केरल चुनाव से पहले एलडीएफ का सबरीमाला पर बदला रुख, हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश तेज
- धन्ना राम चौधरी

- 14 मार्च
- 3 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 20 मार्च
भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
तिरुवनंतपुरम। केरल की सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर राज्य की राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक—सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश—पर अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। सरकार ने कहा है कि वह कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में लिया गया यह कदम राज्य के हिंदू मतदाताओं की नाराजगी कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। गौरतलब है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा पिछले कई वर्षों से केरल की राजनीति में प्रमुख बहस का विषय रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भड़का था विवाद
साल 2018 में भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। इस निर्णय के बाद राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और मंदिर परंपराओं के समर्थकों तथा फैसले के पक्षधर समूहों के बीच तीखी बहस छिड़ गई थी। उस समय राज्य की भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाली सरकार ने अदालत के फैसले का समर्थन किया था और उसे लागू करने की कोशिश की थी।
हालांकि अब वही सरकार इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाती नजर आ रही है।
अदालत के संवैधानिक सवालों पर देगी जवाब
सीपीएम के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा कि पार्टी अपने मूल विचारों से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन अदालत द्वारा उठाए गए संवैधानिक सवालों के आधार पर अपना जवाब तैयार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का सवाल ही नहीं उठाया है, बल्कि धार्मिक परंपराओं और मौलिक अधिकारों से जुड़े सात व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर भी सभी पक्षों से राय मांगी है।
गोविंदन के अनुसार, यह मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है बल्कि सभी धर्मों की परंपराओं और अधिकारों से जुड़ा व्यापक संवैधानिक मुद्दा है।
धार्मिक विद्वानों से परामर्श की तैयारी
सरकार ने संकेत दिया है कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर निर्णय लेने से पहले संबंधित क्षेत्र के विद्वानों और धार्मिक विशेषज्ञों से परामर्श किया जाएगा। इसी क्रम में राज्य सरकार ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के रुख का भी समर्थन किया है, जिसने पहले सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार करने की बात कही थी।
सरकार का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि किसी भी पक्ष की भावनाओं को आघात न पहुंचे।
चुनावी माहौल में फिर गरमाया मुद्दा
केरल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सबरीमाला का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस बदले रुख को चुनावी रणनीति बताते हुए आरोप लगाया है कि वाम मोर्चा हिंदू मतदाताओं को साधने के लिए अपने पुराने रुख से पीछे हट रहा है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई जारी है और अदालत ने राज्य सरकार समेत सभी पक्षों से 14 मार्च तक अपना स्पष्ट रुख प्रस्तुत करने को कहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावी माहौल के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में केरल की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है।
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