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महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम: आंध्र प्रदेश में 5 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाने का लक्ष्य

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 13 मार्च
  • 3 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 20 मार्च

  • Women and men holding a large cheque at a Women's Day event.

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

अमरावती। एन. चंद्रबाबू नायडू ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य आंध्र प्रदेश में 5 लाख महिलाओं को उद्यमी बनाना है। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है और एक वर्ष के भीतर ही लगभग एक लाख महिलाओं को उद्यमी बनाया जा चुका है।


अमरावती के परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं और सहयोग से जल्द ही आंध्र प्रदेश में 6 लाख महिला उद्यमी होंगी, जो देश में सबसे अधिक होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर घर से एक लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमयू) स्थापित हो और उनमें से कम से कम 50 प्रतिशत का नेतृत्व महिलाओं द्वारा किया जाए।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘स्वयं एपी’ ब्रांड लोगो का भी अनावरण किया। इस पहल के माध्यम से राज्य की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बेहतर पहचान और बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।


समारोह में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पांच उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से 6,81,506 महिलाओं को लाभान्वित करने के लिए 10,100 करोड़ रुपये के रियायती ऋण प्रदान किए गए।


मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महिलाएं अपनी मेहनत, समर्पण और त्याग के लिए जानी जाती हैं तथा समाज और परिवार को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता राज्य के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है।


उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार में तीन महिला मंत्री सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, जो राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। साथ ही उन्होंने देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं ने देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचकर अपनी क्षमता का परिचय दिया है।


मुख्यमंत्री ने कहा, “असल में महिलाएं ही असली वित्त मंत्री होती हैं, क्योंकि वे घर की आय का संतुलित प्रबंधन करती हैं और सुनिश्चित करती हैं कि हर रुपया सही दिशा में खर्च हो।”


उन्होंने महिलाओं के अधिकारों की दिशा में पूर्व मुख्यमंत्री एन. टी. रामा राव के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं को समान संपत्ति अधिकार दिलाने, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और स्थानीय निकायों में आरक्षण प्रदान करने जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए थे।


नायडू ने बताया कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कॉलेजों और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था और उम्मीद जताई कि भविष्य में विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा स्थापित डीडब्ल्यूसीआरए और एमईपीएमए जैसी संस्थाएं आज पूरे देश के लिए आदर्श मॉडल बन चुकी हैं। हालांकि समय-समय पर इन संस्थाओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इनकी मजबूती बरकरार रही है।


उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की गठबंधन सरकार ने ‘स्त्री शक्ति’ योजना के तहत महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा शुरू की है, जिससे महिलाओं की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्वयं’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने की जिम्मेदारी वे स्वयं लेंगे, ताकि स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकें।


अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने संयुक्त परिवार प्रणाली को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए परिवारों को अलग नहीं होना चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज कई बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह जाते हैं, जबकि देश में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है।


उन्होंने समाज से आह्वान किया कि परिवारों की एकता और बुजुर्गों के सम्मान की परंपरा को बनाए रखते हुए समाज को मजबूत बनाने की दिशा में मिलकर कार्य किया जाए।

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