बंगाल चुनाव से पहले पुलिस में बड़ा फेरबदल
- धन्ना राम चौधरी

- 10 अप्रैल
- 2 मिनट पठन

भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य पुलिस महकमे में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आयोग ने 81 पुलिस इंस्पेक्टर और 68 सब-इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से चुनाव ड्यूटी से हटा दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
आयोग की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि हटाए गए अधिकारी अब किसी भी रूप में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कार्यों में शामिल नहीं रहेंगे। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन अधिकारियों से लिखित आश्वासन लिया जाए कि वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई की जद में कई महत्वपूर्ण जिले आए हैं, जिनमें कूचबिहार, अलीपुरद्वार, सिलीगुड़ी, बारासात, बैरकपुर, आसनसोल-दुर्गापुर, पुरुलिया और मालदा सहित अन्य जिले शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में चुनावी दृष्टि से संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में सुप्रतिम सरकार, जो कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त रह चुके हैं, को भी राहत नहीं दी गई है। उन्हें चुनावी पर्यवेक्षक के रूप में तमिलनाडु भेजने का निर्णय बरकरार रखा गया है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस जिम्मेदारी से छूट की मांग की थी, लेकिन आयोग ने इसे अस्वीकार कर दिया।
आयोग की अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि हटाए गए इंस्पेक्टरों को नई जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और उन्हें शुक्रवार शाम पांच बजे तक अपने नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। इस त्वरित कार्रवाई का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की निष्पक्षता पर सवाल न उठे, यह सुनिश्चित करना है।
राज्य में 294 विधानसभा सीटों पर 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में मतदान प्रस्तावित है। चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक नियंत्रण आयोग के हाथों में आ चुका है, जिसके तहत लगातार बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कई जनसभाओं में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण करार दिया है। विशेष रूप से सुप्रतिम सरकार की तैनाती को लेकर भी उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है। चुनाव से पहले इस तरह के बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने राज्य की सियासत को और गरमा दिया है। अब देखना होगा कि आयोग के इन सख्त कदमों का चुनावी माहौल और मतदाताओं के विश्वास पर क्या असर पड़ता है।
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