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चौरडिया परिवार की धर्मसेवा, मुमुक्षु कविताजी के परिवार ने समर्पित किया अनुज्ञा पत्र

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Apr 9
  • 2 min read

भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

बेंगलूरु। जैन समाज में आध्यात्मिक साधना एवं त्याग की प्रेरणादायक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चौरडिया परिवार ने एक गौरवपूर्ण पहल की है। जिनशासन गौरव, आगमज्ञ एवं प्रवचन प्रभाकर परमश्रद्धेय आचार्य भगवन्त 1008 श्री हीराचन्द्रजी म.सा. तथा भावी आचार्यप्रवर श्री महेन्द्रमुनि जी म.सा. के पावन सान्निध्य में व्याख्यात्री महासती श्री भाग्यप्रभा जी म.सा. की सेवा में अध्ययनरत मुमुक्षु बहिन श्रीमती कविताजी चौरडिया ने अपना अनुज्ञा पत्र समर्पित किया।

उल्लेखनीय है कि श्रीमती कविताजी चौरडिया, जोधपुर के सुश्रावक स्वर्गीय श्री कनकमलसा चौरडिया परिवार की पौत्रवधु एवं श्री राजेन्द्रजी चौरडिया की धर्मपत्नी हैं, वर्तमान में बेंगलूरु निवासी हैं। उनके इस आध्यात्मिक संकल्प को परिवारजनों ने पूर्ण समर्थन देते हुए सामूहिक रूप से अनुज्ञा पत्र समर्पित किया, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।


इस अवसर पर श्रीमति भीखीबाई पूनमचंदजी लूनावत जैन स्थानक शांतिनगर संघ की ओर से संपूर्ण चौरडिया परिवार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए उनके इस त्याग, समर्पण और धर्मनिष्ठा की भूरी-भूरी प्रशंसा की गई। वक्ताओं ने कहा कि सांसारिक सुखों का त्याग कर धर्ममार्ग की ओर अग्रसर होना अत्यंत कठिन, किंतु सर्वोच्च साधना का मार्ग है, जिसे अपनाकर मुमुक्षु कविताजी ने समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इधर, लूणावत परिवार (लूनी-बेंगलूरु) के लिए भी यह अत्यंत गर्व का विषय बताया गया है। पारिवारिक संबंधों के दृष्टिकोण से इस उपलब्धि को विशेष महत्व देते हुए परिवारजनों ने कहा कि यह केवल एक परिवार नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए गौरव का क्षण है। समाज के विभिन्न क्षेत्रों—बेंगलूरु, चेन्नई और जोधपुर—से जुड़े श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर चौरडिया परिवार को बधाई देते हुए अनुमोदना व्यक्त की और मुमुक्षु कविताजी के उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामनाएं कीं। उपरोक्त जानकारी श्री मरुधरा जैन संघ के अध्यक्ष एवं प्रवासी राजस्थानी कर्नाटका संघ के महामंत्री डॉ. जवरीलाल लूणावत ने दी।

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