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स्वर्णनगरी जैसलमेर में दादागुरुदेव चादर महोत्सव का भव्य समापन—20 हजार श्रद्धालु बने साक्षी, आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज ‘राष्ट्र रत्न संत’ से सम्मानित

  • Writer: धन्ना राम चौधरी
    धन्ना राम चौधरी
  • Mar 12
  • 2 min read


भारतार्थ खबर, संवाददाता धन्नाराम चौधरी (Bhaarataarth.com)

जैसलमेर। स्वर्णनगरी जैसलमेर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य दादागुरुदेव चादर महोत्सव का समापन रविवार को विविध धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ श्रद्धा व उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। इस विराट आयोजन में देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।


महोत्सव के दौरान गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज को ‘राष्ट्र रत्न संत’ सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा सम्मान पत्र प्रदान कर दिया गया। साथ ही दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव समिति, जैसलमेर जैन ट्रस्ट तथा आयोजन से जुड़ी अन्य समितियों की ओर से उन्हें ‘सूरि सम्राट’ की उपाधि भी प्रदान की गई।



महोत्सव के दौरान उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी को विधिवत आचार्य पद पर पदासीन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने हर्ष और आस्था के साथ उनका अभिनंदन किया।


कार्यक्रम के संयोजक बेंगलूरु के तेजराज गुलेच्छा ने बताया कि इस भव्यातिभव्य समारोह में पूरे भारतवर्ष से लगभग 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दादागुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। वहीं राष्ट्रीय महासचिव पद्म टाटिया ने कहा कि संत-महात्माओं के सान्निध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न यह चादर महोत्सव आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया।



कार्यक्रम के वित्त प्रभारी बेंगलूरु के कुशलराज गुलेच्छा ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन के दौरान दादागुरुदेव के जीवन पर आधारित विशेष म्यूजियम प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे ग्रामीणों सहित लगभग एक लाख से अधिक लोगों ने भावुकता के साथ देखा और दादागुरुदेव के जीवन व प्रेरणाओं को जाना।


जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष व समायोजक महेंद्र भंसाली ने बताया कि महोत्सव के प्रथम दिवस मोहन भागवत ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति देकर आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।


चादर समिति के सदस्य ललित डाकलिया ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को ‘राष्ट्र रत्न संत’ सम्मान मिलने तथा उपाध्याय महेंद्रसागरजी के आचार्य पद पर आसीन होने पर सकल जैन संघ ने शुभकामनाएं प्रकट कीं।


महोत्सव के दौरान गणिनी पद समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें साध्वी सुभ्रदा श्रीजी को गणिनी पद प्रदान किया गया। इसके साथ ही पूज्य उपाध्याय मनितप्रभ सागरजी द्वारा लिखित पुस्तक “द यूनिवर्सल ट्रूथ” तथा डॉ. विद्युत्प्रभा श्रीजी की पुस्तक “गुरुदेव” का विमोचन भी किया गया।


बेंगलूरु से दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष तेजराज मालानी, संघवी विजयराज डोसी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। भोजन समिति में महेंद्र कुमार रांका, सुरेंद्र कुमार रांका और रणजीत ललवानी सहित बैंगलोर से आए 50 से अधिक सदस्यों ने सेवा कार्यों में सक्रिय योगदान दिया।


यह विशाल आयोजन गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीजी की पावन निश्रा में संपन्न हुआ, जबकि इस विराट महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागरजी रहे। चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा और समन्वयक प्रकाशचंद लोढ़ा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


महोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं को चादर अभिषेक जल एवं वासक्षेप का वितरण किया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की अपार आस्था, अनुशासन और सेवा भावना ने इसे यादगार बना दिया।

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