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मेरी सोच मेरी पहचान’ कार्यक्रम में महिलाओं को आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संदेश

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 11
  • 3 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर श्री ब्यावर संघ के तत्वावधान में ब्यावर युवा लेडीज विंग द्वारा “मेरी सोच मेरी पहचान” विषय पर प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन सुराणा कॉलेज, बसवनगुड़ी में किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 75 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आत्मविकास, सकारात्मक सोच और सामाजिक भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक मैग्नस केड़क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड रहे, जबकि वेन्यू स्पॉन्सर के रूप में श्रीमती अर्चना सुराणा और सुराणा कॉलेज का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार महामंत्र के उच्चारण तथा पौधे में जल अर्पण कर किया गया।


इस अवसर पर श्री ब्यावर संघ के अध्यक्ष ललित डाकलिया ने उपस्थित सभी सदस्यों और अतिथियों को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उन्होंने ब्यावर युवा लेडीज विंग द्वारा आयोजित ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायक आयोजनों को निरंतर जारी रखने की बात कही।



कार्यक्रम में ब्यावर युवा लेडीज विंग की संयोजिका संगीता पारख ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संयोजिका मोनिका कुमट ने किया, जबकि संयोजिका जीया हिंगड़ ने मुख्य वक्ता नमिता दुगड़ का परिचय प्रस्तुत किया।

मुख्य वक्ता नमिता दुगड़ ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि महिला दिवस मनाने का सही अर्थ तभी है जब हम अपने जीवन में कुछ नया सीखने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि परिवार में आपसी तालमेल और रिश्तों की समझ ही जीवन में मिठास लाती है। सास-बहू, मां-बेटी, भाई-बहन और पति-पत्नी जैसे रिश्तों में प्रेम और सम्मान तभी बढ़ता है जब हम एक-दूसरे की भावनाओं को समझते हुए व्यवहार करते हैं।


उन्होंने भगवान महावीर के अनेकान्तवाद सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति का दृष्टिकोण अलग होता है, इसलिए हमें दूसरों को उनकी नजर से समझने का प्रयास करना चाहिए। परिवार के साथ बिताया गया समय रिश्तों को मजबूत बनाता है और बड़ों से सीखे गए संस्कार जीवन की दिशा तय करते हैं। उन्होंने महिलाओं को सकारात्मक सोच, समय का सदुपयोग और निरंतर सीखने की भावना के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।



कार्यक्रम में राजस्थान संघ की पूर्व अध्यक्षा रतनी बाई मेहता ने महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं कामधेनु गौशाला की अध्यक्षा शारदा चौधरी ने घूंघट से बाहर निकलकर समाज सेवा और आत्मनिर्भरता की अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की।

इस अवसर पर श्री रत्न हितैषी श्रविका मंडल की अध्यक्षा प्रभा गुलेच्छा ने अपनी सुंदर कविता के माध्यम से महिलाओं को प्रोत्साहित किया और ब्यावर युवा लेडीज विंग की सराहना की। वहीं साधु-संतों द्वारा घरेलू देसी सामग्री से निर्मित औषधियों से वैयावच्च का लाभ लेने वाली सरोज गिरिया ने अपनी शारीरिक अस्वस्थता के संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी सुनाते हुए जरूरतमंदों की सेवा के लिए सभी को प्रेरित किया।


कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को जीवन जीने की कला, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित करना रहा। आयोजन को सफल बनाने में संयोजिका चंदू डाकलिया और कंचन छाजेड़ का विशेष सहयोग रहा। अंत में सीमा बोहरा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।


कार्यक्रम में ब्यावर संघ के अर्चित पारख सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। यह आयोजन महिलाओं के लिए प्रेरणा, संवाद और आत्मविकास का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

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