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पेपर लीक रोधी कानून में बड़ा बदलाव: राष्ट्रपति की मंजूरी, अब हर राज्य में त्वरित अदालतें

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 1 अग॰
  • 2 मिनट पठन
Woman at a podium speaks indoors while protesters outside hold PAPER LEAK signs near a government building.

पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ, जांच 2 महीने में पूरी और दोषियों को 10 साल तक की सजा

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 1 अगस्त, 2026 पेपर लीक रोधी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार को बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और नकल माफिया के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। संशोधित कानून के तहत अब प्रत्येक राज्य में विशेष त्वरित अदालतें (Fast Track Courts) स्थापित की जाएंगी, जो पेपर लीक से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई करेंगी। साथ ही, जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और करोड़ों युवाओं का विश्वास बहाल करना है।


राजपत्र अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधित कानून प्रभावी हो गया है। संसद के दोनों सदनों ने इसी सप्ताह इस विधेयक को पारित किया था। अब राज्यों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन करें।


संशोधित कानून में जांच एजेंसियों के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। अब किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों के उपयोग से जुड़े मामले की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आएगी और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई संभव हो सकेगी।


कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक कराने, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा दी जा सकेगी। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।


सरकार ने संगठित परीक्षा माफिया और बड़े गिरोहों पर शिकंजा कसने के लिए और भी कड़े प्रावधान किए हैं। यदि कोई अपराध संगठित गिरोह या नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है, तो दोषियों को कम से कम 7 वर्ष के कारावास तथा 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। इससे पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की उम्मीद जताई जा रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन देशभर में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हाल के वर्षों में कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया था। ऐसे में त्वरित न्याय और कड़ी सजा की व्यवस्था युवाओं का भरोसा मजबूत करेगी।


सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से केवल अपराधियों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता भी बढ़ेगी। इससे योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और परीक्षा प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

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