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मेघालय में हिंसा के बाद शांति की अपील: मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा बोले—अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र विवाद सुलझाएगी एनपीपी, भाईचारा बनाए रखें

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 13
  • 3 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

तुरा (मेघालय)। गैरो हिल्स क्षेत्र में हालिया हिंसा और तनाव के बीच मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने राज्य के लोगों से शांति, एकता और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र से जुड़े विवादों का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है और पार्टी अपने संस्थापक पी. ए. संगमा के सिद्धांतों के अनुरूप जनता की सेवा करती रहेगी।


शुक्रवार को पश्चिम गैरो हिल्स जिले के मुख्यालय तुरा में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि मौजूदा समय में समाज के सभी वर्गों को धैर्य और संयम के साथ एकजुट रहकर शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए।


उन्होंने कहा, “एनपीपी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र से जुड़े मुद्दे को सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी पार्टी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ लोगों की सेवा करती रहेगी और किसी भी परिस्थिति में जनता के हितों से पीछे नहीं हटेगी।”


पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे से बचते हुए संगठन को और मजबूत बनाने की जरूरत है।


उन्होंने कहा, “कोई भी ताकत एनपीपी के मनोबल को कमजोर नहीं कर सकती। हमें मिलकर पार्टी को और मजबूत बनाना है और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना है।”


शांति और क्षमा की भावना पर दिया जोर

संगमा ने अपने संबोधन में समुदायों के बीच आपसी विश्वास और क्षमा की भावना को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में समाज के सभी वर्गों को मिलकर भाईचारे और एकता का संदेश देना चाहिए ताकि राज्य में स्थायी शांति कायम रह सके।


प्रशासन और पुलिस की सराहना

मुख्यमंत्री ने हालिया हिंसा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।


उन्होंने कहा, “मैं उन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अथक प्रयास किए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।”


तुरा के लोगों की एकजुटता की प्रशंसा

संगमा ने तुरा के निवासियों की भी सराहना की, जिन्होंने हिंसा के बाद शहर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए एकजुट होकर प्रयास किए।


उन्होंने कहा, “तुरा के लोगों ने मलबा साफ करने और शहर को फिर से सामान्य बनाने में जिस तरह की एकजुटता दिखाई है, वह हमारे समाज की मजबूती और सहनशीलता का प्रतीक है।”


उन्होंने धार्मिक नेताओं और सामुदायिक संगठनों का भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने लोगों के बीच शांति बनाए रखने और तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन की सतत निगरानी

हिंसा के बाद तुरा और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके और सामान्य जीवन शीघ्र बहाल हो सके।


हिंसा की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को गैरो समुदाय के कुछ सदस्यों द्वारा चुनावी नामांकन के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पुलिस की फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई।


हिंसक घटनाओं के दौरान तुरा और अन्य स्थानों पर आगजनी, नागरिकों पर हमले और बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की घटनाएं सामने आईं।


इस विवाद की पृष्ठभूमि में मेघालय उच्च न्यायालय का वह निर्णय भी है, जिसमें अदालत ने जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को अनिवार्य बनाने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया।


बताया जाता है कि यह अधिसूचना गैर-आदिवासियों को जीएचएडीसी चुनावों में भाग लेने से रोकने का प्रयास कर रही थी, जबकि पिछले करीब सात दशकों से ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी। अदालत के फैसले के बाद ही इस मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया और स्थिति हिंसक हो गई।


राज्य सरकार ने फिलहाल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं तथा सभी समुदायों से संयम बरतने की अपील की है।

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