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बेंगलूरु की जक्कूर फ्लाइंग स्कूल बंद करने की साजिश? विपक्ष का आरोप, 370 एकड़ जमीन पर रियल एस्टेट की नजर

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार जक्कूर फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल को बंद करने की योजना बना रही है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम रियल एस्टेट हितों को साधने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।


अशोक ने सदन में कहा कि केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पास स्थित जक्कूर का यह सरकारी फ्लाइंग स्कूल 370 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है, जिस पर रियल एस्टेट माफिया की नजर है। उन्होंने बताया कि यह जमीन 1940 के दशक में मैसूरु के शाही परिवार द्वारा दान में दी गई थी।


उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल में भी इस जमीन पर विधायकों, सांसदों और पदाधिकारियों के लिए एक कार्यकारी क्लब बनाने की योजना बनाई गई थी, जिसे बाद में बसवराज बोम्मई सरकार ने रद्द कर दिया था। अशोक ने कहा कि अब एक बार फिर स्कूल को स्थानांतरित करने के लिए अधिकारियों द्वारा बैठकें की जा रही हैं।


विपक्ष के नेता ने कहा कि जब कांग्रेस विपक्ष में थी, तब कृष्णा बायरे गौड़ा ने भी इस योजना को गलत बताया था। “यह एक बड़ा घोटाला है और इस ऐतिहासिक फ्लाइंग स्कूल को हर हाल में बचाया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल की जमीन पर खेल परिसर बनाने की आड़ में बाद में ऊंची इमारतें खड़ी की जा सकती हैं।


इस दौरान अशोक ने बृहत बेंगलूरु महानगर पालिका को पांच निगमों में विभाजित करने के प्रस्ताव की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीबीएमपी में भारी स्टाफ की कमी है और सरकार ने लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं की हैं।


उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि राजस्व विभाग में 1,482 पदों के मुकाबले केवल 858 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग में 1,063 के स्थान पर 429, इंजीनियरिंग विभाग में 1,047 के बजाय 543 और वित्त विभाग में 30 के स्थान पर केवल 18 कर्मचारी ही मौजूद हैं। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां 2,704 के मुकाबले केवल 970 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।


अशोक ने निगम की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि संपत्ति कर, नगर नियोजन और सड़क निर्माण शुल्क से कुल लगभग 5,850 करोड़ रुपये की आय का अनुमान है, जबकि केवल वेतन मद में ही 3,492 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर बीबीएमपी को करीब 6,300 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जिससे स्पष्ट है कि किसी आपात स्थिति जैसे बाढ़ या जल संकट से निपटने के लिए निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं बचेंगे।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली गर्मियों में शहर में टैंकर माफिया सक्रिय था और इस वर्ष भी गर्मी की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस तैयारी या बैठक नहीं की गई है।


विपक्ष के इन आरोपों पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, जबकि जक्कूर फ्लाइंग स्कूल को लेकर उठे विवाद ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

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