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‘शब्द’ वसंतोत्सव: कविताओं और फूलों की होली से सजी साहित्यिक शाम

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 9 मार्च
  • 4 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 20 मार्च

  • Group of men and women at a colorful spring festival event

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी।

(Bhaarataarth.com) बेंगलूरु, 9 मार्च। प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘शब्द’ ने रविवार को अपने वार्षिक वसंतोत्सव के माध्यम से बेंगलूरु के साहित्यिक परिदृश्य में रंग और भाव की अनूठी छटा बिखेरी। यह आयोजन मासिक रचनागोष्ठी के रूप में हुआ, जिसमें वसंत ऋतु की सौंदर्यपूर्ण झलक और जीवन के विभिन्न अनुभवों को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कवियों, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने भावों और रंगों की अद्भुत बरसात का आनंद लिया और फूलों की होली खेलकर वसंत के आगमन का उत्सव मनाया।


विशेष रूप से इस वर्ष वसंतोत्सव को विश्व महिला दिवस के अवसर से भी जोड़ा गया। मुख्य अतिथि के रूप में बेंगलूरु की प्रसिद्ध समाजसेवी और स्वयंसेवी संस्था ‘मातृछाया’ की संस्थापिका त्रिशला कोठारी को आमंत्रित किया गया। उनके सामाजिक योगदान और महिलाओं के उत्थान के क्षेत्र में किए गए कार्यों को देखते हुए उन्हें इस कार्यक्रम में विशेष स्थान दिया गया। त्रिशला कोठारी ने अपने संबोधन में कहा कि होली केवल रंग और उल्लास का पर्व नहीं है, बल्कि इसे जीवन में अपनाकर हम दूसरों की मदद और समाज में सहयोग की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ‘शब्द’ के सदस्य भी उतनी ही उत्साही और सहयोगी भावना से परिपूर्ण हैं।


  • Woman speaking at a 'Shabd Sahityik Sanstha' event

कार्यक्रम की अध्यक्षता ‘शब्द’ की कार्यकारी अध्यक्ष नलिनी पोपट ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी वरिष्ठ गज़लगो विद्या कृष्णा ने निभाई। विशिष्ट अतिथि के रूप में मुंबई से पधारी कवयित्री डॉ. कनकलता तिवारी ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर किया। उनकी कविताओं में जीवन के सुख-दुख, प्रेम, करुणा और सामाजिक संवेदनाओं का संतुलित मिश्रण देखने को मिला, जिसे श्रोताओं ने उत्साह और तालियों से सराहा।


कार्यक्रम की शुरुआत ‘शब्द’ के सलाहकार श्रीकान्त पाराशर द्वारा मुख्य अतिथि त्रिशला कोठारी का परिचय कराकर हुई। उन्होंने उनके अहर्निश समाजसेवा और महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण में योगदान की सराहना की। इसके पश्चात त्रिशला कोठारी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य और कला समाज में संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों को विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने श्रोताओं से अपील की कि वे भी अपने-अपने क्षेत्र में सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा दें।


इसके बाद ‘शब्द’ के अध्यक्ष डॉ. श्रीनारायण समीर ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज का समय कविता और साहित्य रचना के लिए चुनौतीपूर्ण है, फिर भी सृजन की आग को जलाए रखना आवश्यक है। उन्होंने युद्ध की विभीषिका और


  • Five women smiling and holding books at 'शब्द' Vasantotsav.

समाज में व्याप्त अन्य समस्याओं पर आधारित एक ओजस्वी कविता सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित किया। उनका मानना था कि कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता पैदा करने का सशक्त माध्यम है।


कविगोष्ठी की शुरुआत युवा कवि दीपक सोपोरी के कन्नड़ वाग्देवी-वंदना से हुई। उनके स्वर में भावनाओं की गहराई और सहज अभिव्यक्ति ने सभी का मन मोह लिया। इसके बाद वरिष्ठ नाटककार मथुरा कलौनी, नलिनी पोपट, प्रीति राही, राही राज, सुचित्रा कौल मिश्र, माधुरी सुबोध और दीपक सोपोरी ने अपनी कविताओं के माध्यम से वसंत ऋतु, जीवन के सुख-दुख, प्रेम और सामाजिक संदेशों को प्रस्तुत किया। श्रोताओं ने उनकी प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से इसे सराहा।


विद्या कृष्णा ने गज़लों के मधुर तरन्नुम से कार्यक्रम में और भी रोमांच पैदा किया। उनके स्वर और प्रस्तुति ने श्रोताओं के मन को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही, राजेंद्र गुलेच्छा, रमाकांत गुप्ता, गीता चौबे गूँज और श्रीकांत शर्मा की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं पर जादुई प्रभाव डाला। कवियों की यह श्रृंखला वसंत ऋतु के उल्लास और जीवन के विविध रंगों का प्रतीक बनकर सामने आई। इसके अतिरिक्त, उर्मिला श्रीवास्तव उर्मि, ऋता शेखर, अचला प्रवीण, भूमिका श्रीवास्तव और उषा गुप्ता की कविताएँ भी हर्षपूर्वक स्वागत की गई, जिससे यह गोष्ठी और भी जीवंत और समृद्ध बन गई।


  • Group of women celebrating Shabd Vasantotsav with spring flowers

कार्यक्रम के दौरान कवयित्री ऋता शेखर मधु ने अपनी पुस्तक ‘दुर्गा सप्तशती’ का हिंदी कुंडलियों में भावानुवाद प्रस्तुत किया। इसका लोकार्पण समारोह के दौरान हुआ और श्रोताओं ने इसे बहुत उत्साहपूर्वक अपनाया। इस अवसर पर ‘शब्द’ के सलाहकार और वरिष्ठ संपादक श्रीकान्त पाराशर, लखनऊ से पधारे वरिष्ठ पत्रकार नागेंद्र, बेंगलूरु से भारतार्थ खबर के संस्थापक, सम्पादक और वरिष्ठ पत्रकार धन्नाराम चौधरी, यूट्यूब लाइव डायरेक्टर अशोक कुमार सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।


वसंतोत्सव का समापन फूलों की होली खेलकर हुआ। श्रोताओं और उपस्थित कवियों ने रंगों और खुशियों में एक-दूसरे के साथ शामिल होकर वसंत का उल्लास मनाया। इसके साथ ही ‘शब्द’ के अध्यक्ष डॉ. श्रीनारायण समीर ने भारतार्थ खबर के यूट्यूब लाइव चैनल पर साक्षात्कार के माध्यम से कार्यक्रम की महत्ता और अनुभव साझा किया। इस साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि साहित्य और कविता केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह समाज में बदलाव, संवेदनशीलता और मानवता के मूल्यों को विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन है। कार्यक्रम संयोजक श्रीकांत शर्मा ने समापन पर आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें सभी कवियों, अतिथियों, सहयोगियों और दर्शकों का धन्यवाद किया गया।


‘शब्द’ वसंतोत्सव ने यह स्पष्ट कर दिया कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने, समाज में जागरूकता फैलाने और रचनात्मक ऊर्जा को विकसित करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। इस आयोजन ने उपस्थित सभी लोगों के मन में वसंत ऋतु की खुशबू, रंगों की बहार और साहित्य की गहराई का मिश्रण छोड़ते हुए यह संदेश दिया कि रचनात्मकता और कला समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।


इस प्रकार, ‘शब्द’ वसंतोत्सव ने न केवल साहित्यिक सृजन और कविताओं का उत्सव मनाया, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सहयोग और मानवीय मूल्यों को भी उजागर किया। यह आयोजन बेंगलूरु के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच पर वसंत ऋतु के उल्लास और रचनात्मक ऊर्जा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा। कविताओं और गीतों की मधुर ध्वनि, भावनाओं की बहार और फूलों की होली की रंगीन छटा ने इसे श्रोताओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया।


वसंतोत्सव ने यह भी सिद्ध कर दिया कि साहित्य और कला का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सहयोग, सेवा, और मानवीय संवेदनाओं को बढ़ावा देने में एक अहम भूमिका निभा सकती है। ‘शब्द’ के इस आयोजन ने युवा और वरिष्ठ कवियों, समाजसेवियों और साहित्य प्रेमियों को एक साथ लाकर साहित्यिक संस्कृति को समृद्ध करने में एक नई दिशा दी।

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