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महाराष्ट्र में यूसीसी की आहट: विधानसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश, सियासी गलियारों में तेज हुई बहस

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 13
  • 2 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक द्वारा प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में यूसीसी लागू करने का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस कदम को आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक-राजनीतिक विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है।


विधानसभा में पेश किए गए इस निजी विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाना है। वर्तमान में ये कानून विभिन्न धार्मिक समुदायों के अनुसार अलग-अलग लागू होते हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने से कानून व्यवस्था में एकरूपता आएगी और सभी नागरिकों को समान अधिकार सुनिश्चित होंगे।


भाजपा विधायक ने बिल के समर्थन में तर्क देते हुए कहा कि “एक देश-एक कानून” की अवधारणा सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उनका कहना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था कई बार महिलाओं और कमजोर वर्गों के अधिकारों को प्रभावित करती है। ऐसे में समान नागरिक संहिता से न्यायिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनेगी।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद अब अन्य राज्यों में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। महाराष्ट्र में इस मुद्दे का उठना राष्ट्रीय स्तर पर चल रही बहस को और गति दे सकता है।


हालांकि विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित कदम बताया है। विपक्ष का कहना है कि समाज की विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखे बिना इस प्रकार के विधेयक लाना उचित नहीं है। कुछ नेताओं का तर्क है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक सहमति बनाना जरूरी है।


राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, प्राइवेट मेंबर बिल आमतौर पर किसी विधायक द्वारा व्यक्तिगत पहल के रूप में पेश किया जाता है और इसे पारित कराने के लिए सरकार का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में अब सबकी नजर राज्य सरकार के आधिकारिक रुख पर टिकी हुई है कि वह इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में कितनी रुचि दिखाती है।


यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाती है, तो महाराष्ट्र समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का दूसरा राज्य बन सकता है। फिलहाल इस मुद्दे ने विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

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