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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की उल्टी गिनती शुरू: कभी भी लग सकती है आचार संहिता, 294 सीटों पर अप्रैल-मई में मतदान संभव

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 14
  • 3 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा अब कभी भी हो सकती है। जैसे ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा, पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिसका सीधा असर सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ेगा।


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में भारत का चुनाव आयोग की पूर्ण टीम ने 9 और 10 मार्च 2026 को कोलकाता का दौरा कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा की। आयोग ने संकेत दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया अप्रैल के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।


7 मई को खत्म हो रहा विधानसभा का कार्यकाल

पश्चिम बंगाल विधान सभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उससे पहले नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसी कारण चुनाव आयोग जल्द ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।


राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मतदान अप्रैल और मई के बीच दो या तीन चरणों में कराया जा सकता है, जबकि मतगणना उसके बाद निर्धारित तिथि पर होगी।


घोषणा होते ही लागू होगी आचार संहिता

जैसे ही चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करता है, उसी क्षण पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना होता है।


आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य सरकार और राजनीतिक दलों पर कई प्रकार की पाबंदियां लागू हो जाती हैं।


आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्य प्रभाव


नई घोषणाओं पर रोक: राज्य सरकार किसी भी नई योजना, अनुदान, वित्तीय लाभ या परियोजना की घोषणा नहीं कर सकती।


प्रशासनिक नियंत्रण आयोग के पास: पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले, नियुक्तियां और चुनाव संबंधी व्यवस्थाएं सीधे चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाती हैं।


सरकारी प्रचार पर प्रतिबंध: सरकारी खर्च से लगाई गई विज्ञापन सामग्री, होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री को हटाना अनिवार्य हो जाता है।

सरकारी मशीनरी के उपयोग पर रोक: कोई भी राजनीतिक दल सरकारी संसाधनों या पद का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकता।


संवेदनशील जिलों में कड़ी सुरक्षा

पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग ने पहले ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 480 कंपनियां राज्य में तैनात कर दी हैं।


उत्तर 24 परगना, मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों को संवेदनशील माना गया है, जहां सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती की गई है। इन इलाकों में केंद्रीय बलों का रूट मार्च भी कराया जा रहा है ताकि मतदाताओं में विश्वास का माहौल बनाया जा सके।


मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता में कहा कि चुनाव शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में कराना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।


60 लाख मतदाताओं की सूची पर चल रही जांच

राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल न्यायिक जांच के दायरे में हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की पूरी सुरक्षा की जाएगी।


जांच पूरी होने के बाद पूरक मतदाता सूची जारी की जाएगी ताकि योग्य मतदाताओं का नाम सूची में शामिल हो सके।


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: प्रमुख तथ्य


कुल विधानसभा सीटें: 294


बहुमत का आंकड़ा: 148


संभावित मतदान अवधि: अप्रैल-मई 2026


सुरक्षा व्यवस्था: 480 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात


राजनीतिक मुकाबले पर नजर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है। दोनों दल चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं और राज्य में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं।


आने वाले दिनों में जैसे ही चुनाव आयोग आधिकारिक कार्यक्रम घोषित करेगा, बंगाल में चुनावी माहौल और गर्म होने की संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी रणनीतियां भी तेज होंगी, जबकि मतदाता भी अपने नए प्रतिनिधियों को चुनने की तैयारी में जुट जाएंगे।

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