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रिकॉर्ड मतदान से चुनावी सरगर्मी तेज

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 10 अप्रैल
  • 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

असम, केरल और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों में इस बार मतदाताओं का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। गुरुवार को संपन्न हुए मतदान में तीनों राज्यों ने पिछले चुनावों के रिकॉर्ड तोड़ने की ओर मजबूत संकेत दिए हैं। अब सभी की निगाहें 4 मई 2026 को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।


चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, असम में लगभग 85 प्रतिशत और पुडुचेरी में करीब 89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इन राज्यों के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक माना जा रहा है। वहीं केरल में भी 77 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है, जो वहां के पारंपरिक उच्च मतदान रुझान को और मजबूती देता है। अंतिम आंकड़ों में इन प्रतिशतों में 2 से 3 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान एक प्रमुख कारण रहा है। इस अभियान के तहत मृत, स्थानांतरित एवं दोहरे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे मतदाता सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनी। इसके साथ ही चुनाव आयोग द्वारा मतदान प्रक्रिया को सुगम और आकर्षक बनाने के लिए किए गए नवाचारों ने भी मतदाताओं को प्रेरित किया। मतदान केंद्रों पर मोबाइल जमा करने की व्यवस्था, बैठने के बेहतर इंतजाम, युवा मतदाताओं के लिए फोटो प्वाइंट, तथा मतदान के बाद गुलदस्ते देकर सम्मानित करने जैसी पहलें लोगों को मतदान के प्रति आकर्षित करने में कारगर साबित हुईं।


उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में असम में 82 प्रतिशत, केरल में 76 प्रतिशत और पुडुचेरी में 83 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार के आंकड़े न केवल इन रिकॉर्ड्स को पार करने की ओर अग्रसर हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। चुनाव आयोग का मानना है कि इन राज्यों में पहले से ही अपेक्षाकृत अधिक मतदान होता रहा है, लेकिन इस बार की जागरूकता और व्यवस्थागत सुधारों ने इसे नए आयाम दिए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह रिकॉर्ड मतदान किस राजनीतिक दल के पक्ष में जनादेश के रूप में सामने आता है। 4 मई 2026 को घोषित होने वाले नतीजे न केवल इन राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे, बल्कि देश की समग्र राजनीतिक परिस्थितियों पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।

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