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कचरा संग्रहण ठप होने से बेंगलूरु पर संकट की आहट, ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 25 मार्च
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु, 25 मार्च। आईटी नगरी बेंगलूरु में कचरा संग्रहण सेवाओं के बाधित होने से एक बार फिर स्वच्छता संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई है। सोमवार को शहर के 76 इलाकों में कचरा उठाने का कार्य प्रतीकात्मक रूप से रोक दिया गया, जिससे कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगने लगे और जनस्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है।


यह विरोध प्रदर्शन कचरा पृथक्करण (सेग्रिगेशन) व्यवस्था और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का परिणाम है। कचरा संग्रहण से जुड़े वाहन चालक और सफाई कर्मचारी आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन द्वारा घर-घर तीन श्रेणियों में कचरा अलग करने का निर्देश तो दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में मिश्रित कचरे को अलग करने की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर ही आ जाती है।


कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन लगभग पांच घंटे तक कचरे की छंटाई करनी पड़ती है, जिसमें कांच, लोहे और अन्य नुकीली वस्तुओं के कारण चोट लगने का खतरा बना रहता है। अपशिष्ट ठेकेदार संघ के महासचिव बी. बालासुब्रमण्य के अनुसार, कई कर्मचारी त्वचा संक्रमण, चोट और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।


वहीं, बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई के प्रमुख करिगौड़ा ने इस हड़ताल को “अवैध” बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ठेकेदारों को केवल पृथक किए गए कचरे का ही संग्रहण करना है और बिना अलग किए गए कचरे को लेने से मना करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू है, जिसके तहत ठेकेदारों पर सेवाएं जारी रखने की कानूनी जिम्मेदारी है।


इसी बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कई ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कुमारस्वामी लेआउट पुलिस स्टेशन में बीबीएमपी के राजपत्रित अधिकारी मनुजा आर. की शिकायत पर श्री लक्ष्मी रंगनाथ एंटरप्राइजेज के बी.एस. किरण कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि 23 मार्च को पद्मनाभनगर वार्ड में कचरा संग्रहण नहीं किया गया, जिससे कचरे का ढेर लग गया और जनस्वास्थ्य को खतरा उत्पन्न हुआ।


इसके अलावा, राजाजीनगर और गिरिनगर पुलिस थानों में भी कर्नाटक आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम-2013 के तहत दो अन्य एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें पी. विक्रम देवराड्डी, अंजनेया और बी.एस. किरण कुमार जैसे ठेकेदारों के नाम शामिल हैं। अधिकारियों की शिकायतों में कई वार्डों में कचरा न उठाए जाने के कारण दुर्गंध, पर्यावरणीय जोखिम और आम जनजीवन में बाधा का उल्लेख किया गया है।


स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है और जल्द से जल्द सेवाएं बहाल कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि विवाद का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो शहर को एक बार फिर बड़े कचरा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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