गुरु महाराज राजाराम जी की गुरुवाणी: कलबी समाज में सामाजिक न्याय व्यवस्था पुनर्जीवित करने का आह्वान
- धन्नाराम चौधरी

- 1 अग॰
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पंच-पटेलों से समाज की न्याय परंपरा को फिर सशक्त बनाने और गुरुवाणी के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा
भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)शिकारपुरा (जोधपुर, राजस्थान) | 1 अगस्त, 2026। कलबी समाज सामाजिक न्याय व्यवस्था को पुनर्जीवित करने का संदेश देते हुए गुरुवाणी प्रचारक किशनाराम पटेल ने समाज के पंच-पटेलों से गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के आदर्शों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता, संस्कार और पारदर्शी सामाजिक व्यवस्था से सुनिश्चित होती है। यही कारण है कि आज समाज को अपनी गौरवशाली पंच-परंपरा और गुरु महाराज की शिक्षाओं को पुनः आत्मसात करने की आवश्यकता है।
लगभग 144 वर्ष पूर्व राजस्थान के जोधपुर जिले की लूणी तहसील स्थित पावन तीर्थ शिकारपुरा में उच्च कुलीन कलबी समाज में जन्मे गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज ने मानवता, धर्म, सदाचार, नशामुक्ति, संस्कारयुक्त शिक्षा तथा अहंकारमुक्त जीवन का संदेश दिया। उनका संपूर्ण जीवन समाज को अज्ञान से ज्ञान, अन्याय से न्याय और विभाजन से संगठन की ओर ले जाने के लिए समर्पित रहा।
संदेश में कहा गया कि एक समय समाज की प्रत्येक सामाजिक समस्या का समाधान पंच-पटेलों की पंचायतों में निष्पक्ष विचार-विमर्श के बाद किया जाता था। पंच परमेश्वर की भावना से लिए गए निर्णय समाज में अनुशासन, नैतिकता और आपसी विश्वास को मजबूत करते थे। किन्तु समय के साथ आपसी मतभेद, पक्षपात, अत्यधिक आर्थिक दंड, नियमों की अनदेखी तथा भारतीय न्याय व्यवस्था के विपरीत निर्णयों जैसी प्रवृत्तियों के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई।
गुरुवाणी प्रचारक ने कहा कि पंच-पंचायती व्यवस्था कमजोर होने से समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हुआ, अनुशासन कमज़ोर पड़ा और कई असामाजिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला। ऐसे में समाज के वरिष्ठ पंच-पटेलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे गुरु महाराज की शिक्षाओं के अनुरूप समाज को नई दिशा प्रदान करें।
उन्होंने समाज के पंच-पटेलों को संबोधित करते हुए कहा कि वे समाज के मार्गदर्शक, संरक्षक और न्याय व्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। यदि वे अपनी जिम्मेदारियों का पुनः निर्वहन करें तो समाज में विश्वास, भाईचारा और सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा मिल सकती है।
संदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज भी अपने प्रवचनों के माध्यम से समय-समय पर समाज को सामाजिक न्याय, नैतिकता और संगठन का संदेश दे रहे हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग से अपील की गई कि वे गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज की गुरुवाणी को जीवन में अपनाकर समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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