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शालिभद्र जी की 99 पेटियों का भव्य मंचन, भक्ति से गूंजा दादावाड़ी

  • लेखक की तस्वीर: धन्नाराम चौधरी
    धन्नाराम चौधरी
  • 11 अग॰
  • 3 मिनट पठन
मंदिर मंच पर पारंपरिक वेशभूषा में समूह, पुरुषों को सम्मानित करते हुए; पीछे धार्मिक पोस्टर, कोमल उत्सव माहौल, फाइल फोटो

चातुर्मास के विशेष कार्यक्रम में स्वर्ण, वस्त्र और भोजन की 99 पेटियों का प्रतीकात्मक आयोजन; श्रद्धालुओं ने त्याग, तप और सुपात्र दान का संदेश ग्रहण किया


भारतार्थ खबर। संवाददाता: धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलुरु | 10 अगस्त, 2026। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी, बसवनगुडी में चातुर्मास के रविवारीय विशेष कार्यक्रम के दौरान शालिभद्र जी की 99 पेटियां उतारने की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का भावपूर्ण मंचन किया गया। श्री जिन कुशल सूरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ सहभागिता की और शालिभद्र जी के जीवन से जुड़े त्याग, तपस्या, संयम, संतोष एवं सुपात्र दान के प्रेरक संदेश को आत्मसात किया।


यह विशेष आयोजन परम पूज्य साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्री जी म.सा. की पावन प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। मंचन के दौरान शालिभद्र जी के जीवन प्रसंग को श्रद्धा और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा गया। कार्यक्रम ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ-साथ जीवन में दान, सेवा और सदाचार के महत्व का संदेश दिया।


दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष तेजराज मालानी एवं महामंत्री कुशलराज गुलेच्छा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक कथा या मंचन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा और धर्म के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं। शालिभद्र जी के जीवन से जुड़ी यह प्रेरक कथा श्रद्धालुओं को यह संदेश देती है कि धन-संपत्ति का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग धर्म, सेवा और जरूरतमंदों के कल्याण में किया जाए।


कार्यक्रम के अंतर्गत शालिभद्र जी की देवलोक से प्रतिदिन 99 स्वर्ण, वस्त्र एवं भोजन की पेटियां उतरने के प्रसंग का प्रतीकात्मक मंचन किया गया। आयोजन में लकी ड्रा के माध्यम से चयनित परिवारों को पेटियां प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई। इस धार्मिक आयोजन का लाभ श्रीमती प्रेमलता देवी एवं सज्जनसिंह जी खटोड़ परिवार, ब्यावर-बेंगलुरु द्वारा लिया गया।


आयोजन के अवसर पर परम पूज्य गुरुदेव श्री मलयप्रभ सागर जी म.सा. आदि ठाणा ने शुभकामनाएं प्रदान कीं। गुरुदेव के आशीर्वचन एवं साध्वीजी के मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।

ट्रस्ट के ललित डाकलिया ने शालिभद्र जी के पूर्व भव से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि साधु भगवंत को सुपात्र दान के रूप में खीर का वोहराने के फलस्वरूप शालिभद्र जी को अनंत पुण्य राशि प्राप्त हुई। इस प्रसंग को धर्म और दान की शक्ति से जोड़ते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में सुपात्र दान, सेवा और सदाचार को अपनाने का आह्वान किया।


उन्होंने कहा कि शालिभद्र जी का जीवन भौतिक वैभव के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना और त्याग की प्रेरणा देता है। कथा का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति के जीवन में वास्तविक समृद्धि केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि धर्म, संयम, संतोष और सेवा भावना से आती है।

कार्यक्रम को आकर्षक एवं जीवंत बनाने में अखिल भारतीय खरतरगच्छ महिला परिषद, बेंगलुरु शाखा के साथ गुंजन और महक का विशेष सहयोग रहा। मंचन के दौरान सनी रांका, रेखा लोढ़ा, संगीता पारख और रेणु पालरेचा ने सुंदर भक्ति गीत प्रस्तुत किए। भक्तिमय गीतों और धार्मिक प्रसंगों से वातावरण भावविभोर हो उठा।


कार्यक्रम में ज्ञान वाटिका के बच्चों ने भी मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने धार्मिक आयोजन में नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी और संस्कारों से जुड़ाव का संदेश दिया।

आयोजन में ट्रस्ट के उपाध्यक्ष बाबूलाल भन्साली, कोषाध्यक्ष रनजीत ललवानी, सहमंत्री धर्मेन्द्र संकलेचा, पुखराज कवाड, मोतीलाल ललवानी सहित संघ एवं विभिन्न संस्थाओं के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।


पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्तिभाव देखने को मिला। शालिभद्र जी की 99 पेटियां उतारने का यह विशेष मंचन धार्मिक कथा, संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुति का प्रभावशाली संगम बन गया। कार्यक्रम ने उपस्थित समाजजनों को धर्म के साथ जीवन मूल्यों को जोड़ने की प्रेरणा दी।

चातुर्मास के दौरान इस प्रकार के आयोजन जैन समाज में धार्मिक चेतना, सामूहिक सहभागिता और संस्कारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शालिभद्र जी के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं ने त्याग, तपस्या, संयम, संतोष, सेवा और सुपात्र दान जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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