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पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: बेंगलूरु में 80 प्रतिशत सड़क कार्य ठप, बिटुमेन 50 प्रतिशत महंगा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब देश के बुनियादी ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण सड़क निर्माण में उपयोग होने वाली प्रमुख सामग्री बिटुमेन की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे बेंगलूरु में सड़क निर्माण और डामरीकरण के लगभग 80 प्रतिशत कार्य ठप पड़ गए हैं।


नगर निगम के साथ कार्यरत ठेकेदारों के संघ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि बिटुमेन की आपूर्ति या तो बाधित हो गई है या फिर कृत्रिम कमी उत्पन्न की जा रही है। संघ के अध्यक्ष जी.एम. नंदा कुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से बिटुमेन की उपलब्धता लगातार प्रभावित हो रही है।


उन्होंने बताया, “पहले एक टन बिटुमेन की कीमत 45,000 से 46,000 रुपये के बीच थी, जो अब बढ़कर 65,000 से 67,000 रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि 50 प्रतिशत से अधिक है, जिसे मौजूदा अनुबंध दरों पर वहन करना संभव नहीं है।”


ठेकेदारों का कहना है कि 1 मार्च 2026 के बाद कई सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों के टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन कीमतों में अचानक आई इस वृद्धि के कारण कार्यों को जारी रखना मुश्किल हो गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह से आपूर्ति लगभग बंद हो गई है और काला बाजार में ऊंची दरों पर बिटुमेन बेचा जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, बेंगलूरु में बिटुमेन की आपूर्ति मुख्य रूप से मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के माध्यम से होती है। वर्तमान संकट के चलते इन स्रोतों से नियमित आपूर्ति प्रभावित हुई है।


ठेकेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के मुख्य आयुक्त एम. महेश्वर राव से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। आयुक्त ने इस मुद्दे को सरकार के स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया है।


ठेकेदार संघ ने बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए “स्टार रेट” लागू करने की मांग की है। स्टार रेट ऐसी विशेष दर होती है, जिसका उपयोग उन कार्यों के मूल्यांकन में किया जाता है जो मूल अनुबंध में शामिल नहीं होते या जिनकी लागत बाजार परिस्थितियों के कारण बदल जाती है।


ठेकेदारों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस समस्या का समाधान नहीं करती और बढ़ी हुई लागत के अनुसार दरों में संशोधन नहीं होता, तब तक कार्यों को जारी रखना संभव नहीं है।


इस स्थिति से न केवल शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आने वाले दिनों में यातायात और नागरिक सुविधाओं पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

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