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Karnataka Congress Crisis: कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में कलह तेज, दो विधायकों का इस्तीफा

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 4 अग॰
  • 3 मिनट पठन

मंत्री पद नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी, कई नेताओं ने उठाए सवाल; मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने धैर्य रखने की दी सलाह।


Indian politician speaks at a press conference with microphones and papers, with colleagues behind him; Hindi text फाइल फोटो.

कर्नाटक कांग्रेस कैबिनेट विस्तार के बाद नाराज विधायक एवं मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की प्रतिक्रिया।

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु | 4 अगस्त, 2026 Karnataka Congress Crisis ने कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों की अनदेखी से नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दो विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी, जबकि कई अन्य नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के लिए बड़ा संगठनात्मक संकट मान रहे हैं।


कैबिनेट विस्तार के दौरान मंत्रियों की सूची दो बार जारी होने से विवाद और गहरा गया। पहली सूची में भटकल के विधायक मनकल वैद्य का नाम शामिल था, लेकिन अंतिम क्षणों में उनका नाम हटाकर दावणगेरे के विधायक एस.एस. मल्लिकार्जुन को मंत्री बनाया गया। इसी दौरान एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा का नाम भी अंतिम सूची से हटा दिया गया और एक मंत्री पद रिक्त छोड़ दिया गया। पार्टी ने इस बदलाव पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया, हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे वरिष्ठ नेताओं के दबाव और आंतरिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।


सबसे बड़ा राजनीतिक झटका इंडी से लगातार तीन बार विधायक रहे यशवंतरायगौड़ा पाटिल के फैसले से लगा। उन्होंने विधानसभा के उपाध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वे कांग्रेस परिवार से अपने संबंध समाप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंडी विधानसभा क्षेत्र आज तक ऐसा क्षेत्र रहा है, जहां से किसी भी विधायक को मंत्री बनने का अवसर नहीं मिला।


उधर, सागर से विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने भी मंत्री पद नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए इस्तीफे का ऐलान किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री पद केवल पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के पुत्र-पुत्रियों के लिए ही सुरक्षित हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मंत्री बनाए जाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अंतिम समय में सूची बदल दी गई।


इसी कड़ी में भद्रावती के विधायक संगमेश ने भी अपनी उपेक्षा पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इस्तीफे की चेतावनी दी। वहीं पूर्व मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके दिनेश गुंडूराव ने भी सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। दूसरी ओर विजयनगर और गोविंदराजनगर विधानसभा क्षेत्रों में विधायक एम. कृष्णप्पा और प्रियाकृष्णा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए बसों की आवाजाही रोक दी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार के बाद क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने की कोशिश में कई वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी हुई, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और अधिक बढ़ गया है। यदि समय रहते नेतृत्व इस नाराजगी को दूर नहीं कर पाया, तो इसका असर सरकार की राजनीतिक स्थिरता और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।


इस बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नाराज विधायकों और कार्यकर्ताओं से संयम और धैर्य बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई योग्य विधायक हैं, लेकिन सभी को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2004 में उन्हें भी मंत्री नहीं बनाया गया था और सिद्धारमैया सरकार (2013–18) के शुरुआती दौर में भी वे मंत्रिमंडल से बाहर रहे थे। धैर्य और संगठन के प्रति निष्ठा के कारण ही उन्हें आगे चलकर नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली।


उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व परिस्थितियों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। ऐसे में नाराज नेताओं को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय संगठन पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।


कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ता यह असंतोष आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन सकता है। अब सभी की नजर पार्टी आलाकमान पर है कि वह असंतुष्ट नेताओं को कैसे साधता है और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

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