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बेंगलूरु के चंदापुरा झील पर मंडराया औद्योगिक खतरा, एनजीटी ने उठाए सख्त सवाल

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 20
  • 2 min read

Updated: Mar 23

कैचमेंट क्षेत्र में ‘स्विफ्ट सिटी’ परियोजना पर पर्यावरणीय चिंता, व्यापक ईआईए की मांग


फाइल फोटो

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु के अनेकल तालुक स्थित चंदापुरा झील के संरक्षण को लेकर मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ के समक्ष 18 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में झील के कैचमेंट क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को लेकर कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सवाल उठाए गए।


याचिकाकर्ता ने अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत अपने आवेदन में कहा कि चंदापुरा झील की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसका असर इसके डाउनस्ट्रीम जल निकायों—मुत्तनल्लूर झील और बिदरगुप्पे झील—पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इन झीलों की आपसी जलधारात्मक कड़ी के कारण एक झील की क्षति पूरे जल तंत्र को प्रभावित कर रही है।


मामले में “स्विफ्ट सिटी” नामक प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। यह परियोजना मुत्तनल्लूर झील के कैचमेंट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 11 गांवों में विकसित की जानी प्रस्तावित है। याचिका के अनुसार, यह क्षेत्र बिदरगुप्पे झील की सहायक जलधाराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से जल प्रदूषण, भूजल संकट और पारिस्थितिक असंतुलन बढ़ने की आशंका है।


याचिकाकर्ता ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। साथ ही, किसी भी प्रकार की स्वीकृति से पूर्व एक स्वतंत्र और मान्यता प्राप्त एजेंसी से विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि संभावित जोखिमों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके।


एनजीटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 30 मार्च 2026 को दक्षिणी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि आगामी सुनवाई में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव, कैचमेंट क्षेत्र की संवेदनशीलता और जल निकायों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत विचार किया जाएगा।


विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरी और औद्योगिक विस्तार के बीच यदि झीलों और उनके कैचमेंट क्षेत्रों की अनदेखी की गई, तो भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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