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स्टिंग विवाद से टूटा गठबंधन, बंगाल में मुस्लिम वोट पर सियासी संग्राम तेज

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 10
  • 3 min read

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक कथित स्टिंग वीडियो ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस विवाद के केंद्र में पूर्व तृणमूल नेता हुमायूं कबीर हैं, जिन पर गंभीर आरोप लगने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने उनकी पार्टी एजेयूपी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है, खासकर मुस्लिम वोट बैंक को लेकर।


स्टिंग वीडियो से मचा बवाल

तृणमूल कांग्रेस द्वारा जारी कथित स्टिंग वीडियो में हुमायूं कबीर पर यह आरोप लगाया गया है कि वे भाजपा नेताओं से संपर्क में थे और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) तक उनकी पहुंच थी। वीडियो में वे कथित तौर पर यह भी कहते सुनाई देते हैं कि मुस्लिम वोटों को प्रभावित कर चुनावी समीकरण बदला जा सकता है। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

इस मामले को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार को हराने के लिए एक बड़े स्तर की साजिश रची जा रही है। पार्टी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग भी की है।


एआईएमआईएम ने क्यों तोड़ा गठबंधन

विवाद सामने आते ही एआईएमआईएम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एजेयूपी से दूरी बना ली। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि वह किसी भी ऐसे व्यक्ति या बयान से जुड़ी नहीं रह सकती जो मुस्लिम समाज की एकजुटता और सम्मान पर सवाल उठाता हो।

एआईएमआईएम ने यह भी स्पष्ट किया कि अब वह पश्चिम बंगाल चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी और किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि उसका उद्देश्य वंचित और उपेक्षित समुदायों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज देना है।


कबीर का पलटवार: “वीडियो एआई जनरेटेड”

विवादों में घिरे हुमायूं कबीर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “एआई जनरेटेड फर्जी वीडियो” बताया है। उन्होंने कहा कि 2019 के बाद से उनका किसी भी भाजपा नेता से कोई संपर्क नहीं रहा है। कबीर ने नरेंद्र मोदी, अमित शाह और हिमंता बिस्वा सरमा सहित कई नेताओं के नाम लेते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने तृणमूल नेतृत्व पर फर्जी स्टिंग ऑपरेशन चलाने और उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया तथा मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही।


मुस्लिम वोट बैंक बना चुनावी केंद्र

इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी अहम मानी जाती है और कई सीटों पर उनका निर्णायक प्रभाव रहता है। एआईएमआईएम के अलग चुनाव लड़ने के फैसले से मुस्लिम वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ गई है, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। वहीं तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों की नजर इस वोट बैंक पर टिकी हुई है।


चुनाव कार्यक्रम और बढ़ती सरगर्मी

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। चुनाव से पहले इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और गठबंधन टूटने की घटनाओं ने राज्य की सियासत को और अधिक रोमांचक बना दिया है। हुमायूं कबीर से जुड़ा यह विवाद केवल एक व्यक्ति या पार्टी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बंगाल की चुनावी राजनीति में नए समीकरण और संभावित ध्रुवीकरण की जमीन तैयार कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इसका असर मुस्लिम वोटों और चुनावी परिणामों पर कितना पड़ता है।

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