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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • मौसम की मार के बीच वोटिंग तेज, बंगाल में मोदी का प्रहार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) केरल, असम और पुड्डुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से शुरू हुआ मतदान उत्साहपूर्ण माहौल में जारी रहा, हालांकि कुछ क्षेत्रों में मौसम ने चुनावी गतिविधियों को प्रभावित किया। शाम 6 बजे तक मतदान चलने के दौरान केरल में 49.70 प्रतिशत असम में 59.62 प्रतिशत और पुड्डुचेरी में 56.83 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। केरल में 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए 2.71 करोड़ मतदाता 883 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कर रहे हैं। यहां सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), कांग्रेस नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और भाजपा नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। वहीं असम में 126 सीटों पर 2.50 करोड़ से अधिक मतदाता 722 उम्मीदवारों के भविष्य का निर्णय कर रहे हैं। भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस गठबंधन कड़ी चुनौती पेश कर रहा है। पुड्डुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए भी 10 लाख से अधिक मतदाता मतदान कर रहे हैं। इसी बीच पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुनावी रैलियां खराब मौसम की भेंट चढ़ गईं। निर्धारित तीन रैलियों में से केवल हल्दिया की सभा ही हो सकी। हल्दिया में आयोजित रैली में प्रधानमंत्री ने चैतन्य महाप्रभु का उल्लेख करते हुए जनता से समर्थन मांगा और भारी भीड़ को बदलाव का संकेत बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य में कथित आर्थिक कुप्रबंधन और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के लिए छह प्रमुख गारंटियों की घोषणा करते हुए कानून व्यवस्था सुधार, पारदर्शी शासन, भ्रष्टाचार की जांच, घुसपैठ पर रोक और सातवें वेतन आयोग के लागू करने का वादा किया। उन्होंने कहा कि राज्य कभी औद्योगिक केंद्र रहा, लेकिन अब विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल के मतदाताओं से विशेष रूप से बदलाव के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ऐसी सरकार की हकदार है जो उनके हितों को प्राथमिकता दे। केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने विश्वास जताया कि यूडीएफ 100 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी। वहीं केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने भाजपा के चुनाव प्रचार को प्रभावी बताते हुए कहा कि पार्टी ने हर स्तर तक पहुंच बनाई है और अब परिणामों का इंतजार है। इन चुनावों के साथ ही कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए भी मतदान जारी है। सभी राज्यों के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे, जिन पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

  • बंगाल में मोदी का हुंकार—6 गारंटी, ‘विकसित राज्य’ का संकल्प

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हल्दिया/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को राज्य में चुनावी अभियान को धार देते हुए पूर्वी मेदिनीपुर के हल्दिया सहित तीन अहम रैलियों को संबोधित किया। अपने तीखे और आक्रामक भाषण में उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास और लुटेरों का हिसाब’ का नया राजनीतिक संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चुनाव सामान्य नहीं, बल्कि “बंगाल के गौरव की पुनर्स्थापना” का निर्णायक अवसर है। उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए “निर्दयी और भ्रष्ट शासन” को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चुनाव “विकसित बंगाल” की मजबूत नींव रखने वाला साबित होगा। भाजपा की छह गारंटियों का ऐलान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भाजपा की ओर से छह प्रमुख गारंटियां पेश कीं, जिन्हें उन्होंने सुशासन का आधार बताया— भय के स्थान पर भरोसे का वातावरण, भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने की कार्रवाई, भ्रष्टाचार और अपराध की फाइलों का खुलासा, कानून द्वारा हर दोषी का हिसाब, घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सरकारी कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का लाभ मत्स्य उद्योग और विकास पर सरकार को घेरा प्रधानमंत्री ने बंगाल की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्र मत्स्य पालन और सी-फूड उद्योग का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अपार संभावनाओं के बावजूद राज्य मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है और आज भी दूसरे राज्यों पर निर्भर है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के प्रयासों से देश में पिछले 11 वर्षों में मछली उत्पादन और समुद्री निर्यात दोगुना हुआ है, लेकिन बंगाल इस प्रगति से वंचित रह गया। युवाओं और रोजगार पर तीखा हमला युवाओं के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार पर “दोहरा विश्वासघात” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में अवसर सीमित हैं और सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार हावी है। उन्होंने हल्दिया जैसे औद्योगिक क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां कभी देशभर से लोग रोजगार के लिए आते थे, आज वहां के युवा पलायन को मजबूर हैं। घुसपैठ और कानून-व्यवस्था बना मुद्दा प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में “घुसपैठियों की फैक्ट्री” चल रही है, फर्जी दस्तावेज बनाए जा रहे हैं और तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने इसे टीएमसी की “डर और तुष्टिकरण की राजनीति” का परिणाम बताया। केंद्र की योजनाओं पर भी उठाए सवाल तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की योजनाओं को या तो बदला गया या लागू नहीं किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ‘पीएम’ शब्द से राजनीतिक विरोध के कारण गरीबों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। चुनावी दृष्टि से अहम रैलियां राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हल्दिया, आसनसोल और बीरभूम के सूरी में आयोजित रैलियां रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। हल्दिया को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, जबकि आसनसोल औद्योगिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम केंद्र है। सूरी, जो अब तक टीएमसी का गढ़ रहा है, वहां भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह आक्रामक चुनावी रणनीति राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकती हैं।

  • तीन राज्यों में लोकतंत्र का महापर्व: असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान शुरू

    296 सीटों पर एक चरण में वोटिंग, लाखों मतदाता कर रहे अपने मताधिकार का प्रयोग; 4 मई को आएंगे नतीजे भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी। देश में लोकतंत्र का महापर्व गुरुवार को अपने चरम पर पहुंच गया, जब असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। तीनों क्षेत्रों की कुल 296 सीटों पर एक ही चरण में वोट डाले जा रहे हैं। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जो लोकतंत्र के प्रति जनता के उत्साह और जागरूकता को दर्शाती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र को सशक्त बनाने का सबसे बड़ा माध्यम बताया। असम: 722 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर असम की 126 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है, जहां कुल 722 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 64 सीटों का है। असम में कुल लगभग 2.5 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.25 करोड़ पुरुष और 1.25 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं, जबकि 343 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं। खास बात यह है कि करीब 5.75 लाख युवा मतदाता पहली बार वोट डाल रहे हैं, जो चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। केरल: त्रिकोणीय मुकाबले में कड़ी टक्कर केरल की 140 सीटों के लिए 833 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां सत्ता की कुर्सी के लिए मुख्य दलों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। सरकार बनाने के लिए 71 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। राज्य में कुल 2.71 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.32 करोड़ पुरुष और 1.39 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। 273 थर्ड जेंडर मतदाता भी लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी कर रहे हैं। पुडुचेरी: छोटे क्षेत्र में बड़ी राजनीतिक जंग केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों पर भी मतदान जारी है। यहां कुल 9.44 लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग 4.43 लाख पुरुष, 5 लाख महिला और 139 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। सीमित सीटों के बावजूद यहां राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। उपचुनाव भी साथ-साथ मुख्य चुनावों के साथ ही कर्नाटक, नगालैंड और त्रिपुरा की कुछ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हो रहे हैं। कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण, नगालैंड की 28-कोरिडांग (एसटी) तथा त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर मतदान जारी है। 4 मई को आएंगे नतीजे इन सभी क्षेत्रों में डाले गए वोटों की गिनती 4 मई 2026 को की जाएगी और उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित होंगे। फिलहाल सभी की निगाहें मतदान प्रतिशत पर टिकी हैं, जो आगामी सियासी समीकरण तय करने में निर्णायक साबित होगा। असम, केरल और पुडुचेरी में जारी मतदान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें कितनी मजबूत हैं। मतदाताओं का उत्साह और भागीदारी आने वाले राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगी।

  • सादगी की मिसाल: ममता की संपत्ति 15 लाख के आसपास

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। ममता बनर्जी एक बार फिर अपनी सादगी को लेकर चर्चा में हैं। लगातार तीन कार्यकाल से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने 2026 विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल अपने हलफनामे में कुल संपत्ति महज 15.37 लाख रुपये घोषित की है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, ममता बनर्जी के पास न तो खुद का घर है, न गाड़ी और न ही किसी प्रकार की कृषि भूमि। उनकी घोषित संपत्ति पूरी तरह चल संपत्ति के रूप में है, जो उनके सादगीपूर्ण जीवनशैली को दर्शाती है। संपत्ति में आई कमी हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2021 के चुनाव में उनकी कुल संपत्ति 16.72 लाख रुपये थी, जो अब घटकर 15,37,509 रुपये रह गई है। यानी पिछले पांच वर्षों में उनकी संपत्ति में लगभग 1.3 लाख रुपये की कमी दर्ज की गई है। बैंक जमा और नकद राशि ममता बनर्जी की कुल संपत्ति में सबसे बड़ा हिस्सा बैंक जमा का है। उनके खातों में 12.7 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा है। वहीं, उनके पास नकद राशि 75,700 रुपये है, जो 2021 में घोषित 69,255 रुपये से थोड़ी अधिक है। इसके अलावा, चुनाव खर्च के लिए खोले गए खाते में 40,000 रुपये मौजूद हैं। सीमित आभूषण हलफनामे के अनुसार, ममता बनर्जी के पास मात्र 9 ग्राम 750 मिलीग्राम सोना है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत करीब 1.45 लाख रुपये आंकी गई है। उन्होंने किसी अन्य प्रकार की बहुमूल्य संपत्ति या निवेश का उल्लेख नहीं किया है। न देनदारी, न आपराधिक मामला महत्वपूर्ण बात यह है कि ममता बनर्जी ने अपने हलफनामे में किसी भी प्रकार की देनदारी या आपराधिक मामले से साफ इनकार किया है। यह स्थिति वर्ष 2021 के हलफनामे के समान ही बनी हुई है। भवानीपुर से चुनावी मैदान में इस बार ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने हाल ही में नामांकन दाखिल करते हुए अपनी शैक्षणिक योग्यता, आय और संपत्ति से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया गया है। सादगी ही पहचान भारतीय राजनीति में जहां कई नेताओं की संपत्ति करोड़ों में होती है, वहीं ममता बनर्जी का यह हलफनामा उन्हें एक अलग पहचान देता है। सादगी और सामान्य जीवनशैली के लिए जानी जाने वालीं ‘दीदी’ की यह छवि उनके समर्थकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को और मजबूत करती है।

  • भव्य आयोजन में झलकी आस्था और सेवा भावना

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। जेसी नगर में श्री विद्या विनायक युवक संघ द्वारा नगर देवताओं अण्णम्मा देवी, बंडे महाकाली देवी एवं सर्किल मारामादेवी का भव्य उत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल के बीच भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और भक्तिमय वातावरण में देवी मां की आराधना की गई। उत्सव के दौरान विशेष अतिथि के रूप में पधारे महेंद्र मुणोत ने विधिवत पूजा-अर्चना कर देवी मां के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए जरूरतमंद बच्चों के बीच शिक्षण सामग्री वितरित की, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उनके इस सराहनीय प्रयास की उपस्थित जनों ने खूब प्रशंसा की। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों द्वारा महेंद्र मुणोत का सम्मान शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। आयोजन समिति ने बताया कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों से समाज में एकता, सहयोग और सेवा की भावना को बढ़ावा मिलता है। पूरे आयोजन के दौरान भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला। भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

  • हरियाणा में न्यूनतम मजदूरी ₹15,220, कैबिनेट ने दी मंजूरी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य के श्रमिकों को बड़ा तोहफा देते हुए न्यूनतम मजदूरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया, जिसके तहत अब अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी ₹11,257 से बढ़ाकर ₹15,220 प्रतिमाह कर दी गई है। कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि बैठक में कुल सात एजेंडे रखे गए थे, जिनमें से छह को मंजूरी प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि मजदूरी बढ़ाने का निर्णय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। अग्निवीरों को बढ़ा आरक्षण बैठक में अग्निवीर नीति 2024 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। अब अग्निवीरों को फॉरेस्ट गार्ड, वार्डर और माइनिंग गार्ड जैसे पदों पर मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं को सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में बेहतर अवसर मिलेंगे। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण, विशेष वर्गों को प्राथमिकता सरकार ने राशन डिपो आवंटन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय भी दोहराया है। इसमें एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और विधवा महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राशन डिपो नियमों में बदलाव मंत्रिमंडल ने टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (टीपीडीएस) संशोधन आदेश, 2026 को भी मंजूरी दी। नए प्रावधानों के अनुसार अब राशन डिपो का लाइसेंस 300 की बजाय 500 राशन कार्ड पर दिया जाएगा। साथ ही डिपो धारकों की अधिकतम आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर, विशेष परिस्थितियों में 65 वर्ष तक की जा सकेगी। यदि डिपो धारक का निधन समय से पहले हो जाता है, तो उसके कानूनी वारिस को लाइसेंस हस्तांतरित किया जा सकेगा। रिटायरमेंट हाउसिंग और एफएआर में वृद्धि सरकार ने रिटायरमेंट हाउसिंग पॉलिसी में संशोधन करते हुए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को 2.25 से बढ़ाकर 3.0 कर दिया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। गांव की जमीन नियमों में संशोधन हरियाणा विलेज कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) नियम, 1964 में नया नियम 5A जोड़ने को मंजूरी दी गई है। इसके तहत उन परियोजनाओं को राहत मिलेगी, जहां पर्याप्त रास्ता उपलब्ध नहीं है। निर्धारित शर्तों के अनुसार भूमि हस्तांतरण कर रास्ते की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि राज्य सरकार जनकल्याण और विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार नीतिगत फैसले ले रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन निर्णयों से प्रदेश के श्रमिकों, महिलाओं और युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा तथा राज्य की आर्थिक और सामाजिक संरचना को मजबूती प्रदान होगी।

  • गिग वर्कर्स जांच पर महाराष्ट्र में सियासत तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई। महाराष्ट्र में फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर से जुड़े गिग वर्कर्स के वेरिफिकेशन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और कथित भेदभाव जैसे मुद्दों के बीच राज्य सरकार सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष इसे आम कामगारों को परेशान करने की साजिश बता रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार जल्द ही स्विगी, ज़ोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी कर्मियों के लिए अनिवार्य पहचान और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन लागू कर सकती है। इस प्रस्तावित व्यवस्था में दस्तावेजों की गहन जांच और पहचान सत्यापन को अनिवार्य बनाया जाएगा। इस मुद्दे को सबसे पहले प्रमुखता से उठाने वाले बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने दावा किया है कि गिग वर्क सेक्टर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए काम कर रहे हैं, जिनमें कुछ आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि डिलीवरी कर्मचारियों का पासपोर्ट स्तर का सख्त सत्यापन किया जाए। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने गृह और श्रम विभाग की बैठक में इस दिशा में सख्त एसओपी लाने के संकेत दिए हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर गिग वर्कर्स के बीच इस प्रस्ताव को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ डिलीवरी कर्मियों और कैब ड्राइवरों का मानना है कि मौजूदा थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन सिस्टम में खामियां हैं, जिससे बाहरी तत्वों की घुसपैठ संभव हो जाती है। ऐसे में सख्त जांच से ईमानदार कामगारों की पहचान सुरक्षित रहेगी। वहीं दूसरी ओर, कई वर्कर्स ने आशंका जताई है कि जांच के नाम पर भेदभाव बढ़ सकता है। उनका कहना है कि वे वैध दस्तावेजों के साथ काम कर रहे हैं और किसी भी समुदाय विशेष को निशाना बनाना उचित नहीं है। राजनीतिक स्तर पर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी, एआईएमआईएम के वारिश पठान और कांग्रेस के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश है। उनका कहना है कि अगर अवैध घुसपैठ हुई है तो यह सरकार की विफलता है, लेकिन आम कामगारों को परेशान करना समाधान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि गिग इकॉनमी में तेजी से बढ़ती भागीदारी के साथ पारदर्शी और संतुलित वेरिफिकेशन प्रणाली की आवश्यकता है, ताकि सुरक्षा और रोजगार—दोनों के बीच संतुलन कायम रह सके। फिलहाल गिग वर्कर्स के वेरिफिकेशन का मुद्दा “सुरक्षा बनाम सियासत” के बीच फंसा नजर आ रहा है। अब सबकी नजर सरकार की आगामी एसओपी पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी या फिर यह विवाद को और गहरा करेगी।

  • नेपाल में गुटखा थूकने पर भारतीय पर्यटकों को सबक

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) काठमांडू। नेपाल की सड़कों पर भारतीय पर्यटकों से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने न केवल नागरिक शिष्टाचार बल्कि स्वच्छता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 24 सेकंड के इस वीडियो में भारतीय पर्यटकों की एक आदत—सार्वजनिक स्थान पर गुटखा थूकना—उन्हें भारी पड़ती नजर आई। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक कार में सवार कुछ भारतीय पर्यटक सड़क पर गुटखा थूक देते हैं। यह दृश्य वहां मौजूद स्थानीय लोगों की नजर से बच नहीं पाता। तभी एक सजग नेपाली नागरिक आगे आता है और पर्यटकों को उनकी गलती का एहसास कराते हुए तुरंत सड़क साफ करने को कहता है। स्थानीय व्यक्ति की सख्ती के आगे पर्यटक झुक जाते हैं। वे पानी की बोतल से खुद ही सड़क पर डाली गई गंदगी को साफ करते हैं और अपनी गलती के लिए माफी भी मांगते हैं। इस दौरान स्थानीय व्यक्ति का एक वाक्य—“यह भारत नहीं, नेपाल है”—वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया पर बहस तेज वीडियो के वायरल होते ही #CivicSense, #GutkhaClean और #NepalViral जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। नेपाली नागरिकों ने इस घटना को नागरिक जिम्मेदारी का उदाहरण बताया, वहीं कई भारतीय यूजर्स ने इसे शर्मनाक बताते हुए आत्मचिंतन की जरूरत पर जोर दिया। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि विदेशों में इस तरह का व्यवहार न केवल व्यक्तिगत छवि बल्कि देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। स्वच्छता अभियान पर उठे सवाल यह घटना भारत में चल रहे स्वच्छता अभियानों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। वर्षों से जागरूकता अभियानों के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर थूकना और गंदगी फैलाना एक आम समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागरिक स्वयं जिम्मेदारी निभाएं, तो स्वच्छता से जुड़ी आधी समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं। विदेश यात्रा में जिम्मेदारी जरूरी नेपाल की इस घटना ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी देश में यात्रा करते समय स्थानीय नियमों और सामाजिक व्यवहार का सम्मान करना अनिवार्य है। पर्यटक केवल अपने देश के प्रतिनिधि ही नहीं होते, बल्कि वे अपने संस्कार और संस्कृति की छवि भी प्रस्तुत करते हैं। भारत के लिए सबक नेपाल में सामने आई यह घटना एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। भारत के कई शहरों में आज भी सार्वजनिक स्थलों पर गुटखा थूकना और गंदगी फैलाना आम दृश्य है। ऐसे में जरूरत है कि नागरिक जागरूकता को केवल अभियानों तक सीमित न रखकर व्यवहार में भी उतारा जाए। यह वायरल वीडियो भले ही एक छोटी घटना हो, लेकिन यह बड़े संदेश के साथ सामने आया है—स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

  • भवानीपुर में ममता का शक्ति प्रदर्शन

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। ममता बनर्जी ने बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को भवानीपुर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनावी बिगुल फूंक दिया। नामांकन से पहले उन्होंने अपने पारंपरिक अंदाज में करीब 800 मीटर लंबा पैदल मार्च निकालकर शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कालीघाट स्थित अपने आवास से पैदल रवाना हुईं। रास्ते भर दोनों ओर खड़े समर्थकों का उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया। उनका यह रोड मार्च अलीपुर सर्वे बिल्डिंग तक पहुंचा, जहां उन्होंने आधिकारिक रूप से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान पूरे इलाके में उत्साह और राजनीतिक जोश का माहौल देखने को मिला। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने भरोसा जताया कि तृणमूल कांग्रेस इस बार केवल भवानीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भवानीपुर सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और प्रतिष्ठापूर्ण माना जा रहा है। यहां ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी से है, जिन्होंने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था। दोनों दिग्गज नेताओं के आमने-सामने होने से यह सीट राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल हो गई है। भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ के रूप में भी जाना जाता है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग निवास करते हैं। यहां बंगाली, मारवाड़ी, गुजराती, पंजाबी, सिख, जैन और मुस्लिम समुदायों की उल्लेखनीय उपस्थिति है, जो इसे सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बनाती है। यही कारण है कि इस सीट का चुनावी परिणाम व्यापक राजनीतिक संदेश देने वाला माना जाता है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी इस सीट से पहले भी तीन बार विधायक रह चुकी हैं, जिससे उनका यहां मजबूत जनाधार माना जाता है। अब एक बार फिर उन्होंने इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। भवानीपुर में बढ़ती चुनावी सरगर्मी के बीच अब सभी की नजरें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी हैं, जो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अहम संकेत देने वाला साबित हो सकता है।

  • वोटिंग से पहले कांग्रेस को झटका, असम में उम्मीदवार ने छोड़ी पार्टी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उदलगुड़ी विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार सुरेन दैमरी ने अचानक कांग्रेस छोड़ने और चुनावी मैदान से हटने का ऐलान कर दिया। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है तथा पार्टी की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, कांग्रेस ने दैमरी के इस दावे से दूरी बनाते हुए कहा है कि उन्होंने अभी तक पार्टी को औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं सौंपा है। पार्टी प्रवक्ता बेदब्रत बोरा के अनुसार, दैमरी ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी है, लेकिन संगठन को कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। इस बीच निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि काफी पहले समाप्त हो चुकी है, इसलिए अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से किसी भी उम्मीदवार का नाम हटाया नहीं जा सकता। इसका मतलब यह है कि सुरेन दैमरी का नाम मतपत्र में बना रहेगा और मतदाता चाहें तो उनके पक्ष में मतदान कर सकेंगे। कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप सुरेन दैमरी ने पार्टी छोड़ने के पीछे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया और किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं दिया। दैमरी के अनुसार, “कांग्रेस में रहने का कोई फायदा नहीं है। पार्टी ने मुझे धोखा दिया है। यह सिर्फ मिया समुदाय के लिए काम करती है, जबकि अनुसूचित जनजातियों के हितों की अनदेखी की जाती है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उम्मीदवार घोषित होने के बाद उन्होंने कई बार पार्टी नेतृत्व से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात तक नहीं सुनी गई। “मैंने बार-बार फोन किया, लेकिन किसी ने उठाया तक नहीं। जिला कांग्रेस कमेटी ने भी कोई मदद नहीं की,” दैमरी ने नाराजगी जताते हुए कहा। चुनावी समीकरण पर असर संभव उदलगुड़ी सीट पर अब मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के रिहोन दैमरी, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के दिपेन बोरो और वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के उनीके बसुमतारी मैदान में हैं। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार के इस कदम से वोटों के बंटवारे और चुनावी परिणामों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। 9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे गौरतलब है कि असम की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। मतदान से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और कांग्रेस के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।

  • तमिलनाडु में बदलाव की हुंकार: विजय का डीएमके-भाजपा पर तीखा प्रहार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) तिरुनेलवेली (तमिलनाडु)। आगामी 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अभिनेता से राजनेता बने ने बुधवार को तिरुनेलवेली के केटीसी नगर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ (डीएमके) और पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस चुनाव को “बदलाव की ऐतिहासिक लड़ाई” करार देते हुए अपनी पार्टी (टीवीके) के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने का आह्वान किया। सभा से पहले विजय थूथुकुडी हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से उन्होंने लगभग 30 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। रास्ते भर समर्थकों की भारी भीड़ ने उनका जोरदार स्वागत किया, जिससे क्षेत्र में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा गया। अपने संबोधन की शुरुआत स्थानीय जनता का अभिवादन करते हुए विजय ने डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि सत्तारूढ़ दल के पास पूरी ताकत होती, तो उनका यह कार्यक्रम आयोजित ही नहीं हो पाता। मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने उन्हें “बेबस” बताया और आरोप लगाया कि सरकार उनके राजनीतिक उभार को रोकने के लिए दबाव और दुष्प्रचार का सहारा ले रही है। विजय ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह भी दावा किया कि डीएमके और भाजपा, भले ही सार्वजनिक रूप से विरोधी नजर आते हों, लेकिन परोक्ष रूप से उनके खिलाफ एकजुट होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब इस “गुप्त गठजोड़” को समझ चुकी है और बदलाव के लिए तैयार है। टीवीके प्रमुख ने यह भी दावा किया कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन कमजोर पड़ रहा है और जनता का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “असली कांग्रेस” उनके साथ खड़ी है, जबकि मौजूदा सरकार उनके कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाकर उनकी पहुंच सीमित करने की कोशिश कर रही है। चुनाव को भावनात्मक और निर्णायक बताते हुए विजय ने कहा, “दूसरों के लिए यह सिर्फ एक चुनाव हो सकता है, लेकिन हमारे लिए यह जनभावनाओं की लड़ाई है।” उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानूनी और राजनीतिक हमलों का जनता पर कोई असर नहीं पड़ा है। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए विजय ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध, नशा तस्करी और अवैध रेत खनन पर नियंत्रण करने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सरकार के नैतिक अधिकार पर भी सवाल उठाए। अपने भाषण के अंत में विजय ने स्पष्ट किया कि यह चुनाव बहुकोणीय नहीं, बल्कि सीधी टक्कर है। उन्होंने कहा, “यह मुकाबला डीएमके और टीवीके के बीच है, और हमें विश्वास है कि जनता बदलाव के लिए हमें मौका देगी।” उन्होंने युवाओं और महिलाओं के लिए केंद्रित नीतियों के साथ जनहितकारी सरकार देने का वादा भी दोहराया। तमिलनाडु की राजनीति में विजय की सक्रियता और आक्रामक चुनावी अभियान ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनता इस “बदलाव की लड़ाई” में किसे अपना समर्थन देती है।

  • अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) हैदराबाद। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम में दर्ज आपराधिक मामले से राहत पाने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खेड़ा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की है। हालांकि, उनकी याचिका अभी अदालत में सूचीबद्ध नहीं हुई है। यह मामला उस वक्त सामने आया जब खेड़ा ने हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टीम ने दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर भी छापेमारी की है और उनकी तलाश जारी है। गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच थाने में 6 अप्रैल 2026 को दर्ज एफआईआर रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 5 अप्रैल 2026 को आयोजित दो प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खेड़ा ने झूठे और मनगढ़ंत दावे प्रस्तुत किए। उन्होंने कथित रूप से ऐसे दस्तावेज और दृश्य सामग्री दिखाई, जिनसे यह संकेत मिलता था कि सरमा के पास मिस्र, एंटीगुआ और बारबुडा सहित कई देशों की नागरिकता या पासपोर्ट हैं, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात का गोल्डन कार्ड भी है। एफआईआर के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। इनमें जालसाजी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल, मानहानि, आपराधिक साजिश और सार्वजनिक शांति भंग करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए दस्तावेज नकली थे, जिन पर फर्जी मुहरें और क्यूआर कोड लगाए गए थे, ताकि वे सरकारी रिकॉर्ड जैसे प्रतीत हों। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन दावों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया, जिससे न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि ऑनलाइन उत्पीड़न और जनाक्रोश की स्थिति भी बनी। मामले की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि यह घटनाक्रम असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले सामने आया, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। उधर, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच वरिष्ठ स्तर पर की जा रही है और डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय करेगा।

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