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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • Karnataka Congress Crisis: कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस में कलह तेज, दो विधायकों का इस्तीफा

    मंत्री पद नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी, कई नेताओं ने उठाए सवाल; मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने धैर्य रखने की दी सलाह। कर्नाटक कांग्रेस कैबिनेट विस्तार के बाद नाराज विधायक एवं मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की प्रतिक्रिया। भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु | 4 अगस्त, 2026 Karnataka Congress Crisis ने कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के तुरंत बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों की अनदेखी से नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दो विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी, जबकि कई अन्य नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए। राजनीतिक जानकार इसे कांग्रेस के लिए बड़ा संगठनात्मक संकट मान रहे हैं। कैबिनेट विस्तार के दौरान मंत्रियों की सूची दो बार जारी होने से विवाद और गहरा गया। पहली सूची में भटकल के विधायक मनकल वैद्य का नाम शामिल था, लेकिन अंतिम क्षणों में उनका नाम हटाकर दावणगेरे के विधायक एस.एस. मल्लिकार्जुन को मंत्री बनाया गया। इसी दौरान एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा का नाम भी अंतिम सूची से हटा दिया गया और एक मंत्री पद रिक्त छोड़ दिया गया। पार्टी ने इस बदलाव पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया, हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे वरिष्ठ नेताओं के दबाव और आंतरिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। सबसे बड़ा राजनीतिक झटका इंडी से लगातार तीन बार विधायक रहे यशवंतरायगौड़ा पाटिल के फैसले से लगा। उन्होंने विधानसभा के उपाध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वे कांग्रेस परिवार से अपने संबंध समाप्त कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंडी विधानसभा क्षेत्र आज तक ऐसा क्षेत्र रहा है, जहां से किसी भी विधायक को मंत्री बनने का अवसर नहीं मिला। उधर, सागर से विधायक बेलूर गोपालकृष्ण ने भी मंत्री पद नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए इस्तीफे का ऐलान किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री पद केवल पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व मंत्रियों के पुत्र-पुत्रियों के लिए ही सुरक्षित हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मंत्री बनाए जाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अंतिम समय में सूची बदल दी गई। इसी कड़ी में भद्रावती के विधायक संगमेश ने भी अपनी उपेक्षा पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इस्तीफे की चेतावनी दी। वहीं पूर्व मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके दिनेश गुंडूराव ने भी सोशल मीडिया पर अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। दूसरी ओर विजयनगर और गोविंदराजनगर विधानसभा क्षेत्रों में विधायक एम. कृष्णप्पा और प्रियाकृष्णा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए बसों की आवाजाही रोक दी और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार के बाद क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने की कोशिश में कई वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी हुई, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और अधिक बढ़ गया है। यदि समय रहते नेतृत्व इस नाराजगी को दूर नहीं कर पाया, तो इसका असर सरकार की राजनीतिक स्थिरता और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है। इस बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नाराज विधायकों और कार्यकर्ताओं से संयम और धैर्य बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई योग्य विधायक हैं, लेकिन सभी को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2004 में उन्हें भी मंत्री नहीं बनाया गया था और सिद्धारमैया सरकार (2013–18) के शुरुआती दौर में भी वे मंत्रिमंडल से बाहर रहे थे। धैर्य और संगठन के प्रति निष्ठा के कारण ही उन्हें आगे चलकर नेतृत्व की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व परिस्थितियों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। ऐसे में नाराज नेताओं को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय संगठन पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ता यह असंतोष आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन सकता है। अब सभी की नजर पार्टी आलाकमान पर है कि वह असंतुष्ट नेताओं को कैसे साधता है और संगठन में एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • आत्म-संदेह ही सफलता की सबसे बड़ी बाधा, सजगता से पाएँ मन पर विजय : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज

    ज्ञानोदय परिसर, बेंगलुरु में ‘Psychology of Transformation’ प्रवचन श्रृंखला में आत्मविश्वास, सजगता और सकारात्मक चिंतन का दिया प्रेरक संदेश भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)| बेंगलुरु | 3 अगस्त, 2026 आत्म-संदेह ही सफलता की सबसे बड़ी बाधा—यह प्रेरक संदेश देते हुए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में व्यक्ति की सबसे बड़ी चुनौती बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उसके मन में छिपा आत्म-संदेह है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य सजगता, सकारात्मक चिंतन और अनुशासित जीवनशैली को अपनाए तो वह न केवल अपने मानसिक तनाव पर विजय प्राप्त कर सकता है, बल्कि सफलता और आत्मविकास के नए आयाम भी स्थापित कर सकता है। तुबरहल्ली स्थित ज्ञानोदय परिसर (इनर रिफ्लेक्शन सेंटर) में आयोजित "Psychology of Transformation" प्रवचन श्रृंखला के अंतर्गत मुनिश्री ने आधुनिक मनोविज्ञान और जैन दर्शन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करते हुए बताया कि मनुष्य के विचार ही उसके व्यक्तित्व, व्यवहार और भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि आज अधिकांश लोग सफलता, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करते हैं, लेकिन मन के भीतर बैठे भय, असफलता की आशंका और आत्म-संदेह उनके मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बन जाते हैं। जब व्यक्ति स्वयं पर विश्वास खो देता है, तब उसकी निर्णय क्षमता, एकाग्रता और कार्य करने की ऊर्जा भी प्रभावित होने लगती है। मुनिश्री ने कहा कि आत्म-संदेह को समाप्त करने का सबसे प्रभावी उपाय सजगता (Mindfulness) है। सजगता का अर्थ है—वर्तमान क्षण में पूरी जागरूकता के साथ जीना। उन्होंने बताया कि सजग श्वास, सजग भोजन, ध्यान और आत्मचिंतन जैसे सरल अभ्यास मन को स्थिर बनाते हैं तथा नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण पाने में सहायता करते हैं। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सकारात्मक कल्पना (Positive Visualization), प्रेरणादायक साहित्य का अध्ययन, नियमित व्यायाम तथा प्रतिदिन सकारात्मक संकल्पों का अभ्यास व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है। इन अभ्यासों से मन की नकारात्मकता धीरे-धीरे समाप्त होती है और व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर अधिक दृढ़ता से आगे बढ़ता है। प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने अनासक्त भाव का भी विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने पुरुषार्थ और कर्तव्य के प्रति पूर्ण समर्पित रहना चाहिए, लेकिन परिणाम के प्रति अत्यधिक आसक्ति नहीं रखनी चाहिए। यही दृष्टिकोण मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और जीवन में स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन केवल मोक्ष का मार्ग नहीं बताता, बल्कि यह दैनिक जीवन में मानसिक संतुलन, आत्मानुशासन, सकारात्मक सोच और सफल जीवन जीने की व्यवहारिक शिक्षा भी प्रदान करता है। यदि व्यक्ति अपने विचार, व्यवहार और जागरूकता को एक दिशा में ले आए, तो उसका जीवन स्वतः परिवर्तन की ओर अग्रसर हो जाता है। अपने प्रेरक संदेश में मुनिश्री ने कहा, "मनुष्य की उपलब्धियों के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बाहर नहीं, उसके अपने मन का आत्म-संदेह है। जब विचार, आचरण और जागरूकता वर्तमान क्षण में एक हो जाते हैं, तभी व्यक्ति अपने जीवन का सचेत निर्माण कर पाता है।" प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने आत्मविश्वास, आत्मअनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, युवा, महिलाएँ और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे।

  • गुरुवाणी अपनाकर संस्कारित, नशामुक्त और अहंकारमुक्त समाज के निर्माण का आह्वान

    शिकारपुरा तीर्थधाम से गुरु महाराज श्री राजाराम जी महाराज के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने और जनजागरण अभियान को गति देने की प्रेरणा भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा (राजस्थान) | 3 अगस्त, 2026 गुरुवाणी को जीवन का आधार बनाकर संस्कारित, नशामुक्त और अहंकारमुक्त समाज के निर्माण का संदेश एक बार फिर प्रमुखता से दिया गया है। गुरु भक्तों से आह्वान किया गया कि वे गुरु महाराज श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज के उपदेशों को आत्मसात करते हुए अपने जीवन को सेवा, संस्कार और समाज कल्याण के कार्यों के लिए समर्पित करें। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय गुरुवाणी के संदेशों को व्यवहार में उतारने का उपयुक्त अवसर है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए गुरु मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। संदेश में कहा गया कि मनुष्य को अज्ञान, अहंकार और हठधर्मिता से ऊपर उठकर सत्य, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलना चाहिए। गुरुवाणी केवल आध्यात्मिक जीवन का मार्गदर्शन नहीं करती, बल्कि सामाजिक समरसता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाने की प्रेरणा देती है। गुरु भक्तों से आग्रह किया गया कि वे गुरुवाणी से विमुख होने के बजाय उसके मूल संदेश—संस्कार, संयम, सेवा और सद्भाव—को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह आने वाली पीढ़ियों को नैतिक शिक्षा, भारतीय संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाए। शिकारपुरा स्थित पावन तीर्थधाम को गुरुवाणी के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा गया कि यहां से वर्षों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन, शिक्षा और जनकल्याण की प्रेरणा प्रसारित होती रही है। गुरु महाराज के उपदेशों ने समाज को एकजुट करने, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और संस्कारित जीवन अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संदेश में विशेष रूप से स्वपोषित संस्कारयुक्त शिक्षा, नशामुक्त समाज और अहंकारमुक्त मानव जीवन के निर्माण पर बल दिया गया। कहा गया कि यदि युवा पीढ़ी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कारों को अपनाए और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहे, तो समाज का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। यही गुरुवाणी का मूल उद्देश्य भी है। वक्ताओं ने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि वे सामाजिक एकता, सहयोग और सेवा की भावना के साथ जनजागरण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि समाज का वास्तविक उत्थान तभी संभव है जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे और अपने परिवार, गांव तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बने। गुरु भक्तों को यह भी प्रेरणा दी गई कि वे बिना किसी दिखावे के सेवा कार्यों में भाग लें, शिक्षा को बढ़ावा दें, सामाजिक समरसता बनाए रखें और मानवता की सेवा को सर्वोच्च धर्म मानें। ऐसे प्रयासों से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी वातावरण तैयार होगा। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरुवाणी के संदेशों को जीवन में अपनाने तथा समाजहित के कार्यों में सक्रिय योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया। सभी ने गुरु महाराज के आदर्शों के अनुरूप सेवा, सदाचार और संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • FCRA संशोधन विधेयक पर वैश्विक बहस तेज, विदेशी फंडिंग नियमों को लेकर ईसाई संगठनों ने जताई चिंता

    सरकार का दावा—विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी; अंतरराष्ट्रीय ईसाई संगठनों ने प्रस्तावित संशोधनों पर उठाए सवाल भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 3 अगस्त, 2026 FCRA संशोधन विधेयक एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। भारत सरकार विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित विधेयक को संसद में पेश किए जाने की संभावना के बीच कई अंतरराष्ट्रीय ईसाई संगठनों ने अपनी चिंताएं सार्वजनिक की हैं, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य केवल विदेशी अंशदान की निगरानी को मजबूत करना और फंड के संभावित दुरुपयोग को रोकना है। यह विधेयक इससे पहले 25 मार्च को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों की आपत्तियों के बाद आगे की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। अब सरकार इसे पुनः सदन में लाने की तैयारी कर रही है, जिससे इस पर बहस तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय कुछ ईसाई संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों से विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। उनका दावा है कि यदि नए प्रावधान लागू होते हैं तो विदेशी फंडिंग पर निर्भर कई धार्मिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और सामाजिक संस्थाओं के संचालन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत सरकार का स्पष्ट रुख है कि FCRA संशोधन विधेयक का उद्देश्य किसी विशेष धर्म, समुदाय या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कानून के अनुरूप जवाबदेही बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है। अमेरिका स्थित संगठन International Christian Concern (ICC) ने प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि इससे कुछ ईसाई संगठनों के लिए FCRA पंजीकरण बनाए रखना कठिन हो सकता है। संगठन का यह भी कहना है कि विदेशी सहायता पर निर्भर संस्थाओं के सामाजिक और मानवीय कार्य प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, भारत में समय-समय पर यह आरोप भी सामने आते रहे हैं कि कुछ संस्थाओं द्वारा विदेशी फंड का उपयोग नियमों के विपरीत किया गया। ऐसे मामलों में सरकार और संबंधित एजेंसियों ने जांच और कार्रवाई भी की है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन केवल नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष विस्तार से रखेंगे। अंतिम स्वरूप संसद में बहस, संशोधनों और पारित होने की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुद्दा केवल विदेशी फंडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिक समाज की भूमिका और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे व्यापक विषयों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर संतुलित और तथ्यों पर आधारित चर्चा आवश्यक मानी जा रही है। समुदाय या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और कानून के अनुरूप जवाबदेही बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है। अमेरिका स्थित संगठन International Christian Concern (ICC) ने प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि इससे कुछ ईसाई संगठनों के लिए FCRA पंजीकरण बनाए रखना कठिन हो सकता है। संगठन का यह भी कहना है कि विदेशी सहायता पर निर्भर संस्थाओं के सामाजिक और मानवीय कार्य प्रभावित हो सकते हैं। फंड का उपयोग नियमों के विपरीत किया गया। ऐसे मामलों में सरकार और संबंधित एजेंसियों ने जांच और कार्रवाई भी की है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन केवल नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष विस्तार से रखेंगे। अंतिम स्वरूप संसद में बहस, संशोधनों और पारित होने की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुद्दा केवल विदेशी फंडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिक समाज की भूमिका और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे व्यापक विषयों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर संतुलित और तथ्यों पर आधारित चर्चा आवश्यक मानी जा रही है।

  • धारवाड़ में पतंजलि का हर्बल डे: 25 हजार औषधीय पौधे लगाने का महाअभियान शुरू

    आचार्य बालकृष्ण के जन्मोत्सव पर पर्यावरण संरक्षण, योग और आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) धारवाड़ (कर्नाटक) | 3 अगस्त, 2026 पतंजलि हर्बल डे के अवसर पर कर्नाटक के धारवाड़ शहर में पर्यावरण संरक्षण और आयुर्वेद को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार एवं पतंजलि योगपीठ, कर्नाटक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में आयुर्वेद रत्न आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस को हर्बल डे के रूप में उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान सैकड़ों औषधीय पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया तथा पूरे अगस्त माह में राज्यभर में 25 हजार से अधिक हर्बल पौधे लगाने और वितरित करने के अभियान की शुरुआत की गई। धारवाड़ के जोशी गली स्थित गरदी माने योग सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व पतंजलि योगपीठ कर्नाटक के चीफ स्टेट इंचार्ज श्री भवरालाल आर्य ने किया। कार्यक्रम में योग, आयुर्वेद और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया गया। अपने संबोधन में भवरालाल आर्य ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण के जन्मोत्सव को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि हरित भविष्य के संकल्प दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगस्त माह के दौरान कर्नाटक के सभी जिलों, शहरों, तालुकों, गांवों और वार्डों में 25 हजार से अधिक हर्बल पौधे नि:शुल्क वितरित और लगाए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को औषधीय पौधों के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बीच आयुर्वेद और योग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा अन्य शुभ अवसरों पर पौधे लगाने की परंपरा विकसित करनी चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार होगा। भवरालाल आर्य ने बताया कि पतंजलि कर्नाटक में संचालित 1,500 से अधिक निःशुल्क योग केंद्रों के माध्यम से भी इस अभियान को व्यापक रूप से चलाया जाएगा। योग शिविरों, जनजागरूकता कार्यक्रमों और पौधारोपण अभियानों के जरिए पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अग्निहोत्र, नियमित योगाभ्यास और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित जीवन के लिए योग और आयुर्वेद का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। यदि समाज सामूहिक रूप से इस दिशा में कार्य करे तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम में हुबली-धारवाड़ नगर निगम के लोकप्रिय सदस्य श्री शंकर शेलके, सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लता एस. मुल्लूर, पतंजलि परिवार की उमा अगाड़ी, रमेश सुलाखे, लीलावती संब्रानी, बसवराज मुम्मिगट्टी, प्रेमा मुम्मिगट्टी, उमेश कुलकर्णी, भाग्यश्री बडीगेरा, पुष्पा यारेशिमी, विजयलक्ष्मी करिंदी, विजयलक्ष्मी नविले, पवड़ा शेट्टी, ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि अक्कनवारु, बसवराज हिरेमठ, विरेशा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, योगाभ्यास और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया। हर्बल डे के अवसर पर वितरित औषधीय पौधों को लोगों ने उत्साहपूर्वक ग्रहण किया और उन्हें सुरक्षित रूप से विकसित करने का वचन दिया।

  • चौधरी आंजणा समाज शिक्षा समिति चेन्नई की नई कार्यकारिणी घोषित, शिक्षा और प्रतिभा सम्मान को मिलेगी नई गति

    राजेश्वर भवन, साहूकारपेट में सर्वसम्मति से हुआ गठन, विद्यार्थियों के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को लेकर लिया संकल्प भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)डेटलाइन | चेन्नई | 3 अगस्त, 2026 चौधरी आंजणा समाज शिक्षा समिति चेन्नई की नई कार्यकारिणी का गठन रविवार को साहूकारपेट स्थित राजेश्वर भवन में आयोजित समिति की बैठक में सर्वसम्मति से किया गया। बैठक में समाज के वरिष्ठजन, शिक्षाविद्, पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही समाज में शिक्षा, प्रतिभा प्रोत्साहन और युवा सशक्तिकरण को नई दिशा देने का संकल्प लिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से दिनेश जी करड़ (कुपावास) को शिक्षा समिति का अध्यक्ष, निंबाराम पौण (निंबावास) को सचिव तथा नगाराम सोलंकी (बाकरा) को कोषाध्यक्ष चुना गया। इसके साथ ही 18 सदस्यों की कार्यकारिणी का भी गठन किया गया, जो समिति की विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों का संचालन करेगी। नई कार्यकारिणी अध्यक्ष: दिनेश जी करड़ (कुपावास).,सचिव: निंबाराम पौण (निंबावास),कोषाध्यक्ष: नगाराम सोलंकी (बाकरा),कार्यकारिणी सदस्य,जेपारामजी सोलंकी (केशवणा),लादाराम तरक (सांकरणा) ,भंवरलाल पिलास (वागोतरा) ,भगाराम खागड़ा (बिजली),मनाराम (रतपुरा) ,खेताराम (बिशनगढ़),पकाराम फक (बिशनगढ़),रुपाराम तरक (सांकरणा),रोहित/मनरूपारामजी भूरिया (कोटड़ा) ,अशोक कुमार/अजबारामजी ,सुजाराम ऐलाण कपुरजी (गंगावास),प्रतापरामजी भूरिया (धानता) जुझाराम गोदन ,डूगररामजी (बांकली),भूपेन्द्र आंजणा (जुंजाणी),पुखराज (रेवड़ाखुद) ,दिनेश कुमार कोदली (रुसियार) बैठक में वक्ताओं ने कहा कि चौधरी आंजणा समाज शिक्षा समिति चेन्नई पिछले कई वर्षों से समाज के मेधावी विद्यार्थियों के लिए प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित करती आ रही है। इन आयोजनों से विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरणा मिलती है। समिति समय-समय पर विद्यार्थियों के लिए मोटिवेशनल सेमिनार, करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम, शिक्षा जागरूकता अभियान और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी करती है। इन प्रयासों का परिणाम है कि समाज के अनेक युवा आज चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी और विभिन्न प्रशासनिक एवं निजी क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाएं देकर समाज का नाम रोशन कर रहे हैं। बैठक में नई कार्यकारिणी से अपेक्षा व्यक्त की गई कि वह शिक्षा के क्षेत्र में नई योजनाओं को गति देगी तथा आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, मार्गदर्शन और कैरियर परामर्श जैसी योजनाओं को और प्रभावी बनाएगी। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने नवगठित टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नई कार्यकारिणी शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाएगी। सभी पदाधिकारियों ने भी समाजहित में पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और सेवा भावना के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराया। बैठक का समापन समाज की उन्नति, शिक्षा के विस्तार और युवा शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित समाजबंधुओं ने नव निर्वाचित पदाधिकारियों का अभिनंदन करते हुए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

  • पूर्व विधायक अबुल कलाम का निधन: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद् को भावभीनी श्रद्धांजलि

    92 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, राजनीति के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी छोड़ गए अमिट पहचान भारतार्थ खबर। स्थानीय संवाददाता: अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) आजमगढ़ | 2 अगस्त, 2026 पूर्व विधायक अबुल कलाम का निधन उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। फूलपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अबुल कलाम का शनिवार को 92 वर्ष की आयु में लखनऊ में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। समर्थकों, शुभचिंतकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन और समाज सेवा को याद किया। अबुल कलाम ने वर्ष 1980 में कांग्रेस (इंदिरा) के टिकट पर तत्कालीन फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। उन्होंने उस चुनाव में जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार राम नरेश यादव को 5,920 मतों से पराजित कर उल्लेखनीय जीत दर्ज की थी। उनकी यह जीत उस समय क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं में गिनी गई थी। राजनीति के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे माहुल स्थित अशरफिया इंटर कॉलेज और अशरफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक रहे। शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के विकास और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिला। वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अबुल कलाम सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील नेता के रूप में पहचाने जाते थे। विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्रीय विकास, शिक्षा और जनसुविधाओं से जुड़े कई मुद्दों को प्राथमिकता दी। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाज के सभी वर्गों के साथ उनके मधुर संबंध रहे। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया। लोगों ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सादगी और सेवा की मिसाल कायम की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अबुल कलाम का जीवन नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। राजनीति के साथ शिक्षा और समाज सेवा को समान महत्व देने की उनकी सोच उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाती है। उनके निधन से फूलपुर और आजमगढ़ क्षेत्र ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में विकास, शिक्षा और सामाजिक समरसता को हमेशा प्राथमिकता दी।

  • Tatkal Ticket Rules 2026: तत्काल टिकट बुकिंग के नियम बदले, जानिए काउंटर और ऑनलाइन बुकिंग के नए नियम

    1 अगस्त से लागू नई व्यवस्था में टोकन सिस्टम, आधार सत्यापन और एजेंट बुकिंग पर नए नियम; टिकट बुक करने से पहले जरूर पढ़ें भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 3 अगस्त, 2026 Tatkal Ticket Rules 2026 के तहत भारतीय रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं। यदि आप तत्काल टिकट बुक करने की योजना बना रहे हैं, तो 1 अगस्त 2026 से प्रभावी नए नियमों की जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे रिजर्वेशन काउंटरों पर भीड़ कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और ऑनलाइन टिकट बुकिंग को अधिक सुरक्षित एवं तेज़ बनाना है। नए नियम काउंटर और ऑनलाइन दोनों माध्यमों पर लागू होंगे, इसलिए यात्रियों को बुकिंग से पहले इन बदलावों को समझना आवश्यक है। भारतीय रेलवे ने Passenger Reservation System (PRS) काउंटरों पर अब नया टोकन सिस्टम लागू किया है। इसके तहत तत्काल टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को काउंटर पहुंचते ही क्रम संख्या वाला टोकन दिया जाएगा। इसी टोकन के आधार पर उनकी बुकिंग की जाएगी। पहले यात्रियों को अलग से टोकन लेकर दोबारा लाइन में लगना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया सरल और व्यवस्थित हो जाएगी। नई व्यवस्था के अनुसार एसी (AC) क्लास के यात्रियों को सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक टोकन वितरित किए जाएंगे, जबकि नॉन-एसी (Non-AC) यात्रियों के लिए टोकन वितरण का समय सुबह 9:00 बजे से 9:30 बजे निर्धारित किया गया है। रेलवे का मानना है कि इससे टिकट बुकिंग प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और यात्रियों का समय भी बचेगा। रेलवे ने काउंटर बुकिंग को अब दो श्रेणियों – Category A और Category B में विभाजित किया है। Category A के यात्रियों को प्राथमिकता के आधार पर पहले सेवा मिलेगी, जबकि Category B के यात्रियों की बुकिंग उसके बाद की जाएगी। Category B में आने वाले यात्रियों के लिए आधार कार्ड या रेलवे द्वारा मान्य अन्य फोटो पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा। बिना वैध पहचान पत्र के तत्काल टिकट बुकिंग संभव नहीं होगी। ऑनलाइन टिकट बुकिंग करने वाले यात्रियों के लिए भी नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से तत्काल टिकट केवल वही यात्री बुक कर सकेंगे, जिनका आधार सत्यापन (Aadhaar Verification) पूरा हो चुका होगा। टिकट बुकिंग के समय पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP के माध्यम से पहचान की पुष्टि भी अनिवार्य होगी। रेलवे ने अधिकृत टिकट एजेंटों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। अब एजेंट तत्काल बुकिंग विंडो खुलने के शुरुआती 30 मिनट तक टिकट बुक नहीं कर सकेंगे। यह प्रतिबंध AC क्लास के लिए सुबह 10:00 बजे से 10:30 बजे तक और Non-AC क्लास के लिए 11:00 बजे से 11:30 बजे तक लागू रहेगा। रेलवे का उद्देश्य आम यात्रियों को टिकट बुकिंग में प्राथमिकता देना और दुरुपयोग को रोकना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी बुकिंग पर रोक लगेगी और वास्तविक यात्रियों को तत्काल टिकट प्राप्त करने में अधिक सुविधा मिलेगी। यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो बुकिंग से पहले आधार सत्यापन, वैध पहचान पत्र और निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखें।

  • माँ की आख़िरी गुल्लक:

    जब रिश्तों ने बचा ली एक ज़िंदगी रिश्तों की सबसे बड़ी पूँजी प्रेम, विश्वास और इंसानियत है ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंहप्रकाशन: भारतार्थ ख़बर | प्रेरक कथाआज़मगढ़, उत्तर प्रदेश। कहा जाता है कि धन से जीवन की सुविधाएँ खरीदी जा सकती हैं, लेकिन कठिन समय में इंसान को संभालने का काम केवल रिश्ते, विश्वास और इंसानियत ही करते हैं। प्रस्तुत है एक ऐसी प्रेरक कथा, जो हमें याद दिलाती है कि जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि अपने लोगों का साथ और उनके दिलों में बसने वाला विश्वास है। माँ की आख़िरी गुल्लक शहर के एक बड़े सरकारी अस्पताल के बाहर लगभग सत्तर वर्षीय सरस्वती देवी एक पुरानी लोहे की गुल्लक को सीने से लगाए चुपचाप बैठी थीं। उनकी आँखों में चिंता, चेहरे पर बेबसी और मन में अपने इकलौते बेटे रवि की सलामती की प्रार्थना थी। अस्पताल के भीतर रवि की हालत गंभीर थी। डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा था— "ऑपरेशन तुरंत करना होगा, नहीं तो देर हो जाएगी।" ऑपरेशन के लिए दो लाख रुपये चाहिए थे। सरस्वती देवी अपनी दो बीघा ज़मीन बेच चुकी थीं, गहने गिरवी रख चुकी थीं, लेकिन फिर भी पचास हजार रुपये कम पड़ रहे थे। वे बार-बार अपनी पुरानी गुल्लक को सहला रही थीं। तभी एक युवक ने उनकी उदासी देखी और पूछा— "माँजी, क्या बात है? आप इतनी परेशान क्यों हैं?" सरस्वती देवी ने भर्राए गले से कहा— "बेटा, यह गुल्लक मेरे स्वर्गीय पति की आख़िरी निशानी है। उन्होंने कहा था कि इसे तभी खोलना, जब परिवार पर सबसे बड़ा संकट आए।" युवक ने धीरे से गुल्लक तोड़ी। उसमें कुछ सिक्के, कुछ पुराने नोट और एक पत्र निकला। पत्र में लिखा था— "सरस्वती, अगर यह गुल्लक कभी खुले तो समझना कि परिवार कठिन समय में है। इसमें बहुत धन नहीं होगा, लेकिन याद रखना— जब अपने साथ हों तो कोई भी इंसान गरीब नहीं होता। रिश्तों से कभी मुँह मत मोड़ना, क्योंकि कठिन समय में वही सबसे बड़ा सहारा बनते हैं।" पत्र पढ़ते ही सरस्वती देवी की आँखों से आँसू बह निकले। यह दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद लोग भी भावुक हो गए। एक शिक्षक ने पाँच हजार रुपये दिए। एक रिक्शा चालक ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दो हजार रुपये उनकी हथेली पर रख दिए। एक नर्स ने अपनी एक दिन की तनख्वाह दे दी। फल विक्रेता ने कहा— "माँजी, पैसे कम हैं, लेकिन जब तक आप यहाँ हैं, भोजन मेरी ओर से रहेगा।" कुछ ही देर में यह बात पूरे अस्पताल में फैल गई। किसी ने सौ रुपये दिए, किसी ने पाँच सौ, किसी ने हजार। सिर्फ दो घंटे के भीतर ऑपरेशन के लिए पूरी राशि इकट्ठी हो गई। रवि का सफल ऑपरेशन हुआ। जब वह स्वस्थ होकर बाहर आया और पूरी घटना सुनी, तो उसकी आँखें भर आईं। उसने कहा— "माँ, आज समझ आया कि इंसान की सबसे बड़ी दौलत पैसा नहीं, बल्कि रिश्ते, संस्कार और अच्छे कर्म हैं।" उस दिन रवि ने प्रण लिया कि वह हर महीने अपनी आय का एक हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की सहायता में लगाएगा। समय बीतता गया। कुछ वर्षों बाद उसी अस्पताल में 'सरस्वती सहायता कोष' की स्थापना हुई, जहाँ से हजारों जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क इलाज होने लगा। अस्पताल के मुख्य द्वार पर एक शिलालेख लगाया गया, जिस पर लिखा था— "जिस घर में प्रेम और विश्वास की गुल्लक भरी होती है, वहाँ संकट अकेला नहीं आता; उसके साथ मदद करने वाले भी आ जाते हैं।" आज भी उस शिलालेख को पढ़कर अनेक लोगों की आँखें नम हो जाती हैं। भारतार्थ संदेश धन जीवन की आवश्यकता है, लेकिन जीवन का आधार नहीं। विश्वास, प्रेम, संवेदना और रिश्ते ही वह पूँजी हैं, जो हर कठिन समय में हमारा साथ निभाती है। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करता है, समय आने पर पूरा समाज उसके साथ खड़ा दिखाई देता है। "रिश्तों की गुल्लक में प्रेम और विश्वास जमा करते रहिए, क्योंकि कठिन समय में वही सबसे बड़ी पूँजी बनकर लौटता है।" ✍️ लेखक: अशोक कुमार सिंहप्रकाशक: भारतार्थ ख़बरटैग: प्रेरक कथा, पारिवारिक कहानी, जीवन दर्शन, इंसानियत, रिश्ते, समाज, प्रेरणा, भावनात्मक कहानी, सकारात्मक सोच, भारतार्थ ख़बर केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक एउपन्यास — मौन दान। एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि अगर आपने इस धारावाहिक उपन्यास के पिछले भाग को नहीं पढ़ा है तो पढ़ें, भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • कावेरी मुद्दे पर सर्वदलीय एकजुटता: राज्यहित की रक्षा के लिए सभी दल आए साथ

    सीएम आवास ‘कृष्णा’ में हुई अहम बैठक, कर्नाटक के जल अधिकार और किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वर में उठी आवाज भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 2 अगस्त, 2026 कावेरी मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जब राज्यहित और किसानों के भविष्य का प्रश्न सामने हो, तब राजनीतिक मतभेद पीछे छूट जाते हैं। रविवार को मुख्यमंत्री आवास ‘कृष्णा’ में आयोजित महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक में कर्नाटक के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, वरिष्ठ अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एक मंच पर दिखाई दिए। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कावेरी जल विवाद केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों, आम नागरिकों और पेयजल आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक की राजनीतिक संस्कृति हमेशा राज्यहित के मुद्दों पर एकजुट रही है। चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी दलों ने समय-समय पर राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास किए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि कावेरी मुद्दे पर भी यही परंपरा आगे बढ़ेगी और सभी दल एकजुट होकर राज्य की आवाज को मजबूती से रखेंगे। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, एचडी कुमारस्वामी, डीवी सदानंद गौड़ा और बसवराज बोम्मई सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार रखे। केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना और शोभा करंदलाजे भी बैठक में उपस्थित रहे। इस दौरान राज्य के जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति, कानूनी पहलुओं और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि कावेरी जल विनियमन समिति और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठकों से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों तथा वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर कर्नाटक का पक्ष मजबूती से रखा था। उन्होंने कहा कि केंद्र स्तर पर भी राज्य की चिंताओं को गंभीरता से उठाया गया, जिससे कर्नाटक के हितों को बल मिला। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली में आयोजित सांसदों की बैठक में सभी दलों ने राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का भरोसा दिया था। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए अब सर्वदलीय बैठक में भी राज्यहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प दोहराया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार की अपील को खारिज किए जाने के बाद यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में सर्वदलीय एकजुटता कर्नाटक के पक्ष को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बैठक का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि राज्य के जल अधिकार, किसानों की आजीविका और पेयजल सुरक्षा जैसे विषयों पर सभी दल एक मंच पर खड़े हैं।

  • 100 रविवार तक चलेगा 'नशामुक्त युवा अभियान': PM मोदी बोले—युवा बदलेंगे, तभी विकसित होगा भारत

    करोड़ से अधिक युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य, 28 हजार से ज्यादा स्थानों से शुरू हुआ राष्ट्रीय जन अभियान भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)| नई दिल्ली | 2 अगस्त, 2026 नशामुक्त युवा अभियान के जरिए देश में नशे के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'नशामुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान' का शुभारंभ करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा नशे जैसी बुराइयों से पूरी तरह मुक्त होगा। अगले 100 रविवार तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य केवल नशे के प्रति जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि युवाओं को स्वस्थ, सकारात्मक और जिम्मेदार जीवन की ओर प्रेरित करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज का अभियान है। सरकार ने इस मिशन से 1 करोड़ से अधिक युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसकी शुरुआत देशभर के 28 हजार से अधिक स्थानों पर एक साथ हुई, जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, शिक्षण संस्थान और आध्यात्मिक संस्थाओं ने मिलकर नशामुक्त भारत का संकल्प लिया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए इससे मुकाबला केवल कानून के माध्यम से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक सहयोग और सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने युवाओं से नशे के दुष्प्रभावों को समझने और अपने साथ-साथ दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थाएं और औद्योगिक संगठन एक साथ जुड़े हैं। ब्रह्माकुमारीज़, इस्कॉन, चिन्मय मिशन, ऑरोविले सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाएं युवाओं में सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देंगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान की नींव पिछले वर्ष काशी में शुरू हुए एक पायलट प्रोजेक्ट से पड़ी थी। वहां मिले सकारात्मक परिणामों के बाद अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'काशी डिक्लेरेशन' के माध्यम से अभियान के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 100 रविवार केवल कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं होंगे, बल्कि समाज में स्थायी परिवर्तन की दिशा में 100 मजबूत कदम होंगे। इस दौरान देशभर में खेल, कला, संस्कृति, सेवा, जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लाखों युवाओं ने अभियान के शुभारंभ पर नशामुक्ति की शपथ भी ली। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने परिवारों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा या युवा नशे की लत का शिकार हो जाए तो उसे छिपाने के बजाय समय रहते डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने माता-पिता से बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने, भरोसे का वातावरण बनाने और उनकी समस्याओं को समझने का आग्रह किया ताकि वे गलत रास्ते पर जाने से पहले सही मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें। प्रधानमंत्री के अनुसार, नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत होंगे। उन्होंने सभी नागरिकों से इस जनआंदोलन का हिस्सा बनने और समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

  • अगस्त 2026 के नए नियम: LPG, तत्काल टिकट, ITR समेत आज से लागू हुए 10 बड़े बदलाव

    आज से बदल गए कई अहम नियम, जानिए आपकी जेब, यात्रा, बैंकिंग और टैक्स पर क्या पड़ेगा असर भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली | 1 अगस्त, 2026 के नए नियम आज से पूरे देश में लागू हो गए हैं और इनका सीधा असर करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है। LPG सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल, रेलवे तत्काल टिकट, ITR फाइलिंग, CKYC 2.0, स्पीड पोस्ट, बैंक छुट्टियां, चीनी स्टॉक लिमिट, दिल्ली की मुफ्त बस यात्रा और SEBI Buyback नियम जैसे कई महत्वपूर्ण बदलाव आज से प्रभावी हो चुके हैं। यदि आप इन नए नियमों से अनजान हैं, तो आपको आर्थिक नुकसान, अतिरिक्त शुल्क या अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आज लागू हुए इन 10 बड़े बदलावों की पूरी जानकारी जानना बेहद जरूरी है। अगस्त महीने की शुरुआत आम नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है। सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में बड़ी राहत देते हुए कटौती की है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पहले जैसी ही रखी गई हैं। दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रेलवे ने रिजर्वेशन काउंटर पर Tatkal Ticket Booking के लिए नया टोकन सिस्टम लागू किया है। अब यात्रियों को पहले टोकन मिलेगा और उसी क्रम में टिकट जारी किए जाएंगे, जिससे भीड़ और अव्यवस्था कम होने की उम्मीद है। आयकर विभाग के अनुसार 31 जुलाई की समय सीमा समाप्त होने के बाद अब पात्र करदाताओं द्वारा ITR-1 और ITR-2 देर से दाखिल करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं जिन करदाताओं पर ऑडिट लागू नहीं होता और जो ITR-3 या ITR-4 भरते हैं, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में भी बड़ा बदलाव हुआ है। आज से CKYC 2.0 लागू कर दिया गया है। अब बैंक, बीमा कंपनियां और म्यूचुअल फंड संस्थाएं ग्राहक की डिजिटल सहमति से केंद्रीय रजिस्ट्री से KYC जानकारी प्राप्त कर सकेंगी, जिससे बार-बार दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता कम होगी। भारतीय डाक विभाग ने भी स्पीड पोस्ट सेवाओं में बदलाव किया है। आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासबुक, चेकबुक सहित सरकारी दस्तावेज अब अलग Documents Category में भेजे जाएंगे, जबकि अन्य सामग्री पार्सल श्रेणी में रहेगी। अगस्त माह में विभिन्न राज्यों के त्योहारों, स्वतंत्रता दिवस, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, रविवार तथा दूसरे एवं चौथे शनिवार को मिलाकर लगभग 14 दिन बैंक बंद रहेंगे। हालांकि छुट्टियां राज्यों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। सरकार ने चीनी बाजार में जमाखोरी रोकने के लिए नई स्टॉक सीमा लागू कर दी है। अब कोई भी डीलर 30 दिनों से अधिक तथा 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का भंडारण नहीं कर सकेगा। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। दिल्ली में महिलाओं को अब मुफ्त बस यात्रा का लाभ लेने के लिए Pink Saheli Smart Card का उपयोग करना अनिवार्य होगा। बस में कार्ड टैप करने के बाद ही निशुल्क टिकट जारी किया जाएगा। पूंजी बाजार के नियामक SEBI ने भी नया Buyback नियम लागू कर दिया है। इसके तहत सूचीबद्ध कंपनियां अब अपनी कुल पेड-अप पूंजी का अधिकतम 15 प्रतिशत तक ही शेयर बायबैक कर सकेंगी और पूरी प्रक्रिया 66 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना है।

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