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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

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  • लुम्बिनी से गूंजा विश्व शांति का संदेश, तीसरा अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन शुरू

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) काठमांडू/लुम्बिनी। नेपाल के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल लुम्बिनी में शुक्रवार से तीसरे अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। इसी के साथ यहां तीसरे अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस की भी शुरुआत की गई, जिसमें विश्वभर से आए प्रतिनिधि, साधक और विद्वान शांति, सह-अस्तित्व और वैश्विक एकता के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए एकत्र हुए हैं। यह बहुप्रतीक्षित आयोजन नेपाल सरकार के पर्यटन तथा संस्कृति मंत्रालय, नेपाल पर्यटन बोर्ड, लुम्बिनी विकास कोष तथा नेपाल ओलंपिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान ध्यान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत प्रस्तुतियां और मैराथन जैसी विविध गतिविधियों के माध्यम से शांति और मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री अनिल कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता और चुनौतियों के बीच शांति ही मानवता के लिए सबसे बड़ा और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि आज के अनिश्चित माहौल में शांति न केवल एक आवश्यकता है, बल्कि यह मानव सभ्यता की आधारशिला और साझा आकांक्षा भी है। मंत्री सिन्हा ने कहा, “लुम्बिनी विश्व शांति का स्रोत और मानवता की अमूल्य धरोहर है। यह वही पवित्र स्थल है, जहां गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। यहां स्थित अशोक स्तंभ आज भी पूरी दुनिया को बौद्ध धर्म, करुणा और अहिंसा का संदेश देता है।” उन्होंने यह भी बताया कि यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल लुम्बिनी वैश्विक शांति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि लुम्बिनी केवल किसी एक धर्म का केंद्र नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए शांति, समानता और सह-अस्तित्व का सार्वभौमिक प्रतीक है। यहां से प्रसारित होने वाला शांति का संदेश पूरे विश्व को जोड़ने की क्षमता रखता है। सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यदि व्यक्ति का मन शांत होगा, तो समाज और राष्ट्र भी शांत रहेंगे। मन की सुरक्षा से समस्त जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और समानता की भावना से विश्व में संतुलन और समरसता स्थापित की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष आयोजित लुम्बिनी अंतरराष्ट्रीय शांति महोत्सव में “शांति, विकास, समानता, न्याय, लोकतंत्र और स्वतंत्रता” जैसे वैश्विक मूल्यों को केंद्र में रखकर विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें अनेक देशों के प्रतिनिधि, आध्यात्मिक गुरु, शोधकर्ता और युवा भागीदारी कर रहे हैं, जिससे यह सम्मेलन वैश्विक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि विश्व स्तर पर शांति और सह-अस्तित्व के संदेश को भी मजबूती मिलती है।

  • कन्या गुरुकुल नया चेण्डा का शत-प्रतिशत परिणाम, 20 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर रचा इतिहास

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नया चेण्डा /पाली। 10वीं बोर्ड परीक्षा (हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम) के घोषित परिणामों में कन्या गुरुकुल नया चेण्डा ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत परिणाम हासिल किया है। लगातार नौवें वर्ष 100 प्रतिशत रिजल्ट कायम रखते हुए संस्थान ने उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा को बरकरार रखा है। इस वर्ष कुल 197 छात्राओं ने परीक्षा में भाग लिया, जिनमें से सभी छात्राएं उत्तीर्ण हुईं। इनमें 187 छात्राओं ने प्रथम श्रेणी तथा 10 छात्राओं ने द्वितीय श्रेणी में सफलता प्राप्त की। विशेष बात यह रही कि 20 छात्राओं ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया, वहीं 113 छात्राओं ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर गार्गी पुरस्कार के लिए अपनी पात्रता सुनिश्चित की। विद्यालय की टॉपर छात्रा ने 96.17 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया। छात्राओं के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल है। इस सफलता का श्रेय संस्थान की पीठाधीश्वर परम तपस्विनी साध्वी श्री भगवती बाई जी के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन को दिया जा रहा है। विद्यालय प्रबंधन समिति, प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ के समर्पित प्रयासों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने सभी छात्राओं को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। क्षेत्र में भी इस परिणाम को लेकर हर्ष और गर्व का वातावरण बना हुआ है।

  • रेलवे की कमाई पर नया अनुमान:

    यात्री और माल ढुलाई से आय को लेकर बदले लक्ष्य भारतीय रेलवे ने अपने आने वाले वर्षों की कमाई को लेकर नए अनुमान प्रस्तुत किए हैं। रेलवे के अनुसार यात्री सेवाओं और माल ढुलाई से आय में वृद्धि की उम्मीद है, हालांकि कुछ लक्ष्यों को लेकर संशोधन किया गया है। यह जानकारी बजट सत्र के दौरान सामने आई है, जिससे रेलवे की वित्तीय स्थिति पर चर्चा तेज हो गई है। रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है और इसकी आय सीधे तौर पर बुनियादी ढाँचे, सेवाओं की गुणवत्ता और यात्रियों की सुविधा से जुड़ी होती है। आय के नए अनुमानों से यह संकेत मिलता है कि रेलवे अपने खर्च और राजस्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। आम यात्रियों के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि इन वित्तीय बदलावों का असर किराए, सेवाओं और भविष्य की योजनाओं पर किस तरह पड़ेगा। आने वाले समय में रेलवे के ये निर्णय न केवल परिवहन व्यवस्था, बल्कि आम नागरिकों के दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर सकते हैं।   रेलवे और बजट से जुड़े इन फैसलों का विस्तृत विश्लेषण भारतार्थ पर जल्द पढ़ें ।

  • ईडी का बड़ा खुलासा: 257 साइबर केसों में ₹35,925 करोड़ की ‘काली कमाई’ का पता, 21,857 आरोपी गिरफ्तार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच करते हुए साइबर अपराध से जुड़े 257 मामलों में कुल ₹35,925.58 करोड़ की ‘आपराधिक आय’ का पता लगाया है। यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लिखित जवाब में दी। मंत्री ने बताया कि इन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन एकत्रित किया गया था, जिस पर एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए हजारों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक 21,857 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। समन्वित तंत्र से तेज हुई कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र विकसित किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां अपने-अपने नोडल अधिकारियों के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं, जिससे मामलों की जांच में तेजी आती है। I4C बना बड़ा हथियार साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए गृह मंत्रालय ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) की स्थापना की है। इसके अंतर्गत ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) भी संचालित किया जा रहा है, जहां आम नागरिक ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 भी सक्रिय है। हजारों करोड़ की रकम बचाई गई I4C के प्रयासों से 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से ज्यादा की रकम बचाई जा चुकी है। यह रकम समय रहते कार्रवाई कर पीड़ितों तक पहुंचाने में मददगार साबित हुई है। संदिग्ध खातों पर कड़ी निगरानी साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए 10 सितंबर 2024 को ‘संदिग्ध रजिस्टर’ की शुरुआत की गई थी। इसमें 23.05 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं और 27.37 लाख म्यूल खातों का डेटा साझा किया गया है। इस पहल के चलते ₹9,518.91 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन रद्द किए जा चुके हैं। आधुनिक तकनीक से जांच को बल I4C के तहत विकसित ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल अपराधियों की लोकेशन और उनके नेटवर्क को मैप पर दर्शाता है, जिससे जांच एजेंसियों को तकनीकी सहायता मिलती है। इसके अलावा ‘मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम’ (एमआईएस) प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न राज्यों के बीच डेटा साझा कर अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है। सरकार का सख्त संदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने के लिए व्यापक और समन्वित रणनीति अपनाई गई है। आने वाले समय में तकनीकी संसाधनों और एजेंसियों के बीच तालमेल को और मजबूत कर साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • पश्चिम एशिया संकट पर एकजुटता की पहल: केंद्र ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उत्पन्न वैश्विक और घरेलू प्रभावों के मद्देनज़र केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट रणनीति तैयार करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में इस संकट से निपटने के लिए सभी दलों और राज्यों से सहयोग की अपील की है। सूत्रों के अनुसार, बैठक शाम पांच बजे आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर सकते हैं। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित अन्य वरिष्ठ मंत्री भी उपस्थित रहेंगे। सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के साथ-साथ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया गया है। हालांकि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बैठक में शामिल न होने की बात कही है। बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के विभिन्न पहलुओं—जैसे आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव, ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और आंतरिक सुरक्षा—पर व्यापक चर्चा की जाएगी। साथ ही, सरकार विपक्ष के सुझावों को भी शामिल करते हुए एक समन्वित कार्ययोजना तैयार करने का प्रयास करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में अपने संबोधन में कहा कि यह संकट देश के लिए “एक बड़ी परीक्षा” साबित हो सकता है। उन्होंने राज्यों से सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर “टीम इंडिया” के रूप में कार्य करना होगा। उन्होंने जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश देने की भी बात कही, ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो। प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच हुए समन्वय को उदाहरण बताते हुए कहा कि उसी मॉडल को अपनाकर वर्तमान संकट का सामना किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से भी संयम और धैर्य बनाए रखने की अपील की। सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया का यह संकट अपने आप में विशिष्ट है और इसके समाधान के लिए भी अलग रणनीति अपनानी होगी। ऐसे में सर्वदलीय बैठक को राष्ट्रीय एकजुटता और समन्वित प्रयासों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

  • पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: बेंगलूरु में 80 प्रतिशत सड़क कार्य ठप, बिटुमेन 50 प्रतिशत महंगा

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब देश के बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली प्रमुख सामग्री बिटुमेन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे बेंगलूरु में सड़क निर्माण और डामरीकरण के लगभग 80 प्रतिशत कार्य ठप पड़ गए हैं। नगर निगम के साथ कार्यरत ठेकेदारों के संघ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि बिटुमेन की आपूर्ति या तो बाधित हो गई है या फिर कृत्रिम कमी उत्पन्न की जा रही है। संघ के अध्यक्ष जी.एम. नंदा कुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से बिटुमेन की उपलब्धता लगातार प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया, “पहले एक टन बिटुमेन की कीमत 45,000 से 46,000 रुपये के बीच थी, जो अब बढ़कर 65,000 से 67,000 रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि 50 प्रतिशत से अधिक है, जिसे मौजूदा अनुबंध दरों पर वहन करना संभव नहीं है।” ठेकेदारों का कहना है कि 1 मार्च 2026 के बाद कई सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों के टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन कीमतों में अचानक आई इस वृद्धि के कारण कार्यों को जारी रखना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह से आपूर्ति लगभग बंद हो गई है और काला बाजार में ऊंची दरों पर बिटुमेन बेचा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, बेंगलूरु में बिटुमेन की आपूर्ति मुख्य रूप से मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के माध्यम से होती है। वर्तमान संकट के चलते इन स्रोतों से नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई है। ठेकेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। आयुक्त ने इस मुद्दे को सरकार के स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया है। ठेकेदार संघ ने बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए “स्टार रेट” लागू करने की मांग की है। स्टार रेट ऐसी विशेष दर होती है, जिसका उपयोग उन कार्यों के मूल्यांकन में किया जाता है जो मूल अनुबंध में शामिल नहीं होते या जिनकी लागत बाजार परिस्थितियों के कारण बदल जाती है। ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस समस्या का समाधान नहीं करती और बढ़ी हुई लागत के अनुसार दरों में संशोधन नहीं होता, तब तक कार्यों को जारी रखना संभव नहीं है। इस स्थिति से न केवल शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आने वाले दिनों में यातायात और नागरिक सुविधाओं पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

  • चार राज्यों के चुनाव: कांग्रेस के लिए सियासी अग्निपरीक्षा, केरल पर टिकी सबसे बड़ी उम्मीद

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित होने जा रहे हैं। पार्टी के सामने जहां अपनी साख बचाने की चुनौती है, वहीं कई राज्यों में संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक खींचतान उसके लिए चिंता का विषय बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे कांग्रेस के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं। केरल में सबसे अधिक उम्मीद, लेकिन राह कठिन कांग्रेस की सबसे बड़ी उम्मीद केरल से जुड़ी हुई है, जहां पार्टी को पिनारयी विजयन के नेतृत्व वाली वाम सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर का लाभ मिलने की संभावना दिखाई दे रही है। हालांकि, चुनाव प्रचार की धीमी शुरुआत और नेतृत्व को लेकर आंतरिक मतभेदों ने पार्टी की राह को जटिल बना दिया है। मुख्यमंत्री पद को लेकर केसी वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशान और रमेश चेन्निथला जैसे नेताओं के बीच खींचतान भी सामने आई है, जिससे संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल उठे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस के लिए केरल में जीत बेहद अहम मानी जा रही है। असम में भाजपा से सीधी टक्कर, चुनौतियां भारी असम में कांग्रेस का मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा से है, जहां पिछले एक दशक से पार्टी सत्ता से बाहर है। चुनाव से ठीक पहले दो प्रमुख नेताओं के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। गौरतलब है कि यहां पार्टी संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को दी गई है, लेकिन समय की कमी और संसाधनों के प्रबंधन में देरी पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तमिलनाडु में गठबंधन पर निर्भर भविष्य तमिलनाडु में कांग्रेस डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है और उसकी स्थिति सहयोगी दल की ही बनी हुई है। एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में गठबंधन की वापसी की संभावना जताई जा रही है, लेकिन कांग्रेस के भीतर सत्ता-साझेदारी को लेकर असंतोष भी उभर कर सामने आया है। वहीं अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके की सक्रियता ने राज्य की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है, जिससे भविष्य में गठबंधन समीकरण बदलने की आशंका भी जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल में ‘एकला चलो’ रणनीति पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने इस बार वाम दलों से दूरी बनाते हुए “एकला चलो” की रणनीति अपनाई है। पार्टी 2006 के बाद पहली बार सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। हालांकि, राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के मजबूत प्रभाव के बीच कांग्रेस के लिए अपनी जमीन फिर से तैयार करना आसान नहीं होगा। पुडुचेरी में भी स्थिति अनिश्चित केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी कांग्रेस की स्थिति मजबूत नहीं मानी जा रही है। यहां क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है, जिससे परिणाम अनिश्चित बने हुए हैं। नेतृत्व के संकेत और सियासी संदेश चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के बयान और राहुल गांधी की प्रतिक्रियाओं से भी यह संकेत मिला कि पार्टी को केरल और तमिलनाडु से अधिक उम्मीदें हैं, जबकि अन्य राज्यों को लेकर सतर्क रुख अपनाया गया है। कुल मिलाकर, आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं। केरल में जीत पार्टी के लिए राहत लेकर आ सकती है, जबकि अन्य राज्यों में कमजोर प्रदर्शन उसके राजनीतिक भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

  • पश्चिम एशिया युद्ध का लंबा असर, भारत पूरी तरह सतर्क: पीएम मोदी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर विस्तृत बयान देते हुए इसे “गंभीर और चिंताजनक” स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है और भारत सरकार देश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन लोकसभा में एक दिन पहले दिए गए वक्तव्य के बाद आया, जिसमें उन्होंने देश की सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी थी। व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति पर असर प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “युद्ध के कारण हमारे व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की नियमित आपूर्ति पर दबाव पड़ा है। यह स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय है।” वैश्विक स्तर पर गहराता ऊर्जा संकट प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संघर्ष को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और इससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तेल, गैस और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत सभी संबंधित देशों और विशेष रूप से यूनाइटेड स्टेटस के साथ लगातार संपर्क में है तथा पश्चिम एशियाई नेताओं के साथ दो दौर की वार्ता भी की जा चुकी है। खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा पर जोर प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं, जिन पर बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद हैं। बड़े पैमाने पर भारतीयों की सुरक्षित वापसी सरकार द्वारा चलाए गए निकासी अभियान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इनमें ईरान से लौटे 1,000 से अधिक नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र हैं। उन्होंने कहा, “संकट की इस घड़ी में देश और विदेश में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।” शांति और संवाद पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का मानवीय संकट मानवता के हित में नहीं है और भारत लगातार तनाव कम करने के प्रयास कर रहा है। संघर्ष क्यों बढ़ा पश्चिम एशिया में यह संघर्ष तब और तेज हो गया जब 28 फरवरी को यूनाइटेड स्टेटस और इजरायल के संयुक्त हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने कई क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई की, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। इस घटनाक्रम के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्ग और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक असर पड़ा है, जिसका प्रभाव भारत समेत पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है।

  • बेंगलूरु में नौकरी सुरक्षा की मांग पर पौराकर्मिकों का जीबीए कार्यालय घेराव, मई में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु, 25 मार्च। राजधानी बेंगलूरु में सोमवार को पौराकर्मिकों ने अपनी नौकरी की सुरक्षा और सेवा नियमितीकरण को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में एकत्रित पौराकर्मिकों ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव के कार्यालय में प्रवेश कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सेवा नियमितीकरण प्रमाण पत्र जारी करने, लंबित बोनस के भुगतान तथा ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए पौराकर्मिकों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई। इस दौरान कार्यालय परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी उत्पन्न हो गई। कर्नाटक राज्य नगरसभा, पुरसभा पौराकर्मिका महासंघ के राज्य महासचिव मुनिराजु ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा पौराकर्मिकों की सेवा नियमित करने के निर्णय के बावजूद नगर निकाय प्रशासन ने 12,692 में से करीब 2,000 कर्मचारियों को “तुच्छ कारणों” का हवाला देकर नियमितीकरण प्रमाण पत्र देने से वंचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह श्रमिकों के साथ अन्याय है और इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए। मुनिराजु ने बताया कि महासंघ की ओर से जीबीए प्रशासन को 14 अप्रैल 2026 तक शेष पौराकर्मिकों को नियुक्ति पत्र जारी करने की समयसीमा तय करने की मांग की गई है। साथ ही, सेवा के दौरान जान गंवाने वाले पौराकर्मिकों के परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। वहीं, मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को जीबीए के विशेष आयुक्त (प्रशासन) से चर्चा करने के लिए भी निर्देशित किया। ग्रेटर बेंगलूरु पौराकर्मिका एसोसिएशन के अध्यक्ष मुत्यालप्पा ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा तक मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो मई महीने में व्यापक स्तर पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पौराकर्मिकों की कार्य परिस्थितियों और नौकरी की सुरक्षा के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कितना शीघ्र और प्रभावी कदम उठाता है।

  • बेंगलूरु की जक्कूर फ्लाइंग स्कूल बंद करने की साजिश? विपक्ष का आरोप, 370 एकड़ जमीन पर रियल एस्टेट की नजर

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार जक्कूर फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल को बंद करने की योजना बना रही है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम रियल एस्टेट हितों को साधने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। अशोक ने सदन में कहा कि केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास स्थित जक्कूर का यह सरकारी फ्लाइंग स्कूल 370 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है, जिस पर रियल एस्टेट माफिया की नजर है। उन्होंने बताया कि यह जमीन 1940 के दशक में मैसूरु के शाही परिवार द्वारा दान में दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल में भी इस जमीन पर विधायकों, सांसदों और पदाधिकारियों के लिए एक कार्यकारी क्लब बनाने की योजना बनाई गई थी, जिसे बाद में बसवराज बोम्मई सरकार ने रद्द कर दिया था। अशोक ने कहा कि अब एक बार फिर स्कूल को स्थानांतरित करने के लिए अधिकारियों द्वारा बैठकें की जा रही हैं। विपक्ष के नेता ने कहा कि जब कांग्रेस विपक्ष में थी, तब कृष्णा बायरे गौड़ा ने भी इस योजना को गलत बताया था। “यह एक बड़ा घोटाला है और इस ऐतिहासिक फ्लाइंग स्कूल को हर हाल में बचाया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल की जमीन पर खेल परिसर बनाने की आड़ में बाद में ऊंची इमारतें खड़ी की जा सकती हैं। इस दौरान अशोक ने बृहत बेंगलूरु महानगर पालिका को पांच निगमों में विभाजित करने के प्रस्ताव की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीबीएमपी में भारी स्टाफ की कमी है और सरकार ने लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं की हैं। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि राजस्व विभाग में 1,482 पदों के मुकाबले केवल 858 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग में 1,063 के स्थान पर 429, इंजीनियरिंग विभाग में 1,047 के बजाय 543 और वित्त विभाग में 30 के स्थान पर केवल 18 कर्मचारी ही मौजूद हैं। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां 2,704 के मुकाबले केवल 970 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। अशोक ने निगम की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि संपत्ति कर, नगर नियोजन और सड़क निर्माण शुल्क से कुल लगभग 5,850 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है, जबकि केवल वेतन मद में ही 3,492 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर बीबीएमपी को करीब 6,300 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जिससे स्पष्ट है कि किसी आपात स्थिति जैसे बाढ़ या जल संकट से निपटने के लिए निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं बचेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली गर्मियों में शहर में टैंकर माफिया सक्रिय था और इस वर्ष भी गर्मी की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस तैयारी या बैठक नहीं की गई है। विपक्ष के इन आरोपों पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, जबकि जक्कूर फ्लाइंग स्कूल को लेकर उठे विवाद ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

  • कचरा संग्रहण ठप होने से बेंगलूरु पर संकट की आहट, ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु, 25 मार्च। आईटी नगरी बेंगलूरु में कचरा संग्रहण सेवाओं के बाधित होने से एक बार फिर स्वच्छता संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है। सोमवार को शहर के 76 इलाकों में कचरा उठाने का कार्य प्रतीकात्मक रूप से रोक दिया गया, जिससे कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगने लगे और जनस्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है। यह विरोध प्रदर्शन कचरा पृथक्करण (सेग्रिगेशन) व्यवस्था और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का परिणाम है। कचरा संग्रहण से जुड़े वाहन चालक और सफाई कर्मचारी आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन द्वारा घर-घर तीन श्रेणियों में कचरा अलग करने का निर्देश तो दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में मिश्रित कचरे को अलग करने की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर ही आ जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन लगभग पांच घंटे तक कचरे की छंटाई करनी पड़ती है, जिसमें कांच, लोहे और अन्य नुकीली वस्तुओं के कारण चोट लगने का खतरा बना रहता है। अपशिष्ट ठेकेदार संघ के महासचिव बी. बालासुब्रमण्य के अनुसार, कई कर्मचारी त्वचा संक्रमण, चोट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं, बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई के प्रमुख करिगौड़ा ने इस हड़ताल को “अवैध” बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ठेकेदारों को केवल पृथक किए गए कचरे का ही संग्रहण करना है और बिना अलग किए गए कचरे को लेने से मना करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू है, जिसके तहत ठेकेदारों पर सेवाएं जारी रखने की कानूनी जिम्मेदारी है। इसी बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कई ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन में बीबीएमपी के राजपत्रित अधिकारी मनुजा आर. की शिकायत पर श्री लक्ष्मी रंगनाथ एंटरप्राइजेज के बी.एस. किरण कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि 23 मार्च को पद्मनाभनगर वार्ड में कचरा संग्रहण नहीं किया गया, जिससे कचरे का ढेर लग गया और जनस्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न हुआ। इसके अलावा, राजाजीनगर और गिरिनगर पुलिस थानों में भी कर्नाटक आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम-2013 के तहत दो अन्य एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें पी. विक्रम देवराड्डी, अंजनेया और बी.एस. किरण कुमार जैसे ठेकेदारों के नाम शामिल हैं। अधिकारियों की शिकायतों में कई वार्डों में कचरा न उठाए जाने के कारण दुर्गंध, पर्यावरणीय जोखिम और आम जनजीवन में बाधा का उल्लेख किया गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और जल्द से जल्द सेवाएं बहाल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि विवाद का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो शहर को एक बार फिर बड़े कचरा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

  • वाराणसी में भोजपुरी साहित्य का सम्मान: ‘चुभे लागल बरगद के छांव’ सहित चार पुस्तकों का भव्य लोकार्पण

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) वाराणसी। भोजपुरी भाषा और साहित्य को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए तथागत ट्रस्ट के तत्वावधान में वाराणसी के बरजी गांव स्थित बनारस पब्लिक स्कूल में पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर भोजपुरी पांडुलिपि प्रकाशन योजना के अंतर्गत चयनित चार रचनाकारों की कृतियों का विधिवत प्रकाशन और लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आजमगढ़ के गोपालगंज बाजार निवासी लोक कवि एवं गीतकार लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ की अप्रकाशित भोजपुरी कृति “चुभे लागल बरगद के छांव” का लोकार्पण रहा। इस पुस्तक का प्रकाशन भोजपुरी प्रकाशन द्वारा तथा वितरण सर्वभाषा प्रकाशन के माध्यम से किया गया है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में तेलंगाना के महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सदानंद शाही ने की। कार्यक्रम में संरक्षक के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. नागेंद्र प्रसाद सिंह तथा कार्यकारी अध्यक्ष, भारतीय शिक्षा बोर्ड एवं वरिष्ठ साहित्यकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। तथागत ट्रस्ट की संचालिका डॉ. सोनी पांडेय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ को उनके साहित्यिक योगदान के लिए तथागत सम्मान से नवाजा गया। उन्हें स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ की यह तीसरी प्रकाशित कृति है, जबकि भोजपुरी भाषा में उनकी यह पहली पुस्तक है। इससे पूर्व उनकी दो काव्य संग्रह—“आंसू से मुस्कान लिखेंगे” (2021) तथा “मैं मधुमास ढूँढ़ने आया” (2024) प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी सात कविताएं एवं एक जीवनी आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड की हिंदी पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल हैं, जो उनकी साहित्यिक प्रतिष्ठा को दर्शाती हैं। इस उपलब्धि पर आजमगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी है। लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ ने अपने सभी शुभचिंतकों और पाठकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि पुस्तक “चुभे लागल बरगद के छांव” ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजॉन एवं फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है, जहां से भोजपुरी साहित्य के प्रेमी इसे आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। यह आयोजन न केवल भोजपुरी भाषा के संवर्धन की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ, बल्कि क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का भी माध्यम बना।

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