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वाराणसी में भोजपुरी साहित्य का सम्मान: ‘चुभे लागल बरगद के छांव’ सहित चार पुस्तकों का भव्य लोकार्पण

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 24
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

वाराणसी। भोजपुरी भाषा और साहित्य को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए तथागत ट्रस्ट के तत्वावधान में वाराणसी के बरजी गांव स्थित बनारस पब्लिक स्कूल में पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर भोजपुरी पांडुलिपि प्रकाशन योजना के अंतर्गत चयनित चार रचनाकारों की कृतियों का विधिवत प्रकाशन और लोकार्पण किया गया।


कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आजमगढ़ के गोपालगंज बाजार निवासी लोक कवि एवं गीतकार लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ की अप्रकाशित भोजपुरी कृति “चुभे लागल बरगद के छांव” का लोकार्पण रहा। इस पुस्तक का प्रकाशन भोजपुरी प्रकाशन द्वारा तथा वितरण सर्वभाषा प्रकाशन के माध्यम से किया गया है।



समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में तेलंगाना के महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सदानंद शाही ने की। कार्यक्रम में संरक्षक के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. नागेंद्र प्रसाद सिंह तथा कार्यकारी अध्यक्ष, भारतीय शिक्षा बोर्ड एवं वरिष्ठ साहित्यकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। तथागत ट्रस्ट की संचालिका डॉ. सोनी पांडेय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।


इस अवसर पर लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ को उनके साहित्यिक योगदान के लिए तथागत सम्मान से नवाजा गया। उन्हें स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।


लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ की यह तीसरी प्रकाशित कृति है, जबकि भोजपुरी भाषा में उनकी यह पहली पुस्तक है। इससे पूर्व उनकी दो काव्य संग्रह—“आंसू से मुस्कान लिखेंगे” (2021) तथा “मैं मधुमास ढूँढ़ने आया” (2024) प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी सात कविताएं एवं एक जीवनी आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड की हिंदी पाठ्यपुस्तकों में भी शामिल हैं, जो उनकी साहित्यिक प्रतिष्ठा को दर्शाती हैं।


इस उपलब्धि पर आजमगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों ने उन्हें बधाई दी है। लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’ ने अपने सभी शुभचिंतकों और पाठकों के प्रति आभार व्यक्त किया।


उल्लेखनीय है कि पुस्तक “चुभे लागल बरगद के छांव” ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजॉन एवं फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है, जहां से भोजपुरी साहित्य के प्रेमी इसे आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।


यह आयोजन न केवल भोजपुरी भाषा के संवर्धन की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ, बल्कि क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का भी माध्यम बना।

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