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घोषणापत्र पर सियासी संग्राम, टीएमसी का बीजेपी पर तीखा हमला

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 2 days ago
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चुनावी घोषणापत्र पर कड़ा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर कोलकाता को “बांग्लादेश” की तरह प्रस्तुत करने का आरोप लगाते हुए इसे बंगाल की अस्मिता पर आघात बताया।

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी भाजपा के संकल्प पत्र में घुसपैठ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’, पारदर्शी भर्ती प्रणाली, आर्थिक विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पहले भाजपा अपने घोषणापत्र को ‘सोनार बांग्ला संकल्प पत्र’ कहती थी, लेकिन इस बार यह शब्द हटाना दर्शाता है कि भाजपा अपनी ही बातों से पीछे हट रही है।


प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की नीतियों के कारण मतदाता सूची संशोधन (एसएसआई) को लेकर राज्य में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गृह मंत्री इस पर जनता से माफी मांगेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के वादों की तुलना चिटफंड और पोंजी योजनाओं से करते हुए कहा कि ये घोषणाएं केवल मतदाताओं को लुभाने के लिए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो बंगाल का प्रशासन दिल्ली से नियंत्रित होगा, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “इसका मतलब है कि भाजपा की नजर में कोलकाता बांग्लादेश जैसा है। अगर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री ऐसा सोचते हैं, तो यह बेहद चिंताजनक है।”


इधर, महिला सशक्तिकरण के तहत भाजपा द्वारा महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये देने के वादे पर फौजिया खान सांसद ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान इस तरह के वादे यह दर्शाते हैं कि सरकारें महिलाओं को आर्थिक रूप से कमजोर मानकर उन्हें आकर्षित करने की कोशिश करती हैं। पश्चिम बंगाल में आगामी चरणों में होने वाले मतदान से पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि जनता इन दावों और वादों के बीच किस पर भरोसा जताती है।

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