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ईडी का बड़ा खुलासा: 257 साइबर केसों में ₹35,925 करोड़ की ‘काली कमाई’ का पता, 21,857 आरोपी गिरफ्तार

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 25
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच करते हुए साइबर अपराध से जुड़े 257 मामलों में कुल ₹35,925.58 करोड़ की ‘आपराधिक आय’ का पता लगाया है। यह जानकारी मंगलवार को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लिखित जवाब में दी।


मंत्री ने बताया कि इन मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन एकत्रित किया गया था, जिस पर एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए हजारों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक 21,857 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है।


समन्वित तंत्र से तेज हुई कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र विकसित किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां अपने-अपने नोडल अधिकारियों के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं, जिससे मामलों की जांच में तेजी आती है।


I4C बना बड़ा हथियार

साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए गृह मंत्रालय ने ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) की स्थापना की है। इसके अंतर्गत ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) भी संचालित किया जा रहा है, जहां आम नागरिक ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1930 भी सक्रिय है।


हजारों करोड़ की रकम बचाई गई

I4C के प्रयासों से 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से ज्यादा की रकम बचाई जा चुकी है। यह रकम समय रहते कार्रवाई कर पीड़ितों तक पहुंचाने में मददगार साबित हुई है।


संदिग्ध खातों पर कड़ी निगरानी

साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए 10 सितंबर 2024 को ‘संदिग्ध रजिस्टर’ की शुरुआत की गई थी। इसमें 23.05 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ताओं और 27.37 लाख म्यूल खातों का डेटा साझा किया गया है। इस पहल के चलते ₹9,518.91 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन रद्द किए जा चुके हैं।


आधुनिक तकनीक से जांच को बल

I4C के तहत विकसित ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल अपराधियों की लोकेशन और उनके नेटवर्क को मैप पर दर्शाता है, जिससे जांच एजेंसियों को तकनीकी सहायता मिलती है। इसके अलावा ‘मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम’ (एमआईएस) प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न राज्यों के बीच डेटा साझा कर अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है।


सरकार का सख्त संदेश

सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने के लिए व्यापक और समन्वित रणनीति अपनाई गई है। आने वाले समय में तकनीकी संसाधनों और एजेंसियों के बीच तालमेल को और मजबूत कर साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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