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जंतर-मंतर आतंकी साजिश का खुलासा: पूछताछ में सामने आए कई चौंकाने वाले दावे

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 2 अग॰
  • 2 मिनट पठन
Two police escorts show hooded detainees being led by officers in khaki uniforms, creating a tense arrest scene outdoors.

बंगाल STF की जांच में संदिग्ध आतंकी नेटवर्क, महिला सहयोगी की गिरफ्तारी और विदेशी संपर्कों की पड़ताल तेज

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com ) कोलकाता | 2 अगस्त, 2026 जंतर-मंतर आतंकी साजिश से जुड़े मामले में बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच लगातार नए दावों और सुरागों तक पहुंच रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। अधिकारियों का दावा है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर हमला करने की साजिश रची गई थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि संदिग्ध उस स्थान तक पहुंचा था या नहीं। इस संबंध में जांच अभी जारी है।


बंगाल STF के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध आतंकी से पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी मिली कि कुछ प्रमुख राजनीतिक हस्तियां और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कथित रूप से निशाने पर थे। जांच एजेंसियां इन दावों की विभिन्न तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि करने में जुटी हैं।


जांच के दौरान एक महिला सहयोगी को झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया गया है। STF का दावा है कि वह संदिग्ध मॉड्यूल से जुड़ी हुई थी और इंटरनेट के माध्यम से संपर्क स्थापित कर विभिन्न गतिविधियों में सहयोग करती थी। अधिकारियों के अनुसार, उससे पूछताछ में डिजिटल नेटवर्क, संपर्कों और कथित मॉड्यूल की कार्यप्रणाली से जुड़े कई पहलुओं की जांच की जा रही है।


जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों संदिग्धों के बीच सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन के माध्यम से संपर्क था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों के बीच कई चैट रिकॉर्ड मिले हैं, जिनका डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि उनके संपर्क किन विदेशी हैंडलरों से थे और किसी प्रकार की संदिग्ध फंडिंग या नेटवर्किंग हुई या नहीं।


अधिकारियों के अनुसार, महिला संदिग्ध को ट्रांजिट रिमांड पर लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेजा गया है। अब दोनों संदिग्धों से आमने-सामने पूछताछ की जाएगी, ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके और जांच को आगे बढ़ाया जा सके।


STF का कहना है कि जांच का दायरा केवल स्थानीय नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल गतिविधियों, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों, संभावित विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की भी गहन पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।


गौरतलब है कि यह पूरा मामला अभी जांच के अधीन है। जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। फिलहाल किसी भी संदिग्ध के विरुद्ध आरोप अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।

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