भक्तमाल कथा मानव जीवन में भक्ति, सेवा और सदाचार का संदेश देती है: संत शीतल राजाराम महाराज
- धन्नाराम चौधरी

- 4 अग॰
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बेंगलूरू चातुर्मास प्रवचन में संत शीतल राजाराम महाराज ने कहा— सच्ची भक्ति तभी सार्थक है जब वह जीवन के संस्कार, व्यवहार और सेवा में दिखाई दे।

बलेपेट वडेर भवन, बेंगलूरू में भक्तमाल कथा का प्रवचन करते संत शीतल राजाराम महाराज एवं कथा श्रवण करते श्रद्धालु।
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरू | 4 अगस्त, 2026 भक्तमाल कथा केवल संतों के जीवन का इतिहास नहीं, बल्कि मानव जीवन को भक्ति, सेवा, त्याग, सदाचार और आध्यात्मिक मूल्यों की ओर प्रेरित करने वाला अमूल्य ग्रंथ है। यही संदेश मंगलवार को सीरवी समाज ट्रस्ट कर्नाटक द्वारा आयोजित चातुर्मास प्रवचन के दौरान संत शीतल राजाराम महाराज ने श्रद्धालुओं को दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति संतों के आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन सुख, शांति, आत्मिक आनंद और सेवा भावना से परिपूर्ण हो सकता है।
बेंगलूरू के बलेपेट स्थित वडेर भवन में चातुर्मास के पावन अवसर पर आयोजित भक्तमाल कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान संत शीतल राजाराम महाराज ने भक्तमाल के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल संत चरित्रों का संग्रह नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शक है।
उन्होंने कहा कि संतों का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। जो व्यक्ति ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और अटूट विश्वास रखता है, उसके जीवन में मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्ति का वास्तविक स्वरूप केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति के व्यवहार, विचार और सेवा भावना में भी झलकना चाहिए।
अपने प्रेरक प्रवचन में संत शीतल राजाराम महाराज ने कहा कि संतों ने अपने जीवन से समाज को सत्य, करुणा, परोपकार, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे नियमित रूप से भक्तमाल कथा का श्रवण करें और संतों के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। जब मनुष्य अपने आचरण में अच्छे संस्कार अपनाता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सफल और सार्थक बनता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज के भौतिकवादी युग में आध्यात्मिकता का महत्व और भी बढ़ गया है। जीवन की भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच संतों के विचार मनुष्य को मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच प्रदान करते हैं। यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति सेवा, सदाचार और प्रेम की भावना को अपनाए, तो परिवार और समाज दोनों में सुख-शांति का वातावरण स्थापित हो सकता है।
कथा के दौरान भक्ति रस से ओतप्रोत वातावरण बना रहा। संत महाराज के प्रेरक भजनों और आध्यात्मिक संदेशों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। विशेष रूप से महिलाओं ने भक्ति गीतों पर नृत्य कर अपनी आस्था और श्रद्धा व्यक्त की, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
इस अवसर पर सीरवी समाज ट्रस्ट कर्नाटक के अध्यक्ष पन्नालाल भायल, उपाध्यक्ष चौथाराम भायल, सचिव कैलाश भायल, कोषाध्यक्ष वोराराम पंवार, सहसचिव राजूराम बर्फा, पूर्व सचिव ओमप्रकाश बर्फा, पूर्व अध्यक्ष पेमाराम गेहलोत, गैर मंडल अध्यक्ष राजूराम भायल, पूर्व गैर मंडल अध्यक्ष पारसमल काग सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने संत शीतल राजाराम महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरा आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण बन गया।
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