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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर मंथन जारी: जेपीसी को मिला और समय, अब मानसून सत्र में आएगी अहम रिपोर्ट

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 18
  • 2 min read

Updated: Mar 20


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देश की चुनावी प्रणाली में संभावित बड़े बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लोक सभा ने बुधवार, 18 मार्च 2026 को ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े दो प्रमुख विधेयकों की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव सदन में ध्वनिमत से पारित हुआ।


अब समिति को अपनी रिपोर्ट 2026 के आगामी मॉनसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक पेश करने की अनुमति मिल गई है, जिससे इस बहुचर्चित चुनाव सुधार पर व्यापक विचार-विमर्श का रास्ता और लंबा हो गया है।


किसने रखा प्रस्ताव?

संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पी. पी. चौधरी ने सदन में समय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि समिति को इन जटिल और व्यापक प्रभाव वाले विधेयकों पर गहन अध्ययन और विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।


किन विधेयकों पर हो रहा है विचार?


समिति फिलहाल दो महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार कर रही है:


संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024

इसका उद्देश्य देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था लागू करना है।


केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024

यह विधेयक प्रस्तावित चुनाव प्रणाली को कानूनी मजबूती प्रदान करने के लिए लाया गया है।


इन दोनों विधेयकों को दिसंबर 2024 में संसद में पेश किया गया था और विस्तृत जांच के लिए जेपीसी को भेजा गया था।


बैठकों में क्या सामने आया?

समिति की बैठकों में कई वरिष्ठ नेताओं और विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे हैं। 9 मार्च 2026 को हुई बैठक में वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं, तो एक समान मतदाता सूची का उपयोग संभव होगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो सकती है।


आगे की राह

अब संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेकर अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।


‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पहल को भारत की चुनावी प्रक्रिया में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह लागू होता है, तो इससे न केवल चुनावी खर्च में कमी आएगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी निरंतरता बनी रह सकती है।


लोकसभा द्वारा जेपीसी को अतिरिक्त समय देने का निर्णय इस बात का संकेत है कि सरकार इस महत्वपूर्ण सुधार को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय व्यापक सहमति और ठोस अध्ययन के आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है। अब सभी की नजरें आगामी मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां इस विषय पर निर्णायक दिशा तय हो सकती है।

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