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अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंचे पवन खेड़ा

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 5 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

हैदराबाद। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम में दर्ज आपराधिक मामले से राहत पाने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खेड़ा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की है। हालांकि, उनकी याचिका अभी अदालत में सूचीबद्ध नहीं हुई है।

यह मामला उस वक्त सामने आया जब खेड़ा ने हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, टीम ने दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर भी छापेमारी की है और उनकी तलाश जारी है।


गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच थाने में 6 अप्रैल 2026 को दर्ज एफआईआर रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 5 अप्रैल 2026 को आयोजित दो प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खेड़ा ने झूठे और मनगढ़ंत दावे प्रस्तुत किए। उन्होंने कथित रूप से ऐसे दस्तावेज और दृश्य सामग्री दिखाई, जिनसे यह संकेत मिलता था कि सरमा के पास मिस्र, एंटीगुआ और बारबुडा सहित कई देशों की नागरिकता या पासपोर्ट हैं, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात का गोल्डन कार्ड भी है। एफआईआर के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। इनमें जालसाजी, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल, मानहानि, आपराधिक साजिश और सार्वजनिक शांति भंग करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए दस्तावेज नकली थे, जिन पर फर्जी मुहरें और क्यूआर कोड लगाए गए थे, ताकि वे सरकारी रिकॉर्ड जैसे प्रतीत हों।


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन दावों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित किया गया, जिससे न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा, बल्कि ऑनलाइन उत्पीड़न और जनाक्रोश की स्थिति भी बनी। मामले की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि यह घटनाक्रम असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले सामने आया, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। उधर, पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच वरिष्ठ स्तर पर की जा रही है और डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय करेगा।

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