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देवभूमि में योग पर्यटन को नई उड़ान: उत्तराखंड में बनेंगे पांच नए योग धाम, सीएम धामी का बड़ा ऐलान

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 14
  • 3 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

ऋषिकेश। उत्तराखंड को विश्व स्तर पर योग और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि प्रदेश में पांच नए योग धाम स्थापित किए जाएंगे। साथ ही आयुष वेलनेस और योग वेलनेस सेंटर की स्थापना कर राज्य में योग एवं आध्यात्मिक पर्यटन को नई पहचान दी जाएगी।


शुक्रवार शाम तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 38वें अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि योग भारत की पुण्य भूमि से निकली एक प्राचीन और महान परंपरा है, जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला एक सार्वभौमिक विज्ञान है, जो व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखने के बाद आज 180 से अधिक देशों में योग का व्यापक अभ्यास हो रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं बल्कि योग और अध्यात्म की भूमि भी है, इसलिए राज्य सरकार इसे विश्व की योग राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


योग नीति 2025 के तहत मिलेंगी प्रोत्साहन योजनाएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में योग नीति 2025 लागू की गई है, जिसके तहत योग और ध्यान केंद्रों को विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा योग से जुड़े शोध कार्यों के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इसी नीति के तहत प्रदेश में पांच नए योग हब स्थापित किए जा रहे हैं।


उन्होंने कहा कि आयुष नीति के माध्यम से औषधि निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, अनुसंधान और औषधीय पौधों के संवर्धन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन स्थापित करने के लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


आयुष वेलनेस और नेचुरोपैथी केंद्रों को बढ़ावा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार आयुष वेलनेस सेंटर और नेचुरोपैथी केंद्रों को भी प्रोत्साहित कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हो रहे हैं। प्रत्येक जिले में 50 और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा आयुष से संबंधित ऑनलाइन परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है।


योग महोत्सव में संगीत और साधना का संगम

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में योग के साथ संगीत का भी अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और उनकी कैलाशा बैंड की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि देवभूमि की पावन धरती ने योग की अनंत परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा को जन्म दिया है। यहां का हर घाट, पर्वत और नदी योग साधना के वातावरण को समृद्ध करता है। वहीं साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव विश्व को शांति और संतुलन का संदेश देने वाला अनूठा आयोजन है।


वैश्विक शांति के लिए योग की भूमिका अहम

कार्यक्रम में स्विट्जरलैंड दूतावास के प्रथम सचिव साइमन सेवन शेफर ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति है। ऐसे समय में योग मानवता को शांति और संतुलन की दिशा में प्रेरित कर सकता है।


अमेरिका से आई योगाचार्या किया मिलर ने कहा कि मां गंगा के तट पर आयोजित यह महोत्सव विश्वभर के लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। वहीं आयुर्वेद विशेषज्ञ मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल तकनीक नहीं बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जिसे दुनिया के हर व्यक्ति तक पहुंचाया जाना चाहिए।


इस प्रकार उत्तराखंड सरकार के नए प्रयासों से राज्य में योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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