कर्नाटक कैबिनेट विस्तार पर BJP का बड़ा हमला, बीवाई विजयेंद्र बोले- ‘मंत्री पदों की खरीद-बिक्री हुई’
- धन्नाराम चौधरी

- 6 अग॰
- 3 मिनट पठन

कांग्रेस सरकार पर धनबल, अंदरूनी कलह और महिला प्रतिनिधित्व की अनदेखी का आरोप; राजनीतिक बयानबाजी तेज
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 5 अगस्त, 2026 कर्नाटक कैबिनेट विस्तार को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि हालिया मंत्रिमंडल विस्तार सुशासन या प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि सत्ता संघर्ष, धनबल और राजनीतिक दबाव के कारण किया गया है। विजयेंद्र ने दावा किया कि मंत्री पदों के चयन को लेकर कांग्रेस के भीतर गंभीर अंतर्विरोध सामने आए हैं और यह पूरा घटनाक्रम राज्य की राजनीति में कई सवाल खड़े करता है।
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वे पहले से ही यह कहते आ रहे थे कि मंत्रिमंडल विस्तार में देरी इसलिए हो रही थी क्योंकि मंत्री पदों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के सार्वजनिक बयानों ने भी इस विवाद को और हवा दी है।
विजयेंद्र ने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टी.बी. जयचंद्र ने स्वयं को कांग्रेसी कहने पर निराशा जताई, जबकि विधायक एस.आर. श्रीनिवास ने कथित तौर पर कहा कि आर्थिक कारणों से उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री थिम्मापुर ने भी सार्वजनिक रूप से मंत्री पदों के आवंटन को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि इन बयानों से कांग्रेस के भीतर असंतोष स्पष्ट दिखाई देता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम समय में एक महिला विधायक का नाम प्रस्तावित सूची से हटा दिया गया, जिसके कारण मंत्रिमंडल में किसी महिला को स्थान नहीं मिल सका। विजयेंद्र ने इसे कांग्रेस के दावों और वास्तविक निर्णयों के बीच विरोधाभास बताया।
उन्होंने वल्मीकि विकास निगम मामले से जुड़े नेता बी. नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए। विजयेंद्र का आरोप है कि इस निर्णय के पीछे राजनीतिक दबाव और आंतरिक समीकरण काम कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।
भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राज्य के महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले दिल्ली स्तर पर लिए जा रहे हैं। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के बीच लगातार बैठकों से यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के बीच लंबे समय से नेतृत्व और शक्ति संतुलन को लेकर मतभेद की चर्चा होती रही है, जिसका प्रभाव अब मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे में भी दिखाई दे रहा है। भाजपा का दावा है कि इससे प्रशासनिक निर्णयों पर असर पड़ रहा है।
दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श और संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत किया गया है। पार्टी का कहना है कि सभी निर्णय संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के अनुरूप लिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगामी दिनों में और तेज हो सकता है। ऐसे समय में सरकार के सामने प्रशासनिक कार्यों के साथ राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना होगा।
_edited.jpg)



टिप्पणियां