शिमोगा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गुरु पूर्णिमा एवं गुरु दक्षिणा उत्सव श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ संपन्न
- धन्नाराम चौधरी

- 6 अग॰
- 2 मिनट पठन
तानाजी शाखा के स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज का पूजन कर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया, श्रद्धापूर्वक अर्पित की गुरु दक्षिणा।

शिमोगा के गांधी बाजार स्थित वासवी कल्याण मंटप में गुरु पूर्णिमा एवं गुरु दक्षिणा उत्सव के दौरान भगवा ध्वज पूजन करते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक।
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिमोगा | 2 अगस्त, 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) गुरु पूर्णिमा उत्सव शिमोगा की तानाजी शाखा द्वारा रविवार को गांधी बाजार स्थित वासवी कल्याण मंटप में श्रद्धा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लेते हुए भगवा ध्वज का पूजन किया तथा राष्ट्र सेवा, संस्कार और संगठन के प्रति समर्पण का संकल्प दोहराया। गुरु दक्षिणा अर्पित कर स्वयंसेवकों ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।
रविवार सुबह 9:30 बजे प्रारंभ हुए कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति, पद अथवा ग्रंथ के स्थान पर भगवा ध्वज को सर्वोच्च गुरु के रूप में नमन किया गया। संघ की मान्यता के अनुसार भगवा ध्वज त्याग, तप, ज्ञान, बलिदान और राष्ट्रभक्ति का शाश्वत प्रतीक है तथा यही स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा, आदर्श और जीवन पथ का मार्गदर्शक है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, राष्ट्र समर्पण और संस्कारों को सुदृढ़ करने का अवसर भी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में इस दिन स्वयंसेवक भगवा ध्वज के समक्ष राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित जीवन जीने का संकल्प लेते हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए तानाजी शाखा के स्वयंसेवकों ने पूर्ण श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ गुरु दक्षिणा अर्पित की।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि गुरु दक्षिणा किसी प्रकार का चंदा नहीं होती, बल्कि यह गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और आत्मसमर्पण का प्रतीक है। स्वयंसेवक अपनी क्षमता और भावना के अनुसार गुप्त रूप से गुरु दक्षिणा अर्पित करते हैं। यह परंपरा संगठन में निस्वार्थ सेवा, आत्मानुशासन और त्याग की भावना को मजबूत करती है।

कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा गया कि भगवा ध्वज भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, ऋषि-मुनियों के तप, वीरों के बलिदान और सनातन मूल्यों का प्रतीक है। यही ध्वज समाज को एकता, समरसता और राष्ट्रहित के लिए प्रेरित करता है। स्वयंसेवकों ने ध्वज के समक्ष भारत माता की सेवा, सामाजिक समरसता और चरित्र निर्माण का संकल्प भी दोहराया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण देखने को मिला। स्वयंसेवकों ने पारंपरिक विधि से ध्वज पूजन किया तथा संघ की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन में युवाओं और वरिष्ठ स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे शाखा की संगठनात्मक एकजुटता भी देखने को मिली।
गुरु पूर्णिमा और गुरु दक्षिणा उत्सव के माध्यम से स्वयंसेवकों को यह संदेश दिया गया कि समाज और राष्ट्र की सेवा ही सर्वोच्च साधना है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि माना गया है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भगवा ध्वज उसी आदर्श का प्रतिनिधित्व करता है। कार्यक्रम ने राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को नई ऊर्जा प्रदान की।
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