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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • बेंगलूरु का रहस्यमयी काडू मल्लेश्वर मंदिर: नंदी के मुख से बहती अनवरत जलधारा से होता है शिवलिंग का स्वाभाविक अभिषेक

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। भारत में भगवान शिव के अनेक प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु में स्थित काडू मल्लेश्वर मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक मान्यता और रहस्यमयी जलधारा के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां स्थित शिवलिंग पर नंदी के मुख से लगातार जलधारा प्रवाहित होती रहती है, जो सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती है। इस जलधारा का स्रोत आज तक स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं हो पाया है, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 400 वर्ष पुराना प्राचीन शिवधाम बेंगलूरु के मल्लेश्वरम क्षेत्र में स्थित काडू मल्लेश्वर मंदिर का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना माना जाता है। मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में मराठा शासक वेंकोजी भोंसले ने करवाया था, जो महान मराठा राजा शिवाजी के भाई थे। यह मंदिर मराठा और द्रविड़ स्थापत्य शैली का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग को मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का स्वरूप माना जाता है, इसलिए यह स्थल भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। दक्षिणामुख नंदी तीर्थ की विशेष मान्यता मंदिर परिसर के निकट स्थित दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी को भी अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस तीर्थ के दर्शन किए बिना काडू मल्लेश्वर मंदिर की पूजा अधूरी मानी जाती है। यहां स्थित नंदी की पत्थर की प्रतिमा के मुख से निरंतर स्वच्छ और शीतल जलधारा निकलती रहती है। नंदी के मुख से बहती जलधारा बना रहस्य नंदी की प्रतिमा से निकलने वाली यह जलधारा सीधे शिवलिंग पर गिरती है और निरंतर जलाभिषेक करती रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह जलधारा सदियों से बिना रुके प्रवाहित हो रही है। इस पानी का स्रोत क्या है, यह आज तक स्पष्ट नहीं हो सका है। कई वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इसकी जांच करने का प्रयास किया, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया। यही कारण है कि इस रहस्य को लेकर लोगों में गहरी जिज्ञासा बनी हुई है। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था भक्तों का मानना है कि यह भगवान शिव की दिव्य कृपा का प्रतीक है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर भव्य आयोजन के अवसर पर काडू मल्लेश्वर मंदिर और नंदी तीर्थ परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान रुद्राभिषेक, महापूजा और भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। मंदिर को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। इसी अवसर पर यहां लगभग 15 दिनों तक चलने वाला प्रसिद्ध मूंगफली मेला भी लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। पहुंचने के साधन काडू मल्लेश्वर मंदिर तक पहुंचना बेहद आसान है। हवाई मार्ग से आने वाले श्रद्धालु केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा तक पहुंचकर वहां से शहर के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं। रेल मार्ग से आने पर केएसआर बेंगलूरु सिटी रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन है। सड़क मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए शहर में बस और मेट्रो की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ठहरने की सुविधाएं मंदिर के आसपास मल्लेश्वरम क्षेत्र में धर्मशालाओं के साथ-साथ बजट और मिड-रेंज होटल भी आसानी से उपलब्ध हैं, जहां श्रद्धालु आराम से ठहर सकते हैं। काडू मल्लेश्वर मंदिर की यह अनवरत जलधारा आज भी श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। यही कारण है कि यह प्राचीन शिवधाम न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।

  • आँजणी माता कन्या महाविद्यालय भवन उद्घाटन समारोह का निमंत्रण गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी को सौंपा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अहमदाबाद। श्री राजेश्वर भगवान आँजणी माता कन्या महाविद्यालय भवन के भव्य उद्घाटन समारोह के लिए गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी को औपचारिक निमंत्रण दिया गया। आगामी 28 से 30 अप्रैल 2026 को आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय समारोह में पधारने का आग्रह करते हुए समाज प्रतिनिधियों ने उन्हें निमंत्रण पत्र भेंट किया। इस अवसर पर भक्तराज श्री पदमारामजी महाराज के सान्निध्य में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से समाजसेवी कमलेशभाई पटेल, मुकेशभाई पटेल, लच्छाभाई कंसारी सहित अहमदाबाद के समाज बंधु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर उन्हें महाविद्यालय भवन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारने का निमंत्रण दिया। भेंट के दौरान प्रतिनिधियों ने बताया कि श्री राजेश्वर भगवान आँजणी माता कन्या महाविद्यालय भवन का निर्माण समाज के सहयोग से पूर्ण हुआ है, जिसका उद्देश्य बेटियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करना और समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। तीन दिवसीय समारोह में धार्मिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन तथा समाज के विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श भी आयोजित किए जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए इस महत्वपूर्ण सामाजिक व शैक्षणिक पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा के लिए समाज द्वारा किए जा रहे ऐसे प्रयास समाज के विकास और सशक्तिकरण के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। इस दौरान उपस्थित समाजजनों ने समारोह को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियों की जानकारी भी दी और अधिक से अधिक समाज बंधुओं को इसमें सहभागी बनने का आह्वान किया। बताया गया कि 28 से 30 अप्रैल 2026 तक चलने वाला यह उद्घाटन समारोह समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और समाज के गणमान्य लोग शामिल होंगे।

  • "परंपरा से प्रगति” विषय पर प्रेरणादायक सेशन कल से, प्रसिद्ध डिज़ाइनर डॉ. रूमा देवी करेंगी संबोधित

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हुबली। जैन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संगठन (जीतो) हुबली चैप्टर फाउंडेशन की ओर से उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक कला के संवर्धन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शनिवार 14 मार्च 2026 को एक विशेष प्रेरणादायक सेशन “परंपरा से प्रगति” का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध भारतीय पारंपरिक हैंडीक्राफ्ट डिज़ाइनर, सामाजिक कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रेरक वक्ता डॉ. रूमा देवी उपस्थित रहकर अपने अनुभव साझा करेंगी। यह कार्यक्रम शाम 7:30 बजे से जीतो गर्ल्स हॉस्टल एवं एजुकेशन सेंटर, केशवपुर में आयोजित होगा, जबकि प्रतिभागियों के लिए शाम 7:00 बजे से हाई-टी की व्यवस्था रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य समाज के युवाओं, उद्यमियों और विशेष रूप से महिलाओं को पारंपरिक कला और आधुनिक नवाचार के समन्वय से सफल और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। आयोजकों के अनुसार डॉ. रूमा देवी ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से प्रतिभागियों को उद्यमिता, सामाजिक नेतृत्व तथा नवाचार के क्षेत्र में नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम का आयोजन जीतो हुबली चैप्टर फाउंडेशन तथा जीतो हुबली लेडीज़ विंग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजकों ने सभी सदस्यों एवं उनके परिवारजनों से आग्रह किया है कि वे इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर इसे सफल बनाएं। आयोजन समिति का मानना है कि इस प्रकार के संवादात्मक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच, उद्यमशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम को लेकर समाज के सदस्यों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

  • महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम: आंध्र प्रदेश में 5 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने का लक्ष्य

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) अमरावती। एन. चंद्रबाबू नायडू ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य आंध्र प्रदेश में 5 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाना है। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है और एक वर्ष के भीतर ही लगभग एक लाख महिलाओं को उद्यमी बनाया जा चुका है। अमरावती के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं और सहयोग से जल्द ही आंध्र प्रदेश में 6 लाख महिला उद्यमी होंगी, जो देश में सबसे अधिक होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर घर से एक लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमयू) स्थापित हो और उनमें से कम से कम 50 प्रतिशत का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया जाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘स्वयं एपी’ ब्रांड लोगो का भी अनावरण किया। इस पहल के माध्यम से राज्य की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बेहतर पहचान और बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। समारोह में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पांच उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से 6,81,506 महिलाओं को लाभान्वित करने के लिए 10,100 करोड़ रुपये के रियायती ऋण प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाएं अपनी मेहनत, समर्पण और त्याग के लिए जानी जाती हैं तथा समाज और परिवार को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता राज्य के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार में तीन महिला मंत्री सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, जो राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। साथ ही उन्होंने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचकर अपनी क्षमता का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “असल में महिलाएं ही असली वित्त मंत्री होती हैं, क्योंकि वे घर की आय का संतुलित प्रबंधन करती हैं और सुनिश्चित करती हैं कि हर रुपया सही दिशा में खर्च हो।” उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की दिशा में पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामा राव के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं को समान संपत्ति अधिकार दिलाने, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और स्थानीय निकायों में आरक्षण प्रदान करने जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए थे। नायडू ने बताया कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कॉलेजों और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था और उम्मीद जताई कि भविष्य में विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा स्थापित डीडब्ल्यूसीआरए और एमईपीएमए जैसी संस्थाएं आज पूरे देश के लिए आदर्श मॉडल बन चुकी हैं। हालांकि समय-समय पर इन संस्थाओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इनकी मजबूती बरकरार रही है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की गठबंधन सरकार ने ‘स्त्री शक्ति’ योजना के तहत महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा शुरू की है, जिससे महिलाओं की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्वयं’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की जिम्मेदारी वे स्वयं लेंगे, ताकि स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकें। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने संयुक्त परिवार प्रणाली को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए परिवारों को अलग नहीं होना चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज कई बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह जाते हैं, जबकि देश में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि परिवारों की एकता और बुजुर्गों के सम्मान की परंपरा को बनाए रखते हुए समाज को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर कार्य किया जाए।

  • मैथिली ठाकुर की पहल रंग लाई: 2 किमी पैर घसीटकर स्कूल जाने वाली दिव्यांग छात्रा सोनी को मिली ट्राइसाइकिल, सोनू सूद ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गोपालगंज (बिहार)। सोशल मीडिया के दौर में कई बार एक छोटी सी पहल भी किसी जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला देती है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक मामला बिहार के गोपालगंज जिले से सामने आया है, जहां दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी के संघर्ष की कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। दोनो पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद प्रतिदिन लगभग दो किलोमीटर तक पैर घसीटकर स्कूल जाने वाली इस मासूम बच्ची का वीडियो वायरल होने के बाद कई लोग उसकी मदद के लिए आगे आए। सोनी कुमारी गोपालगंज जिले के रामनगर गांव की रहने वाली है। उसके पिता का निधन हो चुका है और उसकी मां मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करती हैं। आर्थिक तंगी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद सोनी का हौसला कम नहीं हुआ। पहली कक्षा में पढ़ने वाली सोनी का सपना है कि वह पढ़-लिखकर एक दिन डॉक्टर बने और लोगों की सेवा करे। सोनी के संघर्ष का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर की नजर इस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत बच्ची की मदद करने का निर्णय लिया। मैथिली ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सोनी के घर का पता, संपर्क नंबर और अन्य जानकारी मांगी और इस मामले को प्रशासन तक पहुंचाया। उन्होंने गोपालगंज के जिलाधिकारी से फोन पर बात कर बच्ची को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उनकी इस पहल के बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए तेजी से कार्रवाई की। जिला प्रशासन की ओर से जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार सहित अन्य अधिकारी सोनी के घर पहुंचे और उसे ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई। इसके साथ ही पढ़ाई से जुड़ी आवश्यक सामग्री भी दी गई, ताकि वह बिना किसी परेशानी के अपनी शिक्षा जारी रख सके। गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि शिक्षा के अधिकार के तहत सोनी का प्रवेश ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल में कराया गया है। उन्होंने कहा कि यदि पहले ट्राइसाइकिल के लिए आवेदन मिलता तो यह सुविधा पहले ही उपलब्ध कराई जा सकती थी। अब मामले की जांच कर संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। सोनी की कहानी ने फिल्म जगत को भी भावुक कर दिया। प्रसिद्ध अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद ने भी इस बच्ची की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि बच्ची का पता भेज दिया जाए, वे उसके घर व्हीलचेयर पहुंचवा देंगे। सोनी कुमारी की मदद के लिए आगे आए लोगों की संवेदनशीलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यदि समाज मिलकर प्रयास करे तो किसी भी जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। अब ट्राइसाइकिल मिलने से सोनी को स्कूल आने-जाने में काफी सुविधा होगी और वह अपने सपनों को साकार करने की दिशा में और मजबूती से आगे बढ़ सकेगी।

  • असम में गरजे पीएम मोदी: कांग्रेस को नेहरू से सीखने की दी नसीहत, असम को बताया नॉर्थ-ईस्ट का विकास मॉडल

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और विपक्ष को देशहित में सकारात्मक राजनीति करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में भी कांग्रेस देश में भ्रम और गलत जानकारी फैलाने में लगी रहती है, जबकि केंद्र की भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार किसानों को मजबूत बनाने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 15 अगस्त के भाषण को सुनें और उससे सीख लें। उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेकर ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। नेहरू के उदाहरण से विपक्ष को संदेश अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पंडित नेहरू ने अपने एक भाषण में उल्लेख किया था कि दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच हुए युद्ध का असर भारत में महंगाई पर पड़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय भी वैश्विक घटनाओं का प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता था, इसलिए आज के दौर में भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को समझते हुए जिम्मेदारी से बयान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को देशहित में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी कठिन समय में भी भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है। असम बना नॉर्थ-ईस्ट के विकास का मॉडल प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में असम के तेजी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आज असम पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए एक विकास मॉडल बनकर उभर रहा है। उन्होंने नॉर्थ-ईस्ट को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में हो रहा विकास पूरे देश के लिए नई ऊर्जा लेकर आया है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम हुआ है, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, असम में हो रहे विकास कार्यों का सकारात्मक प्रभाव पूरे उत्तर-पूर्वी राज्यों की आर्थिक और सामाजिक प्रगति पर पड़ रहा है। रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन को बताया बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री मोदी ने देश में रेलवे क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने और विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि बीते दस वर्षों में देश के रेलवे नेटवर्क का बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया है। इस पहल से हर साल करीब 17 मिलियन लीटर डीजल की बचत हो रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह कदम न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा योगदान दे रहा है। किसानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और तेज गति से विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र भारत की प्रगति में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और असम इस परिवर्तन का नेतृत्व करता रहेगा।

  • पंचकूला में 37 साल बाद वसंत उत्सव की भव्य शुरुआत, सीएम नायब सैनी ने एशिया के सबसे बड़े कैक्टस गार्डन को किया जनता के लिए पुनः खोलने का ऐलान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला शहर में करीब 37 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार भव्य वसंत उत्सव का आयोजन शुरू हुआ। तीन दिवसीय इस रंगारंग उत्सव का शुभारंभ शनिवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सेक्टर-5 स्थित टाउन पार्क में किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का पारंपरिक पगड़ी पहनाकर, ढोल-नगाड़ों और लोक वाद्ययंत्रों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंचकूला के प्रसिद्ध और एशिया के सबसे बड़े कैक्टस उद्यान राष्ट्रीय कैक्टस और रसीला वनस्पति उद्यान और अनुसंधान केंद्र को भी आम जनता के लिए पुनः खोलने की घोषणा की। रखरखाव के कारण यह गार्डन पिछले लगभग एक वर्ष से बंद था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचकूला में शुरू किया गया यह वसंत उत्सव भविष्य में सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला की तरह ही पहचान बनाएगा और प्रदेश के सांस्कृतिक व पर्यटन नक्शे पर एक नई पहचान स्थापित करेगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फूलों की भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कट फ्लावर, ड्राई फ्लावर और फ्रेश फ्लावर सेक्शन में प्रदर्शित विभिन्न किस्मों के फूलों में विशेष रुचि दिखाई। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प और घरेलू उत्पादों के स्टॉल भी देखे और उनकी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वसंत उत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि हमारी प्रकृति के प्रति प्रेम, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पंचकूला हरियाणा का एक आधुनिक और सुव्यवस्थित शहर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण और योजनाबद्ध विकास के लिए जाना जाता है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से ही संभव है। हरियाणा सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पेड़ों के संरक्षण के लिए प्राणवायु देवता पेंशन योजना शुरू की गई है, जिसके तहत 75 वर्ष से अधिक आयु के पेड़ों के संरक्षण के लिए उनके अभिरक्षकों को प्रतिवर्ष तीन हजार रुपये की पेंशन दी जाती है। अब तक 3,819 पेड़ों की पहचान कर उनके संरक्षकों को लगभग 2 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि दी जा चुकी है, जबकि 1,541 अतिरिक्त पेड़ों की भी पहचान की गई है। इस अवसर पर पंचकूला महानगर विकास प्राधिकरण (पीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मकरंद पांडुरंग ने बताया कि वसंत उत्सव का उद्देश्य विकास के साथ-साथ संस्कृति और भाईचारे के मूल्यों को भी मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों को मंच मिलता है, साथ ही पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलती है। कार्यक्रम में हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ज्ञानचंद गुप्ता, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा, शिवालिक विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष ओमप्रकाश देवी नगर तथा उपायुक्त सतपाल शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। तीन दिनों तक चलने वाले इस वसंत उत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, फूलों की प्रदर्शनी, हस्तशिल्प स्टॉल, लोक संगीत और विविध मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिससे पंचकूला में उत्सव का माहौल बना हुआ है।

  • हिमाचल की किन्नौर घाटी में अनोखा ‘रौलान उत्सव’: दुल्हन-सा श्रृंगार, नृत्य-संगीत और नई फसल का उल्लास

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हिमाचल। हिमाचल प्रदेश की पर्वतीय संस्कृति अपनी अनूठी परंपराओं और रंग-बिरंगे उत्सवों के लिए जानी जाती है। इन्हीं परंपराओं में से एक है किन्नौर क्षेत्र में मनाया जाने वाला पारंपरिक रौलान उत्सव, जो सर्दियों के अंत और नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है। हर वर्ष मार्च माह में आयोजित होने वाला यह उत्सव स्थानीय जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य और लोक संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। बताया जाता है कि यह उत्सव हजारों वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा है और आज भी किन्नौर घाटी के लोग पूरे उत्साह और सामुदायिक भावना के साथ इसे मनाते हैं। हाल के दिनों में ट्रैवल ब्लॉगर्स और पर्यटकों द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो के कारण यह उत्सव सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में आ गया है। दुल्हन-दूल्हे की तरह सजते हैं लोग रौलान उत्सव की सबसे खास बात इसकी अनोखी वेशभूषा है। उत्सव के दौरान पुरुष और महिलाएं दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे नजर आते हैं। महिलाएं चांदी और सोने के पारंपरिक आभूषण पहनती हैं, जबकि सिर पर रंग-बिरंगे फूलों और सजावट से सजे मुकुट जैसे आभूषण लगाए जाते हैं। पुरुष पारंपरिक पोशाक के साथ हाथ से बुनी शॉल ओढ़ते हैं और स्थानीय गहनों से खुद को सजाते हैं। इस विशेष श्रृंगार के कारण पूरा वातावरण किसी पारंपरिक विवाह समारोह जैसा दिखाई देता है। पांच दिनों तक चलता है उत्सव रौलान उत्सव आमतौर पर होली के अगले दिन से शुरू होता है और लगभग पांच दिनों तक चलता है। इस दौरान किन्नौर घाटी के विभिन्न गांवों के लोग एक स्थान पर एकत्र होकर नृत्य, संगीत और पारंपरिक अनुष्ठानों के माध्यम से इस पर्व का उत्सव मनाते हैं। उत्सव के पहले दिन दो या तीन वैवाहिक जोड़े पारंपरिक वेशभूषा में सजकर कार्यक्रम में शामिल होते हैं। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर लगभग पांच जोड़ों तक पहुंच जाती है। तीसरे दिन से आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और सामूहिक नृत्य-गायन के साथ उत्सव का आनंद लेते हैं। जनजातीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक स्थानीय लोगों के अनुसार रौलान उत्सव का कोई विशेष धार्मिक महत्व नहीं है, बल्कि यह एक पारंपरिक जनजातीय पर्व है जो समुदाय को एक साथ लाने और नई फसल की खुशियां साझा करने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान पारंपरिक लोकगीतों की धुन पर लोग सामूहिक नृत्य करते हैं, एक-दूसरे को बधाई देते हैं और गांवों के बीच आपसी मेल-मिलाप को मजबूत करते हैं। पर्यटन के लिए भी बन रहा आकर्षण हाल के वर्षों में रौलान उत्सव की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह उत्सव पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। किन्नौर की प्राकृतिक सुंदरता और इस पारंपरिक पर्व की रंगीन झलक पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति के करीब आने का अवसर प्रदान करती है। इस तरह रौलान उत्सव केवल एक पर्व ही नहीं, बल्कि हिमाचल की जनजातीय परंपरा, सामाजिक एकता और प्रकृति के साथ जुड़े जीवन का जीवंत प्रतीक बनकर उभर रहा है।

  • झारखंड पुलिस को मिली नई ताकत: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1485 आधुनिक वाहनों को दिखाई हरी झंडी, 12 नए थानों का किया शिलान्यास

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) रांची। झारखंड में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को विधानसभा परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में झारखंड पुलिस को 1485 आधुनिक वाहनों की सौगात दी। साथ ही उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में बनने वाले 12 नए अत्याधुनिक पुलिस थानों का ऑनलाइन शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने रिमोट का बटन दबाकर नए पुलिस थानों की आधारशिला रखी और हरी झंडी दिखाकर पुलिस वाहनों को रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न श्रेणियों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे। पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मजबूत पुलिस व्यवस्था ही सुरक्षित समाज की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के लगभग 25 वर्षों में यह पहली बार है, जब झारखंड पुलिस को एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि शहरों से लेकर दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों तक शांति, कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी पुलिस पर होती है। ऐसे में आधुनिक वाहनों की उपलब्धता से पुलिस बल की गतिशीलता, प्रतिक्रिया क्षमता और क्षेत्रीय निगरानी में उल्लेखनीय सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि नए संसाधनों के जरिए पुलिस घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने में और सक्षम बनेगी, जिससे आम जनता को बेहतर और भरोसेमंद सुरक्षा सेवाएं मिल सकेंगी। पहले चरण में मिले 1485 वाहन राज्य सरकार ने झारखंड पुलिस के लिए कुल 1255 पेट्रोलिंग वाहन और 1697 दोपहिया वाहनों को स्वीकृति दी है। इनमें से पहले चरण में 636 पेट्रोलिंग वाहन (महिंद्रा बोलेरो) और 849 दोपहिया वाहन (टीवीएस अपाचे) विभिन्न जिलों और पुलिस थानों को आवंटित किए गए हैं। इस प्रकार पहले चरण में कुल 1485 वाहनों को पुलिस बल को सौंपा गया है, जबकि शेष वाहन जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे। ये वाहन गश्ती, क्विक रिस्पांस, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और ग्रामीण इलाकों में पुलिस उपस्थिति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डायल 112 सेवा को मिलेगा बल सरकार के अनुसार इन वाहनों का उपयोग विशेष रूप से डायल 112 आपातकालीन सेवा को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। प्रत्येक वाहन में वायरलेस सेट और एमडीटी टैब लगाए जाएंगे, जिससे कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सीधा संपर्क बना रहेगा। इससे घटनास्थल से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव होगा और पुलिस की प्रतिक्रिया समय में उल्लेखनीय सुधार आएगा। अपहरण मामले का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड पुलिस कई मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर जनता का विश्वास जीत रही है। उन्होंने रांची के धुर्वा इलाके से दो नाबालिग बच्चों के अपहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस की तत्परता से दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया और अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश भी हुआ। 12 जिलों में बनेंगे आधुनिक संयुक्त थाने मुख्यमंत्री ने जिन 12 नए थानों का शिलान्यास किया, उनका निर्माण झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। ये आधुनिक संयुक्त थाना भवन राज्य के दुमका, पूर्वी सिंहभूम, गुमला, रांची, बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, गढ़वा, गिरिडीह, हजारीबाग और पलामू जिलों में बनाए जाएंगे। इन जी प्लस 6 संयुक्त थाना परिसरों में एएचटीयू थाना, साइबर थाना, एससी/एसटी थाना और महिला थाना को एक ही परिसर में स्थापित किया जाएगा, जिससे पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुगम बनाया जा सकेगा। इस वित्तीय वर्ष में अन्य वाहन भी हुए आवंटित पुलिस मुख्यालय के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में पुलिस विभाग के लिए पहले ही कई अन्य वाहनों की खरीद और वितरण किया जा चुका है। इनमें 900 बजाज पल्सर, 50 रॉयल एनफील्ड हंटर बुलेट, पांच टाटा बस, छह जेसीबी, चार वाटर टैंकर, तीन कैदी वाहन और पांच रायट कंट्रोल व्हीकल शामिल हैं। इसके अलावा चार बुलेट प्रूफ रक्षक वाहन, नौ महिंद्रा बोलेरो और तीन महिंद्रा स्कॉर्पियो भी खरीदे गए हैं, जिन्हें विभिन्न जिलों और इकाइयों को आवंटित किया जा चुका है। समारोह में ये रहे उपस्थित इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, मंत्री राधाकृष्ण किशोर, संजय प्रसाद यादव, डॉ. इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की, कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा सहित झारखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न जिलों के पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे। सरकार के इस कदम को झारखंड में पुलिस आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश के सभी जिलों में एलपीजी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश, कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) भोपाल। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के संभावित प्रभाव को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गठित मंत्री-मंडल समिति की बैठक शुक्रवार को राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में एलपीजी गैस की नियमित और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि गैस एजेंसियों के माध्यम से वितरण व्यवस्था को सुचारू रखा जाए तथा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने भी आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री काश्यप वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने गैस एजेंसियों के संचालन, सिलेंडर वितरण की समयबद्धता और उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि यदि कहीं भी वितरण व्यवस्था में अनियमितता या विलंब की शिकायत मिलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को गैस कंपनियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के निर्देश दिए, जिससे प्रदेश में एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता बनी रहे। कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। एजेंसियों और तेल कंपनियों के साथ समन्वय बनाकर मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि किसी क्षेत्र में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रदेश में निरंतर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 115 स्थानों पर जांच की गई है, जिसमें 350 गैस सिलेंडर जब्त किए गए तथा दो प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है। तकनीकी समस्या के कारण हुई थी बुकिंग में दिक्कत मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए बनाए गए पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण कुछ समय के लिए उपभोक्ताओं को परेशानी हुई थी। अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आवश्यकतानुसार एजेंसियों में ऑफलाइन बुकिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध बैठक में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता तथा खाड़ी देशों से प्रदेश के प्रवासियों को सुरक्षित वापस लाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। ऑयल कंपनी के स्टेट नोडल ऑफिसर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि गैस सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक बॉटलिंग प्लांट और वितरकों के गोदामों में उपलब्ध है। कुछ उपभोक्ताओं द्वारा आशंका के कारण एक साथ अधिक बुकिंग करने से सर्वर पर अतिरिक्त लोड आया, जिससे असुविधा हुई। इसे जल्द ही व्यवस्थित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देशानुसार घरेलू उपभोक्ता अंतिम रिफिल के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए किसी भी प्रकार की अफवाहों से भ्रमित न हों। रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर कर रहीं काम बैठक में बताया गया कि देश की रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर कार्य कर रही हैं और पश्चिम एशिया के अलावा अन्य देशों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति भी बिना किसी कटौती के जारी है। सरकार ने राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित कर प्रतिदिन आपूर्ति स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर गैस आपूर्ति से संबंधित शिकायत या सुझाव के लिए उपभोक्ता इंडियन ऑयल के टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555, एचपीसीएल के 1800-258-7170 और भारत पेट्रोलियम के 1800-22-4344 पर संपर्क कर सकते हैं। बैठक में सचिव गृह कृष्णावेनी देसावातु, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा तथा तेल कंपनियों के अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • महाराष्ट्र में यूसीसी की आहट: विधानसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश, सियासी गलियारों में तेज हुई बहस

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक द्वारा प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में यूसीसी लागू करने का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस कदम को आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक-राजनीतिक विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है। विधानसभा में पेश किए गए इस निजी विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाना है। वर्तमान में ये कानून विभिन्न धार्मिक समुदायों के अनुसार अलग-अलग लागू होते हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने से कानून व्यवस्था में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित होंगे। भाजपा विधायक ने बिल के समर्थन में तर्क देते हुए कहा कि “एक देश-एक कानून” की अवधारणा सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उनका कहना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था कई बार महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों को प्रभावित करती है। ऐसे में समान नागरिक संहिता से न्यायिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद अब अन्य राज्यों में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। महाराष्ट्र में इस मुद्दे का उठना राष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस को और गति दे सकता है। हालांकि विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित कदम बताया है। विपक्ष का कहना है कि समाज की विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखे बिना इस प्रकार के विधेयक लाना उचित नहीं है। कुछ नेताओं का तर्क है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सहमति बनाना जरूरी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, प्राइवेट मेंबर बिल आमतौर पर किसी विधायक द्वारा व्यक्तिगत पहल के रूप में पेश किया जाता है और इसे पारित कराने के लिए सरकार का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में अब सबकी नजर राज्य सरकार के आधिकारिक रुख पर टिकी हुई है कि वह इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में कितनी रुचि दिखाती है। यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाती है, तो महाराष्ट्र समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का दूसरा राज्य बन सकता है। फिलहाल इस मुद्दे ने विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

  • मेघालय में हिंसा के बाद शांति की अपील: मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा बोले—अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र विवाद सुलझाएगी एनपीपी, भाईचारा बनाए रखें

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तुरा (मेघालय)। गैरो हिल्स क्षेत्र में हालिया हिंसा और तनाव के बीच मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने राज्य के लोगों से शांति, एकता और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र से जुड़े विवादों का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है और पार्टी अपने संस्थापक पी. ए. संगमा के सिद्धांतों के अनुरूप जनता की सेवा करती रहेगी। शुक्रवार को पश्चिम गैरो हिल्स जिले के मुख्यालय तुरा में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि मौजूदा समय में समाज के सभी वर्गों को धैर्य और संयम के साथ एकजुट रहकर शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा, “एनपीपी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी पार्टी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ लोगों की सेवा करती रहेगी और किसी भी परिस्थिति में जनता के हितों से पीछे नहीं हटेगी।” पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे से बचते हुए संगठन को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “कोई भी ताकत एनपीपी के मनोबल को कमजोर नहीं कर सकती। हमें मिलकर पार्टी को और मजबूत बनाना है और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना है।” शांति और क्षमा की भावना पर दिया जोर संगमा ने अपने संबोधन में समुदायों के बीच आपसी विश्वास और क्षमा की भावना को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में समाज के सभी वर्गों को मिलकर भाईचारे और एकता का संदेश देना चाहिए ताकि राज्य में स्थायी शांति कायम रह सके। प्रशासन और पुलिस की सराहना मुख्यमंत्री ने हालिया हिंसा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “मैं उन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अथक प्रयास किए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।” तुरा के लोगों की एकजुटता की प्रशंसा संगमा ने तुरा के निवासियों की भी सराहना की, जिन्होंने हिंसा के बाद शहर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए एकजुट होकर प्रयास किए। उन्होंने कहा, “तुरा के लोगों ने मलबा साफ करने और शहर को फिर से सामान्य बनाने में जिस तरह की एकजुटता दिखाई है, वह हमारे समाज की मजबूती और सहनशीलता का प्रतीक है।” उन्होंने धार्मिक नेताओं और सामुदायिक संगठनों का भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने लोगों के बीच शांति बनाए रखने और तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन की सतत निगरानी हिंसा के बाद तुरा और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके और सामान्य जीवन शीघ्र बहाल हो सके। हिंसा की पृष्ठभूमि उल्लेखनीय है कि मंगलवार को गैरो समुदाय के कुछ सदस्यों द्वारा चुनावी नामांकन के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पुलिस की फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई। हिंसक घटनाओं के दौरान तुरा और अन्य स्थानों पर आगजनी, नागरिकों पर हमले और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की घटनाएं सामने आईं। इस विवाद की पृष्ठभूमि में मेघालय उच्च न्यायालय का वह निर्णय भी है, जिसमें अदालत ने जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अनिवार्य बनाने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया। बताया जाता है कि यह अधिसूचना गैर-आदिवासियों को जीएचएडीसी चुनावों में भाग लेने से रोकने का प्रयास कर रही थी, जबकि पिछले करीब सात दशकों से ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी। अदालत के फैसले के बाद ही इस मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया और स्थिति हिंसक हो गई। राज्य सरकार ने फिलहाल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं तथा सभी समुदायों से संयम बरतने की अपील की है।

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