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पश्चिम एशिया युद्ध का लंबा असर, भारत पूरी तरह सतर्क: पीएम मोदी

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 25
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर विस्तृत बयान देते हुए इसे “गंभीर और चिंताजनक” स्थिति बताया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है और भारत सरकार देश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है।


प्रधानमंत्री का यह संबोधन लोकसभा में एक दिन पहले दिए गए वक्तव्य के बाद आया, जिसमें उन्होंने देश की सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी थी।


व्यापार मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति पर असर

प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है।


उन्होंने कहा, “युद्ध के कारण हमारे व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरकों की नियमित आपूर्ति पर दबाव पड़ा है। यह स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय है।”


वैश्विक स्तर पर गहराता ऊर्जा संकट

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि संघर्ष को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और इससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत तेल, गैस और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है।


उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत सभी संबंधित देशों और विशेष रूप से यूनाइटेड स्टेटस के साथ लगातार संपर्क में है तथा पश्चिम एशियाई नेताओं के साथ दो दौर की वार्ता भी की जा चुकी है।


खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं, जिन पर बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद हैं।


बड़े पैमाने पर भारतीयों की सुरक्षित वापसी

सरकार द्वारा चलाए गए निकासी अभियान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इनमें ईरान से लौटे 1,000 से अधिक नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र हैं।


उन्होंने कहा, “संकट की इस घड़ी में देश और विदेश में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।”


शांति और संवाद पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का मानवीय संकट मानवता के हित में नहीं है और भारत लगातार तनाव कम करने के प्रयास कर रहा है।


संघर्ष क्यों बढ़ा

पश्चिम एशिया में यह संघर्ष तब और तेज हो गया जब 28 फरवरी को यूनाइटेड स्टेटस और इजरायल के संयुक्त हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने कई क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई की, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।

इस घटनाक्रम के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्ग और आर्थिक स्थिरता पर व्यापक असर पड़ा है, जिसका प्रभाव भारत समेत पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है।

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