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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • Latest Railway Updates: RAC यात्रियों को बड़ी राहत, अब एसी सफर में मिलेगी बेडरोल किट

    रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला; अब एसी श्रेणी (चेयर कार छोड़कर) में आरएसी टिकटधारकों को भी मिलेगी चादर, कंबल, तकिया और तौलिया की सुविधा भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 6 अगस्त, 2026 Latest Railway Updates के तहत भारतीय रेलवे ने करोड़ों यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर एसी श्रेणी (चेयर कार को छोड़कर) में यात्रा करने वाले यात्रियों को भी अन्य एसी यात्रियों की तरह बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में नया आदेश जारी कर दिया है और सभी जोनल रेलवे को इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से लंबे समय से आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों की एक बड़ी समस्या समाप्त हो जाएगी। रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरएसी टिकटधारी भी वैध आरक्षित यात्री होते हैं। इसलिए उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना उचित नहीं है। इसी सोच के तहत अब सभी एसी श्रेणियों (चेयर कार को छोड़कर) में यात्रा करने वाले आरएसी यात्रियों को भी पूरी बेडरोल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। नई व्यवस्था के अनुसार यात्रियों को चादर, कंबल, तकिया, तकिए का कवर और तौलिया उपलब्ध कराया जाएगा। इससे विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। पहले आरएसी यात्रियों को कई बार बेडरोल नहीं मिलने के कारण असुविधा का सामना करना पड़ता था। रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद पूर्व मध्य रेलवे ने अपने सभी मंडलों के मंडल रेल प्रबंधकों (DRM) को आदेश जारी करते हुए व्यवस्था को तत्काल लागू करने और इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा है। रेलवे अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पात्र यात्री को सुविधा से वंचित नहीं रखा जाए। आरएसी (Reservation Against Cancellation) भारतीय रेलवे की ऐसी व्यवस्था है जिसमें यात्री को यात्रा करने की अनुमति तो मिल जाती है, लेकिन प्रारंभ में पूरी बर्थ उपलब्ध नहीं होती। सामान्यतः दो आरएसी यात्रियों को एक लोअर बर्थ साझा करनी पड़ती है। यदि किसी यात्री का टिकट रद्द हो जाता है तो आरएसी टिकट स्वतः कन्फर्म होकर पूरी बर्थ आवंटित कर दी जाती है। रेलवे के इस निर्णय को यात्री सुविधाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे यात्रियों का यात्रा अनुभव बेहतर होगा और एसी कोच में यात्रा करने वाले आरएसी यात्रियों को भी समान सुविधाएं मिल सकेंगी। रेलवे लगातार यात्री सुविधाओं में सुधार के लिए नई पहल कर रहा है। डिजिटल टिकटिंग, आधुनिक कोच, स्टेशन पुनर्विकास, बेहतर कैटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था के साथ अब आरएसी यात्रियों को बेडरोल उपलब्ध कराने का फैसला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यात्रियों का कहना है कि यह सुविधा विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों तथा रातभर की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे उन्हें अलग से चादर या कंबल लेकर यात्रा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। रेलवे बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों से यह भी कहा है कि व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाए और यदि किसी स्थान पर शिकायत प्राप्त होती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए।

  • 83वीं पुण्यतिथि पर महाअभियान: 'एक पेड़ श्री राजेश्वर भगवान के नाम' से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    गादीपति महंत श्री 108 दयाराम जी महाराज का आह्वान—11 अगस्त को देशभर में वृक्षारोपण कर प्रकृति, गुरुवाणी और सनातन संस्कृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करें भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (राजस्थान) | 6 अगस्त, 2026 एक पेड़ श्री राजेश्वर भगवान के नाम' महाअभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का एक प्रेरक संदेश देने की तैयारी शुरू हो गई है। पावन तीर्थ धाम शिकारपुरा के वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज ने आगामी 11 अगस्त 2026 को पूज्य गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की 83वीं पुण्यतिथि के अवसर पर देशव्यापी वृक्षारोपण जन महाअभियान में अधिकाधिक लोगों से भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, गुरुवाणी के संदेश और सामाजिक उत्तरदायित्व को जन-जन तक पहुँचाना है। महंत श्री दयाराम जी महाराज ने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण के बीच प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प भी ले। उन्होंने सभी गुरु भक्तों, पर्यावरण प्रेमियों और सनातन धर्मावलंबियों से अपील की कि वे अपने घर, गांव, शहर, तहसील, जिला तथा शिकारपुरा आश्रम सहित जहाँ भी संभव हो, "एक पेड़ श्री राजेश्वर भगवान के नाम" लगाकर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें। महाअभियान में समाज के विभिन्न संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया गया है। इनमें अखिल भारतीय आंजना समाज महासभा, अखिल भारतीय आंजना युवा महासंगठन, संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच, शिकारपुरा (राजस्थान) सहित देश-विदेश में कार्यरत विभिन्न सामाजिक एवं क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं। महंत श्री ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ जीवन, स्वच्छ वायु और हरित भविष्य प्रदान करते हैं। गुरुवाणी का मूल संदेश भी प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सेवा और मानवता का है। यदि प्रत्येक परिवार इस अभियान के अंतर्गत एक पौधा लगाए, तो यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर हरित क्रांति का स्वरूप ले सकता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के प्रकृति प्रेम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव वृक्षों, नदियों और प्रकृति की पूजा करती रही है। वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है। महंत श्री दयाराम जी महाराज ने समाज की मातृशक्ति, युवाशक्ति, सामाजिक संगठनों और प्रवासी कलबी समाज से विशेष आग्रह किया कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन बनाएं तथा अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ें। उन्होंने कहा कि जब समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और गुरुवाणी का संदेश एक साथ आगे बढ़ता है, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई ऊर्जा पैदा होती है। यही अभियान गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की पुण्य स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगा। आयोजकों के अनुसार अभियान के अंतर्गत लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल का भी संकल्प लिया जाएगा, ताकि यह प्रयास केवल औपचारिकता न रहकर स्थायी पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बन सके।

  • कॉर्पोरेट युवाओं का स्वच्छता अभियान: तुबरहल्ली में स्वयं उठाई झाड़ू, मुनि श्री वीरसागर बोले— सेवा अहंकार मिटाकर व्यक्तित्व का निर्माण करती है

    ज्ञानोदय परिसर से निकला प्रेरक संदेश; कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स ने श्रमदान कर स्वच्छ भारत और समाज सेवा का दिया अनुकरणीय उदाहरण भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 6 अगस्त, 2026 कॉर्पोरेट युवाओं का स्वच्छता अभियान बेंगलुरु के तुबरहल्ली क्षेत्र में समाज सेवा और नागरिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर स्थित ज्ञानोदय परिसर में आयोजित दैनिक "प्रैक्टिकल समाधान" श्रृंखला के अंतर्गत विभिन्न बहुराष्ट्रीय एवं कॉर्पोरेट कंपनियों में कार्यरत युवाओं ने स्वयं झाड़ू उठाकर विबग्योर हाई स्कूल रोड तथा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों की सफाई की। इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक सेवा केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि मन से अहंकार को हटाने का माध्यम है। युवाओं ने वासवानी मेनलो पार्क, वासवानी ब्रेंटवुड, सम्हिता ग्रीनवुड्स, सम्हिता रेनबो, रजनी आशीष, कीर्ति गार्डेनिया तथा विबग्योर हाई स्कूल के आसपास सड़कों, फुटपाथों और मुनि संघ के विहार मार्ग की कई घंटों तक सफाई की। उन्होंने सड़क किनारे जमा मिट्टी, धूल, कचरा, खरपतवार और अन्य अवरोधों को हटाकर पूरे क्षेत्र को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाया। सामान्यतः प्रशासन द्वारा किए जाने वाले इस कार्य को उच्च शिक्षित कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स द्वारा स्वयं करना स्थानीय नागरिकों के लिए प्रेरणा का विषय बना। अनेक लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक उत्तरदायित्व की उत्कृष्ट मिसाल बताया। प्रवचन के दौरान निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ प्रसिद्धि प्राप्त करना नहीं, बल्कि स्वयं को विनम्र बनाना है। जब शिक्षित और सफल लोग समाज के बीच उतरकर श्रमदान करते हैं, तब वे केवल सड़क की धूल नहीं हटाते बल्कि अपने भीतर के अहंकार को भी समाप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा व्यक्ति को झुकना सिखाती है और जो झुकना सीख जाता है वही जीवन में वास्तविक ऊँचाइयों तक पहुँचता है। जैन परंपरा में मुनियों के विहार मार्ग को स्वच्छ बनाना केवल व्यवस्था नहीं बल्कि गुरु भक्ति, विनय और आत्मानुशासन का श्रेष्ठ उदाहरण है। मुनिश्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्वच्छता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जब नागरिक स्वयं जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, तभी स्थायी परिवर्तन आता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि भारत को केवल तकनीकी रूप से सक्षम नहीं बल्कि संस्कारवान, सेवाभावी और जिम्मेदार युवाओं की आवश्यकता है। यदि शिक्षित युवा नियमित रूप से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा जैसे कार्यों में भाग लें तो राष्ट्र निर्माण की गति और अधिक तेज होगी। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं और युवाओं ने सार्वजनिक स्वच्छता, सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा नियमित श्रमदान को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाज परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है और प्रत्येक नागरिक अपनी छोटी-सी पहल से बड़ा बदलाव ला सकता है।

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर BJP का बड़ा हमला, बीवाई विजयेंद्र बोले- ‘मंत्री पदों की खरीद-बिक्री हुई’

    कांग्रेस सरकार पर धनबल, अंदरूनी कलह और महिला प्रतिनिधित्व की अनदेखी का आरोप; राजनीतिक बयानबाजी तेज भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 5 अगस्त, 2026 कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि हालिया मंत्रिमंडल विस्तार सुशासन या प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष, धनबल और राजनीतिक दबाव के कारण किया गया है। विजयेंद्र ने दावा किया कि मंत्री पदों के चयन को लेकर कांग्रेस के भीतर गंभीर अंतर्विरोध सामने आए हैं और यह पूरा घटनाक्रम राज्य की राजनीति में कई सवाल खड़े करता है। बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वे पहले से ही यह कहते आ रहे थे कि मंत्रिमंडल विस्तार में देरी इसलिए हो रही थी क्योंकि मंत्री पदों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के सार्वजनिक बयानों ने भी इस विवाद को और हवा दी है। विजयेंद्र ने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टी.बी. जयचंद्र ने स्वयं को कांग्रेसी कहने पर निराशा जताई, जबकि विधायक एस.आर. श्रीनिवास ने कथित तौर पर कहा कि आर्थिक कारणों से उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री थिम्मापुर ने भी सार्वजनिक रूप से मंत्री पदों के आवंटन को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि इन बयानों से कांग्रेस के भीतर असंतोष स्पष्ट दिखाई देता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम समय में एक महिला विधायक का नाम प्रस्तावित सूची से हटा दिया गया, जिसके कारण मंत्रिमंडल में किसी महिला को स्थान नहीं मिल सका। विजयेंद्र ने इसे कांग्रेस के दावों और वास्तविक निर्णयों के बीच विरोधाभास बताया। उन्होंने वल्मीकि विकास निगम मामले से जुड़े नेता बी. नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए। विजयेंद्र का आरोप है कि इस निर्णय के पीछे राजनीतिक दबाव और आंतरिक समीकरण काम कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले दिल्ली स्तर पर लिए जा रहे हैं। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के बीच लगातार बैठकों से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच लंबे समय से नेतृत्व और शक्ति संतुलन को लेकर मतभेद की चर्चा होती रही है, जिसका प्रभाव अब मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे में भी दिखाई दे रहा है। भाजपा का दावा है कि इससे प्रशासनिक निर्णयों पर असर पड़ रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श और संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत किया गया है। पार्टी का कहना है कि सभी निर्णय संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगामी दिनों में और तेज हो सकता है। ऐसे समय में सरकार के सामने प्रशासनिक कार्यों के साथ राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना होगा।

  • बांकीपुर में फिर जनता के बीच उतरेंगे प्रशांत किशोर, 9 दिन तक करेंगे जनसंवाद अभियान

    ऐतिहासिक उपचुनाव जीत के बाद 11 से 19 अगस्त तक वार्ड-वार दौरा, विकास, शिक्षा और रोजगार पर सीधे सुनेंगे जनता की राय भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पटना | 5 अगस्त, 2026 प्रशांत किशोर जनसंवाद अभियान की शुरुआत के साथ बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज होने जा रही हैं। हाई-प्रोफाइल उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक और नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर अब जनता के बीच लौटने की तैयारी में हैं। पार्टी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, वे 11 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक नौ दिनों का विशेष जनसंपर्क एवं जनसंवाद अभियान चलाएंगे। इस दौरान वे बांकीपुर के विभिन्न वार्डों का दौरा कर नागरिकों से सीधे संवाद करेंगे और क्षेत्र के विकास की प्राथमिकताओं पर सुझाव लेंगे। जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार भारती द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य चुनाव में मिले जनसमर्थन के लिए मतदाताओं का आभार व्यक्त करना तथा क्षेत्र की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझकर विकास की प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना है। पार्टी के अनुसार, प्रशांत किशोर इस दौरान बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के 40 से अधिक वार्डों में लोगों से मुलाकात करेंगे। स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को छोड़कर प्रत्येक दिन अलग-अलग वार्डों में बैठकें, जनसंवाद और स्थानीय नागरिकों से चर्चा आयोजित की जाएगी। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 11 अगस्त को वार्ड संख्या 15, 18 और 40 से अभियान की शुरुआत होगी। इसके बाद 12 अगस्त को 19, 22, 23 और 26, 13 अगस्त को 29, 16 और 39, 14 अगस्त को 17, 38 और 25, 16 अगस्त को 30, 24 और 27, 17 अगस्त को 28, 31, 35 और 21, 18 अगस्त को 37, 42 और 36 तथा 19 अगस्त को वार्ड संख्या 41 में इंटरैक्टिव जनसंवाद के साथ अभियान का समापन होगा। जन सुराज पार्टी का कहना है कि यह अभियान केवल धन्यवाद यात्रा नहीं है, बल्कि जनता की अपेक्षाओं और समस्याओं को समझने का एक व्यापक प्रयास है। प्रशांत किशोर युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से सीधे संवाद करेंगे तथा उनकी राय को विकास योजना का आधार बनाने का प्रयास करेंगे। अभियान के दौरान क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं जैसे सड़क, जल-जमाव, सीवरेज व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्थानीय रोजगार जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी। पार्टी का कहना है कि नागरिकों के सुझावों को प्राथमिकता देकर विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव जीतने के तुरंत बाद जनता के बीच लौटने का यह कदम जनप्रतिनिधि और मतदाताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास माना जा रहा है। इससे क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं की पहचान करने और समाधान की दिशा में पहल करने में मदद मिल सकती है। जन सुराज पार्टी ने कार्यकर्ताओं से भी अभियान को सफल बनाने की अपील की है। पार्टी के अनुसार, जनसंवाद कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और जनहित केंद्रित रहेगा। अभियान के माध्यम से विकास, पारदर्शिता और जनभागीदारी को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।

  • ध्यान और मस्तिष्क की तरंगों से बदल सकता है अवचेतन मन: मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज

    बेंगलुरु प्रवचन में बताया— मस्तिष्क की पाँच तरंगों, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से तनावमुक्त, संतुलित और सफल जीवन का निर्माण संभव। श्री ज्ञानोदय दिगम्बर जैन परिसर, तुबरहल्ली में मस्तिष्क विज्ञान एवं ध्यान पर प्रवचन देते निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 5 अगस्त, 2026 | बेंगलुरु ध्यान और मस्तिष्क की तरंगें यदि सही दिशा में समझी जाएं, तो व्यक्ति अपने अवचेतन मन (Subconscious Mind) का सकारात्मक रूपांतरण कर सकता है। यही प्रेरणादायी संदेश निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने बुधवार को श्री ज्ञानोदय दिगम्बर जैन परिसर, तुबरहल्ली, बेंगलुरु में आयोजित विशेष प्रवचन के दौरान दिया। उन्होंने आध्यात्मिक दर्शन और आधुनिक तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करते हुए बताया कि ध्यान, सजगता और आत्मचिंतन केवल धार्मिक साधनाएं नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ऐसी प्रक्रियाएं हैं, जो व्यक्ति के मस्तिष्क, विचारों और व्यक्तित्व में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। प्रवचन के आरंभ में मुनि श्री ने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी बाधा बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की कमी, भय, नकारात्मक सोच और स्वयं पर संदेह हैं। जब व्यक्ति अपने मन में लगातार नकारात्मक विचारों को स्थान देता है, तब उसकी निर्णय क्षमता, रचनात्मकता और सफलता प्रभावित होने लगती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक परिवर्तन भीतर से प्रारंभ होता है और ध्यान उसका सबसे प्रभावी माध्यम है। मुनि श्री ने आधुनिक तंत्रिका विज्ञान का उल्लेख करते हुए बताया कि तनाव की स्थिति में शरीर का सहानुभूति तंत्र (Sympathetic Nervous System) सक्रिय हो जाता है, जिससे मस्तिष्क का भय-केन्द्र व्यक्ति को संघर्ष अथवा पलायन (Fight or Flight) की अवस्था में पहुंचा देता है। इसके विपरीत जब व्यक्ति ध्यान, प्राणायाम और सजग श्वास का नियमित अभ्यास करता है, तब परानुभूति तंत्र (Parasympathetic Nervous System) सक्रिय होता है। इससे मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, निर्णय क्षमता और विवेक में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने मस्तिष्क की पाँच प्रमुख तरंगों (Brain Waves) का अत्यंत सरल और वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि डेल्टा तरंगें गहन निद्रा और गहरे ध्यान की अवस्था का संकेत देती हैं। थीटा तरंगें अवचेतन मन तक पहुंचने, रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान को विकसित करती हैं। अल्फा तरंगें मानसिक शांति, तनावमुक्ति और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं। बीटा तरंगें सामान्य दैनिक कार्य, विश्लेषण और निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं, जबकि गामा तरंगें उच्च चेतना, गहन एकाग्रता और आध्यात्मिक अनुभूति का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति ध्यान के माध्यम से अल्फा और थीटा अवस्था तक पहुंचने का अभ्यास करता है, तो वह अपने अवचेतन मन में सकारात्मक संस्कार स्थापित कर सकता है। यही प्रक्रिया आत्मविश्वास बढ़ाने, भय दूर करने और जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने का आधार बनती है। मुनि श्री ने वर्तमान समय में बढ़ती डिजिटल निर्भरता पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया पर नकारात्मक सामग्री का लगातार उपभोग मनुष्य की मानसिक ऊर्जा को कमजोर करता है। डिजिटल माध्यमों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर आत्मचिंतन, ध्यान और प्रेरणादायक साहित्य के अध्ययन में लगाएं। प्रवचन के अंतिम चरण में मुनि श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को लगभग 15 मिनट का विशेष ध्यान-सत्र कराया। इसमें गहरी उदर-श्वास, प्रणव ध्वनि (ॐ) का उच्चारण, आज्ञा चक्र पर सात पंखुड़ियों वाले कमल का ध्यान तथा सकारात्मक आत्म-संकल्पों का अभ्यास कराया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार का नियमित अभ्यास मस्तिष्क को तनावपूर्ण सक्रिय अवस्था से निकालकर शांति, एकाग्रता और अवचेतन मन की ग्रहणशील अवस्था में पहुंचाता है। अपने समापन संदेश में मुनि श्री वीरसागर जी महाराज ने कहा कि "वास्तविक परिवर्तन बाहरी दुनिया बदलने से नहीं, बल्कि अपने विचारों, भावों और चेतना के रूपांतरण से प्रारंभ होता है। जब मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन स्थापित हो जाता है, तब सफलता, आत्मिक शांति और आनंद स्वतः प्राप्त होने लगते हैं।" प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने ध्यान-सत्र में भाग लेकर मानसिक शांति एवं आत्मविकास का अनुभव किया।

  • शिमोगा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु पूर्णिमा एवं गुरु दक्षिणा उत्सव श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ संपन्न

    तानाजी शाखा के स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज का पूजन कर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया, श्रद्धापूर्वक अर्पित की गुरु दक्षिणा। शिमोगा के गांधी बाजार स्थित वासवी कल्याण मंटप में गुरु पूर्णिमा एवं गुरु दक्षिणा उत्सव के दौरान भगवा ध्वज पूजन करते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिमोगा | 2 अगस्त, 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) गुरु पूर्णिमा उत्सव शिमोगा की तानाजी शाखा द्वारा रविवार को गांधी बाजार स्थित वासवी कल्याण मंटप में श्रद्धा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लेते हुए भगवा ध्वज का पूजन किया तथा राष्ट्र सेवा, संस्कार और संगठन के प्रति समर्पण का संकल्प दोहराया। गुरु दक्षिणा अर्पित कर स्वयंसेवकों ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की। रविवार सुबह 9:30 बजे प्रारंभ हुए कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति, पद अथवा ग्रंथ के स्थान पर भगवा ध्वज को सर्वोच्च गुरु के रूप में नमन किया गया। संघ की मान्यता के अनुसार भगवा ध्वज त्याग, तप, ज्ञान, बलिदान और राष्ट्रभक्ति का शाश्वत प्रतीक है तथा यही स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा, आदर्श और जीवन पथ का मार्गदर्शक है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, राष्ट्र समर्पण और संस्कारों को सुदृढ़ करने का अवसर भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में इस दिन स्वयंसेवक भगवा ध्वज के समक्ष राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए तानाजी शाखा के स्वयंसेवकों ने पूर्ण श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ गुरु दक्षिणा अर्पित की। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि गुरु दक्षिणा किसी प्रकार का चंदा नहीं होती, बल्कि यह गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आत्मसमर्पण का प्रतीक है। स्वयंसेवक अपनी क्षमता और भावना के अनुसार गुप्त रूप से गुरु दक्षिणा अर्पित करते हैं। यह परंपरा संगठन में निस्वार्थ सेवा, आत्मानुशासन और त्याग की भावना को मजबूत करती है। कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा गया कि भगवा ध्वज भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, ऋषि-मुनियों के तप, वीरों के बलिदान और सनातन मूल्यों का प्रतीक है। यही ध्वज समाज को एकता, समरसता और राष्ट्रहित के लिए प्रेरित करता है। स्वयंसेवकों ने ध्वज के समक्ष भारत माता की सेवा, सामाजिक समरसता और चरित्र निर्माण का संकल्प भी दोहराया। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण देखने को मिला। स्वयंसेवकों ने पारंपरिक विधि से ध्वज पूजन किया तथा संघ की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन में युवाओं और वरिष्ठ स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे शाखा की संगठनात्मक एकजुटता भी देखने को मिली। गुरु पूर्णिमा और गुरु दक्षिणा उत्सव के माध्यम से स्वयंसेवकों को यह संदेश दिया गया कि समाज और राष्ट्र की सेवा ही सर्वोच्च साधना है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि माना गया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भगवा ध्वज उसी आदर्श का प्रतिनिधित्व करता है। कार्यक्रम ने राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को नई ऊर्जा प्रदान की।

  • मदरसों में वंदे मातरम् विवाद: कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणी बनी चर्चा का केंद्र

    हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा— 'ईसाई स्कूलों में भी प्रार्थना होती है, वंदे मातरम् गाने से आसमान नहीं गिर जाएगा'; अनिवार्यता पर याचिकाकर्ताओं ने जताई आपत्ति। कलकत्ता हाई कोर्ट में मदरसों में वंदे मातरम् से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान न्यायालय की कार्यवाही। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता | 5 अगस्त, 2026 मदरसों में वंदे मातरम् के छह छंदों को अनिवार्य किए जाने से जुड़े विवाद पर कलकत्ता हाई कोर्ट में हुई सुनवाई ने राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती की मौखिक टिप्पणियां चर्चा का विषय बन गईं। न्यायालय ने कहा कि यदि ईसाई विद्यालयों में सभी छात्र प्रार्थना में शामिल होते हैं, तो वंदे मातरम् गाने से "आसमान नहीं गिर जाएगा"। हालांकि अदालत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मामले के संवैधानिक और अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी। यह मामला मदरसों में वंदे मातरम् के छह छंदों को अनिवार्य बनाने के विरोध में दायर जनहित याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि संविधान निर्माण के समय व्यापक विचार-विमर्श के बाद केवल पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था। ऐसे में सभी छह छंदों को अनिवार्य करना संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से वंदे मातरम् गाना चाहता है तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना उचित नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसा कदम सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना था कि किसी नागरिक को उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई गीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हजारों ईसाई विद्यालयों में छात्र नियमित रूप से प्रार्थना करते हैं और इससे कोई असाधारण स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति से उसके धर्म से अलग कोई कथन दोहराने को कहा जाए, तो क्या इससे उसकी धार्मिक पहचान समाप्त हो जाएगी? अदालत की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से की गई, जिस पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी आना बाकी है। पीठ ने यह भी पूछा कि क्या अब तक किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है जिसने वंदे मातरम् नहीं गाया हो। अदालत ने संकेत दिया कि यदि अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, तो अंतरिम राहत देने की आवश्यकता पर भी विचार किया जाएगा। मामले में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी ने अंतरिम रोक की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कुछ जनहित याचिकाएं केवल प्रचार प्राप्त करने के उद्देश्य से दायर की जाती हैं। वहीं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि इस विषय पर संसद में पहले भी विस्तृत बहस हो चुकी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य रूप से यह जानने का प्रयास किया कि संबंधित अधिसूचना जारी करने का अधिकार क्षेत्र क्या था और क्या उसके तहत किसी प्रकार की बाध्यकारी या दंडात्मक व्यवस्था बनाई गई है। फिलहाल अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए सभी पक्षों के तर्क दर्ज किए हैं। इसी बीच न्यायपालिका से जुड़े एक अन्य कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आज के डिजिटल युग में न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियां कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं। उन्होंने इस प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए न्यायिक टिप्पणियों को संदर्भ सहित समझने की आवश्यकता पर बल दिया। इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। अंतिम निर्णय आने तक इस मामले पर सभी की निगाहें कलकत्ता हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी रहेंगी।

  • ध्यान और मस्तिष्क विज्ञान का अद्भुत संबंध: मुनि श्री 108 वीरसागर महाराज ने बताए वैज्ञानिक रहस्य

    बेंगलुरु प्रवचन में कहा— ध्यान केवल आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि मस्तिष्क, हार्मोन, पाचन तंत्र और व्यक्तित्व को सकारात्मक रूप से बदलने वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया है। मेनिफेस्टेशन में न्यूरो एवं फिजियो परिवर्तन" विषय पर प्रवचन देते निर्यापक मुनि श्री 108 वीरसागर महाराज। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 4 अगस्त, 2026 ध्यान और मस्तिष्क विज्ञान के बीच संबंध को लेकर अक्सर अनेक प्रश्न उठते हैं, लेकिन क्या वास्तव में ध्यान मस्तिष्क की संरचना, हार्मोन, पाचन तंत्र और व्यक्तित्व को बदल सकता है? बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष प्रवचन में निर्यापक मुनि श्री 108 वीरसागर महाराज ने इस विषय पर प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करते हुए बताया कि नियमित ध्यान केवल धार्मिक साधना नहीं, बल्कि मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व को सकारात्मक दिशा देने वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया है। "मेनिफेस्टेशन में न्यूरो एवं फिजियो परिवर्तन वैज्ञानिक तरीके से जानें" विषय पर आयोजित प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि जीवन की अधिकांश समस्याओं का मूल कारण बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर बैठा आत्मसंदेह, भय और नकारात्मक चिंतन है। यदि व्यक्ति अपने मन को समझकर ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक विचारों का अभ्यास करे तो वह अपने जीवन में स्थायी और गहरे परिवर्तन ला सकता है। मुनि श्री ने आधुनिक न्यूरोसाइंस (Neuroscience) का उल्लेख करते हुए बताया कि जब व्यक्ति भय, क्रोध, चिंता या तनाव में रहता है, तब मस्तिष्क का एमिग्डाला (Amygdala) अधिक सक्रिय हो जाता है। इससे तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन शरीर में अधिक मात्रा में बनने लगते हैं, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करते हैं। इसके विपरीत, नियमित ध्यान और मानसिक एकाग्रता का अभ्यास मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) को सक्रिय करता है। यह मस्तिष्क का वह भाग है जो निर्णय क्षमता, एकाग्रता, स्मरण शक्ति, भावनात्मक नियंत्रण और सकारात्मक सोच को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि ध्यान करने वाले व्यक्तियों में मानसिक स्थिरता और भावनात्मक संतुलन अधिक देखा जाता है। प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने आंत और मस्तिष्क (Gut-Brain Connection) के संबंध को भी सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि सकारात्मक मानसिक स्थिति का सीधा प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ता है। जब मन शांत और संतुलित रहता है, तब शरीर में लाभकारी जीवाणुओं की सक्रियता बढ़ती है, जिससे स्वास्थ्य बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि ध्यान के अभ्यास से शरीर में एंडोर्फिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और डोपामिन जैसे लाभकारी रसायनों का स्राव बढ़ता है। ये रसायन व्यक्ति को प्रसन्नता, आत्मविश्वास, भावनात्मक स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। यही कारण है कि नियमित ध्यान करने वाले लोग तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी अपेक्षाकृत शांत और संतुलित बने रहते हैं। मुनि श्री ने विशेष रूप से वात्सल्य, क्षमा, करुणा और मैत्रीभाव जैसे सकारात्मक गुणों पर जोर देते हुए कहा कि ये केवल आध्यात्मिक मूल्य नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि सकारात्मक भावनाएं शरीर में स्वास्थ्यवर्धक जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को सक्रिय करती हैं। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) की अवधारणा को भी समझाया। उन्होंने कहा कि निरंतर सकारात्मक चिंतन, ध्यान और आत्मजागरण के अभ्यास से मस्तिष्क में नए तंत्रिका मार्ग विकसित होते हैं। इससे व्यक्ति अपनी पुरानी नकारात्मक आदतों, भय और मानसिक सीमाओं को पीछे छोड़कर नए और सकारात्मक व्यक्तित्व का निर्माण कर सकता है। प्रवचन के दौरान मुनि श्री का यह संदेश विशेष रूप से श्रद्धालुओं के मन को छू गया कि "हमारा सबसे बड़ा शत्रु बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर बैठा आत्मसंदेह है।" उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी असफलताओं के लिए केवल परिस्थितियों को दोष देता है, तब वह स्वयं की वास्तविक शक्ति को पहचानने से दूर हो जाता है। उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा कि ध्यान कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो मन, मस्तिष्क, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। यदि व्यक्ति नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करे, तो वह न केवल मानसिक शांति प्राप्त कर सकता है, बल्कि अपने जीवन की दिशा और दशा भी बदल सकता है।

  • भक्तमाल कथा मानव जीवन में भक्ति, सेवा और सदाचार का संदेश देती है: संत शीतल राजाराम महाराज

    बेंगलूरू चातुर्मास प्रवचन में संत शीतल राजाराम महाराज ने कहा— सच्ची भक्ति तभी सार्थक है जब वह जीवन के संस्कार, व्यवहार और सेवा में दिखाई दे। बलेपेट वडेर भवन, बेंगलूरू में भक्तमाल कथा का प्रवचन करते संत शीतल राजाराम महाराज एवं कथा श्रवण करते श्रद्धालु। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरू | 4 अगस्त, 2026 भक्तमाल कथा केवल संतों के जीवन का इतिहास नहीं, बल्कि मानव जीवन को भक्ति, सेवा, त्याग, सदाचार और आध्यात्मिक मूल्यों की ओर प्रेरित करने वाला अमूल्य ग्रंथ है। यही संदेश मंगलवार को सीरवी समाज ट्रस्ट कर्नाटक द्वारा आयोजित चातुर्मास प्रवचन के दौरान संत शीतल राजाराम महाराज ने श्रद्धालुओं को दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति संतों के आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन सुख, शांति, आत्मिक आनंद और सेवा भावना से परिपूर्ण हो सकता है। बेंगलूरू के बलेपेट स्थित वडेर भवन में चातुर्मास के पावन अवसर पर आयोजित भक्तमाल कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान संत शीतल राजाराम महाराज ने भक्तमाल के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल संत चरित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। जो व्यक्ति ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और अटूट विश्वास रखता है, उसके जीवन में मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्ति का वास्तविक स्वरूप केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति के व्यवहार, विचार और सेवा भावना में भी झलकना चाहिए। अपने प्रेरक प्रवचन में संत शीतल राजाराम महाराज ने कहा कि संतों ने अपने जीवन से समाज को सत्य, करुणा, परोपकार, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से भक्तमाल कथा का श्रवण करें और संतों के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। जब मनुष्य अपने आचरण में अच्छे संस्कार अपनाता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सफल और सार्थक बनता है। उन्होंने आगे कहा कि आज के भौतिकवादी युग में आध्यात्मिकता का महत्व और भी बढ़ गया है। जीवन की भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच संतों के विचार मनुष्य को मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच प्रदान करते हैं। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति सेवा, सदाचार और प्रेम की भावना को अपनाए, तो परिवार और समाज दोनों में सुख-शांति का वातावरण स्थापित हो सकता है। कथा के दौरान भक्ति रस से ओतप्रोत वातावरण बना रहा। संत महाराज के प्रेरक भजनों और आध्यात्मिक संदेशों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विशेष रूप से महिलाओं ने भक्ति गीतों पर नृत्य कर अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। इस अवसर पर सीरवी समाज ट्रस्ट कर्नाटक के अध्यक्ष पन्नालाल भायल, उपाध्यक्ष चौथाराम भायल, सचिव कैलाश भायल, कोषाध्यक्ष वोराराम पंवार, सहसचिव राजूराम बर्फा, पूर्व सचिव ओमप्रकाश बर्फा, पूर्व अध्यक्ष पेमाराम गेहलोत, गैर मंडल अध्यक्ष राजूराम भायल, पूर्व गैर मंडल अध्यक्ष पारसमल काग सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने संत शीतल राजाराम महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरा आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण बन गया।

  • Kerala Rain Alert: IMD के ऑरेंज अलर्ट के बीच भारी बारिश, कई जिले जलमग्न

    उत्तरी केरल में मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, राहत शिविरों में पहुंचे लोग; सरकार ने सहायता और दस्तावेज दोबारा जारी करने का किया ऐलान। उत्तरी केरल में भारी बारिश के बाद जलमग्न सड़कें और राहत कार्य में जुटी प्रशासनिक टीमें। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम | 4 अगस्त, 2026 Kerala Rain Alert के बीच केरल में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई निचले इलाके जलमग्न हैं, नदियां चेतावनी स्तर के करीब बह रही हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों एवं राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। मंगलवार सुबह साढ़े पांच बजे तक के पिछले 21 घंटों में उत्तरी केरल के कई जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण अलप्पुझा, पत्तनमथिट्टा, कोट्टायम और कोझिकोड के निचले तथा नदी तटीय क्षेत्रों में पानी भर गया है। कई घरों में पानी घुसने से लोगों को अपना सामान छोड़कर राहत शिविरों का रुख करना पड़ा। बाढ़ का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ा है। कई परिवारों के महत्वपूर्ण दस्तावेज, बच्चों की स्कूल की किताबें और घरेलू सामान पानी में बह गए। राज्य के पर्यटन मंत्री पी.सी. विष्णुनाथ ने कहा कि जिन लोगों के दस्तावेज बाढ़ में नष्ट हो गए हैं, उनके लिए विशेष शिविर और विशेष अदालतों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि आवश्यक प्रमाणपत्र और दस्तावेज जल्द दोबारा उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रभावित विद्यार्थियों को नई पाठ्यपुस्तकें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार ने राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करते हुए प्रत्येक वार्ड में सफाई अभियान के लिए 25,000 रुपये की तत्काल सहायता स्वीकृत की है। कई स्वयंसेवी संगठन भी जलभराव वाले क्षेत्रों में घरों की सफाई और राहत सामग्री पहुंचाने में प्रशासन की मदद कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि जिन परिवारों ने बाढ़ के कारण अपने घर या आजीविका खो दी है, उन्हें बिना अनावश्यक देरी के वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद दी जाएगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, कासरगोड जिले के बायार में सबसे अधिक 121.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा मुलियार में 81 मिमी, कन्नूर हवाई अड्डे पर 74 मिमी, कोझिकोड के उरुमी में 65 मिमी तथा चेरुवंचेरी और आरएआरएस पिलिकोड में लगभग 59.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। नेरियामंगलम में भी 59 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। IMD के अनुसार 24 घंटे में 60 मिमी या उससे अधिक वर्षा को भारी बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर भी चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया। मुवाट्टुपुषा नदी का जलस्तर सुबह 11.60 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 10.92 मीटर से ऊपर तथा खतरे के निशान के काफी करीब था। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसी प्रकार तोडुपुषा नदी का जलस्तर 11.50 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है लेकिन धीरे-धीरे घट रहा है। वहीं कलियारा नदी का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे है। जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन लगातार नदियों की निगरानी कर रहे हैं तथा तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी किनारे न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

  • Parliament Strategy: विपक्ष के हंगामे के बीच NDA का 'मंगल मिलन' मास्टर प्लान तैयार

    संसद के मानसून सत्र में विपक्ष की रणनीति का जवाब देने के लिए एनडीए ने बनाया समन्वित फ्लोर मैनेजमेंट प्लान, सरकार के एजेंडे को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर। संसद परिसर में आयोजित एनडीए संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ नेता। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 4 अगस्त, 2026 Parliament Strategy को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने संसद के मानसून सत्र में नई राजनीतिक और संसदीय रणनीति तैयार कर ली है। लगातार विपक्ष के हंगामे से प्रभावित हो रहे संसद के कामकाज के बीच मंगलवार को आयोजित 'मंगल मिलन' बैठक में अगले दस दिनों के लिए विस्तृत फ्लोर मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया। इस रणनीति का उद्देश्य सरकार के विधायी एजेंडे को गति देना, विपक्ष के आरोपों का तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर जवाब देना तथा सदन में एनडीए के सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। संसद पुस्तकालय भवन के जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और एनडीए के घटक दलों के सांसद शामिल हुए। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी उपस्थित रहे। राजनीतिक दृष्टि से यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई जब संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधेयकों और चर्चाओं पर असर पड़ा है। ऐसे में एनडीए नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब सरकार विपक्ष की रणनीति का जवाब बेहतर संसदीय प्रबंधन, समन्वय और तथ्यों के साथ देगी। बैठक में अगले दस दिनों के लिए विस्तृत फ्लोर रणनीति तैयार की गई। इसमें तय किया गया कि विभिन्न विषयों पर किस सांसद को बोलना है, कौन-सा सहयोगी दल किस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखेगा तथा सदन में सरकार की रणनीति किस प्रकार एकजुट होकर प्रस्तुत की जाएगी। उद्देश्य यह है कि विपक्ष के हंगामे के बीच भी विधायी कार्य प्रभावित न हो और सरकार अपने प्रमुख विधेयकों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके। एनडीए संसदीय दल की यह साप्ताहिक बैठक अब 'मंगल मिलन' के नाम से जानी जाती है। संसद सत्र के दौरान प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली इस बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का रुख, सांसदों की भूमिका और सहयोगी दलों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा होती है। इसमें शिवसेना, जनता दल (यूनाइटेड), तेलुगु देशम पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, जनता दल (सेक्युलर) सहित अन्य सहयोगी दलों की जिम्मेदारियां भी तय की जाती हैं। बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सरकार की उपलब्धियों को सांसदों तक पहुंचाने पर केंद्रित रहा। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खेल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि नई खेल नीति लागू होने के बाद भारत ने ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। रोजगार के मुद्दे पर भी सांसदों के सामने विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए गए। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने जानकारी दी कि बैठक में रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों से जुड़े आंकड़े साझा किए गए ताकि सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में जनता के बीच तथ्यों के साथ सरकार की उपलब्धियां रख सकें। बैठक में एनडीए के भीतर मजबूत समन्वय की झलक भी दिखाई दी। भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.पी. चौधरी ने कहा कि "मंगल मिलन में मंगल ही होता है।" वहीं हाल ही में एनडीए में शामिल हुए वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी बैठक में भाग लेते हुए गठबंधन की संगठित कार्यप्रणाली की सराहना की और कहा कि सभी सहयोगी दल एकजुट होकर काम कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल संसदीय औपचारिकता नहीं, बल्कि आगामी दिनों में विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार की रणनीतिक तैयारी का संकेत है। एनडीए अब संसद के भीतर हर मुद्दे पर समन्वित तरीके से जवाब देने, विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने और जनता के सामने अपनी उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से रखने की योजना पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष की रणनीति और एनडीए के इस नए फ्लोर मैनेजमेंट के बीच संसद की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है और सरकार अपने विधायी एजेंडे को किस हद तक सफलतापूर्वक आगे ले जा पाती है।

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