top of page

 भारतार्थ खबर, नहीं उसका अर्थ

20अक्टूबर /2026 /मंगलवार

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

भारतार्थ लोगो: खबर नहीं, उसका अर्थ - राजनीतिक समाचार विश्लेषण

अलुवा,19 अक्टूबर 2026। कभी-कभी जीवन में सुनी गई कोई बात या देखा गया कोई वीडियो सोचने का नजरिया बदल देता है। केरल की अरुंधति के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक वीडियो से प्रेरित अरुंधति ने उन्हें हाथ से लिखा भावुक पत्र भेजकर अपनी शादी में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उनकी शादी 20 दिसंबर 2026 को केरल के अलुवा में होनी है।

WhatsApp Video 2026-10-04 at 8.50.36 PM.mp4

इस साइट पर खोजें

1897किसी भी खाली खोज के साथ परिणाम मिले

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच एयर इंडिया की बड़ी पहल, आज 48 उड़ानें संचालित; पायलटों के कार्य समय में भी मिली अस्थायी छूट

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कई देशों के हवाई क्षेत्र में लगे प्रतिबंधों के बीच भारतीय विमानन कंपनियां यात्रियों की सुविधा और कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास कर रही हैं। इसी कड़ी में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने सोमवार को पश्चिम एशिया के लिए कुल 48 निर्धारित और अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने का निर्णय लिया है। इन उड़ानों के माध्यम से भारत और खाड़ी देशों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। जेद्दा और मस्कट के लिए विशेष उड़ानें कंपनियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत और जेद्दा के बीच कुल 10 उड़ानें संचालित की जाएंगी। इनमें एयर इंडिया की ओर से दिल्ली और मुंबई से एक-एक रिटर्न फ्लाइट संचालित की जाएगी। वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलूरु, कोझिकोड और मैंगलूरु से जेद्दा के लिए एक-एक उड़ान संचालित करेगी। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में यात्रियों की मांग को देखते हुए मस्कट के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस की 12 निर्धारित उड़ानें चलाई जाएंगी। इनमें दिल्ली, कन्नूर, मुंबई और तिरुवनंतपुरम से एक-एक उड़ान तथा कोच्चि से दो उड़ानें शामिल हैं। इसके अलावा कुल 26 अतिरिक्त (नॉन-शेड्यूल) उड़ानें भी संचालित की जाएंगी, जो मुख्य रूप से यूएई और सऊदी अरब के विभिन्न शहरों के लिए होंगी। लंबा मार्ग अपनाकर उड़ानें संचालित पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कुछ हवाई क्षेत्रों में प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया को अपनी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। इसके चलते उड़ानों की अवधि बढ़ गई है, खासकर यूरोप और अमेरिका जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों में। स्थिति को देखते हुए भारत की विमानन सुरक्षा निगरानी संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयर इंडिया को अस्थायी राहत प्रदान की है। पायलटों के कार्य समय में अस्थायी ढील सूत्रों के अनुसार, डीजीसीए ने पायलटों के उड़ान और कार्य समय की सीमा में 30 अप्रैल तक अस्थायी छूट दी है। इस छूट के तहत लंबी दूरी की उड़ानों में दो पायलटों के लिए अधिकतम उड़ान समय 11 घंटे 30 मिनट और कार्य अवधि 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ाई गई है। इसके अलावा पायलटों की ड्यूटी शेड्यूलिंग में 30 मिनट की अतिरिक्त सुविधा भी दी गई है, ताकि लंबा मार्ग अपनाने के बावजूद उड़ानों का संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके। सूत्रों ने बताया कि जेद्दा जाने वाली एक उड़ान में पायलटों की कार्य अवधि 11 घंटे 55 मिनट तक पहुंच जाती है, जो सामान्य अनुमति सीमा से करीब 10 मिनट अधिक है। इसलिए विशेष परिस्थितियों को देखते हुए यह छूट दी गई है। सुरक्षा और थकान को ध्यान में रखकर फैसला डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि उड़ान समय वह अवधि होती है जब विमान जमीन से उड़ान भरने के बाद सुरक्षित लैंडिंग तक हवा में रहता है। वहीं कार्य अवधि तब शुरू होती है जब पायलट ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करता है और अंतिम उड़ान के इंजन बंद होने के बाद समाप्त होती है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने घटाई उड़ानें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने इस क्षेत्र के लिए अपनी उड़ानों में कटौती की है। हालांकि भारतीय विमानन कंपनियां यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए अधिक से अधिक उड़ानें संचालित करने का प्रयास कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता है तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग और समय-सारणी में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की यह पहल भारत और खाड़ी देशों के बीच यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के लिए राहत साबित हो सकती है।

  • चेन्नई में सजेगा ‘आंजणा प्रीमियर लीग-6’ का रोमांच, 9 टीमें दिखाएंगी दमखम

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) चेन्नई। कलबी युवा स्पोर्ट्स क्लब, चेन्नई के तत्वावधान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आंजणा प्रीमियर लीग (APL) क्रिकेट सीजन-6 का आयोजन 21 और 22 मार्च 2026 (शनिवार-रविवार) को मेघना कॉलेज ग्राउंड, रेडहिल्स (चेन्नई) में किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में आंजणा समाज, चेन्नई की कुल 9 क्रिकेट टीमें भाग लेंगी, जिनके बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों में राजेश्वर क्रिकेट क्लब, आंजणा स्टार इलेवन, माताजी वारियर्स, आहोर फाइटर्स, श्री चरणनाथ क्रिकेट क्लब, श्री चौधरी टाइटंस कोवुर, किशनारामजी क्रिकेट क्लब, श्री रामदेव क्रिकेट क्लब और आपेश्वर किंग इलेवन शामिल हैं। सभी टीमों ने पिछले एक महीने से कड़ी मेहनत करते हुए अभ्यास किया है और खिताब जीतने का जुनून खिलाड़ियों में साफ नजर आ रहा है। क्रिकेट क्लब के सदस्य जगुभाई पटेल ने बताया कि टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। वहीं वरिष्ठ सदस्य भगराज पटेल ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी प्रतियोगिता और अधिक रोमांचक व भव्य होगी, जिसमें समाज के युवाओं का जोश और खेल के प्रति उनका जुनून देखने को मिलेगा। क्रिकेटर ललित पटेल ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, खेल भावना और एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे आयोजनों से प्रेरित होकर समाज का व्यापारी वर्ग भी खेलों के प्रति जागरूक होगा और इस तरह के आयोजन निरंतर होते रहेंगे। इस आयोजन की जानकारी दिनेश ‘जी’ करड़ द्वारा दी गई। आयोजकों ने समाज के सभी सदस्यों और खेल प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है।

  • कर्नाटक में कांग्रेस की महिला नेता ने अपनी ही पार्टी पर उठाए सवाल, पीएम मोदी से मांगी सुरक्षा और केंद्रीय जांच

    भारतार्थ खबर, बेंगलूरु संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। कर्नाटक की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब कांग्रेस की एक महिला नेता ने अपनी ही पार्टी के एक अन्य नेता पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से न्याय की गुहार लगाई। महिला नेता ने न केवल अपने साथ कथित उत्पीड़न और हमले का आरोप लगाया है, बल्कि राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। कर्नाटक प्रदेश महिला कांग्रेस की राज्य सचिव और दलित नेता चेतना ने ईमेल के माध्यम से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के ही एक नेता राहिल शरीफ ने उनके और उनके पति पर हमला करने की कोशिश की। चेतना के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने किराए के मकान को खाली करने के लिए कहा। आरोप है कि इसके बाद संबंधित नेता ने उनके घर में घुसकर हमला करने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजनीतिक प्रभाव के चलते मामले की जांच निष्पक्ष रूप से नहीं की जा रही है। महिला नेता ने अपने पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपी के फोन में कई हिंदू लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो मौजूद हैं और उन्हें कथित तौर पर “लव जिहाद” के जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही थी। इस संबंध में उन्होंने विस्तृत जांच की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की कांग्रेस सरकार को असहज स्थिति में ला दिया है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध सकता है, क्योंकि मामला कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जुड़ा है। चेतना द्वारा सीधे प्रधानमंत्री से मदद मांगने को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उन्हें राज्य की अपनी सरकार और पुलिस तंत्र पर भरोसा नहीं है। फिलहाल इस मामले में कांग्रेस या राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

  • ‘डबल इंजन सरकार से तेज हुआ बराक वैली का विकास’—असम दौरे पर पीएम मोदी, 22,860 करोड़ की शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर सहित कई परियोजनाओं का शिलान्यास

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) असम। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को असम दौरे के दौरान बराक वैली और पूर्वोत्तर भारत के विकास को नई गति देने वाली कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से बराक वैली सहित पूरे नॉर्थ-ईस्ट में विकास की रफ्तार तेज हुई है और आने वाले वर्षों में क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री ने करीब 22,860 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 166 किलोमीटर लंबे शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भूमि पूजन किया। यह कॉरिडोर शिलांग और सिलचर के बीच बनने वाला नॉर्थ-ईस्ट भारत का पहला एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड फोर-लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा। इसके निर्माण से गुवाहाटी और सिलचर के बीच यात्रा का समय लगभग 8.5 घंटे से घटकर करीब 5 घंटे रह जाएगा। इससे व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर राज्यों को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए तेजी से बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि सड़क, शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में नई परियोजनाएं क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने नेशनल हाईवे-306 पर एलिवेटेड कॉरिडोर (फेज-1) का भी शिलान्यास किया। यह परियोजना सिलचर के कैपिटल पॉइंट को रंगिरखारी पॉइंट से जोड़ेगी, जिससे शहर की व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक दबाव कम होगा। साथ ही, इससे मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ आवागमन भी तेज और सुगम हो सकेगा। प्रधानमंत्री ने असम के पथरकंडी में नए कृषि महाविद्यालय की आधारशिला भी रखी। यह संस्थान क्षेत्र में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक खेती के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा किसानों और छात्रों को नई तकनीकों से जोड़ने का काम करेगा। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अगले चरण में वे कोलकाता पहुंचेंगे, जहां करीब 18,680 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं में 420 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्ट, खड़गपुर-मोरग्राम आर्थिक कॉरिडोर, दुबराजपुर बाईपास तथा कई पुलों का निर्माण शामिल है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी, व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे, जिससे क्षेत्रीय विकास को दीर्घकालिक गति

  • बिलासपुर से आज ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत करेंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, निराश्रित गौवंश संरक्षण को मिलेगा नया आधार

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) रायपुर। छत्तीसगढ़ में निराश्रित और घुमंतू गौवंश के संरक्षण तथा उनके समुचित प्रबंधन के लिए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शनिवार को बिलासपुर से राज्य की महत्वाकांक्षी ‘गौधाम योजना’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम बिलासपुर जिले स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रेक्षागार में आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार की इस योजना के तहत निराश्रित, घुमंतू और जप्त किए गए गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और समुचित देखभाल के लिए गौधामों की स्थापना की जाएगी। कार्यक्रम में कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल तथा अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। प्रत्येक विकासखंड में स्थापित होंगे गौधाम सरकार की योजना के अनुसार राज्य के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के तहत पूरे छत्तीसगढ़ में कुल 1460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे। इन गौधामों में गौवंश के लिए शेड, सुरक्षित फेंसिंग, स्वच्छ पेयजल, बिजली सहित अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सके। 36 गौधामों को मिल चुकी है स्वीकृति पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक 36 गौधामों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 29 गौधामों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग में भी हो चुका है। इन 29 गौधामों का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा। लाखासार गांव से होगी शुरुआत योजना का पहला शुभारंभ बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड स्थित ग्राम लाखासार से किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री राज्य के अन्य 10 जिलों में स्थापित 28 गौधामों का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से करेंगे। गौवंश संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार के अनुसार गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य निराश्रित, घुमंतू और जब्त किए गए गौवंश पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को सुनिश्चित करना तथा ग्रामीण स्तर पर गौसेवा की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। सरकार का मानना है कि इस योजना से एक ओर जहां गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और जैविक कृषि को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

  • गोवा की राजनीति में भाजपा का दबदबा: पणजी निगम चुनाव में 30 में से 27 सीटें जीतकर रचा इतिहास

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) पणजी (गोवा)। गोवा की राजधानी पणजी के सिटी कॉरपोरेशन (सीसीपी) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। 30 वार्डों वाले इस चुनाव में भाजपा समर्थित 'बाबुश' मोंसेरेट पैनल ने 27 सीटों पर विजय हासिल कर विपक्ष को करारी शिकस्त दी। मतगणना शुक्रवार सुबह 8 बजे श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में शुरू हुई, जिसमें शुरुआती रुझानों से ही भाजपा उम्मीदवारों का पलड़ा भारी नजर आया। 11 मार्च को शांतिपूर्ण माहौल में मतदान संपन्न हुआ था। भारी मतदान, कई वर्गों के लिए आरक्षित सीटें चुनाव में कुल 69 उम्मीदवारों ने 48 मतदान केंद्रों पर मतपत्रों के माध्यम से अपनी किस्मत आजमाई। इस बार कुल मतदान प्रतिशत लगभग 69.07 प्रतिशत रहा, जबकि वार्ड 23 में सबसे अधिक 81.94 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। नगर निगम के 30 वार्डों में से 10 सीटें महिलाओं के लिए, 8 सीटें ओबीसी वर्ग के लिए और 1 सीट एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थीं। प्रमुख वार्डों में भाजपा उम्मीदवारों की शानदार जीत चुनाव परिणामों में कई प्रमुख वार्डों में भाजपा उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की। वार्ड 15 में शायनी चोपडेकर ने अमी पंजेकर के सूरज रोहिदास नाइक को पराजित किया। वार्ड 5 में किशोर शास्त्री ने सुदीन कामत को हराया, जबकि वार्ड 18 में कृष्णा रामदास शिरोडकर ने आशीष रंगनाथ नागवेकर को मात दी। इसी तरह वार्ड 16 में अस्मिता केरकर ने प्रांजल प्रजीत नाइक को हराकर जीत दर्ज की। वार्ड 12 में वर्षा हरि शेट्टी ने ब्रिजेश वासुदेव कावलेकर और शबनम खान को पछाड़ते हुए विजय हासिल की। वार्ड 10 में प्रसाद अमोनकर ने विष्णु नाइक को हराया, जबकि वार्ड 1 में युतिका जाम्बौलीकर ने रोशन मार्टिंस और दामिनी रघुवीर कुनकोलिंकर को पराजित किया। वार्ड 13 में उदय वामन मडकईकर ने नीलकंठ चारी को हराकर जीत हासिल की। वार्ड 19 में निकिता नाइक ने देओदिता वियाना परेरा को हराया, वहीं वार्ड 9 में कबीर फिलिप पिंटो मखीजा ने सुरेंद्र व्लादिमीर एंटोनियो एंजेलो डी मोंटे फर्टाडो को पराजित किया। वार्ड 14 में प्रजोत संतोष वैगनकर ने मदन शंभू फतेरपेकर को मात दी। विपक्ष को मिली सीमित सफलता हालांकि भाजपा के दबदबे के बीच विपक्षी पैनल को कुछ वार्डों में सफलता भी मिली। वार्ड 7 में लियोनिद फुरतादो ने भाजपा उम्मीदवार संजीव देसाई को हराया। वहीं वार्ड 17 में जैक अजीत सुखीजा ने बेहद कांटे की टक्कर में भाजपा के डेनिस एडवर्ड फ्रांसिस जॉर्ज को मात्र दो वोटों के अंतर से पराजित कर जीत दर्ज की। राज्य राजनीति के लिए अहम संकेत राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पणजी निगम चुनाव में भाजपा की यह बड़ी जीत राज्य की आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। भाजपा ने जहां शहरी मतदाताओं के बीच अपना मजबूत आधार दिखाया है, वहीं विपक्षी एकता ने कुछ वार्डों में चुनौती जरूर पेश की है। इस परिणाम के साथ ही भाजपा ने पणजी के शहरी विकास और नगर प्रशासन में अपना नियंत्रण बरकरार रखा है और आगामी राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित किया है।

  • ग्रीन इकोनॉमी में नई पहचान बना रहा छत्तीसगढ़, हरित विकास की दिशा में तेजी से बढ़ रहा राज्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) रायपुर। छत्तीसगढ़ अब पारंपरिक औद्योगिक विकास के साथ-साथ हरित और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पावर इंजन है और अब ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री साय शुक्रवार को रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित द्वितीय छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलनों की उपयोगिता इसलिए और अधिक बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से नीति निर्माण से जुड़े लोग, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, शोधकर्ता और पर्यावरण विशेषज्ञ एक ही मंच पर आकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हैं और समाधान तलाशते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व जलवायु संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में केवल पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को ध्यान में रखते हुए नीतिगत स्तर पर ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार “विरासत के साथ विकास” की नीति पर कार्य कर रही है। भारत की पारंपरिक जीवनशैली सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित रही है और यही परंपरा आज भी पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्गदर्शक है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसी तकनीकों को अपनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिससे आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट-2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण में वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य सरकार की पर्यावरणीय नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और प्रकृति के प्रति उनके दायित्वबोध को दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा उत्पादक बनाया जा रहा है। इसके अलावा बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में निवेश की भी व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं, जो राज्य को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की पहलें लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते समय उसके संतुलन और स्वास्थ्य का ध्यान रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है और राज्य का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है और वनांचलों में वृक्षों को “सरना” अर्थात देवता के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर इन सरना स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज रूप से सीखा जा सकता है और यही भावना राज्य को हरित विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में प्रेरणा देती है। कार्यक्रम में मेघालय के लोकायुक्त सी. पी. मारक, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला, पीसीसीएफ वी. श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी सहित विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सम्मेलन में हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई तथा भविष्य की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

  • केंद्रीय बजट 2026: आम आदमी के जीवन पर क्या पड़ेगा असर

    केंद्रीय बजट 2026 को देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी बजट को लेकर आम नागरिकों, मध्यम वर्ग, किसानों और युवाओं की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। सवाल यही है कि यह बजट आम आदमी के दैनिक जीवन को किस तरह प्रभावित करेगा। सरकार ने बजट में आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक योजनाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। बजट का उद्देश्य रोज़गार के अवसर बढ़ाना, महँगाई पर नियंत्रण रखना और अर्थव्यवस्था को स्थिर गति देना बताया जा रहा है। इसके साथ ही कर व्यवस्था और सरकारी खर्च को संतुलित रखने पर भी ज़ोर दिया गया है। आम आदमी के लिए बजट का सबसे अहम पहलू यह होता है कि इससे उसकी जेब पर क्या असर पड़ेगा। आयकर, वस्तुओं की कीमतें, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषय सीधे तौर पर आम जीवन से जुड़े होते हैं। बजट में इन क्षेत्रों को लेकर किए गए प्रावधान आने वाले समय में लोगों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए बजट में अलग-अलग प्राथमिकताएँ देखने को मिलती हैं। जहाँ एक ओर किसानों और ग्रामीण विकास योजनाओं पर ध्यान देने की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर शहरी ढाँचे और रोज़गार सृजन को भी अहम माना गया है। इसका उद्देश्य संतुलित विकास को आगे बढ़ाना है। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 केवल आँकड़ों का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में देश की आर्थिक और सामाजिक दिशा को प्रभावित करने वाला कदम है। इसके वास्तविक प्रभाव समय के साथ स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल यह बजट आम आदमी के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ विषय बना हुआ है। इस बजट का विश्लेषण और इसके दूरगामी प्रभावों पर भारतार्थ में विस्तृत लेख जल्द प्रकाशित किया जाएगा।

  • गैस संकट पर अफवाहों से सावधान रहें: पीएम मोदी ने मंत्रियों को किया सतर्क, कहा—भारत की तैयारी मजबूत

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) नई दिल्ली। ईरान में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके प्रभाव के बीच देश में एलपीजी की कमी को लेकर बढ़ती चिंता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को सतर्क रहने और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ तत्व मौजूदा हालात को घबराहट का माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ सतर्कता बेहद जरूरी है। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे देश के भीतर की स्थिति पर लगातार निगरानी रखें और जनता के बीच सही जानकारी पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रमित करने वाले प्रचार का तथ्यों के साथ आक्रामक तरीके से जवाब देने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत की तैयारियां मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कई देश इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद भारत की स्थिति कई पड़ोसी देशों और अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मंत्रियों को आत्मविश्वास के साथ जनता को सही जानकारी देनी चाहिए और किसी भी तरह की अफवाहों को तुरंत खारिज करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की एक रैली को संबोधित करते हुए भी लोगों से घबराने की बजाय संयम रखने और केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। देश के कई हिस्सों में हाल के दिनों में एलपीजी सिलेंडरों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। खासतौर पर व्यावसायिक एलपीजी की कमी का असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर भी पड़ रहा है। सरकार का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इस बीच ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से चर्चा की, जिसके बाद ईरान ने भारत के लिए इस समुद्री मार्ग से जहाजों के आवागमन की अनुमति देने पर सहमति जताई है। सूत्रों के अनुसार, भारत के दो टैंकर ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के ऊर्जा आयात के लिए महत्वपूर्ण राहत साबित हो सकता है। सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां लगातार समन्वय के साथ काम कर रही हैं और जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।

  • स्वर्णनगरी जैसलमेर में दादागुरुदेव चादर महोत्सव का भव्य समापन—20 हजार श्रद्धालु बने साक्षी, आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ‘राष्ट्र रत्न संत’ से सम्मानित

    भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com) जैसलमेर। स्वर्णनगरी जैसलमेर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य दादागुरुदेव चादर महोत्सव का समापन रविवार को विविध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ श्रद्धा व उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। इस विराट आयोजन में देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया। महोत्सव के दौरान गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज को ‘राष्ट्र रत्न संत’ सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा सम्मान पत्र प्रदान कर दिया गया। साथ ही दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव समिति, जैसलमेर जैन ट्रस्ट तथा आयोजन से जुड़ी अन्य समितियों की ओर से उन्हें ‘सूरि सम्राट’ की उपाधि भी प्रदान की गई। महोत्सव के दौरान उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी को विधिवत आचार्य पद पर पदासीन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने हर्ष और आस्था के साथ उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम के संयोजक बेंगलूरु के तेजराज गुलेच्छा ने बताया कि इस भव्यातिभव्य समारोह में पूरे भारतवर्ष से लगभग 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दादागुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। वहीं राष्ट्रीय महासचिव पद्म टाटिया ने कहा कि संत-महात्माओं के सान्निध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न यह चादर महोत्सव आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया। कार्यक्रम के वित्त प्रभारी बेंगलूरु के कुशलराज गुलेच्छा ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन के दौरान दादागुरुदेव के जीवन पर आधारित विशेष म्यूजियम प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे ग्रामीणों सहित लगभग एक लाख से अधिक लोगों ने भावुकता के साथ देखा और दादागुरुदेव के जीवन व प्रेरणाओं को जाना। जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष व समायोजक महेंद्र भंसाली ने बताया कि महोत्सव के प्रथम दिवस मोहन भागवत ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। चादर समिति के सदस्य ललित डाकलिया ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को ‘राष्ट्र रत्न संत’ सम्मान मिलने तथा उपाध्याय महेंद्रसागरजी के आचार्य पद पर आसीन होने पर सकल जैन संघ ने शुभकामनाएं प्रकट कीं। महोत्सव के दौरान गणिनी पद समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें साध्वी सुभ्रदा श्रीजी को गणिनी पद प्रदान किया गया। इसके साथ ही पूज्य उपाध्याय मनितप्रभ सागरजी द्वारा लिखित पुस्तक “द यूनिवर्सल ट्रूथ” तथा डॉ. विद्युत्प्रभा श्रीजी की पुस्तक “गुरुदेव” का विमोचन भी किया गया। बेंगलूरु से दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष तेजराज मालानी, संघवी विजयराज डोसी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। भोजन समिति में महेंद्र कुमार रांका, सुरेंद्र कुमार रांका और रणजीत ललवानी सहित बैंगलोर से आए 50 से अधिक सदस्यों ने सेवा कार्यों में सक्रिय योगदान दिया। यह विशाल आयोजन गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीजी की पावन निश्रा में संपन्न हुआ, जबकि इस विराट महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागरजी रहे। चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा और समन्वयक प्रकाशचंद लोढ़ा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं को चादर अभिषेक जल एवं वासक्षेप का वितरण किया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की अपार आस्था, अनुशासन और सेवा भावना ने इसे यादगार बना दिया।

  • दलित समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से की मुलाकात, सामाजिक मुद्दों पर हुई सार्थक चर्चा

    भारतार्थ खबर बेंगलूरु संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। (Bhaarataarth.com) बेंगलूरु। शहर में दलित समुदाय के विभिन्न संगठनों से जुड़े नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से शिष्टाचार भेंट कर समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। मुलाकात के दौरान सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, आंतरिक आरक्षण और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषय प्रमुख रूप से उठाए गए। प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि राज्य में दलित युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित किए जाने चाहिए तथा सरकारी विभागों में लंबित रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाना चाहिए। साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में छात्रवृत्ति योजनाओं के सरलीकरण और समयबद्ध वितरण की मांग भी रखी गई। नेताओं ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कई विकास योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री से आवश्यक हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों को निर्देशित करने का आग्रह किया गया। इस अवसर पर बसवराज बोम्मई ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में सामाजिक समरसता और समान अवसर सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में रहा है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने दलित समाज के युवाओं से शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की अपील की। मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि उनके मार्गदर्शन से समाज के मुद्दों का सकारात्मक समाधान निकलेगा। इस अवसर पर समुदाय के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

  • नरेंद्र मोदी का आह्वान: ‘सर्वजन हिताय’ की भावना से आगे बढ़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारत बनेगा वैश्विक एआई नेतृत्व का केंद्र

    भारतार्थ संवाददाता, धन्नाराम चौधरी। नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विकास को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि इसकी दिशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई केवल तकनीकी प्रगति का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण, समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत एआई को केवल डिजिटल नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शक्ति के रूप में देखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज विश्व एक नई तकनीकी क्रांति के दौर से गुजर रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ऐसे समय में आवश्यक है कि एआई का विकास मानवीय मूल्यों, नैतिक मानकों और पारदर्शिता के साथ हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में व्यापक जनहित के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एआई में अपार संभावनाएं देखता है और इसे भविष्य की प्रगति, नवाचार तथा वैश्विक नेतृत्व के अवसर के रूप में ग्रहण कर रहा है। भारत के युवाओं की प्रतिभा, स्टार्टअप संस्कृति और डिजिटल अवसंरचना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि देश एआई के क्षेत्र में विश्व को दिशा देने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री ने एआई के जिम्मेदार उपयोग पर बल देते हुए कहा कि तकनीक का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए, न कि असमानता को बढ़ावा देना। उन्होंने नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और शोध संस्थानों से आह्वान किया कि वे मिलकर एक ऐसा एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करें जो सुरक्षित, समावेशी और विश्वसनीय हो। सम्मेलन में देश-विदेश के तकनीकी विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया तथा एआई के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के दौरान भारत की डिजिटल उपलब्धियों और भविष्य की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री के संबोधन ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत तकनीकी नवाचार के साथ-साथ नैतिक नेतृत्व की दिशा में भी अग्रसर है, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवता की भलाई के लिए समर्पित करने का संकल्प रखता है।

bottom of page