गुरुवाणी अपनाकर संस्कारित, नशामुक्त और अहंकारमुक्त समाज के निर्माण का आह्वान
- धन्नाराम चौधरी

- 4 अग॰
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शिकारपुरा तीर्थधाम से गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने और जनजागरण अभियान को गति देने की प्रेरणा
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (राजस्थान) | 3 अगस्त, 2026
गुरुवाणी को जीवन का आधार बनाकर संस्कारित, नशामुक्त और अहंकारमुक्त समाज के निर्माण का संदेश एक बार फिर प्रमुखता से दिया गया है। गुरु भक्तों से आह्वान किया गया कि वे गुरु महाराज श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के उपदेशों को आत्मसात करते हुए अपने जीवन को सेवा, संस्कार और समाज कल्याण के कार्यों के लिए समर्पित करें। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय गुरुवाणी के संदेशों को व्यवहार में उतारने का उपयुक्त अवसर है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए गुरु मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
संदेश में कहा गया कि मनुष्य को अज्ञान, अहंकार और हठधर्मिता से ऊपर उठकर सत्य, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलना चाहिए। गुरुवाणी केवल आध्यात्मिक जीवन का मार्गदर्शन नहीं करती, बल्कि सामाजिक समरसता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाने की प्रेरणा देती है।
गुरु भक्तों से आग्रह किया गया कि वे गुरुवाणी से विमुख होने के बजाय उसके मूल संदेश—संस्कार, संयम, सेवा और सद्भाव—को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह आने वाली पीढ़ियों को नैतिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाए।
शिकारपुरा स्थित पावन तीर्थधाम को गुरुवाणी के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा गया कि यहां से वर्षों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन, शिक्षा और जनकल्याण की प्रेरणा प्रसारित होती रही है। गुरु महाराज के उपदेशों ने समाज को एकजुट करने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और संस्कारित जीवन अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संदेश में विशेष रूप से स्वपोषित संस्कारयुक्त शिक्षा, नशामुक्त समाज और अहंकारमुक्त मानव जीवन के निर्माण पर बल दिया गया। कहा गया कि यदि युवा पीढ़ी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कारों को अपनाए और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहे, तो समाज का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। यही गुरुवाणी का मूल उद्देश्य भी है।
वक्ताओं ने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि वे सामाजिक एकता, सहयोग और सेवा की भावना के साथ जनजागरण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक उत्थान तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे और अपने परिवार, गांव तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बने।
गुरु भक्तों को यह भी प्रेरणा दी गई कि वे बिना किसी दिखावे के सेवा कार्यों में भाग लें, शिक्षा को बढ़ावा दें, सामाजिक समरसता बनाए रखें और मानवता की सेवा को सर्वोच्च धर्म मानें। ऐसे प्रयासों से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी वातावरण तैयार होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुवाणी के संदेशों को जीवन में अपनाने तथा समाजहित के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया। सभी ने गुरु महाराज के आदर्शों के अनुरूप सेवा, सदाचार और संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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