कॉर्पोरेट युवाओं का स्वच्छता अभियान: तुबरहल्ली में स्वयं उठाई झाड़ू, मुनि श्री वीरसागर बोले— सेवा अहंकार मिटाकर व्यक्तित्व का निर्माण करती है
- धन्नाराम चौधरी

- 6 अग॰
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ज्ञानोदय परिसर से निकला प्रेरक संदेश; कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स ने श्रमदान कर स्वच्छ भारत और समाज सेवा का दिया अनुकरणीय उदाहरण
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 6 अगस्त, 2026 कॉर्पोरेट युवाओं का स्वच्छता अभियान बेंगलुरु के तुबरहल्ली क्षेत्र में समाज सेवा और नागरिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। श्री ज्ञानोदय दिगंबर जैन मंदिर स्थित ज्ञानोदय परिसर में आयोजित दैनिक "प्रैक्टिकल समाधान" श्रृंखला के अंतर्गत विभिन्न बहुराष्ट्रीय एवं कॉर्पोरेट कंपनियों में कार्यरत युवाओं ने स्वयं झाड़ू उठाकर विबग्योर हाई स्कूल रोड तथा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों की सफाई की। इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक सेवा केवल बाहरी सफाई नहीं, बल्कि मन से अहंकार को हटाने का माध्यम है।

युवाओं ने वासवानी मेनलो पार्क, वासवानी ब्रेंटवुड, सम्हिता ग्रीनवुड्स, सम्हिता रेनबो, रजनी आशीष, कीर्ति गार्डेनिया तथा विबग्योर हाई स्कूल के आसपास सड़कों, फुटपाथों और मुनि संघ के विहार मार्ग की कई घंटों तक सफाई की। उन्होंने सड़क किनारे जमा मिट्टी, धूल, कचरा, खरपतवार और अन्य अवरोधों को हटाकर पूरे क्षेत्र को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाया।
सामान्यतः प्रशासन द्वारा किए जाने वाले इस कार्य को उच्च शिक्षित कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स द्वारा स्वयं करना स्थानीय नागरिकों के लिए प्रेरणा का विषय बना। अनेक लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक उत्तरदायित्व की उत्कृष्ट मिसाल बताया।
प्रवचन के दौरान निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ प्रसिद्धि प्राप्त करना नहीं, बल्कि स्वयं को विनम्र बनाना है। जब शिक्षित और सफल लोग समाज के बीच उतरकर श्रमदान करते हैं, तब वे केवल सड़क की धूल नहीं हटाते बल्कि अपने भीतर के अहंकार को भी समाप्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि सेवा व्यक्ति को झुकना सिखाती है और जो झुकना सीख जाता है वही जीवन में वास्तविक ऊँचाइयों तक पहुँचता है। जैन परंपरा में मुनियों के विहार मार्ग को स्वच्छ बनाना केवल व्यवस्था नहीं बल्कि गुरु भक्ति, विनय और आत्मानुशासन का श्रेष्ठ उदाहरण है।
मुनिश्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्वच्छता केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जब नागरिक स्वयं जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं, तभी स्थायी परिवर्तन आता है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि भारत को केवल तकनीकी रूप से सक्षम नहीं बल्कि संस्कारवान, सेवाभावी और जिम्मेदार युवाओं की आवश्यकता है। यदि शिक्षित युवा नियमित रूप से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा जैसे कार्यों में भाग लें तो राष्ट्र निर्माण की गति और अधिक तेज होगी।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं और युवाओं ने सार्वजनिक स्वच्छता, सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा नियमित श्रमदान को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाज परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है और प्रत्येक नागरिक अपनी छोटी-सी पहल से बड़ा बदलाव ला सकता है।
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