पूर्व विधायक अबुल कलाम का निधन: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद् को भावभीनी श्रद्धांजलि
- Ashok kumar Singh

- 3 अग॰
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92 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, राजनीति के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी छोड़ गए अमिट पहचान
भारतार्थ खबर। स्थानीय संवाददाता: अशोक कुमार सिंह (Bhaarataarth.com) आजमगढ़ | 2 अगस्त, 2026 पूर्व विधायक अबुल कलाम का निधन उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। फूलपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अबुल कलाम का शनिवार को 92 वर्ष की आयु में लखनऊ में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। समर्थकों, शुभचिंतकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन और समाज सेवा को याद किया।
अबुल कलाम ने वर्ष 1980 में कांग्रेस (इंदिरा) के टिकट पर तत्कालीन फूलपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। उन्होंने उस चुनाव में जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार राम नरेश यादव को 5,920 मतों से पराजित कर उल्लेखनीय जीत दर्ज की थी। उनकी यह जीत उस समय क्षेत्र की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं में गिनी गई थी।

राजनीति के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे माहुल स्थित अशरफिया इंटर कॉलेज और अशरफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रबंधक रहे। शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों के विकास और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिला।
वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अबुल कलाम सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील नेता के रूप में पहचाने जाते थे। विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्रीय विकास, शिक्षा और जनसुविधाओं से जुड़े कई मुद्दों को प्राथमिकता दी। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाज के सभी वर्गों के साथ उनके मधुर संबंध रहे।

उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक का माहौल बन गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया। लोगों ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सादगी और सेवा की मिसाल कायम की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अबुल कलाम का जीवन नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। राजनीति के साथ शिक्षा और समाज सेवा को समान महत्व देने की उनकी सोच उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाती है।
उनके निधन से फूलपुर और आजमगढ़ क्षेत्र ने एक ऐसे जननेता को खो दिया, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में विकास, शिक्षा और सामाजिक समरसता को हमेशा प्राथमिकता दी।
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