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बेंगलूरु में नौकरी सुरक्षा की मांग पर पौराकर्मिकों का जीबीए कार्यालय घेराव, मई में बड़े आंदोलन की चेतावनी

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु, 25 मार्च। राजधानी बेंगलूरु में सोमवार को पौराकर्मिकों ने अपनी नौकरी की सुरक्षा और सेवा नियमितीकरण को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में एकत्रित पौराकर्मिकों ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव के कार्यालय में प्रवेश कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।


प्रदर्शनकारियों ने सेवा नियमितीकरण प्रमाण पत्र जारी करने, लंबित बोनस के भुगतान तथा ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए पौराकर्मिकों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई। इस दौरान कार्यालय परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी उत्पन्न हो गई।


कर्नाटक राज्य नगरसभा, पुरसभा पौराकर्मिका महासंघ के राज्य महासचिव मुनिराजु ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा पौराकर्मिकों की सेवा नियमित करने के निर्णय के बावजूद नगर निकाय प्रशासन ने 12,692 में से करीब 2,000 कर्मचारियों को “तुच्छ कारणों” का हवाला देकर नियमितीकरण प्रमाण पत्र देने से वंचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह श्रमिकों के साथ अन्याय है और इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।


मुनिराजु ने बताया कि महासंघ की ओर से जीबीए प्रशासन को 14 अप्रैल 2026 तक शेष पौराकर्मिकों को नियुक्ति पत्र जारी करने की समयसीमा तय करने की मांग की गई है। साथ ही, सेवा के दौरान जान गंवाने वाले पौराकर्मिकों के परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।


वहीं, मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को जीबीए के विशेष आयुक्त (प्रशासन) से चर्चा करने के लिए भी निर्देशित किया।


ग्रेटर बेंगलूरु पौराकर्मिका एसोसिएशन के अध्यक्ष मुत्यालप्पा ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा तक मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो मई महीने में व्यापक स्तर पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पौराकर्मिकों की कार्य परिस्थितियों और नौकरी की सुरक्षा के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर कितना शीघ्र और प्रभावी कदम उठाता है।

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