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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • राज्यसभा चुनाव से पहले बीजद का तीन लाइन का व्हिप, विधायकों को बैठक व प्रशिक्षण में अनिवार्य उपस्थिति का निर्देश

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) भुवनेश्वर (ओडिशा)। आगामी राज्यसभा चुनावों को देखते हुए बीजू जनता दल (बीजद) ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने गुरुवार को पार्टी के सभी विधायकों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी करते हुए उन्हें भुवनेश्वर में आयोजित महत्वपूर्ण बैठकों में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सभी बीजद विधायकों को 13 और 14 मार्च को शाम 5:30 बजे से 7:30 बजे तक भुवनेश्वर स्थित नवीन निवास में आयोजित प्रेजेंटेशन और प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित रहना होगा। इसके अलावा, 15 मार्च को भी इसी स्थान पर बीजद विधायक दल की बैठक बुलाई गई है, जिसमें राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति और मतदान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी। क्रॉस-वोटिंग की अटकलों के बीच सख्ती राजनीतिक हलकों में क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाओं के बीच बीजद ने यह कदम उठाया है। इसी बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के छह विधायक गुरुवार रात बेंगलुरु पहुंच गए। बताया जा रहा है कि उन्हें कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की निगरानी में दक्षिण बेंगलुरु जिले के एक निजी रिसॉर्ट में ठहराया गया है। इन विधायकों में अशोक कुमार दास, प्रफुल्ल चंद्र प्रधान, पवित्र सौंता, कद्रका अप्पाला स्वामी, सी.एस. राजेन एक्का और सत्यजीत गोमांगो शामिल हैं। वे अपने परिवारों के साथ वहां ठहरे हुए हैं। ओडिशा से कुल 14 लोग इस दौरे पर पहुंचे हैं। संयुक्त उम्मीदवार को समर्थन हालांकि कांग्रेस ने ओडिशा से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन पार्टी ने बीजद और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के साथ मिलकर संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को समर्थन देने का फैसला किया है। ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने 5 मार्च को कहा था कि दत्तेश्वर होता के सामाजिक कार्य और उनके गैर-दलीय व्यक्तित्व को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि होता किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, इसलिए समान विचारधारा वाली पार्टियां उन्हें समर्थन दे सकती हैं। दास ने यह भी बताया कि नवीन पटनायक इस फैसले को लेकर पूरी तरह स्पष्ट थे और उन्होंने इसे ओडिशा की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण तथा “क्रांतिकारी कदम” बताया। विभिन्न दलों के उम्मीदवार घोषित राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं। बीजद ने संतृप्त मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को मैदान में उतारा है। 16 मार्च को मतदान देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होगा। उसी दिन शाम 5 बजे मतों की गिनती भी की जाएगी। जिन राज्यों की सीटें खाली हो रही हैं उनमें महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इन राज्यों से चुने गए 37 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, जिसके चलते इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। ऐसे में सभी प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति को मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं।

  • मोगा में भाजपा की ‘बदलाव रैली’ आज, अमित शाह भरेंगे चुनावी हुंकार; 2027 विधानसभा चुनाव अभियान का होगा आगाज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जालंधर। पंजाब की राजनीति में शनिवार को बड़ा राजनीतिक आयोजन होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से मोगा जिले के गांव किल्ली चाहलां में ‘बदलाव रैली’ आयोजित की जा रही है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस रैली को आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के अभियान के औपचारिक आगाज के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की यह हालिया समय में पंजाब में दूसरी बड़ी राजनीतिक गतिविधि है। इससे पहले फरवरी माह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जालंधर का दौरा कर पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरा था। अब अमित शाह की मोगा रैली को संगठन को चुनावी मोड में लाने की रणनीति के रूप में माना जा रहा है। चुनावी अभियान की शुरुआत का संकेत राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह ‘बदलाव रैली’ पंजाब में भाजपा की चुनावी रणनीति की शुरुआत का संकेत मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राज्य में राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं और भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूती के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। भाजपा पहले शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ गठबंधन में पंजाब की सत्ता में भागीदार रह चुकी है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी राज्य में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि भाजपा इस बार राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत कर सत्ता तक पहुंचने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। संगठन की तैयारी तेज रैली की तैयारियों की कमान प्रदेश संगठन मंत्री श्रीनिवासलु ने संभाल रखी है। उनके साथ प्रदेश प्रभारी नरिंद्र सिंह रैणा, प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। रैली स्थल पर पिछले कई दिनों से व्यापक तैयारियां चल रही हैं। पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में लगे रहे, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले लोगों के लिए सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें। एक लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा भाजपा की ओर से दावा किया गया है कि इस रैली में राज्य भर की 117 विधानसभा सीटों से एक लाख से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक शामिल होंगे। इसके लिए लगभग 4000 बसों की व्यवस्था की गई है, जिनके माध्यम से विभिन्न जिलों से लोगों को रैली स्थल तक पहुंचाया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह रैली पंजाब में ‘राजनीतिक बदलाव’ का संदेश देने वाली होगी। भाजपा नेतृत्व का विश्वास है कि अमित शाह के संबोधन से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आएगा और आगामी चुनावों के लिए संगठनात्मक अभियान को गति मिलेगी। राजनीतिक संदेश पर रहेगी नजर राजनीतिक हलकों की नजर अब अमित शाह के संबोधन पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि वे राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, कानून-व्यवस्था, विकास और केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर पार्टी का दृष्टिकोण स्पष्ट कर सकते हैं। ऐसे में मोगा की यह ‘बदलाव रैली’ न केवल भाजपा के लिए शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकती है, बल्कि पंजाब की आगामी राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

  • गांधी प्रतिमा पर केवल 70 करोड़ खर्च होंगे, 5000 करोड़ का दावा भ्रामक: मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने गांधी प्रतिमा निर्माण को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस परियोजना पर 5,000 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा पूरी तरह झूठा और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित गांधी प्रतिमा के निर्माण पर मात्र 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और नेता इस परियोजना को लेकर गलत जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देना और नई पीढ़ी को देश के महान नेताओं के योगदान से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाओं को राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं है। अंबेडकर प्रतिमा का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने बयान में कहा कि जब बी. आर. अम्बेडकर की प्रतिमा के निर्माण पर लगभग 220 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, तब किसी भी राजनीतिक दल या नेता ने इसका विरोध नहीं किया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उस समय यह खर्च स्वीकार्य था, तो अब गांधी प्रतिमा के लिए 70 करोड़ रुपये की राशि पर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह का विरोध दोहरे मानदंड को दर्शाता है और इससे यह भी प्रतीत होता है कि कुछ लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को तूल दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इतिहास और विरासत को संरक्षित करना और उसे सम्मान देना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है। हाइड्रा के समर्थन में बोले मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने इस दौरान हैदराबाद में कार्यरत हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति निगरानी और संरक्षण प्राधिकरण (हाइड्रा) का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब इस संस्था की स्थापना की गई थी, तब इसे लेकर कई तरह की आलोचनाएं सामने आई थीं और इसके कार्यों पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि समय के साथ जब हाइड्रा ने शहर के तालाबों और जलाशयों को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान चलाया और उन्हें पुनः जनता के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया, तब आम लोगों ने इसकी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हाइड्रा के प्रति लोगों का नजरिया सकारात्मक हो गया है और इसे व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है। मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना पर सरकार का रुख स्पष्ट मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मूसी नदी पुनरुद्धार परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे किसी भी कीमत पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने विरोध करने वाले समूहों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार उनकी सुविधा के लिए परियोजना स्थल के पास ही कंटेनर हाउस उपलब्ध कराने को तैयार है, जहां सभी बुनियादी सुविधाएं मौजूद होंगी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार विकास परियोजनाओं के माध्यम से हैदराबाद और तेलंगाना की पहचान को और मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जनता के हित में लिए गए फैसलों से पीछे हटने वाली नहीं है और विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

  • देवभूमि में योग पर्यटन को नई उड़ान: उत्तराखंड में बनेंगे पांच नए योग धाम, सीएम धामी का बड़ा ऐलान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) ऋषिकेश। उत्तराखंड को विश्व स्तर पर योग और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि प्रदेश में पांच नए योग धाम स्थापित किए जाएंगे। साथ ही आयुष वेलनेस और योग वेलनेस सेंटर की स्थापना कर राज्य में योग एवं आध्यात्मिक पर्यटन को नई पहचान दी जाएगी। शुक्रवार शाम तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योग भारत की पुण्य भूमि से निकली एक प्राचीन और महान परंपरा है, जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला एक सार्वभौमिक विज्ञान है, जो व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखने के बाद आज 180 से अधिक देशों में योग का व्यापक अभ्यास हो रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं बल्कि योग और अध्यात्म की भूमि भी है, इसलिए राज्य सरकार इसे विश्व की योग राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। योग नीति 2025 के तहत मिलेंगी प्रोत्साहन योजनाएं मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में योग नीति 2025 लागू की गई है, जिसके तहत योग और ध्यान केंद्रों को विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा योग से जुड़े शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इसी नीति के तहत प्रदेश में पांच नए योग हब स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष नीति के माध्यम से औषधि निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, अनुसंधान और औषधीय पौधों के संवर्धन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन स्थापित करने के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आयुष वेलनेस और नेचुरोपैथी केंद्रों को बढ़ावा मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार आयुष वेलनेस सेंटर और नेचुरोपैथी केंद्रों को भी प्रोत्साहित कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। प्रत्येक जिले में 50 और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा आयुष से संबंधित ऑनलाइन परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है। योग महोत्सव में संगीत और साधना का संगम अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में योग के साथ संगीत का भी अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और उनकी कैलाशा बैंड की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि की पावन धरती ने योग की अनंत परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा को जन्म दिया है। यहां का हर घाट, पर्वत और नदी योग साधना के वातावरण को समृद्ध करता है। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव विश्व को शांति और संतुलन का संदेश देने वाला अनूठा आयोजन है। वैश्विक शांति के लिए योग की भूमिका अहम कार्यक्रम में स्विट्जरलैंड दूतावास के प्रथम सचिव साइमन सेवन शेफर ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति है। ऐसे समय में योग मानवता को शांति और संतुलन की दिशा में प्रेरित कर सकता है। अमेरिका से आई योगाचार्या किया मिलर ने कहा कि मां गंगा के तट पर आयोजित यह महोत्सव विश्वभर के लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। वहीं आयुर्वेद विशेषज्ञ मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल तकनीक नहीं बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जिसे दुनिया के हर व्यक्ति तक पहुंचाया जाना चाहिए। इस प्रकार उत्तराखंड सरकार के नए प्रयासों से राज्य में योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की उल्टी गिनती शुरू: कभी भी लग सकती है आचार संहिता, 294 सीटों पर अप्रैल-मई में मतदान संभव

    भारतार्थ खबर, संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा अब कभी भी हो सकती है। जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा, पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिसका सीधा असर सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में भारत का चुनाव आयोग की पूर्ण टीम ने 9 और 10 मार्च 2026 को कोलकाता का दौरा कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा की। आयोग ने संकेत दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया अप्रैल के अंत तक पूरी कर ली जाएगी। 7 मई को खत्म हो रहा विधानसभा का कार्यकाल पश्चिम बंगाल विधान सभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उससे पहले नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसी कारण चुनाव आयोग जल्द ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मतदान अप्रैल और मई के बीच दो या तीन चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना उसके बाद निर्धारित तिथि पर होगी। घोषणा होते ही लागू होगी आचार संहिता जैसे ही चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है, उसी क्षण पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना होता है। आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य सरकार और राजनीतिक दलों पर कई प्रकार की पाबंदियां लागू हो जाती हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्य प्रभाव नई घोषणाओं पर रोक: राज्य सरकार किसी भी नई योजना, अनुदान, वित्तीय लाभ या परियोजना की घोषणा नहीं कर सकती। प्रशासनिक नियंत्रण आयोग के पास: पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले, नियुक्तियां और चुनाव संबंधी व्यवस्थाएं सीधे चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाती हैं। सरकारी प्रचार पर प्रतिबंध: सरकारी खर्च से लगाई गई विज्ञापन सामग्री, होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री को हटाना अनिवार्य हो जाता है। सरकारी मशीनरी के उपयोग पर रोक: कोई भी राजनीतिक दल सरकारी संसाधनों या पद का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकता। संवेदनशील जिलों में कड़ी सुरक्षा पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग ने पहले ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 480 कंपनियां राज्य में तैनात कर दी हैं। उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों को संवेदनशील माना गया है, जहां सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती की गई है। इन इलाकों में केंद्रीय बलों का रूट मार्च भी कराया जा रहा है ताकि मतदाताओं में विश्वास का माहौल बनाया जा सके। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में कराना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। 60 लाख मतदाताओं की सूची पर चल रही जांच राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल न्यायिक जांच के दायरे में हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की पूरी सुरक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद पूरक मतदाता सूची जारी की जाएगी ताकि योग्य मतदाताओं का नाम सूची में शामिल हो सके। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: प्रमुख तथ्य कुल विधानसभा सीटें: 294 बहुमत का आंकड़ा: 148 संभावित मतदान अवधि: अप्रैल-मई 2026 सुरक्षा व्यवस्था: 480 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात राजनीतिक मुकाबले पर नजर पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है। दोनों दल चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं और राज्य में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। आने वाले दिनों में जैसे ही चुनाव आयोग आधिकारिक कार्यक्रम घोषित करेगा, बंगाल में चुनावी माहौल और गर्म होने की संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी रणनीतियां भी तेज होंगी, जबकि मतदाता भी अपने नए प्रतिनिधियों को चुनने की तैयारी में जुट जाएंगे।

  • राजधानी एक्सप्रेस में करोड़ों का सोना बरामद: 24 कैरेट के 19 बिस्किट पैंट की सिलाई में छिपाए, महाराष्ट्र के दो युवक गिरफ्तार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) वाराणसी। रेल मार्ग के जरिए हो रही सोने और नकदी की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से 24 कैरेट शुद्ध सोने के 19 बिस्किट बरामद किए गए हैं। बरामद सोने का कुल वजन 2.215 किलोग्राम है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 3.55 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस मामले में महाराष्ट्र के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई जीआरपी, आरपीएफ और सीआईबी की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर की। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी ट्रेन के बी-8 कोच में यात्रा कर रहे थे और सोने के बिस्किटों को अपनी पैंट की कमर की सिलाई में बने विशेष पॉकेट में छिपाकर ले जा रहे थे। संदिग्ध हरकतों से हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर ट्रेन पहुंचने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से मिली सूचना के आधार पर राजधानी एक्सप्रेस की घेराबंदी कर दी। इसी दौरान बी-8 कोच के दरवाजे पर खड़े दो युवकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पुलिस ने जब उनसे पूछताछ की और तलाशी ली तो उनके पास से सोने के बिस्किट बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के सतारा निवासी बालासो जाधव और पुणे निवासी तेजस बालासाहेब पवार के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान बालासो के पास से 10 और तेजस के पास से 9 सोने के बिस्किट बरामद किए गए। अफ्रीका से बांग्लादेश होते हुए भारत पहुंचा सोना जीआरपी के आईजी एन. कोलांची ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सोना मूल रूप से अफ्रीका से तस्करी कर बांग्लादेश लाया गया था। वहां से इसे पश्चिम बंगाल के कूच बिहार तक पहुंचाया गया, जहां एक स्थानीय हैंडलर ने दोनों आरोपियों को यह सोना सौंपा। इसके बाद दोनों युवक बस के जरिए बिहार के कटिहार पहुंचे और वहां से डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में सवार होकर दिल्ली जा रहे थे। दिल्ली में इस सोने को एक बड़े ज्वेलरी सिंडिकेट को सौंपे जाने की योजना थी। कई एजेंसियां कर रही संयुक्त जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने भी आरोपियों से लंबी पूछताछ की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। गौरतलब है कि इससे कुछ ही समय पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) पर अकालतख्त एक्सप्रेस से 1.75 करोड़ रुपये नकद भी बरामद किए गए थे। उस मामले में हवाला कनेक्शन की भी जांच चल रही है। चुनावी माहौल में बढ़ी सतर्कता सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि चुनावी माहौल या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए वाराणसी रूट का इस्तेमाल सोने और नकदी की तस्करी के लिए किया जा रहा है। इसी कारण रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में जांच अभियान तेज कर दिया गया है। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए आगे की जांच में जुटी हुई हैं।

  • केरल चुनाव से पहले एलडीएफ का सबरीमाला पर बदला रुख, हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुवनंतपुरम। केरल की सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर राज्य की राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक—सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश—पर अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। सरकार ने कहा है कि वह कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में लिया गया यह कदम राज्य के हिंदू मतदाताओं की नाराजगी कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा पिछले कई वर्षों से केरल की राजनीति में प्रमुख बहस का विषय रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भड़का था विवाद साल 2018 में भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। इस निर्णय के बाद राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और मंदिर परंपराओं के समर्थकों तथा फैसले के पक्षधर समूहों के बीच तीखी बहस छिड़ गई थी। उस समय राज्य की भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाली सरकार ने अदालत के फैसले का समर्थन किया था और उसे लागू करने की कोशिश की थी। हालांकि अब वही सरकार इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाती नजर आ रही है। अदालत के संवैधानिक सवालों पर देगी जवाब सीपीएम के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि पार्टी अपने मूल विचारों से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन अदालत द्वारा उठाए गए संवैधानिक सवालों के आधार पर अपना जवाब तैयार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का सवाल ही नहीं उठाया है, बल्कि धार्मिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों से जुड़े सात व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर भी सभी पक्षों से राय मांगी है। गोविंदन के अनुसार, यह मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है बल्कि सभी धर्मों की परंपराओं और अधिकारों से जुड़ा व्यापक संवैधानिक मुद्दा है। धार्मिक विद्वानों से परामर्श की तैयारी सरकार ने संकेत दिया है कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर निर्णय लेने से पहले संबंधित क्षेत्र के विद्वानों और धार्मिक विशेषज्ञों से परामर्श किया जाएगा। इसी क्रम में राज्य सरकार ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के रुख का भी समर्थन किया है, जिसने पहले सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार करने की बात कही थी। सरकार का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष की भावनाओं को आघात न पहुंचे। चुनावी माहौल में फिर गरमाया मुद्दा केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सबरीमाला का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस बदले रुख को चुनावी रणनीति बताते हुए आरोप लगाया है कि वाम मोर्चा हिंदू मतदाताओं को साधने के लिए अपने पुराने रुख से पीछे हट रहा है। उधर, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अदालत ने राज्य सरकार समेत सभी पक्षों से 14 मार्च तक अपना स्पष्ट रुख प्रस्तुत करने को कहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावी माहौल के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में केरल की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है।

  • सिर के गहरे घाव पर टांकों की जगह दफ्तर की स्टेपलर पिन! नवादा की घटना का वीडियो वायरल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नवादा (बिहार)। बिहार के नवादा जिले से सामने आई एक हैरान करने वाली घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक घायल युवक के सिर के गहरे घाव पर डॉक्टर द्वारा टांके लगाने के बजाय कथित तौर पर दफ्तर में इस्तेमाल होने वाली साधारण स्टेपलर मशीन से पिन लगाने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में भारी नाराजगी और चिंता देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार यह मामला नवादा जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के नरोमुरार गांव का बताया जा रहा है। गांव का एक युवक 3 मार्च को एक दुर्घटना में घायल हो गया था। हादसे के दौरान उसके सिर में गहरी चोट लग गई थी और काफी खून बह रहा था। परिजनों और आसपास के लोगों ने उसे तत्काल इलाज के लिए नजदीक के इलाके में मौजूद एक ग्रामीण चिकित्सक के पास पहुंचाया। टांकों की जगह स्टेपलर मशीन का इस्तेमाल घायल युवक का आरोप है कि डॉक्टर ने उसके सिर के घाव की उचित जांच किए बिना ही इलाज शुरू कर दिया। युवक के मुताबिक घाव पर मेडिकल तरीके से टांके लगाने के बजाय डॉक्टर ने साधारण दफ्तर में इस्तेमाल होने वाली स्टेपलर मशीन से पिन लगाकर घाव को जोड़ने की कोशिश की। घटना के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो वे भी हैरान रह गए। आमतौर पर सिर के गहरे घावों में अस्पताल में सर्जिकल टांके लगाए जाते हैं या फिर मरीज को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया जाता है, लेकिन यहां अपनाया गया तरीका लोगों के लिए चौंकाने वाला साबित हुआ। वीडियो वायरल होते ही मचा हंगामा घटना का किसी व्यक्ति ने वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में घायल युवक के सिर के घाव पर स्टेपलर की पिन लगाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और लोगों ने इसे गंभीर लापरवाही बताया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि आखिर मरीज के इलाज में इस तरह का असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीका कैसे अपनाया जा सकता है। लोगों का कहना है कि इस तरह का इलाज मरीज के लिए संक्रमण और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों के बीच ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि दूर-दराज के इलाकों में योग्य डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी के कारण अक्सर मरीजों को ऐसे असुरक्षित इलाज का सामना करना पड़ता है। कई लोगों का यह भी कहना है कि कई जगहों पर बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोग भी इलाज करने लगते हैं, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है। जांच और कार्रवाई की मांग वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले की जांच की मांग उठने लगी है। लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि लापरवाही पाई जाए तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल इस मामले में स्थानीय प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि क्षेत्र के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की लापरवाही का सामना न करना पड़े।

  • शिक्षा नगरी कोटा में आँजणा समाज का अभिनंदन कार्यक्रम, छात्र हितों को लेकर बनी रणनीति

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोटा। शिक्षा नगरी कोटा में आज आँजणा समाज द्वारा एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अखिल भारतीय आँजणा महासभा के अध्यक्ष जोगाराम चौधरी तथा महासभा के कोषाध्यक्ष करनाराम चौधरी (कावतरा) के आगमन पर समाज के लोगों ने उनका पारंपरिक साफा पहनाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में समाज के विकास, संगठन की मजबूती और विशेष रूप से विद्यार्थियों के हितों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों और युवाओं ने बताया कि कोटा देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी नीट (NEET) और आईआईटी (IIT) की तैयारी करने आते हैं। ऐसे में आँजणा समाज के विद्यार्थियों को बेहतर और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाज की ओर से हॉस्टल व्यवस्था शुरू करने के प्रस्ताव पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समाज की ओर से विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की जाती है तो इससे दूर-दराज से आने वाले छात्रों को सुरक्षित वातावरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी काफी सहूलियत मिलेगी। साथ ही समाज के विद्यार्थियों को आपसी सहयोग और मार्गदर्शन का भी लाभ मिल सकेगा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समाजजनों ने संगठन को मजबूत बनाने तथा शिक्षा के क्षेत्र में समाज के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया। अतिथियों ने समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार है और विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर समाज के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें प्रताप आँजणा, राजेंद्र सोलंकी, प्रवीण, मूलाराम नरसाना, भेराराम, नरपत, जीतूभाई, बदाराम, दीपक सहित अनेक समाज बंधु शामिल थे। कार्यक्रम का वातावरण सामाजिक एकता और उत्साह से भरा रहा।

  • बालोतरा में होली स्नेह मिलन एवं गैर नृत्य समारोह 17 मार्च को, आँजणा समाज युवा सेवा संस्थान करेगा आयोजन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बालोतरा। आँजणा समाज में आपसी भाईचारा, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आँजणा समाज युवा सेवा संस्थान, बालोतरा के तत्वावधान में होली स्नेह मिलन समारोह एवं गैर नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम 17 मार्च 2026 को शाम 4 बजे श्री राजाराम छात्रावास, समदड़ी रोड, बालोतरा में आयोजित होगा। संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर होली के पावन पर्व को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से मनाना है। कार्यक्रम में समाज के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं बड़ी संख्या में भाग लेकर आपसी स्नेह और भाईचारे का संदेश देंगे। समारोह के दौरान राजस्थानी लोक परंपरा का प्रसिद्ध गैर नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। पारंपरिक वेशभूषा में युवा ढोल-नगाड़ों की थाप पर गैर नृत्य प्रस्तुत करेंगे, जिससे होली के उत्सव का रंग और भी गहरा होगा। इसके साथ ही स्नेह मिलन कार्यक्रम के माध्यम से समाज के लोगों को एक-दूसरे से मिलने और संवाद का अवसर मिलेगा। आयोजकों ने बताया कि होली का पर्व सामाजिक समरसता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें समाज के सभी वर्गों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ आपसी संवाद और समाजहित के विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। आँजणा समाज युवा सेवा संस्थान ने समाज के सभी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है। आयोजकों का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता, परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • गुरुवाणी से जाग रही सामाजिक चेतना, नशामुक्त व संस्कारयुक्त समाज निर्माण की दिशा में बढ़ रहे कदम

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा तीर्थधाम। समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया धीरे-धीरे लेकिन प्रभावी रूप से आगे बढ़ रही है। गुरु कृपा और गुरुवाणी के सतत प्रभाव से समाज के अनेक लोग अब सामाजिक सुधार, नशामुक्ति और संस्कारयुक्त जीवन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। समाज के सज्जन महानुभावों और जागरूक नागरिकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों से सामाजिक चेतना का विस्तार होता दिखाई दे रहा है। समाज के श्रद्धालु गुरु भक्तों का मानना है कि गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान की असीम कृपा से गुरुवाणी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। गुरु उपदेशों के माध्यम से मानव जीवन में आध्यात्मिकता, सदाचार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का विकास हो रहा है, जिससे समाज में आवश्यक परिवर्तन की राह भी प्रशस्त हो रही है। वर्तमान समय में सामाजिक परिवर्तन के कई प्रमुख कारण सामने आए हैं। इनमें आधुनिक और आध्यात्मिक युग की जानकारी का प्रसार, गुरु कृपा से गुरुवाणी का प्रभाव, ज्ञान-विज्ञान की उपलब्धता, सूचना तंत्र की मजबूती और लोगों के बौद्धिक स्तर में वृद्धि प्रमुख माने जा रहे हैं। साथ ही यह समझ भी समाज में विकसित हो रही है कि अनावश्यक आडंबर, फिजूलखर्ची और नशीले पदार्थों पर खर्च करने से सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं होती। इसके अतिरिक्त घर-परिवार में मातृशक्ति का शिक्षित और जागरूक होना भी सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। शिक्षित माताएं अपने बच्चों को संस्कार, शिक्षा और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित कर समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं। सामाजिक स्तर पर जनजागरण के माध्यम से भी लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आधुनिकता और आध्यात्मिकता के संतुलन का संदेश दिया जा रहा है। पश्चिमी राजस्थान क्षेत्र में विशेष रूप से संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच, शिकारपुरा (राजस्थान) की जागृत युवा शक्ति सामाजिक जागरूकता के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। युवा मंच के कार्यकर्ता समाज में एक संयोजक की भूमिका निभाते हुए युवाओं, बुजुर्गों और मातृशक्ति को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। गुरुवाणी के उपदेशों को आमजन तक पहुंचाकर सामाजिक उत्थान, संस्कारयुक्त शिक्षा, नशामुक्त समाज निर्माण और अहंकार-मुक्त मानव जीवन के निर्माण का संदेश दिया जा रहा है। सामाजिक पंच-परमेश्वर और प्रबुद्धजन भी इन प्रयासों को गुरुवाणी का सात्विक संदेश मानते हुए सहयोग प्रदान कर रहे हैं। समाज में यह भावना मजबूत हो रही है कि आध्यात्मिक मूल्यों के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए ही समृद्ध और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। समाज के श्रद्धालु गुरु भक्तों ने कामना की है कि सभी सज्जन महानुभावों पर गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान और श्री ठाकुर जी महाराज की असीम कृपा बनी रहे तथा गुरुवाणी का यह सकारात्मक प्रभाव समाज में निरंतर बढ़ता रहे।

  • युवाओं में जागृति और सामाजिक एकता पर जोर, संत श्री राजारामजी युवा जागृति मंच की ग्राम इकाई बैठक सम्पन्न

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) खुडाला/जोधपुर। संत श्री राजारामजी युवा जागृति मंच, शिकारपुरा लूणी (जोधपुर) की ग्राम इकाई कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक जय श्री राजेश्वर भगवान मंदिर, खुडाला परिसर में आयोजित की गई। बैठक में समाज के धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श करते हुए युवाओं को संगठन से जोड़कर समाज में सकारात्मक जागृति लाने का आह्वान किया गया। बैठक की अध्यक्षता ग्राम इकाई अध्यक्ष दोलाराम कलबी ने की, जबकि संरक्षक भागीरथ (वाइस प्रिंसिपल) विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत भगवान के स्मरण के साथ हुई, जिसके बाद संगठन के उद्देश्यों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की गई। बैठक में आगामी नवरात्रा पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाले अखंड खड़ी सप्ताह तथा रामनवमी महोत्सव को भव्य और अनुशासित रूप से संपन्न कराने की रूपरेखा तय की गई। उपस्थित सदस्यों ने कार्यक्रमों में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा धार्मिक वातावरण के साथ समाज में सद्भाव और सहयोग की भावना को बढ़ाने पर जोर दिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संत श्री राजारामजी महाराज के आदर्शों और संस्कारों से प्रेरित होकर युवाओं को समाज सेवा, नशामुक्ति, शिक्षा और संगठन की मजबूती के लिए आगे आना चाहिए। मंच के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए युवाओं की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। बैठक में संगठन को ग्राम स्तर पर और अधिक सशक्त बनाने, युवाओं को मंच से जोड़ने तथा सामाजिक कार्यों में आपसी सहयोग और एकजुटता के साथ कार्य करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में तेजाराम, श्रवणराम, जितेन्द्र, नेमाराम, भलाराम, प्रेमाराम, भंवराराम, अशोक, हंसराज, हडमानराम, सोहनराम, सुरेन्द्र, महेन्द्र, नारायणराम सहित अनेक युवा सदस्य उपस्थित रहे। अंत में सभी सदस्यों ने आगामी धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने तथा समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।

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