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आषाढ़ में धारवाड़ में गूंजा अग्निहोत्र का संदेश, पतंजलि ने शुरू किया जन-अभियान

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 10 अग॰
  • 4 मिनट पठन
महिलाएं और एक पुजारी कमरे में हवन कर रहे हैं, बीच में अग्नि जल रही है; रंग-बिरंगी साड़ियां, गंभीर माहौल, फाइल फोटो

भवर लाल आर्य बोले—योग की तरह अग्निहोत्र भी हर घर तक पहुंचे; कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और पतंजलि परिवार की मौजूदगी

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) डेटलाइन | धारवाड़, कर्नाटक | 9 अगस्त 2026 धारवाड़। आषाढ़ के पवित्र अवसर पर धारवाड़ में अग्निहोत्र को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश गूंजा। पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक की ओर से हेब्बल्ली रोड स्थित गाली ओनी के प्रसिद्ध मुडी मारुति मंदिर के कम्युनिटी हॉल योग सेंटर में विशेष अग्निहोत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय योग गुरु एवं पतंजलि योग पीठ कर्नाटक के स्टेट इन-चार्ज हेड श्री भवर लाल आर्य ने किया।


कार्यक्रम में अग्निहोत्र की पारंपरिक विधि, इसके उद्देश्य और इसे दैनिक जीवन में अपनाने को लेकर प्रतिभागियों को जानकारी दी गई। इस अवसर पर श्री भवर लाल आर्य ने कहा कि जिस प्रकार योग कभी सीमित लोगों तक माना जाता था और आज विश्वभर में अपनाया जा रहा है, उसी प्रकार अग्निहोत्र को भी सरल रूप में हर घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि आषाढ़ के इस अवसर को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए अग्निहोत्र को भारतीय परंपरा और जीवन-पद्धति के रूप में समझने तथा इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जाए।


हर घर तक अग्निहोत्र पहुंचाने का संकल्प


भवर लाल आर्य ने कहा कि पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक की ओर से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को अग्निहोत्र की जानकारी और प्रशिक्षण देने का अभियान चलाया जा रहा है। उनके अनुसार, हजारों लोगों को अब तक इसकी प्रक्रिया सिखाई जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि इस अभ्यास को किसी जाति, धर्म, पंथ या संप्रदाय तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका उद्देश्य इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है, ताकि इच्छुक लोग इसकी पारंपरिक विधि और महत्व को समझ सकें।

उन्होंने अग्निहोत्र को भारतीय परंपरा में वर्णित यज्ञ पद्धति से जोड़ते हुए कहा कि इसके विभिन्न रूपों में अलग-अलग सामग्री और विधियों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरल रूप में इसे पारंपरिक रूप से गाय के घी और सूखे गोबर के उपलों के माध्यम से किया जाता है।


स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर किए गए दावों पर जोर


कार्यक्रम में भवर लाल आर्य ने अग्निहोत्र के स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी लाभों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अग्निहोत्र से वातावरण की शुद्धता, मानसिक शांति और सकारात्मकता में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक रूप से औषधीय जड़ी-बूटियों का उपयोग यज्ञीय अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर उन्होंने अपने विचार और अनुभव साझा किए। किसी बीमारी के इलाज या संक्रमण से बचाव के लिए अग्निहोत्र को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प मानने से पहले योग्य चिकित्सक एवं वैज्ञानिक प्रमाणों की सलाह लेना आवश्यक है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने अग्निहोत्र की राख यानी भस्म के पारंपरिक उपयोग का भी उल्लेख किया। कृषि क्षेत्र में इसके उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े पारंपरिक विचारों पर चर्चा की गई।


योग के साथ भारतीय परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर


भवर लाल आर्य ने कहा कि योग, आयुर्वेद और अन्य भारतीय परंपराओं की तरह अग्निहोत्र की जानकारी भी सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी पारंपरिक अभ्यास को अपनाने से पहले उसकी विधि, उद्देश्य और सीमाओं को समझना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अभियान का लक्ष्य लोगों को जागरूक करना और इच्छुक लोगों को पारंपरिक अग्निहोत्र की विधि से परिचित कराना है।


जनप्रतिनिधियों और पतंजलि परिवार की मौजूदगी


विशेष कार्यक्रम में हुबली-धारवाड़ नगर निगम की डिप्टी मेयर श्रीमती रत्नाबाई नाज़रे और नगर निगम सदस्य श्रीमती दीपा नीरलकट्टी की मौजूदगी रही।

मुडी मारुति मंदिर समिति की ओर से रवि एलिगर, वासु एलिगर, मंगेश महेंद्रकर और वसंतराव लक्कुंडे सहित कई सदस्य कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

पतंजलि परिवार की ओर से विजयलक्ष्मी नवले, उमा अगाड़ी, रमेश सुलाखे, लीलावती संब्रानी, शैलजा मदिकरा, वस्त्रमठ, सविता शिंदे, सुवर्णा करिंदी, चव्हाण, बसवराज मुम्मिगट्टी, प्रेमा मुम्मिगट्टी, नीलकंठ होराडी, उमेश कुलकर्णी, भाग्यश्री बडिगर, पुष्पा यारेशिमी, विजयलक्ष्मी करिंदी, वंदना ओमकार, पवादशेट्टी और वीरेश समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।


परंपरा से जन-जागरूकता तक


धारवाड़ में आयोजित यह अग्निहोत्र कार्यक्रम धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जन-जागरूकता से जोड़ने का प्रयास रहा। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों को अग्निहोत्र की पारंपरिक पृष्ठभूमि और विधि के बारे में जानकारी दी गई।

आयोजकों ने कहा कि आने वाले समय में कर्नाटक के विभिन्न क्षेत्रों में अग्निहोत्र प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहेगा।


धारवाड़ में आषाढ़ के पवित्र अवसर पर पतंजलि योग पीठ, कर्नाटक की ओर से विशेष अग्निहोत्र कार्यक्रम आयोजित किया गया। हेब्बल्ली रोड स्थित गाली ओनी के मुडी मारुति मंदिर कम्युनिटी हॉल योग सेंटर में हुए इस आयोजन में अंतरराष्ट्रीय योग गुरु एवं पतंजलि योग पीठ कर्नाटक के स्टेट इन-चार्ज हेड श्री भवर लाल आर्य ने अग्निहोत्र की पारंपरिक विधि और महत्व पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह योग विश्वभर में लोकप्रिय हुआ है, उसी तरह अग्निहोत्र की पारंपरिक जानकारी भी हर घर तक पहुंचनी चाहिए। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, मंदिर समिति सदस्यों और पतंजलि परिवार के अनेक सदस्यों ने भाग लिया।

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