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बिलासपुर से आज ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत करेंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, निराश्रित गौवंश संरक्षण को मिलेगा नया आधार

  • लेखक की तस्वीर: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • 14 मार्च
  • 2 मिनट पठन


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

रायपुर। छत्तीसगढ़ में निराश्रित और घुमंतू गौवंश के संरक्षण तथा उनके समुचित प्रबंधन के लिए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शनिवार को बिलासपुर से राज्य की महत्वाकांक्षी ‘गौधाम योजना’ का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम बिलासपुर जिले स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रेक्षागार में आयोजित किया जाएगा।


राज्य सरकार की इस योजना के तहत निराश्रित, घुमंतू और जप्त किए गए गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और समुचित देखभाल के लिए गौधामों की स्थापना की जाएगी। कार्यक्रम में कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल तथा अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।


प्रत्येक विकासखंड में स्थापित होंगे गौधाम

सरकार की योजना के अनुसार राज्य के प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के तहत पूरे छत्तीसगढ़ में कुल 1460 गौधाम स्थापित किए जाएंगे। इन गौधामों में गौवंश के लिए शेड, सुरक्षित फेंसिंग, स्वच्छ पेयजल, बिजली सहित अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सके।


36 गौधामों को मिल चुकी है स्वीकृति

पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब तक 36 गौधामों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से 29 गौधामों का पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग में भी हो चुका है। इन 29 गौधामों का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।


लाखासार गांव से होगी शुरुआत

योजना का पहला शुभारंभ बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड स्थित ग्राम लाखासार से किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री राज्य के अन्य 10 जिलों में स्थापित 28 गौधामों का शुभारंभ वर्चुअल माध्यम से करेंगे।


गौवंश संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार के अनुसार गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य निराश्रित, घुमंतू और जब्त किए गए गौवंश पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को सुनिश्चित करना तथा ग्रामीण स्तर पर गौसेवा की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।


सरकार का मानना है कि इस योजना से एक ओर जहां गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और जैविक कृषि को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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