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राम-राज का संदेश: नशे से मुक्ति, गुरुवाणी से जागृति

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 10 अग॰
  • 3 मिनट पठन

कलबी समाज से नशामुक्ति का आह्वान; गुरुवाणी को बनाया सामाजिक बदलाव का आधार


रंगीन मंदिर में फूलमालाओं से सजी संत मूर्ति, जलता आरती-दीपक, दोनों ओर गायें, चमकीला मेहराब; नीचे Dipu लिखा है।

नशामुक्ति जागरूकता अभियान एवं कलबी समाज के संत/समाजजन

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) 09 अगस्त, 2026 | बेंगलुरु, कर्नाटक नशामुक्ति, गुरुवाणी और सामाजिक जागृति को लेकर कलबी समाज में एक नई चेतना का संदेश सामने आया है। गुरुवाणी प्रचारक किशनाराम पटेल ने समाज के जागृत सज्जनों, युवाओं और पंच परमेश्वरों से आह्वान किया है कि नशे के खिलाफ संघर्ष केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि इसे संस्कार, आत्मसंयम और गुरुवाणी के मार्ग से सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दिया जाए।


किशनाराम पटेल के अनुसार, गुरु महाराज श्री श्री 1008 श्री राजाराम जी महाराज ने समाज को नशामुक्त और नीति-परायण जीवन जीने की प्रेरणा दी थी। उनका कहना है कि आज बदलते समय में नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रभाव केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और परिवार को ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि नशामुक्ति अभियान को भय या दंड की मानसिकता से आगे बढ़ाकर आत्मजागरण और संस्कारों से जोड़ना जरूरी है। उनका संदेश है कि व्यक्ति पुलिस या कानून के डर से नहीं, बल्कि अपने विवेक, परिवार और गुरुवाणी की प्रेरणा से नशे को त्यागे।


गुरुवाणी से नशामुक्त समाज का संदेश


किशनाराम पटेल ने कहा कि समाज में पिछले कई दशकों से नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या मौजूद रही है। बदलते दौर में रासायनिक एवं विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों की उपलब्धता और सेवन को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए परिवार, समाज और धार्मिक नेतृत्व की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि गुरुवाणी को केवल धार्मिक उपदेश के रूप में न देखकर जीवन-व्यवहार का मार्गदर्शन बनाया जाए। उनके अनुसार, आत्मसंयम, सदाचार और सात्विक जीवनशैली को अपनाकर नशे जैसी सामाजिक बुराई के विरुद्ध मजबूत वातावरण तैयार किया जा सकता है।


युवाओं को नशे से बचाने पर जोर


नशे के बढ़ते प्रभाव को लेकर उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को जागरूक करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि युवा किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। यदि युवा नशे से मुक्त, शिक्षित, संस्कारित और सकारात्मक सोच वाले होंगे तो परिवार से लेकर राष्ट्र तक विकास की गति मजबूत होगी।

उन्होंने समाज के संतों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, महिलाओं, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों से भी नशामुक्ति के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का आह्वान किया।


प्रशासन और समाज मिलकर करें काम


किशनाराम पटेल ने कहा कि नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए प्रशासनिक स्तर पर चलाए जा रहे प्रयासों के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। कानून व्यवस्था नशीले पदार्थों की अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई कर सकती है, लेकिन नशे की मांग को समाप्त करने के लिए सामाजिक चेतना और पारिवारिक संस्कारों की भूमिका अहम है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज स्वयं नशे के खिलाफ दृढ़ संकल्प ले और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए सामूहिक प्रयास करे, तो नशामुक्ति अभियान को स्थायी सफलता मिल सकती है।


'राज, राम और राजाराम' के संदेश से जोड़ने का प्रयास


गुरुवाणी प्रचारक ने अपने संदेश में शिकारपुरा को गुरु महाराज श्री राजेश्वर भगवान की तपोस्थली के रूप में उल्लेखित करते हुए कहा कि यदि समाज अपने आराध्य के उपदेशों को व्यवहार में उतारता है तो यह नशामुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण सामाजिक योगदान होगा।

उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार का विषय नहीं है। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें शिक्षा, संस्कार, रोजगार, खेल, सेवा और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने समाज के पंच परमेश्वरों और सामाजिक नेतृत्व से भी अपेक्षा जताई कि वे नशामुक्ति के संदेश को गांव-गांव और परिवार-परिवार तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।


नशे के खिलाफ बने सामूहिक संकल्प


किशनाराम पटेल ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाना समाज का साझा दायित्व है। इसके लिए परिवार में संवाद, युवाओं के साथ विश्वासपूर्ण व्यवहार और नशे के दुष्प्रभावों को लेकर निरंतर जागरूकता आवश्यक है।

उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि नशे के खिलाफ केवल अभियान चलाने के बजाय नशामुक्त जीवन को सामाजिक प्रतिष्ठा और संस्कार का प्रतीक बनाया जाए।

उनके अनुसार, यदि गुरुवाणी की प्रेरणा, सामाजिक एकजुटता और प्रशासनिक प्रयास एक साथ आगे बढ़ें तो नशामुक्ति का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।

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