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 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

21अक्टूबर /2026 /बुधवार

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

बेंगलुरु, 20 अक्टूबर 2026। बेंगलुरु में आयोजित 48वें दशहरा महोत्सव में राज्यसभा सांसद लहर सिंह सिरोया ने मां दुर्गा के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति एवं राजेंद्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट ‘बिहार भवन’ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सांसद की उपस्थिति रही। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां भगवती की चुनड़ी ओढ़ाकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।

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  • फ्रेंडशिप डे पर JCI बैंगलोर कॉसमो का ‘स्ट्राइक अप अ फ्रेंडशिप’ बॉलिंग फिएस्टा

    60 सदस्यों ने खेल, मस्ती और दोस्ती के रंग में मनाया फ्रेंडशिप डे; जेसी रूपचंद कुमट और जेसी टिनु जैन बने बॉलिंग विजेता भारतार्थ खबर संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त 2026। बेंगलुरु। फ्रेंडशिप डे के अवसर पर JCI बैंगलोर कॉसमो ने ईटा मॉल में ‘स्ट्राइक अप अ फ्रेंडशिप – बॉलिंग फिएस्टा’ का शानदार आयोजन कर दोस्ती, एकता और सौहार्द का संदेश दिया। खेल और मनोरंजन से भरपूर इस कार्यक्रम में संस्था के करीब 60 सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बॉलिंग प्रतियोगिता, फ्रेंडशिप बैंड, केक कटिंग और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों ने आयोजन को यादगार बना दिया। JCI Bangalore Cosmo Friendship Day Bowling Fiesta का आयोजन सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव और मित्रता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम में खेल भावना के साथ सदस्यों ने एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाया और पूरे आयोजन के दौरान जोश एवं उमंग का माहौल बना रहा। फ्रेंडशिप बैंड से हुआ स्वागत, केक कटिंग ने बढ़ाई खुशी कार्यक्रम की शुरुआत सदस्यों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर प्रतिभागियों को फ्रेंडशिप बैंड पहनाकर दोस्ती और भाईचारे की भावना का अभिनंदन किया गया। इसके बाद फ्रेंडशिप डे के उपलक्ष्य में केक कटिंग समारोह आयोजित किया गया। केक कटिंग के दौरान सदस्यों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और मित्रता के रिश्ते को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सदस्यों को आपसी संवाद और सौहार्द के लिए एक सहज मंच उपलब्ध कराना भी रहा। 60 सदस्यों ने बॉलिंग में दिखाया जोश ‘स्ट्राइक अप अ फ्रेंडशिप’ बॉलिंग फिएस्टा में लगभग 60 सदस्यों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। बॉलिंग लेन पर सदस्यों ने अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया, वहीं साथी प्रतिभागियों ने तालियों और उत्साहवर्धन के साथ खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया। प्रतियोगिता में रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। अंत में जेसी रूपचंद कुमट एवं जेसी टिनु जैन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बॉलिंग प्रतियोगिता में विजेता का स्थान हासिल किया। नेतृत्व और सहयोग से सफल हुआ आयोजन कार्यक्रम का आयोजन वीपी जी एंड डी जेसी स्वेता राखेचा के नेतृत्व में किया गया। आयोजन को सफल बनाने में पीसी जेसी धृति जैन एवं पीडी जेसी दीपिका गन्ना का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में संगठन के विभिन्न पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे। इस अवसर पर जोन प्रेसिडेंट जेसी प्रज्वल एस. जैन, जोन कोऑर्डिनेटर जेएफएस श्रीकांत, संस्था की अध्यक्ष जेसी ललिता बोथरा, सचिव जेसी रीना गांधी, कोषाध्यक्ष जेसी दीपिका जैन, संयुक्त सचिव जेसी दीपक जैन तथा आईपीपी जेसी सुनील जैन सहित अनेक सदस्यों ने सहभागिता की। संस्था की ओर से जोन वीपी जेसी मोनिका कुमट के सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया गया। खेल से मजबूत हुआ दोस्ती और टीम भावना का संदेश आयोजन के दौरान बॉलिंग प्रतियोगिता के साथ मनोरंजक गतिविधियों और आपसी संवाद ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा भर दी। सदस्यों ने खेल को प्रतिस्पर्धा के बजाय मित्रता और टीम भावना का माध्यम बनाया। JCI Bangalore Cosmo का यह आयोजन इस संदेश के साथ आगे बढ़ा कि सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों में आपसी संबंध केवल औपचारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होने चाहिए। ऐसे कार्यक्रम सदस्यों को एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानने, संवाद बढ़ाने और सामूहिक भावना को मजबूत करने का अवसर देते हैं। फ्रेंडशिप डे के अवसर पर आयोजित इस बॉलिंग फिएस्टा ने संगठन के सदस्यों के बीच उत्साह, अपनापन और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनाया। खेल, मनोरंजन और मित्रता के इस अनूठे संगम ने सभी प्रतिभागियों को एक साथ आने और यादगार पल साझा करने का अवसर दिया। कार्यक्रम का समापन भी इसी उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। सदस्यों ने आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक एवं मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित करने की उम्मीद जताई।‘स्ट्राइक अप अ फ्रेंडशिप – बॉलिंग फिएस्टा’ ने फ्रेंडशिप डे को केवल एक दिन के उत्सव के बजाय आपसी संबंधों को मजबूत करने वाले यादगार अवसर में बदल दिया। बॉलिंग के रोमांच, फ्रेंडशिप बैंड की आत्मीयता और सामूहिक मनोरंजन ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

  • बिदादी किसानों के साथ BJP का पूरा समर्थन, विजयेंद्र बोले—जमीन बचाने से समझौता नहीं

    बिदादी से लेकर पूरे कर्नाटक तक किसानों की जमीन के मुद्दे पर संघर्ष जारी रखने का ऐलान; नागेंद्र की कैबिनेट वापसी पर भी कांग्रेस सरकार को घेरा भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त 2026 बेंगलुरु। बिदादी के किसानों की जमीन और उनके अधिकारों को लेकर कर्नाटक की राजनीति में सियासी गर्मी बढ़ गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने स्पष्ट किया है कि BJP किसानों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है और किसानों की जमीन बचाने के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि BJP और JDS के लिए किसानों के हितों की रक्षा एक साझा उद्देश्य है। विजयेंद्र ने बिदादी पदयात्रा को लेकर किसी भी तरह के भ्रम से इनकार करते हुए कहा कि BJP का किसानों के संघर्ष को समर्थन जारी रहेगा। उनके अनुसार, पिछले सप्ताह उन्होंने JDS नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी से फोन पर बातचीत की थी और BJP-JDS की संयुक्त पदयात्रा की संभावना पर चर्चा हुई थी। बाद में JDS ने पदयात्रा की तारीख घोषित कर दी। विजयेंद्र के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि BJP पदयात्रा को प्रतीकात्मक समर्थन देगी और किसानों के मुद्दे को सदन के भीतर भी मजबूती से उठाएगी। उन्होंने कहा कि उनके पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण वे स्वयं पदयात्रा में शामिल नहीं हो सके। बिदादी किसानों के मुद्दे पर BJP का रुख स्पष्ट बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि बिदादी के किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दे पर BJP के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन, उनके अधिकार और आजीविका की सुरक्षा पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि BJP के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने पदयात्रा को प्रतीकात्मक रूप से समर्थन दिया है। विजयेंद्र ने कहा कि किसानों के संघर्ष को केवल बिदादी तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसानों की जमीन से जुड़े मामलों को भी उठाया जाएगा। उनका कहना है कि बिदादी के अलावा एयरपोर्ट और अन्य विकास परियोजनाओं से जुड़े भूमि विवादों में भी किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सरकार पर किसानों पर दबाव डालने का आरोप BJP प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर बिदादी में आंदोलन कर रहे किसानों पर दबाव डालने का आरोप भी लगाया। विजयेंद्र ने दावा किया कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि मुआवजे की पेशकश के माध्यम से आंदोलन में सक्रिय कुछ किसानों को संघर्ष से अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप BJP प्रदेश अध्यक्ष के दावे हैं और इन पर सरकार का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। विजयेंद्र ने कहा कि संबंधित मंत्रियों के सामने भी यह विषय रखा गया है। उन्होंने दोहराया कि BJP किसानों की जमीन से जुड़े मामलों में पीछे नहीं हटेगी और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक तथा लोकतांत्रिक स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी। शिडलाघट्टा में जमीन अधिग्रहण पर भी सवाल चिक्कबल्लापुर दौरे का उल्लेख करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि शिडलाघट्टा में KIADB द्वारा किसानों की जमीन लिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जमीन लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। BJP प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की सहमति, अधिकारों और उचित प्रक्रिया से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों की जमीन छीनने की किसी भी कोशिश को BJP स्वीकार नहीं करेगी। नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी पर कांग्रेस को घेरा विजयेंद्र ने पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नागेंद्र पर अनुसूचित जनजातियों के विकास से जुड़े धन के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप हैं और ऐसे समय में उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना उचित नहीं है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नागेंद्र से जुड़े भ्रष्टाचार और धन के कथित दुरुपयोग के आरोप न्यायिक प्रक्रिया का विषय हैं और आरोप सिद्ध होना बाकी है। विजयेंद्र ने इन्हीं आरोपों का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल करने का निर्णय क्यों लिया गया। BJP प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की कि नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर भी उठाएगी और अनुसूचित जनजाति समुदाय के अधिकारों तथा उनके विकास के लिए आवंटित धन की सुरक्षा का मुद्दा राज्यभर में उठाती रहेगी। बिना पोर्टफोलियो के मंत्रियों को लेकर भी हमला विजयेंद्र ने राज्य सरकार के प्रशासनिक कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल विस्तार के बावजूद महत्वपूर्ण विभागों का स्पष्ट बंटवारा नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने विशेष रूप से कृषि, राजस्व और बागवानी विभागों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों के सामने सूखा, बारिश की कमी, फसल नुकसान और आर्थिक संकट जैसी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में संबंधित विभागों को पूरी क्षमता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द विभागों का स्पष्ट आवंटन करने और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग की। मुख्यमंत्री पर दिल्ली की राजनीति को लेकर निशाना BJP प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य की समस्याओं के बीच उनका ध्यान दिल्ली की राजनीति पर अधिक है। विजयेंद्र ने कहा कि जब किसान सूखे और फसल संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं तथा जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं, तब राज्य सरकार को प्रशासन पर पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान, भूमि विवादों और राज्य के प्रशासनिक कामकाज के लिए सरकार को स्पष्ट प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। BJP ने संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान बी.वाई. विजयेंद्र ने अपने बयान में दो प्रमुख मुद्दों—बिदादी किसानों की जमीन और अनुसूचित जनजातियों के अधिकार—पर BJP का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पार्टी किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर पीछे नहीं हटेगी और किसानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। बिदादी में किसानों की जमीन का मुद्दा अब केवल स्थानीय आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है। BJP और JDS के रुख, राज्य सरकार की भूमि नीति और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के बीच यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और बिदादी किसानों के आंदोलन को लेकर BJP-JDS के बीच किस स्तर पर समन्वय होता है, यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

  • मरुधरा जैन संघ का बड़ा ऐलान: कमेटी संग नवयुवक व महिला मंडल का भी होगा चयन : डाँ. लूनावत

    33वें दीपावली स्नेह मिलन की तैयारियां तेज; 15 नवंबर को श्री पार्श्व लब्धि धाम में होगा भव्य आयोजन, पहली बार विशेष भक्ति-भजन कार्यक्रम भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त, 2026। श्री मरुधरा जैन संघ ने आगामी 33वें दीपावली स्नेह मिलन को यादगार और व्यवस्थित बनाने की तैयारियां तेज कर दी हैं। 15 नवंबर 2026, रविवार को टुमकुर रोड स्थित प्रसिद्ध श्री पार्श्व लब्धि धाम में होने वाले इस आयोजन की तैयारियों को लेकर संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान टेंट, भोजन, पूजा-अर्चना, बैठक तथा अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष डॉ. जवरीलाल लूनावत ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि इस बार संघ की नई कमेटी के गठन के साथ ही नवयुवक मंडल और महिला मंडल के सदस्यों का चयन भी उसी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। प्रत्येक ग्राम से संघ के सदस्यों के समक्ष नवयुवक मंडल एवं महिला मंडल के प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। इसे संघ के संगठनात्मक विस्तार और युवाओं एवं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोजन स्थल के निरीक्षण के दौरान संघ के अध्यक्ष डॉ. जवरीलाल लूनावत, उपाध्यक्ष कांतीलाल गुलेच्छा, कोषाध्यक्ष महावीर संचेती, पूर्व अध्यक्ष डूंगरमल पारख, पूर्व कोषाध्यक्ष केवलचंद सालेचा, पूर्व सलाहकार केवलचंद मोदी, उत्तमचंद बागमार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। टेंट एवं साउंड व्यवस्था से जुड़े संचालकों ने भी कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं सादगीपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि दीपावली स्नेह मिलन केवल सामाजिक मिलन का अवसर नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर जोड़ने और संगठनात्मक एकता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी भावना के साथ इस वर्ष भी कार्यक्रम को गरिमापूर्ण, अनुशासित और पारिवारिक वातावरण में आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। धुन्धाड़ा के बाफणा परिवार को मिला संपूर्ण लाभार्थी बनने का अवसर इस वर्ष 33वें दीपावली स्नेह मिलन के संपूर्ण लाभार्थी परिवार धुन्धाड़ा निवासी कुंदनमलजी खुशालजी बाफणा हैं। संघ की ओर से उनके परिवार के सहयोग को आयोजन की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। डॉ. लूनावत के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत सुबह परमात्मा की आरती एवं विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना से होगी। इसके बाद संघ की जनरल मीटिंग आयोजित की जाएगी, जिसमें संगठन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। इसी बैठक में नई कमेटी के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। नवयुवक और महिला मंडल के चयन पर विशेष जोर इस बार आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में संघ के नवयुवक मंडल और महिला मंडल का चयन शामिल है। डॉ. लूनावत ने बताया कि जिस प्रकार मुख्य कमेटी के सदस्यों का चयन संघ के सदस्यों के समक्ष किया जाएगा, उसी प्रकार प्रत्येक ग्राम से नवयुवक मंडल और महिला मंडल के सदस्यों का चयन भी किया जाएगा। इस पहल से संगठन में नई पीढ़ी और महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने का प्रयास दिखाई देता है। संघ का मानना है कि युवाओं की ऊर्जा और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पहली बार भक्ति-भजन का विशेष आयोजन 33वें दीपावली स्नेह मिलन में इस वर्ष एक और आकर्षक पहल की गई है। दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक भक्ति एवं भजन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें भक्ति मंडल श्री नाकोड़ा जैन कॉन्फ्रेंस भैरव भक्ति मंडल कर्नाटका द्वारा भक्ति और भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। डॉ. लूनावत ने बताया कि प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल पर आयोजित होने वाले इस स्नेह मिलन में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर भक्ति एवं भजन कार्यक्रम रखा गया है। इससे आयोजन में आध्यात्मिकता, श्रद्धा और सामाजिक स्नेह का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। संघ की तैयारियों से स्पष्ट है कि इस बार का दीपावली स्नेह मिलन केवल पारंपरिक सामाजिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें संगठनात्मक पुनर्गठन, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा आध्यात्मिक कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। आयोजन समिति द्वारा सभी व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि 15 नवंबर 2026 को श्री पार्श्व लब्धि धाम में होने वाला मरुधरा जैन संघ का 33वां दीपावली स्नेह मिलन समाज के लिए यादगार अवसर बन सके।

  • गुरुवाणी से जनजागरण का महामिशन: महंत दयाराम जी महाराज का सरल-सात्विक जीवन का संदेश

    आध्यात्मिकता के साथ आधुनिक सोच, सामाजिक संगठन, नशामुक्ति और आत्मनिर्भरता पर जोर; कलबी समाज से जनजागरण अभियान का सहभागी बनने का आह्वान भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) शिकारपुरा | 10 अगस्त, 2026 शिकारपुरा। पावन तीर्थ धाम शिकारपुरा के वर्तमान गादीपति महंत श्री श्री 108 श्री दयाराम जी महाराज द्वारा गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज की जीवन प्रेरक शिक्षाओं और गुरुवाणी को जन-जन तक पहुंचाने का जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मूल संदेश आध्यात्मिकता के साथ आधुनिक सोच, सामाजिक संगठन, आर्थिक आत्मनिर्भरता, पारिवारिक संस्कार और सरल-सात्विक जीवन को बढ़ावा देना है। गुरुवाणी से जनजागरण के इस अभियान को लेकर गुरुवाणी प्रचारक किशना राम पटेल ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए जागरूक, संगठित और आत्मनिर्भर बनना आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक, न्यायिक, मीडिया, युवा और महिला शक्ति से इस जनजागरण अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया। प्रचारक किशना राम पटेल के अनुसार महंत दयाराम जी महाराज का संदेश केवल आध्यात्मिक उपदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक जीवन पद्धति को मजबूत करने पर भी केंद्रित है। उनका संदेश है कि व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागृत होने के साथ आधुनिक ज्ञान और तकनीक से भी जुड़ा रहे, आर्थिक रूप से समर्थ बने, सामाजिक रूप से संगठित रहे तथा परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे। संगठन को मजबूत बनाने पर विशेष जोर गुरुवाणी प्रचारक के अनुसार महंत दयाराम जी महाराज सामाजिक संगठनों के कार्यकारी पदाधिकारियों और नेतृत्वकर्ताओं को अधिक प्रभावी एवं गुणात्मक कार्यप्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि मजबूत समाज के लिए केवल संख्या नहीं, बल्कि अनुशासित, पारदर्शी और परिणामदायी संगठनात्मक व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठन यदि योजनाबद्ध तरीके से काम करें और समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाएं तो सामूहिक शक्ति का प्रभाव कई गुना बढ़ सकता है। राजनीतिक नेतृत्व को समाजहित से जोड़ने का संदेश अभियान के माध्यम से राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों को भी समाजहित में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रचारक किशना राम पटेल ने बताया कि महंत दयाराम जी महाराज राजनीतिक नेतृत्व को रणनीतिक सोच, दूरदर्शिता और कुशल निर्णय क्षमता विकसित करने की प्रेरणा देते हैं। उनके अनुसार राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले सक्षम व्यक्तियों की क्षमता का उपयोग समाजहित, जनसेवा और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए होना चाहिए। इसी संदर्भ में चाणक्य नीति जैसे ऐतिहासिक नीति-सिद्धांतों से नेतृत्व क्षमता, विवेक और रणनीतिक सोच की प्रेरणा लेने की बात कही जा रही है। पंच-पटेल और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की अपील समाज की पारंपरिक न्यायिक एवं पंचायती व्यवस्था से जुड़े पंच-पटेलों को भी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया गया है। प्रचारक के अनुसार महंत दयाराम जी महाराज समाज के अनुभवी और न्यायप्रिय लोगों की क्षमता को सामाजिक न्याय, आपसी सद्भाव और विवादों के समाधान के लिए उपयोगी मानते हैं। गुरुवाणी के संदेश के माध्यम से समाज में न्याय, जिम्मेदारी, आपसी विश्वास और सामाजिक सुरक्षा की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। पंचायती व्यवस्था से जुड़े लोगों से निष्पक्षता और समाजहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रेरणा दी जा रही है। डिजिटल युग में संस्कारित मॉडर्न बनने का संदेश महंत दयाराम जी महाराज के जनजागरण अभियान का एक महत्वपूर्ण पक्ष आज की डिजिटल और आधुनिक जीवनशैली से भी जुड़ा है। प्रचारक किशना राम पटेल के अनुसार महंत श्री निरंतर प्रवास के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर "संस्कारित मॉडर्न" जीवन जीने का संदेश दे रहे हैं। इस संदेश में आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने के साथ-साथ भारतीय संस्कारों, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने को समाज की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल करने की अपील की जा रही है। नशामुक्ति और अहंकारमुक्त जीवन पर जोर जनजागरण अभियान में नशामुक्त समाज और अहंकारमुक्त मानव जीवन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। गुरुवाणी के माध्यम से लोगों को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने तथा संयमित, सात्विक और स्वस्थ जीवन अपनाने की प्रेरणा दी जा रही है। प्रचारक किशना राम पटेल ने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि संस्कार, शिक्षा, चरित्र, आपसी सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी से होती है। इसलिए युवा शक्ति और नारी शक्ति को जागृत एवं सशक्त बनाना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया गया है। युवा और नारी शक्ति की भागीदारी का आह्वान अभियान में जागृत युवा शक्ति और संस्कारित नारी शक्ति को सामाजिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है। युवाओं से शिक्षा, तकनीक, नेतृत्व और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे आने तथा महिलाओं से परिवार और समाज में संस्कार, शिक्षा एवं जागरूकता की भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया जा रहा है। गुरुवाणी प्रचारक किशना राम पटेल ने कहा कि यदि समाज आध्यात्मिक मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और संगठनात्मक शक्ति को अपनाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक मजबूत और संस्कारित वातावरण तैयार किया जा सकता है। अभियान का मूल संदेश यही है कि आध्यात्मिकता को जीवन का आधार बनाते हुए आधुनिकता को स्वीकार किया जाए, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना जाए, सामाजिक रूप से संगठित रहा जाए और परिवार तथा समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जिया जाए। गुरुवाणी प्रचारक किशना राम पटेल ने विशेष रूप से कलबी समाज के सज्जन महानुभावों सहित सर्व समाज से महंत दयाराम जी महाराज के इस जनजागरण अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया है। उनके अनुसार गुरुवाणी के जीवनोपयोगी संदेश को व्यवहार में उतारना ही इस अभियान की वास्तविक सफलता होगी।

  • शालिभद्र जी की 99 पेटियों का भव्य मंचन, भक्ति से गूंजा दादावाड़ी

    चातुर्मास के विशेष कार्यक्रम में स्वर्ण, वस्त्र और भोजन की 99 पेटियों का प्रतीकात्मक आयोजन; श्रद्धालुओं ने त्याग, तप और सुपात्र दान का संदेश ग्रहण किया भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त, 2026। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी, बसवनगुडी में चातुर्मास के रविवारीय विशेष कार्यक्रम के दौरान शालिभद्र जी की 99 पेटियां उतारने की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का भावपूर्ण मंचन किया गया। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ सहभागिता की और शालिभद्र जी के जीवन से जुड़े त्याग, तपस्या, संयम, संतोष एवं सुपात्र दान के प्रेरक संदेश को आत्मसात किया। यह विशेष आयोजन परम पूज्य साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी म.सा. की पावन प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। मंचन के दौरान शालिभद्र जी के जीवन प्रसंग को श्रद्धा और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा गया। कार्यक्रम ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ-साथ जीवन में दान, सेवा और सदाचार के महत्व का संदेश दिया। दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष तेजराज मालानी एवं महामंत्री कुशलराज गुलेच्छा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक कथा या मंचन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा और धर्म के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं। शालिभद्र जी के जीवन से जुड़ी यह प्रेरक कथा श्रद्धालुओं को यह संदेश देती है कि धन-संपत्ति का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग धर्म, सेवा और जरूरतमंदों के कल्याण में किया जाए। कार्यक्रम के अंतर्गत शालिभद्र जी की देवलोक से प्रतिदिन 99 स्वर्ण, वस्त्र एवं भोजन की पेटियां उतरने के प्रसंग का प्रतीकात्मक मंचन किया गया। आयोजन में लकी ड्रा के माध्यम से चयनित परिवारों को पेटियां प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई। इस धार्मिक आयोजन का लाभ श्रीमती प्रेमलता देवी एवं सज्जनसिंह जी खटोड़ परिवार, ब्यावर-बेंगलुरु द्वारा लिया गया। आयोजन के अवसर पर परम पूज्य गुरुदेव श्री मलयप्रभ सागर जी म.सा. आदि ठाणा ने शुभकामनाएं प्रदान कीं। गुरुदेव के आशीर्वचन एवं साध्वीजी के मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। ट्रस्ट के ललित डाकलिया ने शालिभद्र जी के पूर्व भव से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि साधु भगवंत को सुपात्र दान के रूप में खीर का वोहराने के फलस्वरूप शालिभद्र जी को अनंत पुण्य राशि प्राप्त हुई। इस प्रसंग को धर्म और दान की शक्ति से जोड़ते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में सुपात्र दान, सेवा और सदाचार को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शालिभद्र जी का जीवन भौतिक वैभव के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना और त्याग की प्रेरणा देता है। कथा का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति के जीवन में वास्तविक समृद्धि केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि धर्म, संयम, संतोष और सेवा भावना से आती है। कार्यक्रम को आकर्षक एवं जीवंत बनाने में अखिल भारतीय खरतरगच्छ महिला परिषद, बेंगलुरु शाखा के साथ गुंजन और महक का विशेष सहयोग रहा। मंचन के दौरान सनी रांका, रेखा लोढ़ा, संगीता पारख और रेणु पालरेचा ने सुंदर भक्ति गीत प्रस्तुत किए। भक्तिमय गीतों और धार्मिक प्रसंगों से वातावरण भावविभोर हो उठा। कार्यक्रम में ज्ञान वाटिका के बच्चों ने भी मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने धार्मिक आयोजन में नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी और संस्कारों से जुड़ाव का संदेश दिया। आयोजन में ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बाबूलाल भन्साली, कोषाध्यक्ष रनजीत ललवानी, सहमंत्री धर्मेन्द्र संकलेचा, पुखराज कवाड, मोतीलाल ललवानी सहित संघ एवं विभिन्न संस्थाओं के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्तिभाव देखने को मिला। शालिभद्र जी की 99 पेटियां उतारने का यह विशेष मंचन धार्मिक कथा, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुति का प्रभावशाली संगम बन गया। कार्यक्रम ने उपस्थित समाजजनों को धर्म के साथ जीवन मूल्यों को जोड़ने की प्रेरणा दी। चातुर्मास के दौरान इस प्रकार के आयोजन जैन समाज में धार्मिक चेतना, सामूहिक सहभागिता और संस्कारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शालिभद्र जी के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं ने त्याग, तपस्या, संयम, संतोष, सेवा और सुपात्र दान जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

  • मंजूनाथ नगर में गूंजा मां अण्णम्माा देवी का जयघोष, 11वां वार्षिक उत्सव धूमधाम से संपन्न

    धार्मिक आस्था और संस्कृति के रंग में रंगा ईटमाडु; महेंद्र मुणोत ने बच्चों को बांटी शिक्षण सामग्री, बोले—संस्कारों से जुड़ती है नई पीढ़ी भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त, 2026। मंजूनाथ नगर अण्णम्माा देवी सेवा समिति, ईटमाडु के तत्वावधान में 11वां अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव हर्ष, उल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। वार्षिक उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की मंगलकामना की। धार्मिक आस्था के साथ आयोजित इस समारोह में सामाजिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता भी देखने को मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने अण्णम्माा देवी के दर्शन कर विधिवत आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित की। इस पहल के माध्यम से धार्मिक आयोजन को शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का सकारात्मक संदेश दिया गया। अपने संबोधन में महेंद्र मुणोत ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज की परंपराओं और संस्कारों को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। बच्चों को अपनी जड़ों और संस्कृति से परिचित कराने के लिए समाज को निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने सनातन संस्कृति पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी विविधता, आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सेवा भावना में निहित है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से जब सामाजिक सेवा और शिक्षा जैसे कार्यों को जोड़ा जाता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव समाज की आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। 11वां अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि कार्यक्रम में धार्मिक श्रद्धा के साथ बच्चों के शैक्षणिक विकास को प्रोत्साहित करने की पहल की गई। शिक्षण सामग्री वितरण से बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिला और अभिभावकों तथा समाजजनों को शिक्षा के महत्व का संदेश भी मिला। आयोजकों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का सम्मान कर उनके सहयोग एवं सहभागिता के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मान समारोह के दौरान समिति के सदस्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। मंजूनाथ नगर और ईटमाडु क्षेत्र में आयोजित इस अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया। स्थानीय श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े लोगों की सहभागिता से कार्यक्रम में उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा। ऐसे वार्षिक धार्मिक उत्सव समाज के लिए केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं होते, बल्कि सामूहिक सहभागिता, सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का मंच भी बनते हैं। खासकर बच्चों और युवाओं की भागीदारी से धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का भावी पीढ़ी तक हस्तांतरण संभव होता है। कार्यक्रम में शिक्षण सामग्री वितरण की पहल ने यह भी रेखांकित किया कि धार्मिक संस्थाएं और सामाजिक संगठन यदि शिक्षा, संस्कार और सेवा को अपनी गतिविधियों से जोड़ें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव को गति मिल सकती है। आयोजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने मां अण्णम्माा देवी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। समिति के सदस्यों ने वार्षिक उत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव के माध्यम से धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक सेवा का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ समाज के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को मजबूत करना भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

  • ज्ञानोदय परिसर में मंगल कलश स्थापना से गूंजा धर्मनाद, वर्षायोग चातुर्मास 2026 का भव्य शुभारंभ

    मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में उमड़ा श्रद्धा सैलाब; आत्मचिंतन, संयम और धर्मसाधना को जीवन में उतारने का संदेश भारतार्थ खबर। बेंगलुरु संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त, 2026। ज्ञानोदय परिसर, इनर रिफ्लेक्शन सेंटर, तुबरहल्ली में रविवार को वर्षायोग चातुर्मास 2026 का भव्य और आध्यात्मिक शुभारंभ हुआ। निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित मंगल कलश स्थापना समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंगल कलशों की विधि-विधानपूर्वक स्थापना के साथ आगामी चार माह के वर्षायोग चातुर्मास 2026 का मंगल आगाज हुआ। समारोह में धर्म, भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का प्रभावशाली वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान आचार्य परंपरा का स्मरण, मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण, प्रवचन, अतिथि सम्मान, श्रीफल अर्पण तथा भक्ति-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद दीप प्रज्वलन एवं पूज्य आचार्यों के चित्रों का अनावरण किया गया। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज तथा नव आचार्य श्री समयसागर जी महाराज की आचार्य परंपरा का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य ब्र. प्रदीप भैया (सुयश) ने किया। श्री मुकेश भाईजी एवं विभिन्न समितियों ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। स्वागत उद्बोधन में श्री राकेश बरया ने मुनिसंघ, अतिथियों और उपस्थित समाजबंधुओं का अभिनंदन किया। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशिष्ट अतिथियों और समाजजनों की उपस्थिति रही। आईपीसी के प्रबंध निदेशक एवं एनएचपीसी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री अनिमेष सिन्हा का विशेष सम्मान किया गया। जस्टिस देसाई, डीजी जिनेंद्र जी, बिजापुर से पधारे श्री शीतल जी, आईएएस श्री मनोज पाटनी तथा आईआरएस श्री सौरभ जैन सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने समारोह की शोभा बढ़ाई। मंगल कलश स्थापना बना समारोह का मुख्य आकर्षण वर्षायोग चातुर्मास 2026 के शुभारंभ अवसर पर मंगल कलश स्थापना समारोह का प्रमुख आकर्षण रही। विभिन्न आध्यात्मिक भावनाओं और आचार्य परंपराओं को समर्पित मंगल कलशों की विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक स्थापना की गई। इनमें अमृत सर्वार्थ सिद्धि कलश, आचार्य विद्यासागर शिविर कलश, अमृत सिद्धि कलश, सर्वार्थ सिद्धि कलश, सिद्धि कलश, अर्हत परमेष्ठी कलश, सिद्ध परमेष्ठी कलश, आचार्य परमेष्ठी कलश, उपाध्याय परमेष्ठी कलश, साधु परमेष्ठी कलश, आचार्य शांतिसागर कलश और आचार्य समयसागर कलश शामिल रहे। प्रथम कलश के पुण्यार्जक श्री महेश-मंजू काला, श्री अंकित-कृतिका काला एवं परिवार रहे। काला परिवार ने प्रथम कलश स्थापना का पुण्य प्राप्त करते हुए चातुर्मास के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया। अन्य मंगल कलशों के पुण्यार्जक परिवारों में श्री दिवाकर चित्तौड़ा, श्रीमती शिल्पी, यति, रिति एवं गुणमाला जैन; श्री नाथूलाल जैन, श्रीमती प्रभा जैन, रितेश जैन, शैली जैन, हितार्थ, क्रिशा जैन एवं परिवार; श्री अनिल कुमार जैन एवं श्रीमती उमा देवी जैन, सलामतपुर; श्री कमल, शालिनी, कृति जैन एवं परिवार; श्री नथमल, प्रतीक, अनुश्री, पविद्य एवं श्रेयांशी बाकलीवाल, नागौर-बेंगलुरु; श्रीमती आरती धिरज कलमकर, बेंगलुरु एवं श्री भरत राजकुमार जैन, नागपुर परिवार; श्री सुरेश-शारदा जैन, भानु भारती जैन एवं परिवार; श्री मुकेश, रक्षा भाईजी, आशी, अनिमेष भाईजी एवं परिवार तथा श्री वैभव, नेहा, नेवान, निर्वाण एवं अभय कुमार जी जैन शामिल रहे। मुनि श्री धवलसागर जी ने समझाया मंगल कलश का आध्यात्मिक अर्थ मंगल कलश स्थापना के प्रथम आध्यात्मिक चरण में मुनि श्री 108 धवलसागर जी महाराज ने प्रभावशाली मंगल प्रवचन दिया। उन्होंने कलश के आध्यात्मिक स्वरूप को समझाते हुए कहा कि मंगल कलश केवल मिट्टी या धातु का पात्र नहीं, बल्कि मनुष्य के घट यानी शरीर और आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मंगल कलश में पवित्र जल और औषधियों की स्थापना की जाती है, उसी प्रकार चातुर्मास का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के हृदय रूपी घट को सम्यक्त्व, संयम, भक्ति और वात्सल्य के भावों से भरना है। मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि केवल बाहरी रूप से कलश की स्थापना कर देना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ व्यक्ति को अपने भीतर भी मंगल भावों की स्थापना करनी चाहिए। वर्षायोग चातुर्मास 2026 आत्मनिरीक्षण का ऐसा अवसर है, जिसमें व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को देखकर उनमें सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास कर सकता है। इनर रिफ्लेक्शन सेंटर के संदर्भ में उन्होंने बेंगलुरु जैसे आधुनिक और तकनीकी महानगर में आत्मचिंतन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और निरंतर भागदौड़ से भरे जीवन में मनुष्य को समय निकालकर अपने भीतर लौटने और स्वयं को देखने की आवश्यकता है। उन्होंने साधर्मिक वात्सल्य और संघबद्धता को भी चातुर्मास की महत्वपूर्ण भावना बताया। उनके अनुसार चातुर्मास केवल व्यक्तिगत साधना का अवसर नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सहयोग, वात्सल्य और धर्मप्रभावना को मजबूत करने का भी समय है। मुनि श्री वीरसागर जी का ‘आत्म-सिलिकॉन वर्षायोग’ संदेश समारोह का विशेष आकर्षण निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज का मंगल प्रवचन रहा। उन्होंने बेंगलुरु की पहचान सिलिकॉन सिटी के रूप में करते हुए धर्म, तकनीक और आत्मविकास के बीच एक प्रेरणादायी संबंध प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘आत्म-सिलिकॉन वर्षायोग’ की संकल्पना समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार सिलिकॉन चिप तकनीक और संचार की बाहरी दुनिया में विभिन्न प्रणालियों को जोड़ने का माध्यम बनती है, उसी प्रकार धर्म, संयम, ध्यान और आत्मचिंतन व्यक्ति को आत्मिक विकास की दिशा में जोड़ सकते हैं। मुनिश्री ने कहा कि बाहरी तकनीकी प्रगति के साथ यदि व्यक्ति अपने भीतर का विकास भी करता है, तभी जीवन अधिक सार्थक बन सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को अपने भीतर मौजूद क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को पहचानने और उन्हें कम करने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने विशेष रूप से लोभ और बढ़ती तृष्णा के प्रभाव को समझाते हुए कहा कि अधिक पाने की निरंतर इच्छा मानसिक अशांति और अनेक विकारों का कारण बन सकती है। मुनिश्री ने मान और आत्मसम्मान के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि मान बाहरी प्रशंसा और दूसरों की स्वीकृति पर निर्भर करता है, जबकि आत्मसम्मान भीतर से उत्पन्न होने वाली स्थिर भावना है। जब व्यक्ति अपने मान को दूसरों के व्यवहार से जोड़ देता है और अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता, तो असंतोष और क्रोध पैदा हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि चातुर्मास के दौरान अपने भावों को पहचानें, आत्मचिंतन करें और भावशुद्धि की दिशा में निरंतर आगे बढ़ें। अतिथियों का सम्मान, मंदिर प्रतिनिधियों ने अर्पित किए श्रीफल कार्यक्रम के अगले चरण में मंगल कलश स्थापना, अतिथि सम्मान और विभिन्न जैन मंदिरों के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों द्वारा श्रीफल भेंट करने का क्रम हुआ। आईपीसी के प्रबंध निदेशक एवं एनएचपीसी के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री अनिमेष सिन्हा का जीवदया, परोपकार, समाजसेवा और निःस्वार्थ सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। जस्टिस देसाई, डीजी जिनेंद्र जी, बिजापुर से आए श्री शीतल जी, आईएएस श्री मनोज पाटनी और आईआरएस श्री सौरभ जैन सहित अनेक गणमान्य अतिथियों का भी सम्मान किया गया। बेंगलुरु के विभिन्न जैन मंदिरों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने मुनिसंघ के वर्षायोग के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्रीफल अर्पित किए। इससे समारोह को व्यापक सामाजिक और धार्मिक स्वरूप मिला। मुनि श्री विशालसागर जी ने दिया संयमित जीवन का संदेश मुनि श्री 108 विशालसागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में सम्यक दर्शन, श्रावक धर्म और संयमित जीवनशैली को चातुर्मास की साधना का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन केवल धार्मिक सिद्धांतों को जानना या ग्रंथों का अध्ययन करना नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब धार्मिक विचार व्यक्ति के जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनते हैं। उन्होंने मुनिसंघ की वैयावृत्ति, देव-शास्त्र-गुरु की भक्ति एवं पूजन तथा क्षमता के अनुसार व्रत और नियम धारण करने की प्रेरणा दी। मुनिश्री ने मान और अहंकार से बचने का संदेश देते हुए कहा कि धार्मिक उपलब्धियां, सम्मान या किसी धार्मिक दायित्व को व्यक्ति की प्रतिष्ठा और अहंकार की संतुष्टि का साधन नहीं बनना चाहिए। धर्म का उद्देश्य भीतर के अहंकार को कम करना और विनम्रता विकसित करना है। उन्होंने युवा पीढ़ी को जैन संस्कारों से जोड़ने पर भी जोर दिया। दैनिक जीवन में धार्मिक अनुशासन, रात्रि भोजन त्याग, देवदर्शन, स्वाध्याय और शुद्ध खान-पान जैसे नियमों को अपनाने की प्रेरणा दी। ‘प्रभु को जीवन साथी बनाएं’—मुनि श्री वीरसागर जी कार्यक्रम के अंतिम आध्यात्मिक चरण में मुनि श्री 108 वीरसागर जी महाराज ने पुनः मंगल प्रवचन दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म को केवल धार्मिक अवसरों तक सीमित न रखते हुए जीवन की नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने व्यापार, नौकरी और जीवन में मूलनायक भगवान एवं इष्टदेव को सहभागी बनाए। मुनिश्री ने शुद्ध आय का कम से कम दस प्रतिशत दान, जीवदया, मुनि-वैयावृत्ति और धर्मकार्यों के लिए समर्पित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी उपलब्धियों और आय में धर्म को भी सहभागी बनाता है तो जीवन केवल भौतिक उन्नति तक सीमित नहीं रहता। सेवा, दान, जीवदया, गुरु-वैयावृत्ति और स्वाध्याय को जीवन की प्राथमिकताओं में स्थान देने से आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बेंगलुरु में हो रहे विभिन्न धार्मिक एवं मंदिर निर्माण कार्यों के लिए मंगल आशीर्वाद देते हुए समस्त जैन समाज को आगामी चार माह तक संयम, स्वाध्याय, धर्मसाधना और गुरु-वैयावृत्ति से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ समारोह में भक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। संगीतकार सुनील ने अपनी संगीत प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बच्चों की मनोहारी नृत्य प्रस्तुति ने भी उपस्थित अतिथियों और श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों में धार्मिक भावनाओं और संस्कारों की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली। इससे समारोह में आध्यात्मिकता के साथ सांस्कृतिक रंग भी जुड़ गया। चार माह तक धर्म-साधना का केंद्र बनेगा ज्ञानोदय परिसर दिगंबर जैन परंपरा में वर्षायोग चातुर्मास का विशेष महत्व है। वर्षा ऋतु में मुनिराज एक स्थान पर स्थिर रहकर साधना, ध्यान, स्वाध्याय और धर्मप्रभावना करते हैं। यह अवधि श्रावकों के लिए भी मुनिसंघ के सान्निध्य में धर्मश्रवण, तप, संयम और आत्मचिंतन का विशेष अवसर प्रदान करती है। ज्ञानोदय परिसर, इनर रिफ्लेक्शन सेंटर, तुबरहल्ली में वर्षायोग चातुर्मास 2026 के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन होगा। इनमें अभिषेक एवं शांतिधारा, मंगल प्रवचन, स्वाध्याय, प्रश्न-समाधान, आरती, भक्ति और अन्य धार्मिक कार्यक्रम शामिल रहेंगे। मंगल कलश स्थापना के साथ शुरू हुआ यह चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने, अहंकार कम करने, भावशुद्धि, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है। यह आयोजन स्वर्गीय श्री मिश्रीलाल जी काला एवं स्वर्गीय श्रीमती फूलादेवी काला के परिवार के पुण्यार्जकत्व में सम्पन्न हुआ। इसमें महेश कुमार एवं मंजू देवी काला, अंकित एवं कृतिका काला तथा परिवारजनों का विशेष योगदान रहा। समापन अवसर पर श्री वैभव जैन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुनिसंघ, सभी अतिथियों, पुण्यार्जक परिवारों, मंदिर पदाधिकारियों, श्रद्धालुओं और कार्यक्रम में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी समाजबंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह के बाद सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोजन में सहभागिता की। मंगल कलश स्थापना के साथ वर्षायोग चातुर्मास 2026 का शुभारंभ ज्ञानोदय परिसर में आध्यात्मिक जागरण के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में हुआ। आगामी चार माह मुनिसंघ के सान्निध्य में धर्म, संयम, स्वाध्याय, सेवा, आत्मचिंतन और साधना के संदेश को समाज तक पहुंचाने का अवसर बनेंगे।

  • रिश्तों की महक आख़िरी रोटी (भाग–4)

    दिल को छू लेने वाली मौलिक कहानियाँ लेखक: अशोक कुमार सिंह एक मासूम सवाल... जिसने तीन बेटों की ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच सामने ला दिया। आँगन में बिछी दरी पर पूरा परिवार एक साथ बैठा था। वर्षों बाद उस घर में फिर से हँसी सुनाई दे रही थी। पीतल की थालियाँ सजी थीं। मिट्टी के चूल्हे से उठती रोटियों की खुशबू पूरे घर में फैल रही थी। सरस्वती देवी एक-एक करके सबकी थाली में गर्म रोटियाँ रख रही थीं। पहले बड़े बेटे राघव की थाली... फिर मोहन... फिर सुरेश... फिर बहुएँ... फिर पोते-पोतियाँ... हर बार रोटी रखते हुए उनके चेहरे पर वही संतोष था, जो केवल एक माँ के चेहरे पर होता है। कुछ ही देर में टोकरी लगभग खाली हो गई। अम्मा ने तवे पर आख़िरी लोई डाली। रोटी धीरे-धीरे फूलने लगी। उसी समय छोटी गौरी ने चारों ओर नज़र दौड़ाई। सबकी थालियों में रोटियाँ थीं... लेकिन... उसने दादी की ओर देखा। दादी अब भी खड़ी थीं। उनके सामने कोई थाली नहीं थी। गौरी ने मासूमियत से पूछा— "दादी... आपकी थाली कहाँ है?" पूरा आँगन जैसे एक पल के लिए थम गया। राघव के हाथ में रखा निवाला वहीं रुक गया। मोहन ने पहली बार सिर उठाकर माँ की ओर देखा। सुरेश की नज़र सीधे रसोई के दरवाज़े पर जा टिकी। अम्मा मुस्कुराईं। उन्होंने हमेशा की तरह बात को हल्का करने की कोशिश की। "अरे बिटिया... मैं बाद में खा लूँगी। पहले तुम लोग खा लो।" लेकिन गौरी मानने वाली नहीं थी। वह उठकर दादी के पास पहुँची। रोटी की टोकरी में झाँका। उसमें केवल एक आख़िरी रोटी बची थी। उसने वह रोटी उठाई और बोली— "दादी... यह आपकी है न?" अम्मा ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा— "नहीं बिटिया... जिसे सबसे ज़्यादा भूख होगी, वह खा लेगा।" गौरी ने भोलेपन से फिर पूछा— "दादी... आपको भूख नहीं लगती क्या?" यह सुनते ही रसोई की दीवारों पर जैसे वर्षों से दबे शब्द गूँज उठे। राघव की आँखों के सामने बचपन का वह दृश्य कौंध गया जब अम्मा अपनी रोटी उसे खिलाकर कहती थीं— "मुझे भूख नहीं है बेटा।" मोहन को याद आया... कितनी ही बार अम्मा ने अचार और पानी से रात गुज़ार दी थी, ताकि बच्चों का पेट भर सके। सुरेश की आँखों से आँसू बह निकले। उसे समझ आ गया... माँ ने कभी यह नहीं कहा कि वह भूखी है... क्योंकि माँ की भूख हमेशा बच्चों की भूख से हार जाती है। आँगन में सन्नाटा था। चूल्हे की आग अब भी जल रही थी... लेकिन तीनों बेटों के भीतर पश्चाताप की आग उससे कहीं अधिक धधक रही थी। क्रमशः... अगले भाग में पढ़िए... "जब तीनों बेटों ने माँ की खाली थाली देखी... और वर्षों से सीने में दबा अपराधबोध आँसुओं में बह निकला।" अन्य कहानी , मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी ज़रूर पढ़िए https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-1 https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-2 https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-महक-आख-िरी-रोटी-भाग-3 https://www.bhaarataarth.com/post/माँ-की-आख-िरी-गुल्लक https://www.bhaarataarth.com/post/रिश्तों-की-सबसे-बड-ी-द-लत केवल भारतार्थ ख़बर पर प्रकाशित मौलिक धारावाहिक एउपन्यास — मौन दान। एक दिल दहलाने वाली कहानी धारावाहिक उपन्यास जरूर पढ़ि भाग 01 भाग 02 भाग 03 भाग 4 भाग 5 भाग 6 भाग 7 भाग 8 भाग 9 भाग 10 भाग 11 नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में इन पोस्ट्स पर अपनी राय ज़रूर दें। आपका नज़रिया ही लोकतंत्र की ताकत है; देश के निर्माण में आपकी अहम भूमिका है। सटीक, वैज्ञानिक और साहित्यिक खबरें पढ़ने के लिए 'भारतार्थ समाचार' से जुड़े रहें। अपना समर्थन दिखाएं—हमें लाइक, शेयर और फ़ॉलो करें—ताकि हर ज़रूरी अपडेट आपको सबसे पहले मिले। ताज़ा खबरों के लिए "भारतार्थ खबर" के साथ बने रहें।

  • कर्नाटक में सूखे पर गरजे विजयेंद्र, बोले—किसानों को राहत दे सरकार

    बी.वाई. विजयेंद्र का कांग्रेस सरकार पर हमला; सूखा राहत, बिदादी टाउनशिप और किसानों की जमीन के मुद्दे पर सदन में लड़ाई का ऐलान कर्नाटक में सूखे और किसान संकट को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र का बयान भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 09 अगस्त, 2026 | बेंगलुरु, कर्नाटक / कर्नाटक में सूखा, किसान संकट और बिदादी टाउनशिप का मुद्दा एक बार फिर सियासी टकराव के केंद्र में आ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है। विजयेंद्र ने कहा कि बारिश की कमी से किसान परेशान हैं, कई इलाकों में खेती प्रभावित हुई है और पेयजल संकट की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। ऐसे समय में सरकार को किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस राहत देनी चाहिए। विजयेंद्र ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सूखे की स्थिति में किसानों को कम से कम एक बार जवाब तो मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और जरूरत के मुताबिक कर्ज राहत की दिशा में कदम उठाने की मांग की। सूखे पर सरकार को घेरा विजयेंद्र के अनुसार, बारिश की कमी का असर खेती पर पड़ रहा है और किसान संकट में हैं। बाजरा, ज्वार, फल एवं सब्जियों सहित विभिन्न फसलों की खेती करने वाले किसानों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार को सूखे की स्थिति पर तत्काल सक्रिय होकर प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करना चाहिए। विजयेंद्र ने मांग की कि किसानों को राहत देने में देरी नहीं होनी चाहिए। इससे पहले भी विजयेंद्र बारिश की कमी को लेकर राज्य सरकार से प्रभावित किसानों को ₹50,000 प्रति एकड़ तक मुआवजा देने की मांग कर चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने उत्तर कर्नाटक के कई जिलों में कम बारिश और खेती प्रभावित होने का मुद्दा उठाया था। ‘सिर्फ चिट्ठी लिखने से नहीं मिलेगी राहत’ विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सहायता मांगने की रणनीति पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि केंद्र से मदद मांगना अपनी जगह है, लेकिन राज्य सरकार को पहले अपने स्तर पर किसानों के लिए राहत के ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि सूखे की स्थिति में राज्य की ओर से अब तक क्या राहत दी गई है और प्रभावित किसानों तक सहायता किस तरह पहुंचाई गई है। विजयेंद्र का आरोप है कि सरकार को किसानों के बीच जाकर वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए और तत्काल अंतरिम राहत की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई से दूर किया जाना चाहिए। बिदादी टाउनशिप पर भी सरकार को घेरा विजयेंद्र ने बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन और उनके हितों से जुड़े इस मुद्दे पर भाजपा अपना संघर्ष जारी रखेगी। विपक्ष पहले से ही बिदादी टाउनशिप परियोजना के विरोध में किसानों के साथ खड़ा होने का दावा कर रहा है। भाजपा ने किसानों की जमीन के मुद्दे को विधानसभा के भीतर भी जोरदार तरीके से उठाने की बात कही है। जुलाई में विजयेंद्र और अन्य भाजपा नेताओं ने बिदादी टाउनशिप को लेकर किसानों के पक्ष में आंदोलन किया था। विजयेंद्र का कहना है कि किसानों की सहमति और उनके हितों की अनदेखी करके विकास परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर विपक्ष सदन के भीतर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। किसानों की जमीन और विकास मॉडल पर बहस बिदादी टाउनशिप को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि कृषि भूमि को विकास परियोजनाओं के लिए लेने से किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, परियोजना को लेकर सरकार की ओर से विकास और शहरी विस्तार का पक्ष सामने आया है। ऐसे में बिदादी का मुद्दा केवल जमीन अधिग्रहण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसान हित बनाम शहरी विकास की व्यापक बहस का विषय बन गया है। वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले पर भी हमला विजयेंद्र ने पूर्व मंत्री नागेंद्र को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन से जुड़े धन के कथित दुरुपयोग के मामले में कार्रवाई का सामना कर चुके व्यक्ति को दोबारा मंत्री पद दिए जाने पर भाजपा आपत्ति जताती है। यह आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा है और संबंधित मामले में कानूनी प्रक्रिया तथा अदालत के निर्णय को अंतिम आधार माना जाना चाहिए। विजयेंद्र ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा के विरोध की बात कही। RSS को लेकर प्रियांक खड़गे पर पलटवार विजयेंद्र ने कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे की RSS को लेकर आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने RSS को राष्ट्रवादी विचारों और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा संगठन बताते हुए कहा कि उसके योगदान की आलोचना करने से पहले उसके कार्यों को समझना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर RSS को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा इस तरह के आरोपों का राजनीतिक स्तर पर जवाब देगी। सदन में उठेंगे किसान और बिदादी के मुद्दे विजयेंद्र ने संकेत दिया कि आगामी विधानसभा सत्र में भाजपा किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। सूखा, फसल नुकसान, पेयजल, मुआवजा और बिदादी टाउनशिप जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए सरकार को घेरने के प्रमुख हथियार बन सकते हैं। जुलाई में भी विजयेंद्र ने कहा था कि भाजपा और जेडीएस मिलकर विधानसभा सत्र में बिदादी टाउनशिप, उत्तर कर्नाटक की समस्याओं और कावेरी क्षेत्र के किसानों की परेशानी जैसे मुद्दे उठाएंगे। अब सरकार के सामने क्या चुनौती? कर्नाटक में बारिश की स्थिति और कृषि संकट को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने के बीच राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित किसानों तक समय पर राहत पहुंचाने की है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि किसान संगठन भी अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हैं। राजनीतिक आरोपों से अलग देखें तो सूखे जैसी स्थिति में फसल नुकसान का वैज्ञानिक आकलन, पेयजल एवं चारे की उपलब्धता, राहत पैकेज और किसानों तक समय पर सहायता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। विजयेंद्र ने सरकार से इसी दिशा में तेजी से कार्रवाई करने की मांग की है और स्पष्ट किया है कि भाजपा किसानों के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है।

  • राम-राज का संदेश: नशे से मुक्ति, गुरुवाणी से जागृति

    कलबी समाज से नशामुक्ति का आह्वान; गुरुवाणी को बनाया सामाजिक बदलाव का आधार नशामुक्ति जागरूकता अभियान एवं कलबी समाज के संत/समाजजन भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 09 अगस्त, 2026 | बेंगलुरु, कर्नाटक नशामुक्ति, गुरुवाणी और सामाजिक जागृति को लेकर कलबी समाज में एक नई चेतना का संदेश सामने आया है। गुरुवाणी प्रचारक किशनाराम पटेल ने समाज के जागृत सज्जनों, युवाओं और पंच परमेश्वरों से आह्वान किया है कि नशे के खिलाफ संघर्ष केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि इसे संस्कार, आत्मसंयम और गुरुवाणी के मार्ग से सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। किशनाराम पटेल के अनुसार, गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज ने समाज को नशामुक्त और नीति-परायण जीवन जीने की प्रेरणा दी थी। उनका कहना है कि आज बदलते समय में नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रभाव केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और परिवार को ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति अभियान को भय या दंड की मानसिकता से आगे बढ़ाकर आत्मजागरण और संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। उनका संदेश है कि व्यक्ति पुलिस या कानून के डर से नहीं, बल्कि अपने विवेक, परिवार और गुरुवाणी की प्रेरणा से नशे को त्यागे। गुरुवाणी से नशामुक्त समाज का संदेश किशनाराम पटेल ने कहा कि समाज में पिछले कई दशकों से नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या मौजूद रही है। बदलते दौर में रासायनिक एवं विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों की उपलब्धता और सेवन को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए परिवार, समाज और धार्मिक नेतृत्व की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि गुरुवाणी को केवल धार्मिक उपदेश के रूप में न देखकर जीवन-व्यवहार का मार्गदर्शन बनाया जाए। उनके अनुसार, आत्मसंयम, सदाचार और सात्विक जीवनशैली को अपनाकर नशे जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध मजबूत वातावरण तैयार किया जा सकता है। युवाओं को नशे से बचाने पर जोर नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को जागरूक करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि युवा किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि युवा नशे से मुक्त, शिक्षित, संस्कारित और सकारात्मक सोच वाले होंगे तो परिवार से लेकर राष्ट्र तक विकास की गति मजबूत होगी। उन्होंने समाज के संतों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, महिलाओं, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों से भी नशामुक्ति के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का आह्वान किया। प्रशासन और समाज मिलकर करें काम किशनाराम पटेल ने कहा कि नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए प्रशासनिक स्तर पर चलाए जा रहे प्रयासों के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। कानून व्यवस्था नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन नशे की मांग को समाप्त करने के लिए सामाजिक चेतना और पारिवारिक संस्कारों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि यदि समाज स्वयं नशे के खिलाफ दृढ़ संकल्प ले और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए सामूहिक प्रयास करे, तो नशामुक्ति अभियान को स्थायी सफलता मिल सकती है। 'राज, राम और राजाराम' के संदेश से जोड़ने का प्रयास गुरुवाणी प्रचारक ने अपने संदेश में शिकारपुरा को गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान की तपोस्थली के रूप में उल्लेखित करते हुए कहा कि यदि समाज अपने आराध्य के उपदेशों को व्यवहार में उतारता है तो यह नशामुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण सामाजिक योगदान होगा। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार का विषय नहीं है। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें शिक्षा, संस्कार, रोजगार, खेल, सेवा और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने समाज के पंच परमेश्वरों और सामाजिक नेतृत्व से भी अपेक्षा जताई कि वे नशामुक्ति के संदेश को गांव-गांव और परिवार-परिवार तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। नशे के खिलाफ बने सामूहिक संकल्प किशनाराम पटेल ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाना समाज का साझा दायित्व है। इसके लिए परिवार में संवाद, युवाओं के साथ विश्वासपूर्ण व्यवहार और नशे के दुष्प्रभावों को लेकर निरंतर जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि नशे के खिलाफ केवल अभियान चलाने के बजाय नशामुक्त जीवन को सामाजिक प्रतिष्ठा और संस्कार का प्रतीक बनाया जाए। उनके अनुसार, यदि गुरुवाणी की प्रेरणा, सामाजिक एकजुटता और प्रशासनिक प्रयास एक साथ आगे बढ़ें तो नशामुक्ति का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।

  • बेंगलुरु में सावन महोत्सव: राजपुताना मातृशक्ति ने जमाया रंग

    हरी साड़ी, चूड़ियों और सोलह श्रृंगार से सजा बिहार भवन; प्रतियोगिताओं में दिखा उत्साह, आरटी नगर मातृशक्ति की नई कार्यकारिणी घोषित बेंगलुरु के बिहार भवन में आयोजित सावन महोत्सव में भारतीय राजपुताना सेवा संगठन की मातृशक्ति भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 09 अगस्त, 2026 | बेंगलुरु, कर्नाटक बेंगलुरु में सावन महोत्सव के अवसर पर भारतीय राजपुताना सेवा संगठन, आरटी नगर मातृशक्ति की ओर से बिहार भवन में भव्य एवं रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। हरी साड़ियों, हरी चूड़ियों और पारंपरिक सोलह श्रृंगार से सजी मातृशक्ति ने सावन की मनमोहक छटा बिखेरी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मनोरंजक प्रतियोगिताओं और सामाजिक संवाद से सजा यह आयोजन महिला शक्ति, संगठनात्मक एकता और भारतीय संस्कृति के रंगों का जीवंत संगम बन गया। कार्यक्रम का आयोजन संगीता सिंह, आरती सिंह, नीतू सिंह एवं रूबी सिंह के नेतृत्व में किया गया। बेंगलुरु में निवास कर रहे भारतीय राजपुताना सेवा संगठन से जुड़े सदस्यों और बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। सावन के रंग में रंगा बिहार भवन सावन महोत्सव के दौरान बिहार भवन परिसर में उत्सव का विशेष माहौल देखने को मिला। मातृशक्ति ने हरे रंग की साड़ियों और हरी चूड़ियों के साथ सावन की पारंपरिक पहचान को खूबसूरती से प्रस्तुत किया। महिलाओं ने गीत-संगीत, नृत्य और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से उत्सव का आनंद लिया। आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक मेलजोल, आपसी संवाद और संगठनात्मक एकता को भी मजबूत करने का संदेश दिया गया। मेहंदी से लेकर नृत्य तक, प्रतियोगिताओं में दिखा उत्साह सावन महोत्सव में मातृशक्ति के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मेहंदी प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता, गायन प्रतियोगिता, म्यूजिकल चेयर और स्पून रेस जैसी गतिविधियों में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘सावन के सोलह श्रृंगार’ प्रतियोगिता रही। इसमें मातृशक्ति ने पारंपरिक परिधान, श्रृंगार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम से भारतीय परंपरा की सुंदर झलक प्रस्तुत की। प्रतियोगिताओं ने आयोजन में उत्साह और उमंग को और बढ़ा दिया। सेवा यात्रा और संगठन विस्तार पर चर्चा कार्यक्रम के प्रारंभ में भारतीय राजपुताना सेवा संगठन की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक की सेवा यात्रा पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने संगठन की सामाजिक गतिविधियों और विभिन्न राज्यों में किए जा रहे सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन लगातार विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर राजेश्वर सिंह एवं लखन सिंह ने मातृशक्ति की सामाजिक भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि परिवार की मजबूती के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मातृशक्ति से सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने और समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए आगे आने का आह्वान किया। आरटी नगर मातृशक्ति की नई कार्यकारिणी घोषित संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह सिकरवार के निर्देशानुसार संगठन विस्तार के क्रम में आरटी नगर मातृशक्ति की नई कार्यकारिणी की घोषणा भी की गई।

  • बेंगलुरु में उपासक श्री दीपसिंह का भव्य स्वागत, भक्ति से गूंजा नगरथपेठ

    तवाव स्थित देवीसिंह-वनेसिंह जुझार बावसी के परम पूज्य उपासक के आगमन पर श्रद्धालुओं ने किया अभिनंदन, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना परम पूज्य उपासक श्री दीपसिंह वाघेला सोलंकी के स्वागत एवं अभिनंदन का दृश्य भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 09 अगस्त 2026 बेंगलुरु।परम पूज्य उपासक श्री दीपसिंह वाघेला सोलंकी के बेंगलुरु पहुंचने की जानकारी मिलते ही श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल रहा। स्वागत कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने श्रद्धा के साथ उनका अभिनंदन किया और उनके मंगलमय आगमन पर शुभकामनाएं अर्पित कीं। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने परम पूज्य उपासक के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। उपस्थित लोगों ने समाज, परिवार और क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। भक्ति और आस्था से ओतप्रोत वातावरण ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। श्रद्धा और भक्ति से हुआ अभिनंदन स्वागत समारोह में दलपतसिंह भायल सोलंकी ने परम पूज्य उपासक श्री दीपसिंह वाघेला सोलंकी का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। इस अवसर पर उनके प्रति सम्मान एवं आस्था प्रकट करते हुए मंगलमय जीवन और समाज के लिए उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन की कामना की गई। समारोह में मौजूद श्रद्धालुओं ने कहा कि संत एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्वों का सान्निध्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और आपसी एकता को मजबूत करने का माध्यम बनता है। ऐसे अवसर लोगों को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ सामाजिक भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। समाज के गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी स्वागत कार्यक्रम में जेतसिंह सोलंकी सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने परम पूज्य उपासक श्री दीपसिंह वाघेला सोलंकी का भावपूर्ण स्वागत करते हुए उनके बेंगलुरु आगमन को समाज के लिए शुभ अवसर बताया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ सहभागिता निभाई। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकजुटता की झलक देखने को मिली। आध्यात्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश बेंगलुरु जैसे महानगर में विभिन्न क्षेत्रों और प्रदेशों से आए समाज के लोग अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए लगातार ऐसे आयोजनों से जुड़ते हैं। उपासक श्री दीपसिंह का बेंगलुरु आगमन भी इसी आध्यात्मिक जुड़ाव और सामाजिक एकता का प्रतीक बना। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक भावनाओं के साथ समाज के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उपस्थित लोगों के अनुसार, धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलता है। स्वागत समारोह का समापन सौहार्दपूर्ण और भक्तिमय वातावरण में हुआ। श्रद्धालुओं ने परम पूज्य उपासक श्री दीपसिंह वाघेला सोलंकी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आगामी प्रवास के लिए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं।

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