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मंजूनाथ नगर में गूंजा मां अण्णम्माा देवी का जयघोष, 11वां वार्षिक उत्सव धूमधाम से संपन्न

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 11 अग॰
  • 3 मिनट पठन

मंदिर के सुनहरे गर्भगृह में पीले वस्त्रधारी व्यक्ति को सम्मानित किया जा रहा है; लोग ताली बजा रहे हैं।

धार्मिक आस्था और संस्कृति के रंग में रंगा ईटमाडु; महेंद्र मुणोत ने बच्चों को बांटी शिक्षण सामग्री, बोले—संस्कारों से जुड़ती है नई पीढ़ी

भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त, 2026। मंजूनाथ नगर अण्णम्माा देवी सेवा समिति, ईटमाडु के तत्वावधान में 11वां अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव हर्ष, उल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। वार्षिक उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की मंगलकामना की। धार्मिक आस्था के साथ आयोजित इस समारोह में सामाजिक एवं सांस्कृतिक सहभागिता भी देखने को मिली।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत ने अण्णम्माा देवी के दर्शन कर विधिवत आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित की। इस पहल के माध्यम से धार्मिक आयोजन को शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का सकारात्मक संदेश दिया गया।


अपने संबोधन में महेंद्र मुणोत ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज की परंपराओं और संस्कारों को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं। बच्चों को अपनी जड़ों और संस्कृति से परिचित कराने के लिए समाज को निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।


सजावटी मंच पर लोग बच्चों को कापियां बांटते, सामने भीड़; दाईं ओर फाइल फोटो लिखा है

उन्होंने सनातन संस्कृति पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता उसकी विविधता,

आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सेवा भावना में निहित है। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से जब सामाजिक सेवा और शिक्षा जैसे कार्यों को जोड़ा जाता


है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव समाज की आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है।


11वां अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा कि कार्यक्रम में धार्मिक श्रद्धा के साथ बच्चों के शैक्षणिक विकास को प्रोत्साहित करने की पहल की गई। शिक्षण सामग्री वितरण से बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिला और अभिभावकों तथा समाजजनों को शिक्षा के महत्व का संदेश भी मिला।


आयोजकों ने मुख्य अतिथि महेंद्र मुणोत का सम्मान कर उनके सहयोग एवं सहभागिता के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मान समारोह के दौरान समिति के सदस्यों और उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

मंजूनाथ नगर और ईटमाडु क्षेत्र में आयोजित इस अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया। स्थानीय श्रद्धालुओं और आयोजन से जुड़े लोगों की सहभागिता से कार्यक्रम में उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा।

मंदिर में माला पहने पुरुष प्रार्थना करता, पास में लोग और सजी हुई देवी-प्रतिमा; दाईं ओर फाइल फोटो।

ऐसे वार्षिक धार्मिक उत्सव समाज के लिए केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं होते, बल्कि सामूहिक सहभागिता, सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का मंच भी बनते हैं। खासकर बच्चों और युवाओं की भागीदारी से धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का भावी पीढ़ी तक हस्तांतरण संभव होता है।

कार्यक्रम में शिक्षण सामग्री वितरण की पहल ने यह भी रेखांकित किया कि धार्मिक संस्थाएं और सामाजिक संगठन यदि शिक्षा, संस्कार और सेवा को अपनी गतिविधियों से जोड़ें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव को गति मिल सकती है।


आयोजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने मां अण्णम्माा देवी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। समिति के सदस्यों ने वार्षिक उत्सव को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


अण्णम्माा देवी वार्षिक उत्सव के माध्यम से धार्मिक श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक सेवा का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ समाज के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को मजबूत करना भी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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