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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • जंतर-मंतर आतंकी साजिश का खुलासा: पूछताछ में सामने आए कई चौंकाने वाले दावे

    बंगाल STF की जांच में संदिग्ध आतंकी नेटवर्क, महिला सहयोगी की गिरफ्तारी और विदेशी संपर्कों की पड़ताल तेज भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com ) कोलकाता | 2 अगस्त, 2026 जंतर-मंतर आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच लगातार नए दावों और सुरागों तक पहुंच रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। अधिकारियों का दावा है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर हमला करने की साजिश रची गई थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि संदिग्ध उस स्थान तक पहुंचा था या नहीं। इस संबंध में जांच अभी जारी है। बंगाल STF के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध आतंकी से पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी मिली कि कुछ प्रमुख राजनीतिक हस्तियां और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कथित रूप से निशाने पर थे। जांच एजेंसियां इन दावों की विभिन्न तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि करने में जुटी हैं। जांच के दौरान एक महिला सहयोगी को झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया गया है। STF का दावा है कि वह संदिग्ध मॉड्यूल से जुड़ी हुई थी और इंटरनेट के माध्यम से संपर्क स्थापित कर विभिन्न गतिविधियों में सहयोग करती थी। अधिकारियों के अनुसार, उससे पूछताछ में डिजिटल नेटवर्क, संपर्कों और कथित मॉड्यूल की कार्यप्रणाली से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों संदिग्धों के बीच सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन के माध्यम से संपर्क था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों के बीच कई चैट रिकॉर्ड मिले हैं, जिनका डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि उनके संपर्क किन विदेशी हैंडलरों से थे और किसी प्रकार की संदिग्ध फंडिंग या नेटवर्किंग हुई या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, महिला संदिग्ध को ट्रांजिट रिमांड पर लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेजा गया है। अब दोनों संदिग्धों से आमने-सामने पूछताछ की जाएगी, ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके और जांच को आगे बढ़ाया जा सके। STF का कहना है कि जांच का दायरा केवल स्थानीय नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल गतिविधियों, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों, संभावित विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। गौरतलब है कि यह पूरा मामला अभी जांच के अधीन है। जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। फिलहाल किसी भी संदिग्ध के विरुद्ध आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।

  • आकर्षण के सिद्धांत का वास्तविक मनोविज्ञान: विचार ही गढ़ते हैं व्यक्तित्व, कर्म और भविष्य — मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज

    'साइकोलॉजी ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन' प्रवचन श्रृंखला में जैन दर्शन और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत समन्वय, सकारात्मक विचारों से जीवन परिवर्तन का दिया संदेश भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 2 अगस्त, 2026 आकर्षण के सिद्धांत का वास्तविक मनोविज्ञान केवल इच्छाओं की पूर्ति का सिद्धांत नहीं, बल्कि विचार, विश्वास, भाव और कर्म के समन्वय का विज्ञान है। यही संदेश रविवार को तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर (इनर रिफ्लेक्शन सेंटर) में आयोजित "साइकोलॉजी ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन" प्रवचन श्रृंखला में पूज्य मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने दिया। उन्होंने आध्यात्मिकता, आधुनिक विज्ञान और जैन दर्शन को सरल एवं व्यवहारिक भाषा में प्रस्तुत करते हुए बताया कि मनुष्य का भविष्य उसके विचारों से निर्मित होता है। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सुख, शांति, सफलता और समृद्धि चाहता है, लेकिन केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं होता। यदि मन में भय, संदेह, नकारात्मक धारणाएँ और विरोधाभासी विचार बने रहें, तो व्यक्ति अपनी वास्तविक क्षमता तक नहीं पहुँच पाता। उन्होंने कहा कि आकर्षण का सिद्धांत तभी प्रभावी होता है, जब विचार, विश्वास और कर्म एक ही दिशा में प्रवाहित हों। मुनि श्री ने आधुनिक न्यूरोसाइंस और मनोविज्ञान के उदाहरण देते हुए समझाया कि हमारा मस्तिष्क कल्पना और वास्तविक अनुभव के बीच बहुत कम अंतर करता है। जब व्यक्ति बार-बार भय, असफलता या चिंता की कल्पना करता है, तो शरीर में उसी प्रकार के रासायनिक और हार्मोनल परिवर्तन होने लगते हैं, जैसे वे घटनाएँ वास्तव में घट रही हों। इसके विपरीत सकारात्मक, उद्देश्यपूर्ण और आत्मविश्वास से भरे विचार व्यक्ति की मानसिक ऊर्जा, निर्णय क्षमता और व्यवहार को नई दिशा देते हैं। उन्होंने जैन आगमों में वर्णित तंदुल मत्स्य की प्रेरक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्मबंधन केवल बाहरी कार्यों से नहीं, बल्कि मन के भीतर उत्पन्न होने वाले भावों और संकल्पों से भी होता है। यदि व्यक्ति निरंतर ईर्ष्या, भय, क्रोध या नकारात्मक चिंतन में डूबा रहता है, तो वही भाव भविष्य के कर्मों का आधार बनते हैं। वहीं शुद्ध भाव, करुणा, संयम और सकारात्मक चिंतन आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मुनि श्री ने कहा कि जीवन में परिवर्तन लाने के लिए सबसे पहले स्वयं पर विश्वास विकसित करना आवश्यक है। बाहरी परिस्थितियाँ सफलता की सबसे बड़ी बाधा नहीं हैं, बल्कि मन के भीतर छिपे नकारात्मक संस्कार और सीमित धारणाएँ व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकती हैं। जब व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं, विश्वासों और कर्मों को एक दिशा में समन्वित कर लेता है, तभी वास्तविक सफलता और आत्मिक विकास संभव होता है। उन्होंने यह भी कहा कि "साइकोलॉजी ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन" प्रवचन श्रृंखला का उद्देश्य जैन दर्शन को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन, मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है। इस श्रृंखला के माध्यम से युवा, विद्यार्थी, व्यवसायी और परिवार सभी वर्गों को जीवन प्रबंधन के व्यावहारिक सूत्र प्रदान किए जा रहे हैं। प्रवचन के समापन पर मुनि श्री ने सभी श्रद्धालुओं से अपने विचारों की शुद्धता बनाए रखने, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि "मनुष्य जैसा निरंतर सोचता है, वैसा ही उसका व्यक्तित्व, कर्म और भविष्य बनता है।" उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रवचन को अत्यंत प्रेरणादायी बताते हुए इसे आत्मपरिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन माना।

  • गुरुवाणी से जागृत युवा शक्ति: संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच बना समाज सेवा का सशक्त आधार

    कलबी समाज के नवगठित संगठन ने गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान के आदर्शों पर चलते हुए सेवा, संगठन और जनजागरण का लिया संकल्प भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (राजस्थान) | 2 अगस्त, 2026 संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच के माध्यम से कलबी समाज में सामाजिक जागरूकता, संगठनात्मक एकता और निस्वार्थ सेवा की नई ऊर्जा दिखाई दे रही है। गुरुवाणी से प्रेरित युवा शक्ति समाजहित के कार्यों को संगठित रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर जनकल्याण के विभिन्न आयामों पर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। संगठन का उद्देश्य केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं, बल्कि गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाना और समाज में संस्कार, सेवा तथा समर्पण की भावना को मजबूत करना है। संगठन के पदाधिकारियों ने संविधान, नियमों और उपनियमों का पूर्ण पालन करते हुए समाज सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प व्यक्त किया है। प्रत्येक पदाधिकारी को उसकी जिम्मेदारी का बोध कराते हुए संगठनात्मक अनुशासन, पारदर्शिता और सामूहिक नेतृत्व की भावना को मजबूत करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। संगठन का मानना है कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब युवा पीढ़ी अपने दायित्वों को समझते हुए निस्वार्थ सेवा का मार्ग अपनाए। इसी सोच के साथ मंच के कार्यकर्ता बिना किसी व्यक्तिगत प्रचार या प्रदर्शन के समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर जनजागरण और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। अपने प्रेरक संदेश में संगठन से जुड़े वरिष्ठ मार्गदर्शकों ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में युवाओं को तकनीक का सकारात्मक उपयोग करते हुए समाज सेवा को नई दिशा देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान ने लगभग एक शताब्दी पूर्व जिस जागृत, शिक्षित और संस्कारित समाज का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी आज की युवा शक्ति पर है। युवा जागृति मंच ने समाज के प्रत्येक पदाधिकारी से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों का नियमित अवलोकन करें, संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा सेवा कार्यों को निरंतर गति दें। समाजहित में किए जाने वाले कार्यों में अनुशासन, समर्पण और सहयोग की भावना ही संगठन की सबसे बड़ी शक्ति मानी गई। संदेश में युवाओं को स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध प्रेरक विचार—"उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको"—की भावना के अनुरूप गुरुवाणी की ज्योति को हर घर, हर गांव और हर व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया गया। संगठन का विश्वास है कि जब युवा शक्ति सेवा, संस्कार और संगठन को अपना जीवन लक्ष्य बनाएगी, तब समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा। संत श्री राजाराम जी युवा जागृति मंच ने कलबी समाज के सभी शिक्षित एवं जागरूक युवाओं से संगठन के साथ जुड़कर सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। संगठन का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए संस्कारवान, संगठित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है।

  • रिश्तों की सबसे बड़ी दौलत

    सेवा, संवेदना और इंसानियत का अनमोल संदेश✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह बरसात की हल्की फुहारों के बीच गाँव के बस स्टैंड पर लगभग 70 वर्षीय रामस्वरूप जी अपनी पुरानी छतरी और दवाइयों का छोटा-सा पैकेट लिए बस की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी तेज़ रफ्तार से गुज़री एक बाइक ने सड़क पर भरा पानी उनके ऊपर उछाल दिया। उनके कपड़े भीग गए और वे असहाय होकर वहीं खड़े रह गए। पास ही चाय की एक छोटी-सी दुकान चलाने वाला 16 वर्षीय मोहन यह दृश्य देखकर दौड़ पड़ा। उसने आदरपूर्वक रामस्वरूप जी को अपनी दुकान के भीतर बैठाया, तौलिया दिया और बिना कुछ पूछे अदरक वाली गरम चाय बनाकर उनके सामने रख दी। जब रामस्वरूप जी ने चाय के पैसे देने चाहे, तो मोहन मुस्कुराकर बोला, "बाबा, दादा से भी कोई पैसे लेता है क्या? मेरे पिता कहते थे कि बुज़ुर्गों की सेवा में कमाई नहीं, दुआ मिलती है।" यह सुनकर रामस्वरूप जी की आँखें नम हो गईं। बातचीत के दौरान उन्होंने मोहन से उसके पिता के बारे में पूछा। कुछ पल चुप रहने के बाद मोहन बोला, "चार वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया। उस दिन कई लोग तमाशा देखते रहे, लेकिन कोई उन्हें अस्पताल नहीं ले गया। तभी मैंने निश्चय किया कि मेरे सामने कोई भी ज़रूरतमंद होगा तो मैं उसे अपना समझकर मदद करूँगा।" इसी बीच एक कार वहाँ रुकी। उसमें बैठे एक संपन्न व्यापारी ने मोहन से जल्दी चाय लाने को कहा। मोहन ने पहले रामस्वरूप जी को दवा खाने के लिए गरम पानी दिया और फिर व्यापारी की चाय तैयार की। व्यापारी नाराज़ होकर बोला, "ग्राहक की कोई कीमत नहीं?" मोहन ने विनम्रता से उत्तर दिया, "साहब, ग्राहक बाद में हैं, पहले इंसान हैं। ये मेरे बाबा जैसे हैं।" व्यापारी चुप रह गया। कुछ महीनों बाद उसी व्यापारी की फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और आर्थिक संकट गहरा गया। एक दिन उसी गाँव से गुजरते समय उसकी कार खराब हो गई। तेज़ बारिश शुरू हो चुकी थी। वही सड़क... वही चाय की दुकान... और वही मोहन... मोहन ने बिना किसी संकोच के उन्हें छाता दिया, पानी पिलाया और मैकेनिक बुलाकर उनकी सहायता की। व्यापारी ने आश्चर्य से पूछा, "तुमने मुझे पहचान लिया था, फिर भी मेरी मदद क्यों की?" मोहन मुस्कुराया और बोला, "मेरे पिता कहते थे कि इंसान का व्यवहार उसका परिचय होता है, सामने वाले का नहीं। अगर मैं भी आपके जैसा व्यवहार करूँ, तो मुझमें और आपमें क्या अंतर रहेगा?" इन शब्दों ने व्यापारी का हृदय बदल दिया। अगले ही दिन उसने गाँव के गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति शुरू की, बुज़ुर्गों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाने का निर्णय लिया और मोहन की पढ़ाई का पूरा खर्च अपने ऊपर ले लिया। जब उसने यह बात मोहन को बताई, तो मोहन भावुक होकर बोला, "साहब, आपने मुझे कुछ नहीं दिया, बल्कि मेरे पिता का अधूरा सपना पूरा कर दिया।" व्यापारी की आँखों से आँसू बह निकले। उसने कहा, "आज समझ आया कि असली दौलत बैंक के खाते में नहीं, लोगों के दिलों में जमा होती है।" वर्षों बाद मोहन एक सफल डॉक्टर बना। उसने अपने अस्पताल के प्रवेश द्वार पर एक पंक्ति लिखवाई— "यहाँ इलाज केवल शरीर का नहीं, रिश्तों और इंसानियत का भी होता है।" आज भी उस गाँव के लोग गर्व से कहते हैं— "जिस बच्चे ने निस्वार्थ सेवा करना सीखा, उसी ने पूरे समाज को इंसानियत का सच्चा अर्थ सिखा दिया।" आज के समय में जब रिश्ते अक्सर स्वार्थ और लाभ-हानि के तराज़ू पर तौले जाने लगे हैं, यह कहानी हमें याद दिलाती है कि समाज की वास्तविक शक्ति धन नहीं, बल्कि संवेदनाएँ, सेवा और अपनापन हैं। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से दूसरों का हाथ थामता है, समय आने पर उसके लिए हजारों हाथ स्वयं उठ खड़े होते हैं। रिश्ते खरीदे नहीं जाते, उन्हें प्रेम, सम्मान और त्याग से निभाया जाता है। संदेश "इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं और रिश्तों से बड़ी कोई संपत्ति नहीं। जिस घर में त्याग, सम्मान और अपनापन बसता है, वहाँ सुख अपने आप रास्ता खोज लेता है।" ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक एउपन्यास — मौन दान। एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • गुरु महाराज राजाराम जी की गुरुवाणी: कलबी समाज में सामाजिक न्याय व्यवस्था पुनर्जीवित करने का आह्वान

    पंच-पटेलों से समाज की न्याय परंपरा को फिर सशक्त बनाने और गुरुवाणी के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)शिकारपुरा (जोधपुर, राजस्थान) | 1 अगस्त, 2026। कलबी समाज सामाजिक न्याय व्यवस्था को पुनर्जीवित करने का संदेश देते हुए गुरुवाणी प्रचारक किशनाराम पटेल ने समाज के पंच-पटेलों से गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के आदर्शों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता, संस्कार और पारदर्शी सामाजिक व्यवस्था से सुनिश्चित होती है। यही कारण है कि आज समाज को अपनी गौरवशाली पंच-परंपरा और गुरु महाराज की शिक्षाओं को पुनः आत्मसात करने की आवश्यकता है। लगभग 144 वर्ष पूर्व राजस्थान के जोधपुर जिले की लूणी तहसील स्थित पावन तीर्थ शिकारपुरा में उच्च कुलीन कलबी समाज में जन्मे गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज ने मानवता, धर्म, सदाचार, नशामुक्ति, संस्कारयुक्त शिक्षा तथा अहंकारमुक्त जीवन का संदेश दिया। उनका संपूर्ण जीवन समाज को अज्ञान से ज्ञान, अन्याय से न्याय और विभाजन से संगठन की ओर ले जाने के लिए समर्पित रहा। संदेश में कहा गया कि एक समय समाज की प्रत्येक सामाजिक समस्या का समाधान पंच-पटेलों की पंचायतों में निष्पक्ष विचार-विमर्श के बाद किया जाता था। पंच परमेश्वर की भावना से लिए गए निर्णय समाज में अनुशासन, नैतिकता और आपसी विश्वास को मजबूत करते थे। किन्तु समय के साथ आपसी मतभेद, पक्षपात, अत्यधिक आर्थिक दंड, नियमों की अनदेखी तथा भारतीय न्याय व्यवस्था के विपरीत निर्णयों जैसी प्रवृत्तियों के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। गुरुवाणी प्रचारक ने कहा कि पंच-पंचायती व्यवस्था कमजोर होने से समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हुआ, अनुशासन कमज़ोर पड़ा और कई असामाजिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला। ऐसे में समाज के वरिष्ठ पंच-पटेलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे गुरु महाराज की शिक्षाओं के अनुरूप समाज को नई दिशा प्रदान करें। उन्होंने समाज के पंच-पटेलों को संबोधित करते हुए कहा कि वे समाज के मार्गदर्शक, संरक्षक और न्याय व्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। यदि वे अपनी जिम्मेदारियों का पुनः निर्वहन करें तो समाज में विश्वास, भाईचारा और सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा मिल सकती है। संदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज भी अपने प्रवचनों के माध्यम से समय-समय पर समाज को सामाजिक न्याय, नैतिकता और संगठन का संदेश दे रहे हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग से अपील की गई कि वे गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी को जीवन में अपनाकर समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाएं।

  • NH-48 बैरियर फ्री टोल सिस्टम लागू: अब बिना रुके फटाफट निकलेंगी गाड़ियां

    दिल्ली-जयपुर हाईवे पर आज से शुरू हुआ MLFF टोल सिस्टम, बिना रुके कटेगा टोल टैक्स भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 1 अगस्त, 2026 NH-48 बैरियर फ्री टोल सिस्टम आज से दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर लागू हो गया है। इस नई व्यवस्था के बाद अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े होने, बैरियर खुलने का इंतजार करने या गाड़ी रोककर टोल देने की जरूरत नहीं होगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने शाहजहांपुर टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम शुरू कर दिया है। इस हाईटेक तकनीक से वाहन अपनी सामान्य गति में चलते हुए स्वतः टोल भुगतान कर सकेंगे। यह बदलाव लाखों यात्रियों के समय, ईंधन और यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। दिल्ली-जयपुर NH-48 देश के सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों निजी वाहन, बसें और मालवाहक ट्रक इस मार्ग से गुजरते हैं। टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें अक्सर यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनती थीं। इसी समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से NHAI ने बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम लागू किया है। नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा से सभी बैरियर और टोल बूथ हटा दिए गए हैं। सड़क के ऊपर विशेष गैंट्री (Gantry) लगाए गए हैं, जिनमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और हाई-स्पीड RFID स्कैनर लगाए गए हैं। जैसे ही वाहन 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की सामान्य गति से इन गैंट्री के नीचे से गुजरता है, कैमरा वाहन की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत स्कैन कर लेता है। यदि वाहन पर वैध FASTag लगा है और उसमें पर्याप्त बैलेंस उपलब्ध है, तो निर्धारित टोल राशि स्वतः कट जाएगी। कुछ ही क्षणों में वाहन मालिक के मोबाइल पर भुगतान का SMS भी प्राप्त हो जाएगा। पूरी प्रक्रिया में वाहन को न तो रोकना होगा और न ही गति कम करनी पड़ेगी। हालांकि सरकार ने इस नई व्यवस्था के साथ नियमों को भी सख्त बनाया है। यदि किसी वाहन के FASTag में पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा, FASTag अमान्य होगा या वाहन बिना FASTag के गैंट्री से गुजरेगा, तो सिस्टम स्वतः वाहन के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ई-नोटिस भेज देगा। इसके बाद वाहन मालिक को बकाया टोल जमा करने के लिए 72 घंटे का समय दिया जाएगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं करने पर सामान्य टोल शुल्क का दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई तकनीक से यात्रियों का सफर अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। पहले जहां टोल प्लाजा पर 10 से 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, अब वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। इससे ईंधन की बचत होगी, यात्रा समय कम होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक समाप्त होगी। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टोल प्लाजा पर वाहनों की भीड़ कम होने से बार-बार ब्रेक और एक्सेलरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इससे वायु प्रदूषण घटाने और हरित परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी MLFF बैरियर-फ्री टोल सिस्टम लागू किए जाने की संभावना है।

  • एविएशन सेक्टर में बड़ी उड़ान: PM मोदी बोले- देश में एयरपोर्ट 74 से बढ़कर 166 हुए

    भोगपुरम में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन, बोले- हवाई संपर्क बनेगा विकास का नया रनवे भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) भोगपुरम (आंध्र प्रदेश) | 1 अगस्त, 2026 एविएशन सेक्टर में बड़ी उड़ान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि देश में एयरपोर्ट्स की संख्या 74 से बढ़कर 166 हो गई है, जो दोगुने से भी अधिक वृद्धि को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने यह बात आंध्र प्रदेश के भोगपुरम में नवनिर्मित अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि मजबूत हवाई संपर्क केवल यात्रा को आसान नहीं बनाता, बल्कि यह निवेश, पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि नया एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। उनके अनुसार यह परियोजना राज्य के लिए केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि विकास का नया "रनवे" साबित होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश के छोटे और मध्यम शहर भी अब हवाई नेटवर्क से तेजी से जुड़ रहे हैं। पहले जहां हवाई यात्रा सीमित लोगों तक थी, वहीं अब आम नागरिक भी आसानी से इसका लाभ उठा रहे हैं। इससे क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 'उड़ान' (उड़े देश का आम नागरिक) योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना ने देश के छोटे शहरों और कस्बों को पहली बार नियमित हवाई सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हवाई यात्रा को आम नागरिक की पहुंच में लाना था, जिसमें उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जहां बेहतर हवाई संपर्क होता है, वहां निवेश, उद्योग, पर्यटन और सेवा क्षेत्र तेजी से विकसित होते हैं। एयरपोर्ट केवल यात्रियों के आने-जाने का केंद्र नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले विकास केंद्र बन जाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से आंध्र प्रदेश के उत्तरी हिस्से में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय कृषि एवं अन्य उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार सड़क, रेल और हवाई परिवहन को एकीकृत कर देशभर में आधुनिक कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार कर रही है। इससे भारत की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे विमानन बाजारों में शामिल है। बढ़ती अर्थव्यवस्था, बढ़ता मध्यम वर्ग और हवाई यात्रा की बढ़ती मांग भविष्य में इस क्षेत्र को और अधिक विस्तार देगी। सरकार का लक्ष्य है कि देश के अधिक से अधिक क्षेत्रों को आधुनिक हवाई नेटवर्क से जोड़ा जाए ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास जताया कि नया एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा और पूरे क्षेत्र को निवेश, पर्यटन एवं उद्योग का नया केंद्र बनाएगा।

  • पेपर लीक रोधी कानून में बड़ा बदलाव: राष्ट्रपति की मंजूरी, अब हर राज्य में त्वरित अदालतें

    पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ, जांच 2 महीने में पूरी और दोषियों को 10 साल तक की सजा भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 1 अगस्त, 2026 पेपर लीक रोधी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और नकल माफिया के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। संशोधित कानून के तहत अब प्रत्येक राज्य में विशेष त्वरित अदालतें (Fast Track Courts) स्थापित की जाएंगी, जो पेपर लीक से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई करेंगी। साथ ही, जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और करोड़ों युवाओं का विश्वास बहाल करना है। राजपत्र अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधित कानून प्रभावी हो गया है। संसद के दोनों सदनों ने इसी सप्ताह इस विधेयक को पारित किया था। अब राज्यों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन करें। संशोधित कानून में जांच एजेंसियों के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। अब किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों के उपयोग से जुड़े मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आएगी और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई संभव हो सकेगी। कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक कराने, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा दी जा सकेगी। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। सरकार ने संगठित परीक्षा माफिया और बड़े गिरोहों पर शिकंजा कसने के लिए और भी कड़े प्रावधान किए हैं। यदि कोई अपराध संगठित गिरोह या नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 वर्ष के कारावास तथा 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। इससे पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन देशभर में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हाल के वर्षों में कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया था। ऐसे में त्वरित न्याय और कड़ी सजा की व्यवस्था युवाओं का भरोसा मजबूत करेगी। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से केवल अपराधियों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता भी बढ़ेगी। इससे योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और परीक्षा प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

  • गृह ज्योति योजना पर बड़ा अपडेट: 82 हजार परिवारों का मुफ्त बिजली लाभ खतरे में!

    सत्यापन से इनकार करने वाले 82,220 परिवार योजना से हो सकते हैं बाहर, सरकार करेगी अंतिम फैसला भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु (कर्नाटक) | 1 अगस्त, 2026 गृह ज्योति योजना के तहत मुफ्त बिजली का लाभ ले रहे 82,220 परिवारों पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कर्नाटक सरकार की ओर से चलाए जा रहे सत्यापन अभियान में इन परिवारों ने आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। ऐसे में इन लाभार्थियों को योजना से बाहर किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बेसकॉम (BESCOM) सहित बिजली वितरण कंपनियां पिछले दो महीनों से घर-घर जाकर लाभार्थियों का सत्यापन कर रही हैं। सरकार का उद्देश्य योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और केवल पात्र परिवारों तक मुफ्त बिजली का लाभ पहुंचाना है। अधिकारियों के अनुसार, गृह ज्योति योजना के तहत प्रत्येक बिजली मीटर को लाभार्थी के आधार नंबर से जोड़ा गया है। इसी कारण सत्यापन के दौरान आधार कार्ड सहित कुछ बुनियादी जानकारियां आवश्यक मानी जा रही हैं। हालांकि, पैन कार्ड और जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज अनिवार्य नहीं हैं। बेसकॉम के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अब तक 87.81 लाख परिवारों के सत्यापन अभियान में 82,220 परिवारों ने मीटर रीडरों को कोई भी दस्तावेज या आवश्यक जानकारी देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ परिवारों ने स्वयं ही गृह ज्योति योजना का लाभ छोड़ने की सहमति दी है। वर्तमान में राज्यभर में लगभग 1.65 करोड़ परिवार गृह ज्योति योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और इनमें से 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। सत्यापन प्रक्रिया अभी भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं, उनकी सूची बिना किसी बदलाव के राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद अंतिम निर्णय सरकार करेगी कि बिना आवश्यक जानकारी वाले परिवारों को योजना का लाभ जारी रखा जाए या नहीं। बेसकॉम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेंगलुरु में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक है। इसकी प्रमुख वजह शहर में बड़ी संख्या में रहने वाले प्रवासी परिवार हैं। कई लोगों के आधार कार्ड या अन्य सरकारी दस्तावेजों में वर्तमान निवास का पता अलग है, जिसके कारण वे सत्यापन प्रक्रिया में जानकारी साझा करने से बच रहे हैं। इसके अलावा कुछ लोग व्यक्तिगत जानकारी, विशेषकर आय और अन्य वित्तीय विवरण साझा करने में भी हिचकिचा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों को उम्मीद है कि जिन परिवारों ने फिलहाल दस्तावेज नहीं दिए हैं, उनमें से कई बाद में स्वयं कार्यालय पहुंचकर फॉर्म जमा कर देंगे। अधिकारियों ने बताया कि जहां भी लोगों ने मौके पर जानकारी देने से इनकार किया, वहां उन्हें आवेदन फॉर्म उपलब्ध करा दिए गए हैं ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकें। गौरतलब है कि गृह ज्योति योजना की शुरुआत जुलाई 2023 में की गई थी। इस योजना के तहत प्रति माह 200 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले पात्र परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाती है। यह योजना राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है।

  • Manifestation का वास्तविक विज्ञान: विचार, विश्वास और पुरुषार्थ से बदलता है जीवन — मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज

    'Psychology of Transformation' प्रवचन श्रृंखला में बताया— केवल इच्छा नहीं, बल्कि सही विचार, अटूट विश्वास और सतत पुरुषार्थ ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन का आधार हैं। ज्ञानोदय परिसर (इनर रिफ्लेक्शन सेंटर), तुबरहल्ली में "Psychology of Transformation" विषय पर प्रवचन देते निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 1 अगस्त, 2026 Manifestation का वास्तविक विज्ञान आजकल युवाओं से लेकर पेशेवरों तक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है, लेकिन इसकी वास्तविकता क्या है? क्या केवल सकारात्मक सोच, इच्छाओं की सूची बनाना या बार-बार लक्ष्य दोहराना ही सफलता दिला सकता है? इन सभी प्रश्नों का वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और व्यवहारिक उत्तर शनिवार को तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर (इनर Reflection Center) में आयोजित "Psychology of Transformation" प्रवचन श्रृंखला के दौरान निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने दिया। अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचन में मुनि श्री ने स्पष्ट कहा कि Manifestation केवल कल्पना या इच्छा का खेल नहीं, बल्कि विचार, विश्वास, भावनाओं और कर्म की एकरूपता का विज्ञान है। जब व्यक्ति के भीतर लक्ष्य के प्रति पूर्ण आस्था, स्पष्ट सोच और निरंतर पुरुषार्थ होता है, तभी जीवन में वास्तविक परिवर्तन दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर Manifestation को लेकर अनेक भ्रम फैलाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक सफलता केवल सकारात्मक सोच से नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, निरंतर अभ्यास और सही दिशा में किए गए कर्म से प्राप्त होती है। यदि व्यक्ति के विचार और कर्म एक-दूसरे के विपरीत हों, तो इच्छाएँ केवल कल्पना बनकर रह जाती हैं। मुनि श्री ने मानव मन की कार्यप्रणाली को अत्यंत सरल भाषा में समझाते हुए Unconscious Incompetence, Conscious Incompetence, Conscious Competence तथा Unconscious Competence की चार अवस्थाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किसी भी कौशल में निपुणता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को पहले अपनी कमियों को पहचानना, फिर सजग अभ्यास करना और अंततः उसे स्वभाव का हिस्सा बनाना आवश्यक होता है। यही प्रक्रिया अवचेतन मन को सकारात्मक दिशा में प्रशिक्षित करती है। प्रवचन के दौरान उन्होंने आचार्य पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित समाधि तंत्र के प्रसिद्ध सूत्र "तद्भूयात्, तत्परान् प्रच्छेत्, तदिच्छेत्, तत्परो भवेत्" का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन दर्शन ने हजारों वर्ष पूर्व ही उन सिद्धांतों का प्रतिपादन कर दिया था जिन्हें आधुनिक मनोविज्ञान आज Subconscious Reprogramming, Mental Conditioning और Law of Attraction जैसे नामों से समझाता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने भीतर लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास विकसित कर ले, तो बहानों का स्थान पुरुषार्थ ले लेता है। जीवन में उपलब्धियाँ केवल इच्छा करने से नहीं, बल्कि स्वयं को भीतर से बदलने और उसी दिशा में निरंतर प्रयास करने से प्राप्त होती हैं। मुनि श्री ने कहा कि वर्तमान समय में मानसिक तनाव, असफलता और भ्रम का प्रमुख कारण विचारों की अस्थिरता है। यदि व्यक्ति अपने मन, भावनाओं और कर्मों में संतुलन स्थापित कर ले, तो वह न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त कर सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन, सकारात्मक दृष्टिकोण, संयम, अनुशासन और सतत अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक परिवर्तन बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से प्रारंभ होता है। जब व्यक्ति स्वयं बदलता है, तब उसका परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र भी सकारात्मक रूप से प्रभावित होने लगता है। प्रवचन के अंत में मुनि श्री ने सभी को संदेश दिया कि विचार, विश्वास, भावनाओं और कर्मों की एकरूपता ही सच्चे Manifestation का आधार है। यही जीवन को सफल, संतुलित और सार्थक बनाती है।

  • PM मोदी ने भारत के युवाओं की कामयाबी को बताया विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत

    मैसूर में विवेक स्मारक का उद्घाटन, रामकृष्ण मठ में बोले प्रधानमंत्री— युवा, शिक्षा, स्टार्टअप और आत्मनिर्भर भारत ही देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैसूर स्थित श्री रामकृष्ण मठ में विवेक स्मारक का उद्घाटन करते हुए एवं संतों का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) मैसूर | 1 अगस्त, 2026 PM मोदी ने भारत के युवाओं की कामयाबी को विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि आज का भारत नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, मोबाइल निर्माण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि मैसूर में स्थापित विवेक स्मारक आने वाले समय में साधकों, संतों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनेगा। शनिवार को मैसूर स्थित श्री रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन द्वारा निर्मित विवेक स्मारक के उद्घाटन अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और युवाओं की क्षमता पर विस्तार से अपने विचार रखे। इस अवसर पर उन्होंने रामायण के सात खंडों तथा अन्य आध्यात्मिक पुस्तकों का भी विमोचन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत कन्नड़ भाषा में "सभी को मेरा नमस्कार" कहकर की तथा देवी चामुंडेश्वरी को नमन किया। उन्होंने कहा कि मैसूर केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी ही नहीं, बल्कि संगीत, साहित्य, अध्यात्म और शिक्षा का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने रामकृष्ण मठ की समाज निर्माण में निभाई जा रही भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान वर्षों से संस्कार, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का कार्य कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि मैसूर का उनके जीवन में विशेष महत्व रहा है। जब स्वामी विवेकानंद विश्वविख्यात नहीं थे, तब मैसूर के महाराजा और यहां की संस्कृति ने उन्हें प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका प्रवास के दौरान भी स्वामी विवेकानंद ने मैसूर के महाराजा को पत्र लिखकर समाज सेवा और परोपकार के महत्व को रेखांकित किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। तपस्या, अनुशासन और निरंतर प्रयास ही किसी भी व्यक्ति और राष्ट्र को महान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत के युवा इसी भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं और विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का प्रमुख स्टार्टअप हब बन चुका है। मोबाइल निर्माण, डिजिटल भुगतान, डिजिटल समाधान, नवाचार और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इन सभी सफलताओं का श्रेय उन्होंने भारत के युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और परिश्रम को दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान की सफलता के पीछे युवाओं का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। देशभर में अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की जा रही हैं, जिससे विद्यार्थियों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच विकसित हो रही है। उन्होंने बताया कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी उच्च शिक्षा अब मातृभाषाओं में भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि ग्रामीण और सामान्य परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भाषा के कारण किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने खेलो इंडिया अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक ने देश को अनेक महान साहित्यकार, कलाकार और विचारक दिए हैं। उन्होंने विशेष रूप से कन्नड़ साहित्य की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय कवि कुवेम्पु को याद किया। उन्होंने बताया कि कुवेम्पु भी अपने समय में रामकृष्ण आश्रम से जुड़े रहे थे। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, ध्यान लगाया, पूजा-अर्चना की तथा आश्रम परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने विवेक स्मारक का अवलोकन कर वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर राज्यपाल थावरचंद गहलोत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वोडेयार, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा परिसर "मोदी-मोदी" के नारों से गूंज उठा।

  • धारावाहिक उपन्यास | मौन दान (भाग–11)

    विरासत (अंतिम अध्याय) ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह क्या किसी इंसान की सबसे बड़ी पहचान उसका नाम होता है, या उसके विचार? पढ़िए "मौन दान" का भावपूर्ण समापन। विशेष नोट: "मौन दान" एक मौलिक काल्पनिक धारावाहिक उपन्यास है। इसके पात्र, घटनाएँ और स्थान साहित्यिक कल्पना पर आधारित हैं। पुराना पुस्तकालय खुला, एक विचार ने पूरे गाँव का भविष्य बदल दिया सुबह की पहली किरणें पुराने प्राथमिक विद्यालय की टूटी हुई खिड़कियों से भीतर उतर रही थीं। वर्षों से बंद पड़ा पुस्तकालय आज फिर खुलने वाला था। माधव ने दोनों हाथों से पीतल की पुरानी चाबी उठाई। उसने धीरे से ताले में चाबी घुमाई। चरमराहट के साथ ताला खुल गया। लेकिन उसके साथ खुला केवल एक कमरा नहीं... एक अधूरा सपना भी। अंदर धूल से ढकी अलमारियाँ थीं। सैकड़ों पुस्तकें वर्षों से अपने पाठकों की प्रतीक्षा कर रही थीं। माधव ने पहली पुस्तक उठाई। पहले पन्ने पर शिवनारायण की लिखावट थी— "जो बच्चा पढ़ता है, वही अपने परिवार का नहीं, पूरे समाज का भविष्य लिखता है।" यह पढ़ते ही वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं। दयानाथ त्रिपाठी ने शांत स्वर में कहा— "आज शिवनारायण सचमुच लौट आए हैं।" पंचायत का ऐतिहासिक निर्णय उसी दिन पंचायत की विशेष बैठक बुलाई गई। पूरा गाँव उपस्थित था। सरपंच ने घोषणा की— "आज हम किसी व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने नहीं, बल्कि एक विचार को आगे बढ़ाने के लिए एकत्र हुए हैं।" उन्होंने प्रस्ताव रखा— "इस पुस्तकालय का नाम 'मौन दान जन-पुस्तकालय' रखा जाए।" तालियाँ गूँज उठीं। लेकिन तभी माधव खड़ा हुआ। उसने विनम्र स्वर में कहा— "यदि आप सचमुच मेरे पिता का सम्मान करना चाहते हैं, तो कृपया पुस्तकालय पर उनका नाम मत लिखिए।" पूरा सभागार शांत हो गया। माधव ने आगे कहा— "उन्होंने स्वयं लिखा था कि लोग उनका नाम नहीं, उनका विचार याद रखें।" कुछ क्षण बाद सरपंच ने मुस्कुराकर घोषणा बदली— "आज से इसका नाम होगा— 'मौन दान सार्वजनिक पुस्तकालय'।" इस बार तालियाँ पहले से कहीं अधिक देर तक बजती रहीं। एक विचार बना पूरे गाँव का आंदोलन मोहन ने उसी दिन पुस्तकालय में बच्चों की पहली निःशुल्क कक्षा शुरू की। शुरुआत पाँच बच्चों से हुई। कुछ ही महीनों में वहाँ प्रतिदिन दर्जनों बच्चे पढ़ने आने लगे। रमेश पाठक ने स्वास्थ्य केंद्र में गरीब मरीजों के लिए निःशुल्क दवा सहायता अभियान शुरू किया। मास्टर रामविलास ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति कोष बनाया। रामदीन ने पंचायत भवन के बाहर एक छोटी-सी दान पेटी रखवाई। उस पर लिखा था— "मौन दान पेटी" और नीचे केवल एक पंक्ति— "जो देना हो, चुपचाप दीजिए...जिसे मिले, उसका सम्मान बना रहने दीजिए।" धीरे-धीरे वह पेटी केवल दान का माध्यम नहीं रही... वह पूरे गाँव की नई पहचान बन गई। वर्षों बाद... एक वर्ष बाद गाँव का पहला छात्र प्रशासनिक सेवा में चयनित हुआ। उसने सबसे पहले उसी पुस्तकालय में जाकर पुस्तक दान की। पुस्तक के पहले पन्ने पर उसने लिखा— "यह पुस्तक किसी व्यक्ति के नाम नहीं... एक विचार के नाम।" माधव दूर खड़ा मुस्कुरा रहा था। उसे महसूस हुआ... आज उसके पिता की अंतिम इच्छा भी पूरी हो चुकी है। उपसंहार समय बीतता गया। जब भी कोई नया व्यक्ति गाँव में आता और पूछता— "शिवनारायण कौन थे?" गाँव वाले मुस्कुराकर जवाब देते— "वे कोई बड़े आदमी नहीं थे..." "उन्होंने बस इतना किया कि लोगों की मदद की... बिना अपना नाम बताए।" मौन दान का संदेश धन समाप्त हो जाता है। इमारतें पुरानी हो जाती हैं। प्रतिमाओं पर धूल जम जाती है। लेकिन... जिसने किसी के जीवन में आशा जगा दी हो, उसकी विरासत कभी समाप्त नहीं होती। "मौन दान" केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं... यह हर उस इंसान की कहानी है— जो बिना प्रशंसा की इच्छा के, बिना अपना नाम लिखे, और बिना किसी पहचान की अपेक्षा के, किसी दूसरे के जीवन में उजाला कर देता है। समाप्त ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंह 📚 केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक उपन्यास — मौन दान। पाठकों के लिए संदेश यदि "मौन दान" की यह 11-भागीय श्रृंखला आपको प्रेरित करती है, तो इसे अपने मित्रों और परिवार के साथ अवश्य साझा करें। हो सकता है यह कहानी किसी एक व्यक्ति को भी बिना नाम बताए किसी ज़रूरतमंद की सहायता करने के लिए प्रेरित कर दे—और वही इस उपन्यास की सबसे बड़ी सफलता होगी। सन्देश ; - अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

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