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लुम्बिनी से गूंजा विश्व शांति का संदेश, तीसरा अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन शुरू

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 20 मार्च
  • 2 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 25 मार्च

Monks gathered at a peace conference in Lumbini

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

काठमांडू/लुम्बिनी। नेपाल के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल लुम्बिनी में शुक्रवार से तीसरे अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। इसी के साथ यहां तीसरे अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस की भी शुरुआत की गई, जिसमें विश्वभर से आए प्रतिनिधि, साधक और विद्वान शांति, सह-अस्तित्व और वैश्विक एकता के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए एकत्र हुए हैं।


यह बहुप्रतीक्षित आयोजन नेपाल सरकार के पर्यटन तथा संस्कृति मंत्रालय, नेपाल पर्यटन बोर्ड, लुम्बिनी विकास कोष तथा नेपाल ओलंपिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान ध्यान सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत प्रस्तुतियां और मैराथन जैसी विविध गतिविधियों के माध्यम से शांति और मानवीय मूल्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री अनिल कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता और चुनौतियों के बीच शांति ही मानवता के लिए सबसे बड़ा और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि आज के अनिश्चित माहौल में शांति न केवल एक आवश्यकता है, बल्कि यह मानव सभ्यता की आधारशिला और साझा आकांक्षा भी है।


मंत्री सिन्हा ने कहा, “लुम्बिनी विश्व शांति का स्रोत और मानवता की अमूल्य धरोहर है। यह वही पवित्र स्थल है, जहां गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। यहां स्थित अशोक स्तंभ आज भी पूरी दुनिया को बौद्ध धर्म, करुणा और अहिंसा का संदेश देता है।” उन्होंने यह भी बताया कि यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल लुम्बिनी वैश्विक शांति और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।


उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि लुम्बिनी केवल किसी एक धर्म का केंद्र नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए शांति, समानता और सह-अस्तित्व का सार्वभौमिक प्रतीक है। यहां से प्रसारित होने वाला शांति का संदेश पूरे विश्व को जोड़ने की क्षमता रखता है।


सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यदि व्यक्ति का मन शांत होगा, तो समाज और राष्ट्र भी शांत रहेंगे। मन की सुरक्षा से समस्त जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और समानता की भावना से विश्व में संतुलन और समरसता स्थापित की जा सकती है।


उल्लेखनीय है कि इस वर्ष आयोजित लुम्बिनी अंतरराष्ट्रीय शांति महोत्सव में “शांति, विकास, समानता, न्याय, लोकतंत्र और स्वतंत्रता” जैसे वैश्विक मूल्यों को केंद्र में रखकर विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें अनेक देशों के प्रतिनिधि, आध्यात्मिक गुरु, शोधकर्ता और युवा भागीदारी कर रहे हैं, जिससे यह सम्मेलन वैश्विक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन गया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि विश्व स्तर पर शांति और सह-अस्तित्व के संदेश को भी मजबूती मिलती है।

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