top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

इस साइट पर खोजें

1908किसी भी खाली खोज के साथ परिणाम मिले

  • घोषणापत्र पर सियासी संग्राम, टीएमसी का बीजेपी पर तीखा हमला

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चुनावी घोषणापत्र पर कड़ा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर कोलकाता को “बांग्लादेश” की तरह प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए इसे बंगाल की अस्मिता पर आघात बताया। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी भाजपा के संकल्प पत्र में घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’, पारदर्शी भर्ती प्रणाली, आर्थिक विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पहले भाजपा अपने घोषणापत्र को ‘सोनार बांग्ला संकल्प पत्र’ कहती थी, लेकिन इस बार यह शब्द हटाना दर्शाता है कि भाजपा अपनी ही बातों से पीछे हट रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की नीतियों के कारण मतदाता सूची संशोधन (एसएसआई) को लेकर राज्य में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गृह मंत्री इस पर जनता से माफी मांगेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के वादों की तुलना चिटफंड और पोंजी योजनाओं से करते हुए कहा कि ये घोषणाएं केवल मतदाताओं को लुभाने के लिए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो बंगाल का प्रशासन दिल्ली से नियंत्रित होगा, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “इसका मतलब है कि भाजपा की नजर में कोलकाता बांग्लादेश जैसा है। अगर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री ऐसा सोचते हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है।” इधर, महिला सशक्तिकरण के तहत भाजपा द्वारा महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने के वादे पर फौजिया खान सांसद ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान इस तरह के वादे यह दर्शाते हैं कि सरकारें महिलाओं को आर्थिक रूप से कमजोर मानकर उन्हें आकर्षित करने की कोशिश करती हैं। पश्चिम बंगाल में आगामी चरणों में होने वाले मतदान से पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि जनता इन दावों और वादों के बीच किस पर भरोसा जताती है।

  • टीएमसी के गढ़ में ओवैसी की सीधी चुनौती

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से हटकर अपनी रणनीति तैयार की है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने न तो भाजपा, न कांग्रेस और न ही वाम दलों को सीधे निशाने पर लिया है, बल्कि उसने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के मजबूत गढ़ों में ही चुनावी ताल ठोकी है। हाल ही में एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की जन उन्नयन पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ते हुए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी राज्य की 12 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है, जिनमें अधिकांश सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में स्थित हैं। टीएमसी पर सीधा फोकस क्यों? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एआईएमआईएम का यह कदम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में इन क्षेत्रों में टीएमसी ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी। कई सीटों पर जीत का अंतर 50 हजार से लेकर एक लाख वोट तक रहा। ऐसे में ओवैसी की पार्टी ने सीधे उसी मजबूत किले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। एआईएमआईएम पर अक्सर भाजपा की ‘बी-टीम’ होने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे आरोपों को खारिज करने के लिए पार्टी अब उन क्षेत्रों में उतर रही है जहां मुकाबला सीधे टीएमसी से है। एआईएमआईएम के नेताओं का कहना है कि राज्य में वास्तविक विपक्ष टीएमसी ही है, जबकि कांग्रेस और वाम दलों का जनाधार लगातार कमजोर हुआ है। सीमांचल कनेक्शन और सामाजिक समीकरण एआईएमआईएम की नजर उन इलाकों पर है, जो बिहार के सीमांचल क्षेत्र से सटे हुए हैं। सीमांचल में पार्टी का प्रभाव पहले से मौजूद है, और इसी आधार को बंगाल में विस्तार देने की कोशिश की जा रही है। पार्टी का दावा है कि वह मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य पिछड़े वर्गों और गरीब तबकों की आवाज बनना चाहती है। एआईएमआईएम का मानना है कि इन क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को लेकर असंतोष है, जिसे वह राजनीतिक समर्थन में बदल सकती है। गठबंधन टूटने का असर हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन टूटने को लेकर भी चर्चा तेज है। एक विवादित वीडियो सामने आने के बाद एआईएमआईएम ने दूरी बना ली। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इससे पार्टी को संगठनात्मक नुकसान हो सकता है, लेकिन ओवैसी इसे अपनी साफ-सुथरी छवि के तौर पर पेश कर रहे हैं। खुद को मजबूत क्यों मानती है एआईएमआईएम? बिहार के सीमांचल क्षेत्र में पिछले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बाद एआईएमआईएम का आत्मविश्वास बढ़ा है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 24 फीसदी से अधिक है, जो पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण वोट बैंक माना जाता है। ओवैसी खुद को अल्पसंख्यकों के मजबूत नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने उन्हीं सीटों पर दांव लगाया है, जहां उनकी सामाजिक पकड़ बनने की संभावना अधिक है। चुनावी असर और संभावनाएं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एआईएमआईएम का यह कदम सीधे जीत दिलाने से ज्यादा वोटों के ध्रुवीकरण पर असर डाल सकता है। यदि पार्टी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में प्रभावी प्रदर्शन करती है, तो इसका सीधा असर टीएमसी के वोट बैंक पर पड़ सकता है। कब होंगे चुनाव? इन 12 सीटों पर मतदान दो चरणों में होगा। 9 सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को पहले चरण में और शेष 3 सीटों पर 29 अप्रैल 2026 को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल की इस चुनावी जंग में ओवैसी की यह रणनीति कितना असर दिखाती है, यह तो नतीजों के बाद ही साफ होगा, लेकिन इतना तय है कि उन्होंने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

  • ओवैसी-कबीर गठबंधन पर सियासत तेज, सिद्दीकी ने जनता को किया आगाह

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मुंबई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी क्रम में एनसीपी (एसपी) के नेता नसीम सिद्दीकी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और जन उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाल की जनता को उनसे सतर्क रहने की अपील की है। मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि ओवैसी और कबीर का गठबंधन टूटना इस बात का संकेत है कि उनकी राजनीति में स्थिरता और विश्वसनीयता का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर काम कर रहे हैं। सिद्दीकी ने यहां तक कहा कि कबीर के बयानों और गतिविधियों से उनकी भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। सिद्दीकी ने बाबरी मस्जिद के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील विषयों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने वाले नेता समाज को गुमराह करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मांगें न केवल अव्यावहारिक हैं, बल्कि इससे सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ सकता है। उन्होंने ओवैसी पर भी निशाना साधते हुए उन्हें भाजपा की “टीम” करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को लाभ पहुंचाती है। वहीं, कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्दीकी ने कहा कि किसी भी मतदाता का अपमान लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वोट देना हर नागरिक का अधिकार है और इसे किसी भी आधार पर कमतर नहीं आंका जा सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी कोशिश रहेगी कि लोग सांप्रदायिक नहीं, बल्कि सेक्युलर और विकास आधारित सोच के साथ मतदान करें। मालेगांव धमाका मामले का जिक्र करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि यह एक गंभीर और दुखद घटना थी, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि यदि दिवंगत एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत न हुई होती, तो मामले की सच्चाई पहले ही सामने आ सकती थी। उन्होंने हाल ही में कर्नल श्रीकांत पुरोहित को बरी होने के बाद पदोन्नति मिलने पर भी सवाल उठाए और सरकार से पारदर्शिता की मांग की। सिद्दीकी ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि देश के नागरिकों का विश्वास धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान सरकार बदलती है, तो पिछले दो दशकों में हुए सभी बड़े विस्फोटों और उनकी जांचों की पुनः समीक्षा कराई जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके। पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में इस तरह के तीखे बयान यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भी तेज होने वाले हैं।

  • किरण भायल ने 12वीं में 89.5 प्रतिशत अंक लाकर बढ़ाया सीरवी समाज का मान

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। सीरवी समाज के लिए गर्व का क्षण तब आया जब समाज की होनहार प्रतिभा किरण भायल ने कर्नाटक बोर्ड की कक्षा 12वीं (वाणिज्य संकाय) परीक्षा में 89.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज का नाम रोशन किया है। किरण भायल, पिता बाबूलाल एवं माता श्रीमती सुशीला देवी की सुपुत्री हैं। उनका गौत्र भायल है तथा मूल रूप से वे राजस्थान के मरुधर क्षेत्र स्थित निम्बेड़ा कला गांव से संबंध रखती हैं। वर्तमान में उनका परिवार बेंगलूरु के कम्मानाहल्ली क्षेत्र में निवासरत है। किरण ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन, गुरुजनों के आशीर्वाद और अपनी निरंतर मेहनत एवं अनुशासन को दिया। उन्होंने बताया कि नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उनकी सफलता का मुख्य आधार रहा। समाज के प्रबुद्धजनों ने किरण की इस उपलब्धि को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में इस प्रकार का उत्कृष्ट प्रदर्शन अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेगा। सीरवी समाज के विभिन्न संगठनों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने किरण भायल को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। सीरवी समाज संपूर्ण भारत की ओर से किरण भायल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की गई है। समाजजनों ने माता रानी से प्रार्थना की कि वे किरण को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करें और वे आगे भी इसी प्रकार नई ऊंचाइयों को प्राप्त करती रहें।

  • कलबी समाज की बेटी रेखा चौधरी बनी कस्टम ऑफिसर, समाज में खुशी की लहर

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। चौधरी कलबी समाज के लिए गर्व का क्षण तब बना जब आहोर क्षेत्र के पिलास वागोतरा निवासी जगाराम की सुपुत्री रेखा चौधरी ने एसएससी सीजीएल परीक्षा उत्तीर्ण कर कस्टम ऑफिसर के पद पर चयन प्राप्त किया। इस उपलब्धि के साथ रेखा चौधरी समाज की पहली छात्रा बन गई हैं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर नया इतिहास रचा है। रेखा चौधरी शुरू से ही मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रा रही हैं। उनकी कड़ी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनकी इस सफलता से न केवल परिवार बल्कि पूरा समाज गौरवान्वित महसूस कर रहा है। चेन्नई सहित विभिन्न स्थानों पर निवास कर रहे समाजबंधुओं में खुशी की लहर है और सभी ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। समाज के गणमान्य लोगों ने बताया कि रेखा चौधरी की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। वे भविष्य में समाज के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देकर उन्हें भी उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर प्रेरित करेंगी। चेन्नई में चौधरी कलबी समाज द्वारा प्रतिभावान विद्यार्थियों सम्मान समारोह आयोजित हर वर्ष करते हैं जिसमें रेखा चौधरी को विशेष प्रतिभाशाली छात्रा के रूप में सम्मानित किया गया था आज समाज के लोगों ने इसे एक प्रेरणादायक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं के प्रति रुचि बढ़ी है। समाज के प्रबुद्धजनों ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया कि आज के समय में केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। यूपीएससी, एसएससी सीजीएल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष रूप से लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलने के साथ-साथ महिलाओं के लिए भी बेहतर अवसर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी 10वीं या 12वीं के बाद उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने करियर की सही दिशा नहीं चुन पाते और पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रह जाते हैं। ऐसे में समाज की संस्थाओं, शिक्षाविदों और जागरूक नागरिकों को आगे आकर विद्यार्थियों व अभिभावकों को समय पर सही मार्गदर्शन देना चाहिए। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम के तुरंत बाद मार्गदर्शन शिविर और संस्कार कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को सही दिशा मिल सके। केवल प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रतिभा का वास्तविक सम्मान तभी होगा जब उन्हें आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। रेखा चौधरी की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास हो तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। समाज को उनसे नई प्रेरणा मिली है और उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी बेटियां इसी तरह सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएंगी। उपरोक्त जानकारी दिनेश जी कराड़ ने दी।

  • बंगाल चुनाव: भाजपा का ‘भरोसा पत्र’ जारी

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी का ‘भरोसा पत्र’ जारी किया। इस दस्तावेज़ को पार्टी ने राज्य के सर्वांगीण विकास का रोडमैप बताते हुए महिलाओं, युवाओं, किसानों और कर्मचारियों सहित सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया है। भरोसा पत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह केवल एक घोषणापत्र नहीं, बल्कि ‘सोनार बंगला’ के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का यह दस्तावेज़ राज्य को वर्तमान “निराशा और अव्यवस्था” से बाहर निकालकर विकास और सुशासन की राह पर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून का राज स्थापित करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता होगी। भाजपा के इस भरोसा पत्र में महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। पार्टी ने प्रत्येक महिला को 3,000 रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया है, वहीं बेरोजगार युवाओं को भी 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा दिलाया गया है। कृषि क्षेत्र को लेकर भी भाजपा ने कई अहम घोषणाएं की हैं। चावल, आलू और आम की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष सहायता देने की बात कही गई है। वहीं मछुआरों के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पंजीकरण सुनिश्चित कर राज्य को एक बड़े मछली-निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन और महंगाई भत्ता देने का वादा भी भरोसा पत्र में शामिल है। साथ ही, आयुष्मान भारत योजना सहित केंद्र सरकार की सभी प्रमुख योजनाओं को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने की बात कही गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में मुफ्त एचपीवी टीकाकरण, स्तन कैंसर जांच और उत्तरी बंगाल में एम्स, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया है। सांस्कृतिक और सामाजिक मोर्चे पर भाजपा ने ‘वंदे मातरम संग्रहालय’ की स्थापना और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कानून लाने की घोषणा की है। इसके अलावा, कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का भी वादा किया गया है। गृह मंत्री ने सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें मतदाता सूची से हटाया जाएगा और देश से बाहर भेजा जाएगा। साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का भी वादा दोहराया। इस दौरान अमित शाह ने राज्य की सत्ताधारी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ‘सिंडिकेट राज, गुंडाराज और घुसपैठ’ जैसी समस्याएं बढ़ी हैं, जिससे आम जनता असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने पहले वामपंथी सरकार को हटाकर बदलाव की उम्मीद में ममता बनर्जी को मौका दिया था, लेकिन अब वही जनता परिवर्तन की ओर देख रही है। भाजपा ने भरोसा जताया कि उसका ‘भरोसा पत्र’ राज्य में एक नई राजनीतिक दिशा और विकास की संभावनाओं को मजबूत करेगा।

  • बंगाल में बीजेपी जीती तो ‘बंगाल का बेटा’ बनेगा मुख्यमंत्री: अमित शाह

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में ताबड़तोड़ चुनावी प्रचार करते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि बीजेपी को बहुमत मिलता है, तो राज्य का मुख्यमंत्री कोई बाहरी नहीं बल्कि “बंगाल का बेटा” ही होगा। “वंशवाद नहीं, बंगाल का नेतृत्व बंगाली के हाथ” अमित शाह ने मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि बीजेपी वंशवादी राजनीति में विश्वास नहीं रखती। उनका इशारा सीधे तौर पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर था। शाह ने कहा, “हम ऐसी पार्टी नहीं हैं जहां एक परिवार के बाद दूसरा सदस्य सत्ता संभाले। बंगाल की जनता को भरोसा दिलाता हूं कि हमारा मुख्यमंत्री यहीं की मिट्टी से जुड़ा व्यक्ति होगा।” छह महीने में लागू होगा यूसीसी गृह मंत्री ने चुनावी मंच से बड़ा वादा करते हुए कहा कि यदि बीजेपी सत्ता में आती है, तो छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। उन्होंने इसे संविधान सभा की सिफारिश बताते हुए कहा कि “तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इसे दशकों तक टाला गया।” शाह ने कहा, “बंगाल में हर नागरिक के लिए एक समान कानून लागू होगा। कानून के सामने सभी बराबर होंगे, यही सच्चा न्याय है।” टीएमसी पर तुष्टीकरण का आरोप अमित शाह ने टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में तुष्टीकरण की राजनीति चरम पर है। उन्होंने कहा कि बीजेपी किसी के खान-पान में दखल नहीं देगी, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करेगी। हुमायूं कबीर विवाद पर सफाई टीएमसी के निलंबित नेता हुमायूं कबीर से जुड़े कथित वीडियो विवाद पर भी शाह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “हुमायूं कबीर और बीजेपी दो अलग-अलग ध्रुव हैं। हम ऐसी किसी भी राजनीति से दूरी रखते हैं और जरूरत पड़ी तो विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।” चुनावी समीकरणों में नई गर्मी अमित शाह के इस बयान से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। एक ओर बीजेपी “स्थानीय चेहरे” के जरिए जनता को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर टीएमसी इसे चुनावी रणनीति करार दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर यह स्पष्टता बीजेपी के लिए लाभकारी हो सकती है, खासकर तब जब राज्य की राजनीति लंबे समय से क्षेत्रीय बनाम बाहरी नेतृत्व के मुद्दे पर केंद्रित रही है।

  • मदुरै जैन समाज से मंत्री पी.टी.आर. ने मांगा समर्थन, भव्य सम्मान

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मदुरै (तमिलनाडु)। विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में तमिलनाडु सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल सेवा मंत्री पी. टी. आर. पलानीवेल त्याग राजन ने मदुरै स्थित जैन समाज के प्रमुख संस्थान श्री नूतन धर्मशाला भवन में पहुंचकर समाज के लोगों से मुलाकात की और आगामी चुनाव में पार्टी के पक्ष में मतदान करने की अपील की। मंत्री पी.टी.आर. का यह दौरा जनसंपर्क अभियान का हिस्सा था, जहां श्री साँचा सुमतिनाथ राजेंद्रसूरी जैन श्वेतांबर ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं समाजजनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने मंत्री को समर्थन देने का आश्वासन भी दिया। कार्यक्रम के दौरान ट्रस्टी मीठालाल संखलेचा ने मंत्री के समक्ष प्रवासी उत्तर भारतीयों की प्रमुख समस्याओं को रखा। उन्होंने बताया कि मदुरै एवं आसपास लगभग एक लाख उत्तर भारतीय निवास करते हैं, जिन्हें अपने गृह राज्यों से जोड़ने के लिए सीधी रेल सेवा की अत्यंत आवश्यकता है। विशेष रूप से मदुरै से जोधपुर के बीच सीधी रेल सेवा शुरू करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। इसके साथ ही जीएसटी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। इस अवसर पर ट्रस्टी मीठालाल संखलेचा, शिवराज भंडारी, भवरलाल शाह, कांतिलाल बंदामुथा, रतनचंद संखलेचा, विजयराज गुलेच्छा, मांगीलाल जैन, दिनेश जैन, कांतिलाल सदन, सुरेश वाणीगोटा, पदमराज भंडारी, ललित जैन, गणपत जैन, दिनेश सालेचा, गौतम जैन, प्रवीण जैन, राजू जैन, मुकेश जैन, विक्रम जैन सहित राजस्थान समाज, उत्तर भारतीय समाज एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट की ओर से मंत्री पी.टी.आर. का पारंपरिक तरीके से तिलक, माला, शॉल एवं साफा पहनाकर भव्य सम्मान किया गया। इस पूरे आयोजन की जानकारी मदुरै प्रवासी प्रवक्ता दिनेश सालेचा ने दी।

  • 95.8 प्रतिशत अंक लाकर देवेन्द्र पटेल ने बढ़ाया मान

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। शिक्षा के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए देवेन्द्र पटेल ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 95.8 प्रतिशत अंक हासिल कर शानदार सफलता प्राप्त की है। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन से न केवल उनके परिवार, बल्कि समाज और क्षेत्र का नाम भी गौरवान्वित हुआ है। देवेन्द्र की इस उपलब्धि के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण स्पष्ट रूप से झलकता है। कठिन परिश्रम और लगन के दम पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि मन में दृढ़ निश्चय हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। देवेन्द्र पटेल, पिता भरत कुमार पटेल एवं माता श्रीमती भंवरी देवी के सुपुत्र हैं। उनका गौत्र तरक है तथा मूल रूप से वे राजस्थान के मरुधर क्षेत्र स्थित धुन्धाड़ा गांव से संबंध रखते हैं। वर्तमान में उनका परिवार बेंगलूरु के सुदामा नगर क्षेत्र में निवासरत है। परिवारजनों ने बताया कि देवेन्द्र ने परीक्षा की तैयारी के दौरान नियमित अध्ययन के साथ समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के बल पर यह मुकाम हासिल किया। उनके इस परिणाम ने अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का कार्य किया है। देवेन्द्र की इस उपलब्धि पर समाज के गणमान्य व्यक्तियों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने आशा जताई कि यह सफलता उनके जीवन में नए अवसरों के द्वार खोलेगी और वे आगे भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश और समाज का नाम रोशन करेंगे। देवेन्द्र पटेल की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है, जो यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, परिश्रम और आत्मविश्वास से हर सपना साकार किया जा सकता है।

  • मीनाक्षी पटेल ने 12वीं में 93.3 प्रतिशत अंक हासिल कर बढ़ाया गौरव

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मीनाक्षी पटेल ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 93.3 प्रतिशत अंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि समाज का भी नाम रोशन किया है। इस शानदार उपलब्धि पर उन्हें हर ओर से बधाइयों का तांता लग रहा है। मीनाक्षी की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धैर्य और लगन के साथ पढ़ाई जारी रखी, जिसका परिणाम आज इस उत्कृष्ट उपलब्धि के रूप में सामने आया है। 12वीं बोर्ड परीक्षा में डिस्टिंक्शन हासिल करना उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है। मीनाक्षी पटेल, पिता अशोक कुमार पटेल एवं माता श्रीमती केलम देवी की सुपुत्री हैं। उनका गौत्र तरक है तथा मूल रूप से वे राजस्थान के मरुधर क्षेत्र स्थित धुन्धाड़ा गांव से संबंध रखती हैं। वर्तमान में उनका परिवार बेंगलूरु के सुदामा नगर क्षेत्र में निवासरत है। परिवारजनों और शुभचिंतकों ने मीनाक्षी की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। उनकी इस उपलब्धि से समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता और उत्साह को नई दिशा मिलेगी। शिक्षकों ने भी मीनाक्षी की प्रतिभा और समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उनका मानना है कि यदि इसी तरह परिश्रम और एकाग्रता बनाए रखी गई, तो मीनाक्षी भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगी। मीनाक्षी पटेल की यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह समाज के लिए गर्व का विषय भी है। सभी ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वे अपने सपनों को साकार कर नई ऊंचाइयों को छुएंगी।

  • रिकॉर्ड मतदान से चुनावी सरगर्मी तेज

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) असम, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों में इस बार मतदाताओं का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। गुरुवार को संपन्न हुए मतदान में तीनों राज्यों ने पिछले चुनावों के रिकॉर्ड तोड़ने की ओर मजबूत संकेत दिए हैं। अब सभी की निगाहें 4 मई 2026 को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, असम में लगभग 85 प्रतिशत और पुडुचेरी में करीब 89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इन राज्यों के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक माना जा रहा है। वहीं केरल में भी 77 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, जो वहां के पारंपरिक उच्च मतदान रुझान को और मजबूती देता है। अंतिम आंकड़ों में इन प्रतिशतों में 2 से 3 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान एक प्रमुख कारण रहा है। इस अभियान के तहत मृत, स्थानांतरित एवं दोहरे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे मतदाता सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनी। इसके साथ ही चुनाव आयोग द्वारा मतदान प्रक्रिया को सुगम और आकर्षक बनाने के लिए किए गए नवाचारों ने भी मतदाताओं को प्रेरित किया। मतदान केंद्रों पर मोबाइल जमा करने की व्यवस्था, बैठने के बेहतर इंतजाम, युवा मतदाताओं के लिए फोटो प्वाइंट, तथा मतदान के बाद गुलदस्ते देकर सम्मानित करने जैसी पहलें लोगों को मतदान के प्रति आकर्षित करने में कारगर साबित हुईं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में असम में 82 प्रतिशत, केरल में 76 प्रतिशत और पुडुचेरी में 83 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार के आंकड़े न केवल इन रिकॉर्ड्स को पार करने की ओर अग्रसर हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। चुनाव आयोग का मानना है कि इन राज्यों में पहले से ही अपेक्षाकृत अधिक मतदान होता रहा है, लेकिन इस बार की जागरूकता और व्यवस्थागत सुधारों ने इसे नए आयाम दिए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह रिकॉर्ड मतदान किस राजनीतिक दल के पक्ष में जनादेश के रूप में सामने आता है। 4 मई 2026 को घोषित होने वाले नतीजे न केवल इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे, बल्कि देश की समग्र राजनीतिक परिस्थितियों पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

  • बंगाल में बदलाव का दावा, शाह आज जारी करेंगे संकल्प पत्र

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) कोलकाता। अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने शुक्रवार को राज्य में भारतीय जनता पार्टी के ‘संकल्प पत्र’ के विमोचन का ऐलान करते हुए दावा किया कि राज्य की जनता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के शासन से त्रस्त होकर अब परिवर्तन चाहती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में शाह ने कहा कि “टीएमसी के भय और अराजकता के माहौल से बंगाल को मुक्त करने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी किया जाएगा, जो राज्य के समग्र विकास का रोडमैप पेश करेगा। अपने दौरे के दौरान शाह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, वहीं खड़गपुर में रोड शो के जरिए आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। उन्होंने बंगाल की जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के बीच रहने की इच्छा भी व्यक्त की। भाजपा के प्रस्तावित ‘संकल्प पत्र’ में समाज के हर वर्ग को साधने की रणनीति दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, इसमें महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष पैकेज के साथ-साथ औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए उद्योग स्थापित करने की योजना भी शामिल हो सकती है। कल्याणकारी योजनाओं के तहत भाजपा ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के लाभार्थियों को प्रति माह 3,000 रुपये तक की सहायता देने का वादा कर सकती है। वहीं ‘युवा साथी’ योजना के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को भी मासिक आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त, राज्य कर्मचारियों के लिए सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर महंगाई भत्ते के लंबित बकाए के भुगतान का आश्वासन भी दिया जा सकता है। गौरतलब है कि इस ‘संकल्प पत्र’ की तैयारी के लिए भाजपा ने व्यापक स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया। फरवरी में शुरू हुए ‘विकसित पश्चिम बंगाल संकल्प पत्र परामर्श संग्रह अभियान’ के तहत पार्टी ने उद्योगपतियों, शिक्षाविदों, व्यापारियों, किसानों, युवाओं और गृहिणियों सहित विभिन्न वर्गों से सुझाव एकत्र किए। भाजपा का दावा है कि उसके कार्यकर्ता बूथ स्तर तक पहुंचे और घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं व अपेक्षाएं जानीं। सुझाव जुटाने के लिए फोन, ईमेल, क्यूआर कोड और ‘आकांक्षा संग्रह बॉक्स’ जैसे माध्यमों का उपयोग किया गया। पार्टी इसे केवल राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता के साथ एक “सामाजिक अनुबंध” के रूप में प्रस्तुत कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा का यह संकल्प पत्र राज्य की सियासत में नई दिशा तय कर सकता है, जहां विकास, कल्याणकारी योजनाएं और जनभागीदारी प्रमुख मुद्दे बनकर उभर रहे हैं।

bottom of page